Tuesday, July 12, 2011

रेल मंत्रालय तृणमूल कांग्रेस के दिनेश त्रिवेदी के पास

लंबे समय से टल रहा कैबिनेट में फेरबदल आखिरकार हो गया। कैबिनेट में कांग्रेस के वी किशोर चंद्र देव और तृणमूल कांग्रेस के दिनेश त्रिवेदी नए चेहरे हैं। ममता बनर्जी के मुख्यमंत्री बनने से खाली हुआ रेल मंत्रालय तृणमूल कांग्रेस के पास ही रह गया है। दिनेश त्रिवेदी नए रेल मंत्री होंगे। तृणमूल कांग्रेस के राज्य मंत्री मुकुल रॉय को रेलवे के बजाय शिपिंग तक ही सीमित कर दिया गया है। फिलहाल वह दोनों मंत्रालय में राज्य मंत्री थे। किशोर चंद्र देव को आदिवासी मामले और पंचायती राज मंत्रालय दिया गया है। इस फेरबदल से मनमोहन की टीम में तीन नए कैबिनेट मंत्री, 4 स्वतंत्र राज्य मंत्री और 5 राज्य मंत्री शामिल हो गए हैं। यूपी में अगले साल होने वाले चुनावों को ध्यान में रखते हुए स्वतंत्र प्रभार वाले इस्पात मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा को कैबिनेट में शामिल किया गया है। बेहतर ढंग से काम करने की वजह से स्वतंत्र प्रभार वाले पर्यावरण राज्य मंत्री जयराम रमेश को प्रमोट करके कैबिनेट में जगह दी गई है। जयराम रमेश को ग्रामीण विकास मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है। अब तक ग्रामीण मंत्रालय देख रहे विलास राव देशमुख को विज्ञान, प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय में भेजा गया है। अब वीरप्पा मोइली कंपनी मामलों के कैबिनेट मंत्री होंगे, जबकि सलमान खुर्शीद कानून मंत्रालय संभालेंगे। पवन कुमार बंसल को जल संसाधन की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है। कांग्रेस की प्रवक्ता जयंती नटराजन और पवन सिंह घाटोवर को स्वतंत्र प्रभार के साथ राज्य मंत्री बनाया गया है। जयंती नटराजन को पर्यावरण मंत्रालय दिया गया है। तृणमूल कांग्रेस के सुदीप बंदोपाध्याय, कांग्रेस के चरण दास महंत, जीतेंद्र सिंह, मिलिंद देवड़ा और राजीव शुक्ला को राज्य मंत्री बनाया गया है। कुल सात मंत्रियों की छुट्टी हुई है, जिनमें एम.एस. गिल, बीके हांडिक, कांति लाल भूरिया, ए. साई प्रताप और अरुण यादव शामिल हैं जबकि दयानिधि मारन और मुरली देवड़ा के इस्तीफे को राष्ट्रपति के पास मंजूरी के लिए भेज दिया गया है।

Tuesday, July 5, 2011

पहचान पत्र के आधार बैग को कल्याण के मोहना में रहने वाले देवेल पटेल को सौंपा गया।

कल्याण जीआरपी पुलिस की सजगता से एक व्यक्ति का लोकल ट्रेन में रुपयों से भरा बैग वापस मिल गया। बैग में 47 हजार 500 रुपये थे। कल्याण जीआरपी के वरिष्ट निरीक्षक जगताप ने बताया कि रविवार मुंबई से कल्याण की 7.45 की लोकल ट्रेन में कल्याण जीआरपी के पुलिसकर्मी राजेश गायकवाड एवं कुर्ला की महिला जीआरपी कर्मी आशा गायकवाड को एक बैग संदिग्ध हालत में लोकल ट्रेन के प्रथम वर्ग के डिब्बे में मिला। पहले जीआरपी ने वहां बैठे यात्रियों से पूछताछ की, लेकिन कोई दावेदार नहीं मिलने पर यह बैग कल्याण जीआरपी कार्यालय ले आए। छान-बीन करने पर बैग के अंदर 47 हजार 500 रुपये नगद व देवेन पटेल नामक व्यक्ति का कॉलेज आई. डी. मिला। पहचान पत्र के आधार बैग को कल्याण के मोहना में रहने वाले देवेल पटेल को सौंपा गया।

Monday, July 4, 2011

एलफिंस्टन स्टेशन का नया फुट ओवर ब्रिज रविवार को जनता के लिए खोल दिया

पश्चिम रेलवे के एलफिंस्टन स्टेशन का नया फुट ओवर ब्रिज रविवार को जनता के लिए खोल दिया गया। इस फुट ओवर ब्रिज के खुलने से एलफिंस्टन स्टेशन से सफर करने वाले यात्रियों को बड़ी राहत होगी। स्टेशन के पश्चिमी छोर पर बनाए गए इस फुट ओवर ब्रिज के खुलने से यात्री सीधे प्लेटफॉर्म नंबर एक और दो पर जा सकेंगे। नए फुट ओवर ब्रिज की लंबाई 22 मीटर है और इसकी चौड़ाई छह मीटर है। जाहिर है कि ब्रिज के चौड़े होने से भीड़ का अहसास कम होगा और लोगों को आने - जाने में आसानी होगी। रेलवे के अनुसार इस पुल को बनाने में 80 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। अब तक एलफिंस्टन स्टेशन पर आने - जाने के लिए पश्चिमी छोर पर कोई ब्रिज नहीं था। पश्चिमी छोर से स्टेशन पर आने जाने के लिए यात्रियों को एलफिंस्टन ब्रिज पर बने स्टेशन के एंट्री पॉइंट से आना जाना पड़ता था। उत्तरी छोर पर जो पुराना फुट ओवर ब्रिज बना है वह मध्य रेलवे के परेल स्टेशन और एलफिंस्टन स्टेशन का कॉमन फुट ओवर ब्रिज है। इसलिए इस पुल पर हमेशा भीड़ रहती है। दूसरे इस पुल का इस्तेमाल करने वालों को काफी पैदल चलना पड़ता था , लेकिन इस ब्रिज के खुल जाने से अब यात्री बिना सड़क पार किए या उत्तरी छोर तक गए सीधे एलफिंस्टन स्टेशन के प्लेटफॉर्म तक जा सकेंगे। दरअसल इस फुट ओवर ब्रिज की मांग लंबे समय से हो रही थी। 12 डिब्बों की लोकल के 15 डिब्बों की लोकल में परिवर्तित होने के बाद स्टेशन पर बढ़ी भीड़ के बाद इस तरह के फुट ओवर ब्रिज की जरूरत और ज्यादा बढ़ गई थी।

Wednesday, June 29, 2011

हर सेक्शन में दो स्पेशल टीम पेट्रोलिंग और इंस्पेक्शन करेंगी।

यह रूट लोकल ट्रेनों के साथ एक्सप्रेस ट्रेनों के लिए काफी महत्वपूर्ण है। इसे देखते हुए यह फैसला किया गया है कि इस रूट पर पड़ने वाले हर सेक्शन में दो स्पेशल टीम पेट्रोलिंग और इंस्पेक्शन करेंगी। फरीदाबाद सेक्शन के लिए नई टावर वैगन भेजी गई है, ताकि कर्मचारियों को कार्य करने में सुविधा रहे। ओएचई (ओवर हेड इलेक्ट्रसिटी) में खराबी के कारण रेल परिचालन प्रभावित न हो, इसके लिए रेलवे ने खास तैयारी की है। इसके तहत फरीदाबाद सेक्शन में दो स्पेशल टीमें बनाई गई हैं जो लगातार ओएचई तारों की जांच करेंगी और कोई भी तकनीकी खराबी होने पर उसे ठीक कराएंगी। बरसात में ओएचई तारों में फॉल्ट का खतरा बना रहता है। इसके कारण रेलवे परिचालन पर असर पड़ता है। जिसका खमियाजा यात्रियों को झेलना पड़ता है। इंस्पेक्शन के दौरान किसी भी तरह की समस्या न आए, इसके लिए संबंधित विभाग ने नई टावर वैगन मंगाई है। यह वैगन मौजूदा टावर वैगन की तुलना में बेहतर और सुविधाजनक है। इसकी विशेष बात यह है कि इसकी स्पीड 80 किलोमीटर प्रति घ्ंाटा है, जिससे इंस्पेक्शन में आसानी होगी, जबकि मौजूदा टावर वैगन की स्पीड 40 किलोमीटर प्रति घंटा है। जहां वर्तमान टावर वैगन मैन्युअली ऑपरेट होती है, वहीं इसे ऑटोमेशन तरीके से भी ऑपरेट किया जा सकता है। टीआरडी (ट्रेगशन डिस्ट्रीब्यूशन) विभाग ने फरीदाबाद सेक्शन में ओएचई तारों के मेंटिनंेस के लिए दो टीमें बनाई हैं। इनमें से एक टीम दिन में पेट्रोलिंग करेगी और एक रात को। बरसात में इन तारों में फॉल्ट आ जाते हैं, जिस कारण यात्रियों को काफी परेशानी होती है। बता दें कि मई में हुई बरसात में भी विभाग को काफी नुकसान हुआ था। बल्लभगढ़ के पास क्रॉसओवर तार टूटने से 7 घंटे तक डाउन लाइन पर रेल यातायात बाधित रहा था। इसे देखते हुए पहले से तैयारी कर ली गई है। उक्त दोनों टीमें लगातार पेट्रोलिंग करेंगी।

Monday, June 20, 2011

रेलवे की लापरवाही

पिछले 24 घंटे में रेलवे की लापरवाही ने 6 लोगों की जान ले ली और नई दिल्ली के तिलक ब्रिज पर एक बड़ा हादसा टल गया। सोमवार सुबह हाथरस में रांची से दिल्ली आ रही राजधानी एक्सप्रेस का ब्रेक शू निकल गया। इसकी चपेट में प्लेटफॉर्म पर खड़े तीन लोग आ गए। एक बच्चे की मौत हो गई, जबकि दो की हालत नाजुक है। वहीं, ऐसा ही एक हादसा रविवार को अलीगढ़ में भी हुआ। अलीगढ़ में ट्रेन का हैंडब्रेक वील निकल कर प्लेटफॉर्म पर आ गिरने से 5 लोगों की जान चली गई। अलीगढ़ जंक्शन के प्लेटफॉर्म नंबर-2 पर दिल्ली से कानपुर की तरफ जा रही मालगाड़ी ने पैसेंजर ट्रेन के इंतजार में खड़े यात्रियों को अपनी चपेट में ले लिया। मालगाड़ी से निकला हैंडब्रेक वील प्लेटफॉर्म पर खड़े यात्रियों को अपने साथ घसीटते हुए ले गया। इस हादसे में 4 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक अन्य ने बाद में दम तोड़ दिया। इनके अलावा 20 लोग घायल हो गए। 7 लोगों की हालत गंभीर है। हादसे की खबर मिलते ही कैबिनेट मंत्री जयवीर सिंह, डीआइजी बीपी त्रिपाठी, डीएम अनिल कुमार मौके पर पहुंच गए। हादसा उस समय हुआ जब रविवार शाम करीब पांच बजे प्लेटफॉर्म-2 पर सैकड़ों यात्री दिल्ली की तरफ से आने वाली टीएडी पैसेंजर ट्रेन के इंतजार में थे। पांच बजकर छह मिनट पर दिल्ली की तरफ से ट्रेन आती दिखाई दी तो मुसाफिर खड़े हो गए। उन्होंने देखा कि ये पैसेंजर ट्रेन नहीं, मालगाड़ी है तो वह पीछे हटने लगे। मगर, तब तक धड़धड़ाती मालगाड़ी से निकला हैंडब्रेक वील यात्रियों को घसीटते हुए ले गया। 4 लोगों की मौत हो गई और 20 घायल हो गए। गंभीर रूप से घायल 7 लोगों को जेएन मेडिकल कॉलेज भेजा गया। हादसे के बाद मालगाड़ी को दाऊद खां स्टेशन पर चेक किया गया। फिर पोरा स्टेशन पर रोक लिया गया। मरने वालों में हबीब खां (25) निवासी हनुमान गली, हाथरस जंक्शन, उदयपाल सिंह (50) निवासी पाली रजापुर व थानसिंह (60) निवासी सुनामई जवां, महीपाल सिंह (45) एवं कालीचरन (50) निवासीगण दरियापुर, हाथरस हैं। घायलों में रतनलाल निवासी परौरा बरला, प्रमोद कुमार निवासी भोपतपुर क्वार्सी, गुलाब सिंह निवासी सुहावली अकराबाद, गंभीर शर्मा, भूरा निवासी पाली रजापुर हैं। उधर, अयूब को गंभीर हालत में वरुण हॉस्पिटल में ऐडमिट कराया है। अयूब फिलहाल वेंटिलेटर पर हैं और उनकी हालत बेहद गंभीर है। अलीगढ़ में मरने वालों के परिवार को 2-2 लाख रुपये का मुआवजा दिए जाने की घोषणा की गई है। नई दिल्ली के तिलक ब्रिज के पास यहां एक ही ट्रैक पर राजधानी एक्सप्रेस और काशी विश्वनाथ एक्सप्रेस आमने-सामने आ गईं। फासला सिर्फ दो सौ से ढाई सौ मीटर ही रह गया था। रविवार दोपहर गुवाहाटी से दिल्ली आ रही राजधानी एक्सप्रेस कांटा फेल होने की वजह से तिलक ब्रिज स्टेशन से पहले 80 नंबर पॉइंट पर खड़ी थी। वहां तैनात रेलवे कर्मचारी के अनुसार, क्लोजर की मदद से ट्रेन को बदले ट्रैक पर लाकर अभी रवाना ही किया गया था कि सामने से काशी विश्वनाथ एक्सप्रेस भी उसी ट्रैक पर आ गई। दोनों ट्रेनों को एक ही ट्रैक पर दौड़ता देख एक कर्मचारी ने ट्रैक के बीच में लाल झंडी गाड़कर चालकों को ट्रेन रोकने का इशारा किया। मात्र ढाई सौ मीटर दूरी पर चालकों को ट्रेन रोकने में कामयाबी मिली। अपर मंडल रेल प्रबंधक सुधीर गर्ग के अनुसार जांच कमिटी गठित कर दी गई है। सोमवार सुबह हाथरस में रांची से दिल्ली आ रही राजधानी एक्सप्रेस का ब्रेक शू निकल गया। इसकी चपेट में प्लेटफॉर्म पर खड़े तीन लोग आ गए। एक बच्चे की मौत हो गई, जबकि दो की हालत नाजुक है।

Thursday, June 16, 2011

ट्रेन में नौ साल की एक बच्ची से बलात्कार

यूपी से मुंबई आ रही हॉलिडे स्पेशल ट्रेन में नौ साल की एक बच्ची से बलात्कार की शर्मसार कर देने वाली घटना सामने आई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार , घटना 10 जून की रात की है। कुर्ला जीआरपी पुलिस ने आरोपी एजाज अहमद शराफत अली को गिरफ्तार कर मनमाड रेलवे पुलिस को सौंप दिया है। पीडि़त लड़की अपने परिवार के साथ मुंबई के वडाला में रहती है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार , पीडि़त लड़की यूपी के बस्ती जिले की रहने वाली है। 10 जून को हॉलिडे स्पेशल ( गोरखपुर - मुंबई एक्सप्रेस ) में लड़की अपने पिता मनोज मिश्रा (35) और मां प्रेमलता मिश्रा के साथ एस -1 कोच में मुंबई आने के लिए सवार हुई। मिश्रा परिवार का 41 से 43 नंबर सीट तक आरक्षण था। उसी डिब्बे में आरोपी एजाज अहमद शराफत अली (22) भी ट्रेन में चढ़ा। एजाज के पास चालू टिकट था , इस वजह से उसने मिश्रा से बैठने की जगह देने की गुजारिश की। मानवता के नाते मिश्रा ने अली को बैठने की इजाजत दे दी। इस बीच , ट्रेन रात के समय जब मनमाड के करीब पहुंची। तब सभी लोग सोए हुए थे। ऐसे में मौका पाकर अली ने ऊपर की सीट पर सोई लड़की से रेप कर दिया। इस बात का खुलासा तब हुआ , जब बच्ची रोने लगी। जब लड़की के पिता ने उससे रोने की वजह पूछी , तो उसने रेप के बारे में बताया। इस घटना से गुस्साए ट्रेन में सवार अन्य यात्रियों ने आरोपी की पिटाई कर दी और उसे कुर्ला जीआरपी पुलिस के हवाले कर दिया। जीआरपी पुलिस के अधिकारी एस . एस . ढुमाल ने बताया कि आरोपी पर आईपीसी की धारा 376 के तहत मामला दर्ज कर , सोमवार को मनमाड पुलिस के हवाले कर दिया गया।

Wednesday, June 8, 2011

'मिलिए रेल मंत्री से'।

आगामी 10 जून को मुंबई वासियों को एक ऐसा मौका नसीब होने जा रहा है जिसमें मुंबई शहर के लोकल यात्री यात्रा के दौरान पेश आने वाली समस्याओं को सीधे रेल मंत्री तक पहुंचा सकेंगे। रेल राज्य मंत्री के. एच. मुनियप्पा इस दिन बोरिवली के प्लेटफॉर्म नंबर 6 पर अपराह्न तीन बजे यात्रियों का दु:ख-दर्द सुनेंगे और चूंकि उनके साथ मध्य और पश्चिम रेल के वरिष्ठ अधिकारी होंगे सो उन्हें संबंधित कदम उठाने का दिशा-निर्देश देंगे। उत्तर मुंबई के सांसद संजय निरूपम द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम को नाम दिया गया है 'मिलिए रेल मंत्री से'। बताया जा रहा है कि यह पहली दफा है जब कोई रेलमंत्री पहली दफा सीधे यात्रियों से रू-ब-रू होगा। निरूपम ने बताया कि आज पूरे देश में से हर दूसरा रेल यात्री मुंबई से होता है और यह कितने दुर्भाग्य की बात है कि इस शहर के रेलयात्रियों को ही सबसे ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसलिए हमने कोशिश ये की है क्यों न उनकी समस्याओं को सीधे रेलमंत्री तक पहुंचाया जाय। उन्होंने कहा कि रेलयात्री चाहें तो अपना सवाल सीधे पूछ सकते हैं या फिर अपना प्रश्न लिखकर दे सकते हैं। निरूपम ने बताया कि इस कार्यक्रम में कुछ बुनियादी समस्याओं पर रेलमंत्री का ध्यानाकर्षण किया जाएगा। मसलन, प्लेटफॉर्मों पर महिला यात्रियों के लिए टॉयलेट न होना, मालाड और कांदिवली से पीक ऑवर में लोकल ट्रेनों का छोड़ा जाना, महत्वपूर्ण स्टेशनों पर एफओबी न होना, स्टेशनों पर साफ-सफाई न होना आदि। निरूपम के इस कार्यक्रम का स्वागत करते हुए मध्य रेल के डीआरयूसीसी मेंबर और रेल कार्यकर्ता राजीव सिंगल ने स्वागत करते हुए कहा है कि रेलवे को कंट्रोल करने वाला ऑफिस सुदूर दिल्ली में अत: ऐसे में जब रेलमंत्री खुद आकर सीधे यात्रियों से मिलेंगे तो उम्मीद की जानी चाहिए कि रेल अफसरों के कान पर कुछ तो जूं रेंगेगी। इस तरह की पहल से रेल यात्रियों के जेहन में आत्मविश्वास भी पैदा होगा।

चेकिंग के दौरान रेलवे टै्रक क्रैक मिला।

गाजियाबाद रेलवे स्टेशन और हिंडन पुल के बीच सादिक पुलिया के पास मंगलवार सुबह चेकिंग के दौरान रेलवे टै्रक क्रैक मिला। इसकी सूचना तुरंत स्थानीय रेलवे अधिकारियों को दी गई और इस पर ट्रेनों का आवागमन रोक दिया गया। इस वजह से करीब आधे घंटे तक टै्रक बाधित रहा। इससे आधा दर्जन से ज्यादा टे्रनें लेट चलीं। रेलवे सूत्रों के मुताबिक मंगलवार को गैंगमैन ने नियमित चेकिंग के दौरान सुबह करीब 7:15 बजे सादिक की पुलिया के पास रेलवे टै्रक क्रैक पाया। तुरंत इसकी सूचना रेल अधिकारियांे को दी गई। ट्रैक ठीक करने में करीब आधा घंटे का समय लगा। जिससे गाजियाबाद-साहिबाबाद थर्ड मेन लाइन बाधित रही। इस बीच किसी भी टे्रन को पास नहीं किया गया। टै्रक बाधित होने की वजह से गाजियाबाद ईएमयू, महिला स्पेशल, डीडीएन, ईएमयू दिल्ली, मेरठ शटल, अलीगढ़-दिल्ली शटल टे्रनें आधे से एक घंटे तक देरी से चली। ट्रेनें लेट होने से गर्मी में यात्री काफी परेशान रहे। एक्सप्रेस व शताब्दी ट्रेनों को पहले पास किया गया। बाद में ईएमयू व पैसेंजर टे्रनें का संचालन सही हो पाया।

Friday, June 3, 2011

डूंगरपुर-बांसवाडा-रतलाम रेल परियोजना की आधारशिला

डूंगरपुर-बांसवाडा-रतलाम रेल परियोजना की आधारशिला रखी गई, जो 2 हज़ार 83 करोड़ रुपये का लागत वाला प्रॉजेक्ट है। इस मौके पर सोनिया गांधी ने शिलान्यास स्थल पर पहुंच कर रेल परियोजना की आधारशिला रखी। उत्तर पश्चिम रेलवे के जेनरल मैनेजर आर.सी. अग्रवाल ने डूंगरपुर-बांसवाडा-रतलाम रेल परियोजना की जानकारी दी और कहा कि काम तय समय पर पूरा हो जाएगा। उत्तर पश्चिम रेलवे सूत्रों के अनुसार दो हजार 83 करोड़ रूपये की लागत वाली डूंगरपुर बांसवाडा रतलाम रेल परियोजना में राजस्थान सरकार ने बारह सौ करोड़ रूपये का अंशदान किया है। उन्होंने बताया कि करीब 176.47 किलोमीटर लंबी इस परियोजना में मध्य प्रदेश के रतलाम जिले के साथ राजस्थान के बांसवाडा व डूंगरपुर जिले शामिल हैं। इस परियोजना में प्रति किलोमीटर 11.80 करोड़ रूपये खर्च होने का अनुमान है। परियोजना को पांच साल में पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है। रेलवे सूत्रों के अनुसार रेल परियोजना का करीब 126 किलोमीटर रेल मार्ग राजस्थान में और 50 किलोमीटर मध्य प्रदेश में होगा। इसमें कुल 19 स्टेशन होंगे।

Thursday, June 2, 2011

बुजुर्ग महिलाओं को बुधवार से रेल यात्रा में टिकट पर 50 फीसदी की छूट मिलने लगेगी। रेलवे बोर्ड की मंजूरी मिलने के बाद इस योजना को बुधवार से लागू

बुजुर्ग महिलाओं को बुधवार से रेल यात्रा में टिकट पर 50 फीसदी की छूट मिलने लगेगी। रेलवे बोर्ड की मंजूरी मिलने के बाद इस योजना को बुधवार से लागू कर दिया गया है। अभी तक महिलाओं को केवल 30 फीसदी की छूट मिलती थी। वहीं 60 साल की उम्र से ज्यादा बुजुर्ग पुरुषों को भी ट्रेन का टिकट खरीदने पर 40 फीसदी की छूट मिलेगी। रेलवे बोर्ड ने छूट से संबंधित सर्कुलर रेलवे के सभी जोन को भेज दिया है। एनआर - एनईआर लखनऊ डिवीजन में पहले ही दिन हजारों यात्रियों ने छूट का लाभ उठाया। सीनियर सिटीजन विजया पंत (59 वर्ष ) को दिल्ली की टिकट जब पचास फीसदी रियायत पर मिली तो उन्होंने ममता बनर्जी के साथ ही सोनिया गांधी को भी इसके लिए धन्यवाद दिया। यूपी के डीजी हेल्थ रह चुके डॉ . आर . एस . बाजपेयी और डॉ . पी बहादुर ने भी किराये में रियायत का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इससे रेल यात्रा करने पर वरिष्ठ नागरिकों पर कम बोझ पड़ेगा। शारीरिक रूप से विकलांग लोगों को शताब्दी - राजधानी जैसी वीआईपी गाडि़यों में छूट दी गई है। रेलवे बोर्ड के डायरेक्टर मार्केटिंग मोनिका अग्निहोत्री ने बताया कि रेल मंत्री की घोषणा के अनुसार रेलवे बोर्ड से मंजूरी मिलने के बाद बुजुर्ग रेल यात्रियों का सफर आसान बनाने के लिए छूट का प्रावधान लागू कर दिया गया है। अभी तक यह छूट केवल 30 फीसदी मिलती थी। 58 साल की महिलाओं के लिए 20 फीसदी तो 60 साल के पुरुषों के रेल टिकटों पर छूट 10 प्रतिशत और बढ़ा दी गई है।

Friday, May 27, 2011

निजामुद्दीन ( नई दिल्ली ) से मेरठ के पल्लवपुरम तक हाईस्पीड ट्रेन ब्रॉडगेज पर दौड़ेगी।

निजामुद्दीन ( नई दिल्ली ) से मेरठ के पल्लवपुरम तक हाईस्पीड ट्रेन ब्रॉडगेज पर दौड़ेगी। आरआरटीएस ( रैपिड रेल ट्रांसपोर्ट सिस्टम ) की सीआरसी ( कंसल्टेंसी रिव्यू कमिटी ) की बैठक में यह फैसला किया गया। बैठक में बोगी के स्टैंडर्ड , इंटरनल डिजाइन , स्टेशन के साइज और डिजाइन पर भी मंथन हुआ। प्रस्ताव आया कि कोच की लंबाई 26 मीटर रखी जाए और यह एल्युमिनियम का बना हो। बोगी में कॉमन एसी हो। आरआरटीएस टास्क फोर्स की बैठक में प्लान फाइनल होगा। दिल्ली में हुई इस बैठक में मेट्रो प्रोजेक्ट कंसल्टेंट कंपनी , हाईस्पीड ट्रेन कंसल्टेंसी कंपनी के इंजीनियरों और सीआरसी अफसरों ने हिस्सा लिया। लगातार कई घंटे चली बैठक में हाईस्पीड ट्रेन के इंजन साइज , कोच , स्टेशन , कोच में सीटिंग डिजाइन पर बातचीत हुई। बैठक में सबसे महत्वपूर्ण फैसला यह हुआ कि हाईस्पीड ट्रेन ब्रॉडगेज पर दौड़ेगी। ट्रेन की बोगी एल्युमिनियम से बनी होगी। इसमें कॉमन एसी होगा , 2 ट्रेनों को मेन स्टेशन से छोड़ते वक्त कम से कम 5 या 5.5 किलोमीटर का अंतर होना चाहिए। इन सभी पॉइंट पर टेक्निकल कमिटी और कंसल्टेंसी कंपनी की एक राय बनी। फिलहाल यह तय नहीं हो पाया है कि हाईस्पीड ट्रेन में कितने कोच होंगे। बैठक में 6 और 9 बोगी का प्रस्ताव आया है। कोच के साइज पर भी आखिरी फैसला नहीं किया जा सका। वैसे रेलवे के कोच 24 मीटर लंबे और 3.7 मीटर चौड़े हैं। हाईस्पीड ट्रेन के कोच को 26 मीटर लंबा और 3.7 मीटर चौड़ा बनाने का प्रपोजल है। कोच का डिजाइन फाइनल होने के बाद ही स्टेशन का डिजाइन फाइनल होगा। अभी यह भी तय नहीं हो पाया कि कोच में कितनी सीट होगी। 2 और प्रस्ताव कमिटी के सामने पेश हुए। पहले प्रस्ताव में ट्रेन में 64 सीट और दूसरे प्रस्ताव में 115 सीट डिजाइन करने की बात कही गई है। कोच का इंटरनल मेट्रो कोच की तरह होगा। इसमें टॉयलेट फैसिलिटी नहीं होगी और खड़े होने के लिए हैंड हैंडल होंगे। सीआरसी की टेक्निकल कमिटी के मिनट्स तैयार कर उसे टास्क फोर्स की बैठक में पेश किया जाएगा। बैठक में कंसल्टेंसी कंपनी और अन्य टेक्निकल कमिटी में शामिल इंजीनियरों से कहा गया कि हाईस्पीड ट्रेन में किसी भी नई तकनीक का प्रयोगात्मक यूज नहीं किया जाएगा। प्रायोगिक तकनीक ही हाईस्पीड ट्रेन में यूज होगी। सीआरसी के मिनट्स को जल्द ही दिल्ली में होनी वाली आरआरटीएस टास्क फोर्स की बैठक पेश किया जाएगा। हाईस्पीड ट्रेन का रूट पहले ही फाइनल हो चुका है।

Friday, May 20, 2011

खड़गपुर-टाटा रेल खंडों के बीच 26 मई तक रात 10 बजे से सुबह पांच बजे तक यात्री रेलगाड़ियों की आवाजाही बंद

पश्चिम बंगाल, ओडिशा और झारखंड के नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा कारणों के चलते 26 मई तक रात के दौरान यात्री रेलगाड़ियों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है। दक्षिण-पूर्व रेलवे ने कहा, 'सुरक्षा कारणों को देखते हुए खड़गपुर-आदा, चक्रधरपुर-राउरकेला और खड़गपुर-टाटा रेल खंडों के बीच 26 मई तक रात 10 बजे से सुबह पांच बजे तक यात्री रेलगाड़ियों की आवाजाही बंद रहेंगी।' बयान के मुताबिक कुछ रेलगाड़ियों की सेवाओं में बदलाव किया गया और कई के समय में भी परिवर्तन किए गए हैं। गौरतलब है कि पश्विम बंगाल के पश्चिमी मिदनापुर में 28 मई 2010 को ज्ञानेश्वरी एक्सप्रेस हादसे के बाद रेलगाड़ियों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई थी। इस हादसे में 148 लोग मारे गए थे।

सब दोस्त राजीव चौक पर मिलते हैं फिर साथ में कॉलेज जाते हैं।

वैसे तो राजीव चौक मेट्रो स्टेशन के आसपास कोई कॉलेज नहीं है लेकिन फिर भी स्टूडेंट्स के बीच यह स्टेशन काफी हिट है। इसकी पहली वजह तो यही है कि कनॉट प्लेस यूथ के बीच काफी पॉपुलर है और यहां घूमने, खाने-पीने और शॉपिंग करने के लिए काफी जगहें हैं। यहां स्टूडेंट्स कॉलेज शुरू होने से पहले या खत्म होने के बाद शॉपिंग करने के लिए आते हैं। स्टूडेंट्स के बीच सबसे पॉपुलर मार्केट्स में से एक जनपथ भी यहीं है। दूसरी वजह यह भी है कि राजीव चौक दिल्ली मेट्रो का सबसे बड़ा इंटरचेंज पॉइंट है। दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले स्टूडेंट्स अपने कॉलेज के दोस्तों से यहीं मिलते हैं और फिर साथ में कॉलेज जाते हैं। नॉर्थ कैंपस के किरोड़ीमल कॉलेज से इंग्लिश ऑनर्स कर रही श्वेता ने बताया कि वह राजेंद्र प्लेस में रहती हैं। पहले बस से कॉलेज जाती थीं लेकिन जब से कॉलेज में ग्रुप बना, सब दोस्त राजीव चौक पर मिलते हैं फिर साथ में कॉलेज जाते हैं। कभी-कभी शॉपिंग का मूड होता है तो यहां से शॉपिंग भी हो जाती है।

Monday, May 16, 2011

सवारी ट्रेन की चपेट में एक मिनी बस के आ जाने से हुई दुर्घटना में मरने वालों यात्रियों की संख्या बढ़ कर 8

बिहार के भोजपुर जिले में आरा-सासाराम रेलखंड पर पीरो स्टेशन के नजदीक बीती रात फाटक रहित रेलवे क्रॉसिंग पर पटना-सासाराम सवारी ट्रेन की चपेट में एक मिनी बस के आ जाने से हुई दुर्घटना में मरने वालों यात्रियों की संख्या बढ़ कर 8 हो गई है। पीरो के डीएसपी शिवचंद्र सिंह ने बताया कि बारातियों को ले जा रही मिनी बस के ट्रेन की चपेट में आने से घटनास्थल पर मरने वाले 7 बारातियों में से एक के शव को ग्रामीण अपने साथ लेकर बक्सर जिला चले गए थे। उन्होंने बताया कि इस दुर्घटना में घायल 23 बारातियों में से 13 को इलाज के लिए जिला मुख्यालय आरा सदर अस्पताल भेजा गया था। इनमे से एक ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया था। सिंह ने बताया कि बक्सर जिला के सोनबरसा गांव निवासी काशीनाथ यादव के पुत्र अनिल यादव की बारात मिनी बस से तरारी थाना अंतर्गत सैदनपुर गांव निवासी शब्बीर यादव के घर जा रही थी तभी बस पीरो स्टेशन के नजदीक बीती रात फाटक रहित रेलवे क्रासिंग पर पटना-सासाराम सवारी ट्रेन की चपेट में आकर पास के खड्ड में पलट गई थी।

Tuesday, May 10, 2011

दुपहिया वाहन मेट्रो की पार्किंग में खड़ा करते हैं और फिर वहां से मेट्रो पकड़कर रवाना हो जाते

लगभग एक दशक पहले तक शायद किसी ने नहीं सोचा होगा कि दिल्ली के पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम में मोड़ आएगा, जो कार में सफर करने वालों से कार को मोह भी छुड़ा ले। लेकिन दिल्ली मेट्रो ने यह कर दिखाया है। दरअसल, ऐसे बदलाव के लिए जहां दिल्ली के ट्रैफिक जाम की बढ़ती समस्या को क्रेडिट जाता है, वहीं इसके लिए मेट्रो के कम्फर्ट और नियमित सर्विस ने भी लोगों को अपनी ओर आकषिर्त किया है।

दिल्ली में न सिर्फ बिजनेसमैन बल्कि ऐसे नौकरीपेशा लोगों की कमी नहीं है, जो अब घर से रवाना तो कार में होते हैं लेकिन अपने डेस्टिनेशन तक पहुंचते मेट्रो से हैं। ऐसे लोग अपनी कारें या फिर दुपहिया वाहन मेट्रो की पार्किंग में खड़ा करते हैं और फिर वहां से मेट्रो पकड़कर रवाना हो जाते हैं। दरअसल, मेट्रो की इस पार्किंग की प्लानिंग ने भी लोगों की आदत बदलने में अहम भूमिका निभाई है। इस वक्त दिल्ली और एनसीआर में मेट्रो के जिन स्टेशनों पर पार्किंग का इंतजाम है, वहां लगभग 75,000 कारें या इसके बराबर दुपहिया वाहन खड़े हो सकते हैं। अगर इन कारों की जगह दुपहिया हों तो उनकी तादाद और भी ज्यादा है।

जनकपुरी में रहने वाले अरविंद मिश्रा का कहना है कि मेट्रो की पार्किंग की यह सुविधा पार्क एंड राइड की तरह ही है। फर्क सिर्फ इतना है कि मेट्रो में पार्किंग और मेट्रो के सफर का भाड़ा देना पड़ता है। उनका कहना है कि अगर पार्किंग सुविधा नहीं होती तो शायद कार या दुपहिया के लोग मेट्रो में शिफ्ट नहीं होते। इसकी वजह यह है कि जिन लोगों के घर मेट्रो स्टेशन से चार-पांच किमी भी दूर हैं तो वे शायद मेट्रो को नजरंदाज करते, क्योंकि उन्हें पहले मेट्रो स्टेशन तक पहुंचने के लिए साधन खोजना पड़ता। मिश्रा के मुताबिक उनका घर भी मेट्रो के जनकपुरी (वेस्ट) स्टेशन से लगभग 3.5 किमी की दूरी पर है। ऐसे में उन्हें कोई दिक्कत नहीं। वह पंखा रोड से जनकपुरी वेस्ट पहुंचते हैं और वहां से नोएडा के लिए ट्रेन पकड़कर ऑफिस पहुंच जाते हैं। लेकिन अगर पाकिर्ंग की सुविधा नहीं होती तो शायद वे मेट्रो के बजाय कार से ही अपने डेस्टिनेशन तक जाना पसंद करते।

खुद दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के सीनियर अफसर भी मानते हैं कि मेट्रो स्टेशन पर पार्किंग उनकी योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है और आगे भी रहेगा। दिल्ली मेट्रो के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी अनुज दयाल का कहना है कि जब मेट्रो की प्लानिंग की गई थी, उस वक्त भी इस मसले पर सोचा गया था और तय किया गया था कि जिन स्टेशनों पर भी मुमकिन हो, पार्किंग सुविधा दी जाए। इसकी वजह यह थी कि उसी वक्त ही सोच लिया गया था कि अगर सड़कों से प्राइवेट वाहनों को कम करना है तो इसके लिए पार्किंग की सुविधा भी दी जाए। जिस तरह से मेट्रो स्टेशनों पर पाकिर्ंग में हमेशा वाहन भरे रहते हैं, उससे साफ है कि यह प्लानिंग बेहद कामयाब रही है और इसकी वजह से ही कार और दुपहिया वाहन वाले मेट्रो में सफर के लिए प्रोत्साहित हुए हैं।

यही नहीं, दिल्ली मेट्रो अब थर्ड फेज में भी इस दिशा में काम कर रही है और उसकी कोशिश होगी कि जिन स्टेशनों पर जमीन उपलब्ध हो, वहां पार्किंग की सुविधा दी जाए। इसका फायदा यह होता है कि मेट्रो लाइन से 4-5 किमी की दूरी पर रहने वाले लोग भी मेट्रो तक पहुंच सकते हैं। हालांकि कई जगह रोड ट्रांसपोर्ट है लेकिन कई लोग उसमें सफर करने के बजाय अपना ही वाहन इस्तेमाल करना चाहते हैं। ऐसे लोग मेट्रो स्टेशन तक वाहन लाकर मेट्रो का उपयोग करते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए एयरपोर्ट मेट्रो लाइन के नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के ऊपर बहुमंजिला पार्किंग बनाई जा रही है। इस वक्त दिल्ली मेट्रो के स्टेशनों पर सबसे बड़ी पार्किंग पटेल चौक मेट्रो स्टेशन पर है और जल्द ही कुछ और स्टेशनों पर पार्किंग का विस्तार किया जाना है।

Sunday, May 1, 2011

ट्रेन का टिकट नहीं मिल पा रहे

गर्मी की छुट्टियों में घर जाने वाले यात्रियों को ट्रेन का टिकट कटाने के लिए गुड़गांव रेलवे स्टेशन पर लंबी लाइनों में खड़ा होना पड़ रहा है। इसके बाद भी रिजर्वेशन काउंटर से टिकट नहीं मिल पा रहे हैं। अधिकांश ट्रेनों में एक महीने तक कोई जगह नहीं है। गुड़गांव में उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, उड़ीसा, बंगाल, मध्य प्रदेश एवं अन्य स्टेट के लाखों लोग रहते हैं। परिवार वाले गर्मी की छुट्टियों में अपने घर जाते हैं। इनमें से कई लोग बाहर घूमने भी जाते हैं। लेकिन आलम यह है कि टिकट के लिए लोगों को घंटों लाइन में लगना पड़ रहा है। यहां रेलवे स्टेशन पर रिजर्वेशन के कम काउंटर हैं इसलिए ज्यादा परेशानी हो रही है।

Monday, April 25, 2011

गुवाहाटी-दादर एक्सप्रेस की एक वातानुकूलित बोगी पटरी से उतर गई।

बिहार में खगड़िया जिले के मानसी रेलवे स्टेशन के समीप गुवाहाटी-दादर एक्सप्रेस की एक वातानुकूलित बोगी पटरी से उतर गई। इससे इस रेलमार्ग पर आवागमन ठप हो गया। दुर्घटना में किसी के हताहत होने की जानकारी नहीं है। पुलिस के अनुसार सोमवार को मानसी रेलवे स्टेशन के समीप गुवाहाटी-दादर एक्सप्रेस की एक एसी बोगी पटरी से उतर गई। रेलवे के एक अधिकारी ने बताया कि दुर्घटना के बाद कटिहार-बरौनी रेल मार्ग के अप लाइन पर आवागमन रोक दिया गया है। उन्होंने बताया कि दोपहर बाद तीन बजे तक आवागमन प्रारंभ होने की सम्भावना है। अधिकारी के अनुसार दुर्घटना के कारणों का अब तक पता नहीं चल पाया है।

बढ़ती आबादी की वजह से लोकल ट्रेनों में भी भीड़

वसई-विरार क्षेत्र में तेजी से बढ़ती आबादी की वजह से लोकल ट्रेनों में भी भीड़ बढ़ती जा रही है। ऐसे में पश्चिम रेल ने लोगों को राहत देने के कई प्रयास किए हैं। लेकिन वे सभी प्रयास विरार-चर्चगेट मार्ग पर चलने वाले यात्रियों के लिए हुए हैं। मगर वसई से लोकल यात्रियों के लिए एक और सेवा संचालित होती है, जिसके यात्रियों की सुविधा के लिए न तो कोई प्रयास हुआ है और न किसी ने इसके लिए आवाज ही उठाई है। यह सेवा है वसई-दिवा के बीच चलने वाली डीएमयू (डीजल मल्टीपल यूनिट) सेवा, जिसकी शुरूआत जुलाई 1995 में हुई थी। जब यह सेवा शुरू हुई थी जब इस रूट पर एक ही लाइन थी जिसपर अप और डाउन दोनों ट्रेनें चलती थीं, साथ ही दिल्ली व गुजरात से दक्षिण भारत की ओर जाने वाली ट्रेनें भी। कुछ माल गाडि़या भी इस रूट पर चलती थीं। इस वजह से सिर्फ एक ही डीएमयू ट्रेन चल पाती थी। पुश-पुल सिस्टम से चलने वाली इस ट्रेन में कुल आठ डिब्बे होते हैं। बीच में इंजन और चार डिब्बे आगे जिसे इंजन धकेलता है और चार डिब्बे पीछे जिन्हें वह खींचता है। अब इस रूट पर डबल लाइन है और डीएमयू सेवा की में भी बढ़ोतरी हुई है, मगर इस रूट पर सफर करने वालों की संख्या को देखते हुए इसे अपर्याप्त कहा जा सकता है। अभी हालत यह है कि ट्रेन की संख्या कम होने की वजह से लोग 'रिटर्न जनीर्' का तरीका अपनाते हैं। खास तौर पर जो ट्रेन दिवा से वसई रोड स्टेशन आ कर वापस जाती है, उसमें लोग जूचंद स्टेशन ही बैठ कर आते हैं। नतीजा यह होता है कि वसई से इस ट्रेन में सवार होने वालों को शायद ही कभी बैठने की जगह मिलती है। इस मार्ग पर दो स्टेशनों के बीच की दूरी अधिक है, इसलिए यात्रियों को सफर के बीच किसी तरह की राहत मिलने की संभावना न के बराबर होती है। प्राप्त जानकारी के अनुसार इस रूट पर सबसे ज्यादा यात्री कोपर स्टेशन के होते हैं। यात्रियों की संख्या में पिछले साल की तुलना में 2 लाख की बढ़ोतरी हुई है। सितंबर 2009 के आंकड़े बताते हैं कि तब यहां से 5 लाख 86 हजार 230 यात्री सफर करते थे, जिनसे रेलवे को 27 लाख 28 हजार 59 रुपये की आय हुई थी। पिछले साल सितंबर के आंकड़े के अनुसार यात्रियों की संख्या बढ़ कर 7 लाख 48 हजार 614 हो गई। इनसे रेलवे को प्राप्त हुए 36 लाख 44 हजार 477 रुपये। इस रूट पर सफर करने वालों में ऑफिस में काम करने वाले सरकारी और गैर सरकारी अधिकारियों- कर्मचारियों के अतिरिक्त व्यापारी वर्ग के लोग अधिक हैं। कोपर से वसई की दूरी 36 किलो मीटर है और इस दूरी को तय करने में करीब 45 मिनट लगते हैं। इस मार्ग पर डीएमयू के दस फेरे होते हैं। कोपर से इन यात्रियों को मध्य रेल के सीएसटी व कल्याण, उल्हासनगर आदि स्टेशनों की लोकल ट्रेन मिल जाती है। अगर ये दादर हो कर इन स्टेशनों की यात्रा करें तो काफी समय लगेगा, क्योंकि वसई रोड स्टेशन से फास्ट ट्रेन से दादर तक आने में ही लगभग 50 मिनट लग जाते हैं। आगे की यात्रा का वक्त अलग से लगता है। इन लाखों यात्रियों की परेशानी को आवाज देने की पहल की है ठाणे जिला वसई-विरार शहर (ग्रामीण) के अध्यक्ष गोविंद गुंजालकर ने। इन्होंने संबंधित अधिकारियों को पत्र लिख कर इस रूट पर 12 डिब्बों की लोकल ट्रेनें चलाने और इसकी सेवाएं बढ़ाने की मांग की है।

Sunday, April 24, 2011

एयरपोर्ट मेट्रो एक्सप्रेस लाइन ने पैसेंजरों को तीन दिन के लिए आधी दरों पर सफर कराने का फैस

उम्मीद के मुताबिक अब तक नाकाम रही एयरपोर्ट मेट्रो एक्सप्रेस लाइन ने पैसेंजरों को तीन दिन के लिए आधी दरों पर सफर कराने का फैसला किया है। गुड फ्राइडे के मौके पर मेट्रो ने न सिर्फ शुक्रवार, बल्कि शनिवार और रविवार को भी एयरपोर्ट लाइन के किराए में 50 फीसदी की कटौती कर दी है। लेकिन दिल्ली मेट्रो की अन्य लाइनों पर किराए में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

दिल्ली एयरपोर्ट मेट्रो एक्सप्रेस के प्रवक्ता ने यह जानकारी देते हुए बताया कि नई दिल्ली से एयरपोर्ट होते हुए द्वारका सेक्टर 21 तक जाने वाली इस लाइन पर अगले तीन दिन में जो भी पैसेंजर सफर करेंगे, उन्हें सामान्य किराए के मुकाबले आधे पैसे देने होंगे। मसलन, अगर नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से कोई पैसेंजर एयरपोर्ट तक जाता है, तो उसे सामान्य तौर पर 80 रुपये का टिकट लेना होता है लेकिन इन तीन दिनों में उसे 40 रुपये ही देने होंगे। इसी तरह द्वारका सेक्टर 21 तक जाने के लिए 100 रुपये के बजाय 50 रुपये ही किराए के रूप में देने होंगे।
यही नहीं, अगर कोई पैसेंजर नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से शिवाजी स्टेडियम जाता है, तो भी उसे 20 रुपये के बजाय 10 रुपये का टिकट लेना होगा। लेकिन चूंकि द्वारका सेक्टर 21 और एयरपोर्ट के बीच आने-जाने वालों के लिए किराया 30 रुपये तय किया गया है, इसलिए सिर्फ उन दो स्टेशनों के बीच आने जाने वाले पैसेंजरों को सिर्फ 15 रुपये किराया देना होगा। इस तरह से इन तीन दिनों में इस लाइन पर न्यूनतम किराया 10 रुपये और अधिकतम 50 रुपये होगा। किराए पर डिस्काउंट 22-24 अप्रैल के बीच न सिर्फ सिंगल जर्नी टोकन लेने वालों पर, बल्कि इस लाइन के लिए जारी पास पर भी लागू होगा। गौरतलब है कि इस लाइन पर मेट्रो 105 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ती है और नई दिल्ली से एयरपोर्ट के बीच इसका सफर महज 18 मिनट में पूरा हो जाता है।

Thursday, April 14, 2011

राजधानी एक्सप्रेस को 10 मिनट तक जबरन रुकवा लिया।

बिहार में झंझारपुर के सांसद मंगनीलाल मंडल (जेडीयू) के बॉडीगार्ड्स ने मंगलवार रात राजधानी एक्सप्रेस को 10 मिनट तक जबरन रुकवा लिया। पटना जंक्शन के स्टेशन इंचार्ज ने इस मामले की एक प्राथमिकी दर्ज कराई है। राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) के अनुसार सांसद के बॉडीगार्ड्स ने मंगलवार रात राजेन्द्रनगर-दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस ट्रेन (नंबर-12309) पटना जंक्शन पर करीब 10 मिनट तक जबरन रोक ली। इस दौरान गार्ड से भी दुर्व्यवहार किया गया। पुलिस के मुताबिक गार्ड से यह कहकर ट्रेन रोकी गई कि सांसद अभी आ रहे हैं, उनके आने पर ट्रेन चलाना। पटना जीआरपी के निरीक्षक सिराजुल अहमद ने बुधवार को बताया कि स्टेशन इंचार्ज के लिखित बयान पर पटना रेल थाना में एक मामला दर्ज किया गया है, जिसमें राजधानी एक्सप्रेस को जबरन 9.11 मिनट तक रोकने की बात कही गई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। पुलिस का कहना है कि जब तक राजधानी एक्सप्रेस के गार्ड से पूछताछ नहीं हो जाती तब तक पूरा मामला स्पष्ट नहीं हो सकेगा।

Wednesday, March 23, 2011

कम से कम 108 ट्रेनें आज प्रभावित

आरक्षण के लिए जाटों के आंदोलन से लोगों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। जम्मू, हरियाणा, हिमाचल, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और उत्तरांचल की कम से कम 108 ट्रेनें आज प्रभावित हैं। यह संख्या बढ़ भी सकती है। जाटों ने पहले से ही ऐलान कर रखा है कि अगर 28 मार्च तक उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वे दिल्ली को सील कर देंगे। इसके तहत आंदोलनकारी हरियाणा और पश्चिमी यूपी में दिल्ली जाने वाली रेल और सड़क यातायात को जाम कर देंगे व दिल्ली की पानी की सप्लाई ठप्प कर देंगे। आंदोलन की वजह से हरियाणा के साथ-साथ एक बार फिर राजस्थान का सफर मुश्किल हो गया है। बुधवार को राजस्थान के श्रीगंगा नगर, जयपुर, जोधपुर, जैसलमेर आदि की तमाम ट्रेनें दिल्ली से रद्द हैं। हरियाणा में हिसार के अलावा पंजाब में भटिंडा, फीरोजपुर की कुछ गाडि़यां दिल्ली से रद्द की गई हैं। कोयला और अनाज पहुंचाने के नाम पर दिल्ली-कालका सेक्शन की रद्द की गईं 5 गाडि़यों के अलावा 66 गाड़ियां रद्द हैं। 37 ट्रेनें आज अपने गंतव्य तक नहीं जा पाएंगी। जम्मू से दिल्ली के रास्ते राजस्थान जानेवाली गाड़ियां आगे नहीं जा पा रही हैं। दिल्ली से फीरोजपुर और जाखल, भिवानी, हिसार आदि की गाड़ियां जींद और रोहतक तक चलाई जा रही हैं। मुंबई के लिए गरीब रथ के अलावा पंजाब मेल को भी आज आंशिक रूप से रद्द किया गया है। पंजाब मेल फीरोजपुर के लिए आज दिल्ली से चलेगी। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा में चल रहे जाट आंदोलन के मद्देनजर रेल यातायात बाधित करने के मामले को गंभीरता से लिया है। इस मुद्दे पर अदालत ने एक एनजीओ की याचिका पर राज्य सरकार से जवाब मांगा है। सरकार से पूछा गया है कि आखिर उसने रेलवे ट्रैक पर जाम की स्थिति को रोकने के लिए क्या कदम उठाए हैं। कोर्ट ने मामले की सुनवाई गुरुवार को मुकर्रर की है। वहीं रेल विभाग ने जाट आंदोलन को देखते हुए अजमेर शताब्दी और हिमालयन क्वीन सहित 8 ट्रेनों को कैंसल कर दिया है। सरकारी नौकरियों में आरक्षण की मांग कर रहे हरियाणा के जाट नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गई तो वे दिल्ली को पानी की सप्लाई रोक देंगे और रेल व सड़क यातायात भी बाधित कर दिया जाएगा। अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति की हरियाणा इकाई के अध्यक्ष हवा सिंह सांगवान ने मंगलवार को कहा कि यदि केंद्र और राज्य सरकारें शुक्रवार तक हमारी मांगें नहीं मानती हैं तो हम दिल्ली-अंबाला रेल मार्ग पर यातायात जाम कर देंगे। 28 मार्च तक यदि कुछ नहीं होता है तो हम पूरे हरियाणा में दिल्ली जाने वाली रेल पटरियों सहित अन्य रेल मार्गों को जाम कर देंगे। केंद्र सरकार ने आंदोलनकरियों से निपटने के लिए केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवानों की 10 कंपनियों को भेजा है। वहीं, सांगवान का कहना है कि हम सीआरपीएफ से नहीं डरते। हम किसी भी तरह का बलिदान देने के लिए तैयार हैं। पिछले करीब दो सप्ताह से सैकड़ों रेल यात्रियों को हो रही परेशानी के बावजूद हरियाणा पुलिस आंदोलनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग नहीं कर रही है। हरियाणा पुलिस के प्रमुख ने जाटों को रेल पटरियां जाम नहीं करने की चेतावनी तो दी है, लेकिन उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने एकबार फिर आंदोलनकारी जाटों से अपील की है कि वे अपना आंदोलन समाप्त कर दें। केंद्र में आरक्षण की मांग को लेकर जाटों ने बुधवार से गुरिल्ला आंदोलन छेड़ने का ऐलान किया है। यूपी, पंजाब व हरियाणा के अलावा जहां भी यह आंदोलन चल रहा है, वहां पर गुरिल्ला आंदोलन छेड़ने की बात की जा रही है। जाट आरक्षण संघर्ष समिति के अध्यक्ष यशपाल मलिक के मुताबिक बुधवार से काफूरपुर में गुरिल्ला आंदोलन छेड़ा जाएगा। आंदोलन कहां-कहां होगा, इसकी सूचना सिर्फ एक घंटा पहले ही सार्वजनिक की जाएगी। मलिक के बयान के मद्देनजर अफसरों ने काफूरपुर व उसके आसपास के क्षेत्रों का खाका तैयार कर पांच मिनट के भीतर वहां फोर्स भेजने की तैयारी कर ली है।

Tuesday, March 15, 2011

आरक्षण के मुद्दे पर अपने कदम पीछे हटाने से इनकार

रेलवे ट्रैक पर जमे बैठे जाट समुदाय ने अब आरक्षण के मुद्दे पर अपने कदम पीछे हटाने से इनकार कर दिया है। बीजेपी, आरएलडी और बीएसपी ने इस मुद्दे को अगले यूपी असेंबली इलेक्शन में भुनाने की कवायद शुरू कर दी है। वहीं केंद्र सरकार की चुप्पी से गुस्साए जाटों ने 17 मार्च से दिल्ली में पानी और दूध की सप्लाई रोकने का ऐलान कर दिया है। राजनीतिक दलों की ओर से मिले समर्थन के बाद आंदोलनकारी अति उत्साहित हैं। जाटों के नेता यशपाल मलिक और उम्मेद सिंह ने रेलवे ट्रैक पर जाम हटाने से स्पष्ट इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। ॉसोमवार को भी दिल्ली जाने वाली तीन प्रमुख ट्रेनें कैंसल रहीं। इससे यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। अकेले 3 दिन में कैंसल ट्रेनों से 70 लाख रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। यह घाटा और बढ़ने की आशंका है क्योंकि लखनऊ मेल सहित कई ट्रेनें 15 मार्च को भी रद्द रहेंगी। पिछले साढ़े तीन दशकों में यह पहला मौका है, जब लखनऊ मेल जैसी वीआईपी ट्रेन चार दिन कैंसल की गई। सोमवार तक रेलवे की 693 ट्रेनें प्रभावित हुई। होली के त्योहार पर दिल्ली से लखनऊ-बनारस और बिहार जाने वाले यात्रियों को काफी परेशानी हो रही है। प्रमुख ट्रेनों में तत्काल कोटा भी चंद मिनटों में खत्म हो रहा है। लोगों की सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि होली पर घर कैसे पहुंचे। तमाम लोगों ने घर जाने का प्रोग्राम ही कैंसल कर डाला है। जाट नेताओं ने भी आरक्षण के मुद्दे पर आर-पार की लड़ाई लड़ने की ठान ली है। यशपाल मलिक ने कहा कि 17 मार्च से दिल्ली को पानी-दूध और अन्य जरूरी सामानों की आपूर्ति बंद कर दी जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार आंख-कान मूंदे बैठी है। दस दिन से रेलवे ट्रैक जाम होने और यात्रियों को हो रही दिक्कतों से कांग्रेस सरकार बेफिक्र है। वहीं उत्तर रेलवे के उच्च अधिकारी यूपी सरकार से रेलवे ट्रैक पर बैठे जाटों को हटाने की गुजारिश की है। रेलवे अफसरों का कहना है कि जब तक राज्य सरकार सहयोग नहीं देती, जाटों को ट्रैक से हटाना कठिन है।

Friday, March 11, 2011

लगभग तीन दर्जन ट्रेनों को बदले हुए रास्ते से चलाया गया।

मुरादाबाद के पास काफूरपुर में चल रहे जाट आरक्षण आंदोलन से रेलवे को रोजाना करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है। गुरुवार को लगातार पांचवे दिन दिल्ली-मुरादाबाद के रास्ते कानपुर और लखनऊ जाने वाली 30 ट्रेनें रद्द रहीं, जबकि लगभग तीन दर्जन ट्रेनों को बदले हुए रास्ते से चलाया गया। शुक्रवार को भी यही स्थिति रहने की आशंका है। शुक्रवार के लिए रेलवे ने इस रूट की 21 ट्रेनों को पहले ही रद्द कर दिया है, जबकि 16 ट्रेनों का रास्ता बदल दिया गया है। इसके अलावा 16 ट्रेनों को डेस्टिनेशन पर पहुंचने से पहले ही रोक दिया जाएगा। मुजफ्फरनगर सहारनपुर-देहरादून रेलमार्ग पर जाट आंदोलन शुरू होने से चंडीगढ़, जम्मू, देहरादून और पंजाब की ओर जाने वाली ट्रेनों पर प्रभाव पड़ सकता है। उत्तर रेलवे के अधिकारियों का कहना है कि हालांकि अभी रेलवे को हुए घाटे का आकलन नहीं किया गया है, लेकिन पांच दिन में रेलवे को हुए घाटे का आंकड़ा करोड़ों रुपये में है। रेल अधिकारियों का कहना है कि इस आंदोलन की वजह से न सिर्फ पैसेंजर ट्रेनें बल्कि मालगाडि़यां भी प्रभावित हो रही हैं। माल ढुलाई से होने वाली आमदनी भी प्रभावित हो रही है। इस आंदोलन की वजह से पैसेंजरों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही हैं। उत्तर रेलवे के प्रवक्ता का कहना है कि शुक्रवार को भी बरेली-दिल्ली-बरेली पैसेंजर, उत्तरांचल एक्सप्रेस, आला हजरत एक्सप्रेस, रामनगर एक्सप्रेस समेत 21 ट्रेनें रद्द कर दी गई हैं। लखनऊ से मिली खबर के मुताबिक, केंद्र से वार्ता विफल होने के बाद आरक्षण की मांग को लेकर जाट नेताओं ने दिल्ली जाने वाली सभी रेलमार्गों को ठप करने का अल्टिमेटम देकर खलबली मचा दी है। जाट समुदाय ने गुरुवार को मुजफ्फरनगर के मंसूरपुर और सहारनपुर-देहरादून रेल रूट को जाम कर दिया। इसके साथ ही उन्होंने पंजाब, जम्मू-कश्मीर और हरियाणा रेलमार्ग को बंद करने की चेतावनी दी है। जाट नेता यशपाल मलिक ने कहा कि केंद्र सरकार जब तक उनकी जायज मांगों को नहीं मान लेती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। गुरुवार को मुरादाबाद-अमरोहा के बीच काफूरपुर में रेलवे ट्रैक पर जाटों का कब्जा बरकरार रहा। सहारनपुर, देहरादून और मुजफ्फरनगर में रेल रूट जाम होने से दो दर्जन से अधिक ट्रेनों का संचालन बाधित होने की सूचना है, वहीं कई ट्रेनों को कैंसल कर दिया गया है। गुरुवार को भी लखनऊ से दिल्ली जाने वाली ज्यादातर गाडि़यों को परिवर्तित मार्ग से चलाया गया। इनमें दुरंतो, लखनऊ मेल, श्रमजीवी, काशी विश्वनाथ, सप्तक्रांति, डुप्लिकेट मेल, सद्भावना एक्सप्रेस, नौचंदी और अवध असम एक्सप्रेस आदि शामिल हैं। हिसार से मिली खबर के मुताबिक , हिसार से 6 मार्च को शुरू हुआ जाट आरक्षण आंदोलन गुरुवार को पांचवें दिन हरियाणा के कई और इलाकों में भी फैल गया। जाटों ने सिवानी के पास झुपा , जींद , पानीपत , हिसार के पास रामायण , फतेहाबाद जिले में टोहाना के पास गाजूवाला में रेलवे टै्रक पर धरना देकर रेलगाडि़यों की आवाजाही पूरी तरह से ठप रखी। हिसार - भिवानी - दिल्ली रेल मार्ग पर लगातार पांचवें दिन भी रेल यातायात पूरी तरह से ठप रहा। हिसार - जयपुर रेलमार्ग पर दूसरे दिन भी रेलगाडि़यां नहीं चली। हिसार - लुधियाना रेलवे टै्रक पर लगातार तीसरे दिन जाटों का कब्जा रखा। खेदड़ थर्मल पावर प्लांट में रेल द्वारा की जा रही कोयले की सप्लाई पूरी तरह से बंद हो गई है , जिस कारण आज से यहां बिजली का उत्पादन पूरी तरह से बंद हो गया है।

Wednesday, March 9, 2011

रेल पटरी की सुरक्षा के लिए भारी संख्या में सुरक्षा बलों को तैनात किया गया

उत्तरी और दक्षिणी कश्मीर को जोड़ने वाली 119 किलो मीटर लम्बी रेल पटरी की सुरक्षा के लिए भारी संख्या में सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है। दो दिनों पूर्व श्रीनगर शहर के बाहरी हिस्से में अलगाववादियों ने रेल पटरी के एक हिस्से को बम से उड़ा दिया था। अलगाववादियों ने सोमवार को नौगाम के वानाबल में एक विस्फोट कर दिया था, जिसके चलते रेल पटरी का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया था। रेलवे के उप महानिरीक्षक (डीआईजी) मुबारक ए.गनी ने कहा, 'जम्मू और कश्मीर सरकारी रेलवे सुरक्षा बल (जेएंडके जीआरपीएफ) के 1,100 से अधिक जवानों को दक्षिण कश्मीर के काजीगुंड रेलवे स्टेशन से उत्तर कश्मीर के बारामूला रेलवे स्टेशन तक 119 किलोमीटर लम्बी रेल पटरी पर तैनात किया गया है।' गनी ने कहा कि घाटी में छह रेल पुलिस थाने और नौ पुलिस चौकियां हैं। डीआईजी गनी ने कहा, 'इसके अलावा केंदीय रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) और रेलवे प्रोटेक्शन सिक्युरिटी फोर्स (आरपीएसएफ) के जवानों को भी घाटी में तैनात किया गया है। आरपीएफ और जेएंडके जीआरपीएफ का नेतृत्व कमांडेंट स्तर के अधिकारी कर रहे हैं। आरपीएफ जवानों को रेलगाड़ियों की सुरक्षा के लिए तैनात किया गया है और वे बंकरों का प्रबंधन और रेल पटरियों से लगे टॉवर्स की भी निगरानी कर रहे हैं।' गनी ने कहा, 'राज्य पुलिस के एक वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) और दो उप पुलिस अधीक्षक (डीएसपी) को जे एंड केजीआरपीएफ के 1,100 से अधिक जवानों के नियंत्रण की जिम्मेदारी दी गई है।' गनी ने कहा, 'सुरक्षा की बढ़ी हुई मांग को पूरा करने के लिए हमारे पास लगभग 800 जवानों की कमी है, जिसे अगले दो-तीन महीनों के भीतर पूरा कर लिया जाएगा। हमने पूरी पटरी की सुरक्षा पहले ही बढ़ा दी है और किसी भी विध्वंसक कोशिश को नाकामयाब करने के लिए पूरे बंदोबस्त किए गए हैं।'

Monday, March 7, 2011

प्लैटफॉर्म बदलने की कोशिश में उत्तम नगर मेट्रो स्टेशन पर एक युवक की मौत

रेलवे प्लैटफॉर्म की तरह ही ट्रैक पर कूदकर प्लैटफॉर्म बदलने की कोशिश में उत्तम नगर मेट्रो स्टेशन पर एक युवक की मौत हो गई। मृतक की पहचान उत्तराखंड के रहने वाले राहुल थापा (25) के रूप में हुई है। वैसे, इस घटना से मेट्रो सेवाओं पर ज्यादा असर नहीं पड़ा। इस बीच दिल्ली मेट्रो ने पैसेंजरों को सलाह दी है कि प्लैटफॉर्म बदलने के लिए वे कॉनकोर्स का ही रास्ता अपनाएं यानी जिस मंजिल पर टिकट मिलता है, वहां से होकर दूसरी तरफ की सीढि़यों या लिफ्ट से दूसरे प्लैटफॉर्म पर जाएं। ट्रैक पर कूदकर प्लैटफॉर्म बदलना दिल्ली मेट्रो ऑपरेशंस एंड मेंटीनेंस एक्ट के तहत गैरकानूनी है। ट्रैक पर कूदने से यह हादसा शनिवार सुबह 7:25 बजे उत्तम नगर पश्चिम मेट्रो स्टेशन पर हुआ। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के प्रवक्ता ने बताया कि हादसे के वक्त राहुल अप प्लैटफॉर्म पर खड़ा था, जहां से द्वारका की ओर ट्रेनें जाती हैं। शायद उन्हें नोएडा की ओर जाना था। राहुल को किसी से पता चला होगा कि नोएडा की ओर जाने वाली ट्रेन डाउन प्लैटफॉर्म पर मिलेगी। उसी वक्त उन्हें द्वारका की ओर से आती हुई ट्रेन दिखी और वह दूसरे प्लैटफॉर्म पर पहुंचने के लिए ट्रैक पर ही कूद गए। अधिकारियों का कहना है कि राहुल ने यह सोचकर छलांग लगाई होगी कि वह रेलवे स्टाइल में नोएडा के लिए ट्रेन पकड़ लेगा। लेकिन इससे पहले कि वह ट्रैक से प्लैटफॉर्म पर चढ़ पाता, द्वारका की ओर से ट्रेन आ गई। मेट्रो प्रवक्ता का कहना है कि हालांकि ट्रेन ऑपरेटर ने इमरजेंसी ब्रेक लगाया लेकिन रुकते-रुकते भी ट्रेन ने उसे टक्कर मार दी जिससे वह ट्रैक पर जा गिरा। उसे फौरन उठाया गया, उसने पूछने पर अपना नाम भी बताया लेकिन इसके बाद वह बेहोश हो गया। उसे दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल ले जाया गया, जहां सुबह 9:30 बजे उसकी मौत हो गई। दिल्ली मेट्रो का कहना है कि राहुल उत्तराखंड के लोहाघाट थाना एरिया के रहने वाले थे। मेट्रो का कहना है कि मामला दिल्ली मेट्रो पुलिस को सौंप दिया गया, जो इसकी जांच कर रही है। फिलहाल उसके रिश्तेदारों को सूचना दे दी गई है।

Wednesday, March 2, 2011

फैजाबाद एक्सप्रेस में 6-7 बदमाशों ने यात्रियों से मारपीट कर नकदी, मोबाइल फोन व जेवरात लूटकर फरार


दिल्ली से फैजाबाद जा रही फैजाबाद एक्सप्रेस में 6-7 बदमाशों ने यात्रियों से मारपीट कर नकदी, मोबाइल फोन व जेवरात लूटकर फरार हो गए। हापुड़ स्टेशन पर यात्रियों ने इसकी सूचना जीआरपी को दी, लेकिन उसने रिपोर्ट दर्ज नहीं की। सोमवार रात को दिल्ली से फैजाबाद जा रही फैजाबाद एक्सप्रेस में गाजियाबाद से 6-7 बदमाश टे्रन में सवार हो गए। पिलखुवा क्षेत्र के आसपास बदमाशों ने एक दर्जन यात्रियों के साथ मारपीट कर नकदी, मोबाइल फोन व जेवरात लूट लिए और स्टेशन से पहले ट्रेन की चेन खींचकर फरार हो गए। हापुड़ स्टेशन पर यात्रियों ने लूटपाट की सूचना रेलवे पुलिस को दी, परंतु पुलिसकर्मियों ने रिपोर्ट दर्ज करने के बजाय यात्रियों को टे्रन में बैठाकर आगे की तरफ रवाना कर दिया। जीआरपी चौकी इंचार्ज सुधीर कुमार ने टे्रन में किसी प्रकार की लूटपाट की घटना से इनकार किया है।

Tuesday, March 1, 2011

रेलमंत्री ने मुंबई रेल विकास कॉर्पोरेशन (एमआरवीसी) की मुंबई की लाइफलाइन को सुधारने के लिए तारीफ की और इसी तर्ज पर दूसरे 4 शहरों (चेन्नै, हैदराबाद, अहम

इसे एक कॉपोर्रेट कंपनी की स्टाइल कह लीजिए या फंड मैनेजमेंट के क्राइसिस की दौर से गुजर रहे रेलवे का सबक, अब रेलवे अपने पहियों को और भी सुचारु रूप से दौड़ाने की प्रक्रिया में संबंधित राज्य सरकारों को अपने साथ लेना चाहती है। वह इस अर्थ में कि मेट्रो सिटीज में रेल ट्रांसपोर्ट अब सिर्फ रेलवे का विषय नहीं रह गया। रेलमंत्री ने मुंबई रेल विकास कॉर्पोरेशन (एमआरवीसी) की मुंबई की लाइफलाइन को सुधारने के लिए तारीफ की और इसी तर्ज पर दूसरे 4 शहरों (चेन्नै, हैदराबाद, अहमदाबाद, कोलकाता) में ऐसे कार्पोरेशन की स्थापना की बात कही। इससे स्पष्ट है कि अब शहरों का रेल नेटवर्क सुधारने का बोझ रेलवे सिर्फ अपने कंधों पर नहीं, बल्कि राज्य सरकारों पर भी डालना चाहती है। बजट के प्रस्तावों के अनुसार, रेल मंत्री चाहती है कि एमआरवीसी की ही तरह केआरवीसी (कोलकाता रेल विकास कार्पोरेशन) का गठन हो और उसके लिए राज्य सरकार के अलावा बैंक और दूसरी फाइनांस कंपनियां, स्थानीय निकाय तथा दूसरे स्टेकहोल्डर अपनी तरफ से फंड दें। आपको मालूम होगा कि एमआरवीसी रेलवे और राज्य सरकार का एक ज्वाइंट वेंचर है जो रेलवे प्रॉजेक्ट का कार्यान्वयन करती है। प्रॉजेक्ट का खर्च रेलवे और महाराष्ट्र सरकार मिलकर वहन करती हैं। इसका गठन 12 जुलाई 1999 को हुआ था। उस समय मुंबई का रेलवे नेटवर्क अच्छी स्थिति में नही था। फिर एमआरवीसी अस्तित्व में आई और इसने लाइफलाइन के दमघोंटू माहौल में राहत की एक सांस सी भर दी। यूं तो आज मुंबई की लाइफलाइन में काफी सहूलियत की गुंजाइश है, मगर 5 साल पहले की तुलना में यह काफी सुकून देता है। राज्य सरकारों या दूसरे एजेंसियों की आर्थिक सहायता लेने की रेलवे की नीयत को इस बात से भी जाना जा सकता है कि इसी बजट में ममता बनर्जी ने देश के 20 महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशनों को चकाचक करने के लिए टूरिजम बोर्ड की फिफ्टी-फिफ्टी मदद मांगी है। पश्चिम रेल के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, दरअसल अब वक्त ही ऐसा आ गया है कि किसी भी शहर का रेल ट्रांसपोर्ट सिर्फ रेलवे नहीं कर सकती है। उसमें संबंधित सरकारों या दूसरी फाइनांशल एजेंसियों का समूचा योगदान जरूरी हो गया है। जबकि खुद एमआरवीसी के एमडी पी. सी. सहगल बताते हैं कि रेल मंत्री द्वारा हमारी एजेंसी की तारीफ इस बात की परिचायक है कि अब रेल ट्रांसपोर्ट के प्रॉजेक्टों में सरकारों की आर्थिक सहभागिता बहुत जरूरी हो गई है।

Monday, February 28, 2011

ट्रेन की पटरी से चार सिरविहीन क्षत-विक्षत शव बरामद


उत्तर प्रदेश में कौशाम्बी जिले के सैनी क्षेत्र में आज ट्रेन की पटरी से चार सिरविहीन क्षत-विक्षत शव बरामद किये गए। पुलिस सूत्रों ने बया कि घुमाई गांव में ट्रेन की पटरी पर करीब 38 वर्षीय एक महिला, लगभग 42 साल के एक पुरुष तथा 10 एवं 12 वर्ष की दो लड़कियों के शव बरामद किए गए हैं। इन सिरविहीन शवों की शिनाख्त नहीं हो सकी है। माना जा रहा है कि इन लोगों की मृत्यु कल रात किसी ट्रेन की चपेट में आने से हुई है। हालांकि, इलाके में तलाश के बावजूद एक भी शव का सिर नहीं मिलने से पुलिस को शक है कि उन लोगों की हत्या करके शवों को रेल की पटरी पर डाल दिया गया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

Friday, February 25, 2011

रेल बजट में यात्री किरायों में कोई बढ़ोतरी नहीं

रेल मंत्री ममता बनर्जी ने रेल बजट में यात्री किरायों में कोई बढ़ोतरी नहीं की। इसके साथ ही उन्होंने पिछले साल शुरू की गई दुरंतो ट्रेनों का विस्तार करते हुए 9 नई दुरंतो, तीन शताब्दी, दो डबल डेकर एसी और 56 नई एक्सप्रेस ट्रेनों का ऐलान किया। लोकसभा में रेल बजट पेश करते हुए ममता ने कहा कि इलाहाबाद से मुंबई के बीच हफ्ते में दो बार एसी दुरंतो चलाई जाएगी। उन्होंने पुणे से अहमदाबाद, सिकंदराबाद से विशाखापट्टनम, मदुरै से चेन्नै, चेन्नै से तिरुवनंतपुरम, मुंबई से नई दिल्ली और शालीमार से पटना के बीच भी एसी दुरंतो गाड़ियां चलाने का ऐलान किया। रेल मंत्री ने सियालदह से पुरी और निजामुद्दीन से अजमेर के बीच नॉन एसी दुरंतो ट्रेनें चलाने की भी घोषणा की। दुरंतो ट्रेनें नॉन स्टॉप चलती हैं। उन्होंने जयपुर से दिल्ली और अहमदाबाद से मुंबई के बीच एसी डबल डेकर ट्रेनें शुरू करने का भी प्रस्ताव किया। इसके अलावा पुणे-सिकंदराबाद, जयपुर-आगरा और लुधियाना-दिल्ली तीन नई शताब्दी ट्रेनें चलाने की भी घोषणा की। ममता ने कुछ दुरंतो ट्रेनों के फेरों में बढ़ोतरी का जिक्र करते हुए बताया कि मुंबई से हावडा के बीच दुरंतो ट्रेन दो की बजाय हफ्ते में चार दिन चलेगी। मुंबई से अहमदाबाद के बीच दुरंतो तीन दिन की बजाय अब हफ्ते में हर दिन चलेगी। सियालदह से नई दिल्ली के बीच दुरंतो गाड़ी अब दो दिन की बजाय पांच दिन चलेगी। नागपुर से मुंबई के बीच दुरंतो गाड़ी तीन दिन की बजाय हफ्ते में हर दिन चलेगी। हावडा से यशवंतपुर के बीच दुरंतो ट्रेन चार दिन की बजाय अब हफ्ते में पांच दिन चलेगी। 56 नई एक्सप्रेस ट्रेनें: 1. रायबरेली-जौनपुर एक्सप्रेस (दैनिक) 2. तिरुपति-अमरावती एक्सप्रेस (सप्ताह में दो दिन) अकोला-निजामाबाद-गूत्ती-धर्मावरम के रास्ते 3. आसनसोल-गोरखपुर एक्सप्रेस (साप्ताहिक) छपरा-सिवान के रास्ते 4. नागपुर-कोल्हापुर एक्सप्रेस (सप्ताह में दो दिन) कुर्दुवाडी-लातूर रोड-पूर्णा-अकोला के रास्ते 5. मालदा टाऊन-दीघा एक्सप्रेस (साप्ताहिक) रामपुरहाट के रास्ते 6. पुणे-नांदेड़ एक्सप्रेस (साप्ताहिक) लातूर के रास्ते 7. विशाखापत्तनम-कोरापुट इंटरसिटी एक्सप्रेस (सप्ताह में 5 दिन) विजयनगरम के रास्ते 8. हावड़ा-सिकंदराबाद एक्सप्रेस (साप्ताहिक) खड़गपुर के रास्ते 9. मुंबई-चंडीगढ़ एक्सप्रेस (साप्ताहिक) के रास्ते 10. बर्द्धमान-रामपुरहाट एक्सप्रेस (सप्ताह में तीन दिन) 11. बीकानेर-दिल्ली सुपरफास्ट (दैनिक) रतनगढ़ के रास्ते 12. हैदराबाद-दरभंगा एक्सप्रेस (साप्ताहिक) मूरी-के रास्ते 13. हावड़ा-तिरुपति एक्सप्रेस (साप्ताहिक) 14. नरसापुर-नागरसोल एक्सप्रेस (सप्ताह में दो दिन) सिकंदराबाद-निजामाबाद के रास्ते 15. पुरी-शालीमार एक्सप्रेस (साप्ताहिक) 16. रांची-पुणे (सप्ताह में दो दिन) बिलासपुर के रास्ते 17. शालीमार-उदयपुर एक्सप्रेस (साप्ताहिक) कटनी-कोटा के रास्ते 18. चेन्नै-शिर्डी एक्सप्रेस (साप्ताहिक) बेंगलुरु के रास्ते 19. कोयंबटूर-तूतीकोरिन लिंक एक्सप्रेस (दैनिक) 20. हावड़ा-मैसूर एक्सप्रेस (साप्ताहिक) गोन्दिया-अदिलाबाद के रास्ते 21. यशवंतपुर-मैसूर एक्सप्रेस (दैनिक) 22. दीघा-विशाखापत्तनम एक्सप्रेस (साप्ताहिक) 23. मैसूर-चेन्नै एक्सप्रेस (साप्ताहिक) 24. अहमदाबाद-यशवंतपुर एसी एक्सप्रेस (साप्ताहिक) हुबली-बिजापुर के रास्ते 25. भावनगर-कोचुवेल्लि एक्सप्रेस (साप्ताहिक) पनवेल-मडगांव के रास्ते 26. गोरखपुर-यशवंतपुर एक्सप्रेस (साप्ताहिक) फैजाबाद-कानपुर-भोपाल-काचेगुडा के रास्ते 27. भुग-दादर एक्सप्रेस (सप्ताह में दो दिन) 28. कोलकाता-अजमेर एक्सप्रेस (साप्ताहिक) आसनसोल के रास्ते 29. जबलपुर-इंदौर इंटरसिटी एक्सप्रेस (सप्ताह में तीन दिन) गुना-बीना के रास्ते 30. पोरबंदर-कोचुवेल्लि एक्सप्रेस (साप्ताहिक) पनवेल-मडगांव के रास्ते 31. कोलकाता-आगरा एक्सप्रेस (साप्ताहिक) कासगंज-मथुरा के रास्ते 32. लखनऊ-भोपाल एक्सप्रेस (साप्ताहिक) 33. वाराणसी-सिंगरौली इंटरसिटी एक्सप्रेस (दैनिक) 34. नागपरु-भुसावल एक्सप्रेस (सप्ताह में तीन दिन) इटारसी-खंडवा के रास्ते 35. पूरी-गांधीधाम एक्सप्रेस (साप्ताहिक) दुर्ग के रास्ते 36. हावड़ा-विशाखापत्तनम एक्सप्रेस (साप्ताहिक) 37. गुवाहाटी-दीमापुर एक्सप्रेस (दैनिक) 38. हावड़ा-दरभंगा एक्सप्रेस (साप्ताहिक) 39. वास्को-वेलंकनी एक्सप्रेस (साप्ताहिक) 40. बिलासपुर-एर्णाकुलम सुपरफास्ट (साप्ताहिक) 41. दीघा-पुरी एक्सप्रेस (साप्ताहिक) 42. जोधपुर-दिल्ली एक्सप्रेस (सप्ताह में दो दिन) डेगाना-रतनगढ़ के रास्ते 43. खड़गपुर-विल्लुपुरम एक्सप्रेस (साप्ताहिक) वेल्लोर के रास्ते 44. उदयपुर-बांद्रा (ट) एक्सप्रेस (साप्ताहिक) रतलाम के रास्ते 45. पुरूलिया-विल्लुपुरम एक्सप्रेस (साप्ताहिक) मिदनापुर-खड़गपुर-वेल्लौर के रास्ते 46. आसनसोल-गोण्डा एक्सप्रेस (साप्ताहिक) छपरा-मऊ-शाहगंज अयोध्या के रास्ते 47. दिल्ली-पुडुचेरी एक्सप्रेस (साप्ताहिक) 48. आसनसोल-टाटानगर एक्सप्रेस (सप्ताह में तीन दिन) पुरूलिया के रास्ते 49. इंदौर-कोटा इंटरसिटी एक्सप्रेस (दैनिक) रूथियाई के रास्ते 50. भागलपुर-अजमेर एक्सप्रेस (साप्ताहिक) 51. हावड़ा-जैसलमेर एक्सप्रेस (साप्ताहिक) रायबरेली-रतनगढ़-लालगढ़ के रास्ते 52. एर्णाकुलम-बेंगलुरू एक्सप्रेस (साप्ताहिक) 53. मंगलोर-पालघाट इंटरसिटी एक्सप्रेस (दैनिक) 54. वाराणसी-अहमदाबाद एक्सप्रेस (साप्ताहिक) अजमेर के रास्ते 55. हावड़ा-नांदेड़ एक्सप्रेस (साप्ताहिक) 56. हरिद्वार-रामनगर लिंक एक्सप्रेस (सप्ताह में तीन दिन) ( नोटः बोल्ड की गई ट्रेनें पश्चिम बंगाल से हैं) जिनका रूट बढ़ाः उदयपुर-ग्वालियर एक्सप्रेस को दिल्ली तक, चंडीगढ़-जयपुर गरीबरथ एक्सप्रेस को अजमेर तक, इलाहाबाद-लखनऊ एक्सप्रेस को विंध्याचल तक, इंदौर-अजमेर एक्सप्रेस को जयपुर तक, वलसाड-वड़ोदरा एक्सप्रेस को दाहोद तक, सुल्तानपुर-अजमेर एक्सप्रेस को अहमदाबाद तक, अजमेर-किशनगंज एक्सपेस को न्यू जल्पाईगुडी तक, लखनऊ-भोपाल एक्सप्रेस को प्रतापगढ़ तक बढ़ाया गया है। जिनके फेरे बढ़ेः नई दिल्ली-अजमेर शताब्दी एक्सप्रेस को छह दिन से बढ़ाकर हफ्ते में हर दिन, निजामुद्दीन-देहरादून एसी एक्सप्रेस को सप्ताह में छह दिन से बढ़ाकर रोजाना, बेंगलुरु-हुबली जन शताब्दी को छह दिन की बजाय रोजाना, हबीबगंज-जबलपुर जनशताब्दी को छह दिन की बजाय रोजाना, मुंबई-मंगलौर एक्सप्रेस को तीन दिन से बढ़ाकर दैनिक किया गया। छुट्टियों, त्योहारों और कुंभ सहित विभिन्न मेलों के दौरान होने वाली यात्रियों की भीड़ के मद्देनजर रेलवे ने पूरे साल 40 हजार अतिरिक्त फेरे लगाने की योजना बनाई है। कविगुरु और विवेक एक्सप्रेसः स्वामी विवेकानंद के जन्मदिन की 150वीं वर्षगांठ के मौके पर ममता ने चार विवेक एक्सप्रेस ट्रेनें और गुरु रविंद्रनाथ टैगोर की 150वीं वर्षगांठ के मौके पर चार कविगुरु एक्सप्रेस चलाने का ऐलान किया। विवेक एक्सप्रेस ट्रेनें डिब्रूगढ से कन्याकुमारी, द्वारका से तूतीकोरिन, हावडा से मंगलौर और बांदा से जम्मूतवी के लिए चलेंगी। कविगुरु एक्सप्रेस हावडा से अजीमगंज, गुवाहाटी से जयपुर, हावडा से बोलपुर और हावडा से पोरबंदर के बीच चलेंगी। राज्यरानी एक्सप्रेसः ममता ने विभिन्न राज्यों के अहम शहरों को उनकी राजधानी से जोड़ने वाली दस राज्यरानी एक्सप्रेस ट्रेनें चलाने की भी घोषणा की। ये ट्रेनें सावंतवाडी रोड से मुंबई, सहरसा से पटना इंटरसिटी, मेरठ से लखनऊ इंटरसिटी, मैसूर से बंगलुरु, दमोह से भोपाल, सिलघट से धुबडी, बांकुरा से हावडा, नीलाम्बुर रोड से तिरुवनंतपुरम, से भुवनेश्वर और मनमाड से मुंबई के बीच चलेंगी। चार जन्मभूमि गौरव ट्रेनें: ये ट्रेनें हावडा से बोलपुर, राजगीर, पटना, वाराणसी, गया से वापस हावडा, बेंगलुरु, मैसूर, हासन, हुबली, बीजापुर से वापस बेंगलुरु, मुंबई, अहमदाबाद, भावनगर, गिर, दीव, सोमनाथ, राजकोट से वापस मुंबई तथा चेन्नै, पुडुचेरी, तिरुचिरापल्ली, मदुरै, तिरुवनंतपुरम, एर्णाकुलम से वापस चेन्नै के लिए होंगी। 13 नई पैसेंजर ट्रेनें: जिन रूट्स पर पैसेंजर ट्रेनें चलेंगी वे इस तरह हैं- 1. दिल्ली-गढ़ी हरसरू-फारूखानगर पैसेंजर (दैनिक), 2. केन्दुझारगढ़-भुवनेश्वर फास्ट पैसेंजर (सप्ताह में पांच दिन), 3. कोरापुट-बोलनगीर-सम्बलपुर पैसेंजर (दैनिक), 4. बरकाकाना-डेहरी ऑन सोन पैसेंजर (दैनिक), 5. जोधपुर-हिसार फास्ट पैसेंजर (दैनिक), 6. तिरुपतिगुंतकल पैसेंजर (दैनिक), 7. कोयम्बटूर-मेट्टूपलायम पैसेंजर (सप्ताह में छह दिन), 8. भुज-पालनपुर पैसेंजर (दैनिक), 9. सिलघाट-चापरमुख पैसेंजर (दैनिक), 10. सिलीगुड़ी-दिनहाटा पैसेंजर (दैनिक), 11. अबोहर-फाजिल्का पैसेंजर (दैनिक), 12. बिलासपुर-कटनी पैसेंजर (दैनिक), 13. रायपुर-कोरबा पैसेंजर (दैनिक)

Tuesday, February 22, 2011

रेलवे के अनुसार विभाग की आमदनी एक रुपये है, लेकिन खर्च 1.34 पैसे आ रहा है।

महंगाई के इस दौर में रेलवे की आमदनी घटती जा रही है, लेकिन उसके खर्चों में काफी इजाफा हो रहा है। रेलवे के अनुसार विभाग की आमदनी एक रुपये है, लेकिन खर्च 1.34 पैसे आ रहा है। रेलवे फिलहाल घाटे में हैं। इस हालात में यात्री सुविधाओं को ठीक ढंग से लागू नहीं किया जा रहा है। अफसर खर्च कम करने की युक्ति ढूंढ रहे हैं, ताकि रेलवे पर बढ़ते बोझ को कम किया जा सके। यूपी के नॉर्दर्न रेलवे लखनऊ डिविजन की बैठक में डीआरएम जीएस सोंधी ने यह आंकड़ा पेश किया। उन्होंने बताया कि रेलवे की आमदनी घटी है, वहीं सिक्स पे कमिशन लागू होने के बाद खर्च बढ़ता जा रहा है। ऐसे में खर्चों को कम करके ही स्थिति पर नियंत्रण पाया जा सकता है। बैठक में नॉर्दर्न रेलवे मैंस यूनियन, आरपीएफ असोसिएशन एवं रेलवे प्रमोटी ऑफिसर्स असोसिएशन ने भी विचार रखे। इस मौके पर एनआरएमयू के डिविजनल सेक्रेटरी आर. के. पांडेय ने सुझाव दिया कि रेलवे के विज्ञापन प्रदर्शित करने और खाली पड़ी जमीन को लीज पर उठाकर आमदनी बढ़ाई जा सकती है। इससे खर्च का अंतर कुछ हद तक कम हो जाएगा। इसके अलावा उन्होंने कई अन्य मुद्दे भी उठाए। इस अवसर पर एसी क्लास में यात्रियों को दी जाने वाली बेडशीट की धुलाई करने वाली एजेंसी के लाखों रुपये बकाया होने समेत कई मामले भी बैठक में सामने आए, जिन पर डीआरएम ने आश्वासन दिया कि एजेंसियों को भुगतान किया जा रहा है। इसके अलावा आरपीएफ असोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र यादव ने जवानों को सुविधाएं न के बराबर मिलने की बात भी उठाई। प्रमोटी ऑफिसर्स असोसिएशन ने भी कई मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। हालांकि बैठक में खर्च कम करने पर अधिक जोर दिया गया। डिविजनल रेलवे के अफसरों का कहना है कि खर्च अधिक होने से विकास कार्य में रुकावट आ रही है। साथ ही यात्री सुविधाओं की उस हिसाब से प्रगति नहीं हो पा रहा है, जितनी तेजी से सुविधाओं का विकास होना चाहिए। इसके लिए ठोस प्रयास करने की जरूरत है।

रेलवे इतनी गति से नहीं बढ़ रही।

रेलवे की तरक्की दो पैमानों पर नापी जा सकती है। एक, इसके एसेट्स का कैसा और कितना इस्तेमाल हो रहा है और दो, यह कितने पैसेंजर और सामान ढो रही है। हालात ये हैं कि देश में पूरा ट्रांसपोर्ट सेक्टर 9-10 फीसदी की गति से बढ़ रहा है, पर रेलवे इतनी गति से नहीं बढ़ रही। पचास के दशक में रेलवे का शेयर ट्रैफिक का 89 फीसदी तक था, जबकि रोड ट्रांसपोर्ट का 11 फीसदी। आज कुल ट्रैफिक में रेलवे का हिस्सा 20 पर्सेंट है जबकि 80 फीसदी ट्रांसपोर्ट सड़क के जरिए हो रहा है। भारतीय रेल का पिछड़ना कई अर्थों में नुकसानदेह है। सबसे पहला नुकसान पर्यावरण को हो रहा है। रोड ट्रांसपोर्ट के मुकाबले ट्रेनें 9 पर्सेंट फ्यूल एफिशिएंट होती हैं। दूसरे, ट्रक-बस की तुलना में इनकी रनिंग कॉस्ट कम होती है और तीसरे, इनसे यात्रा और माल ढुलाई सस्ती पड़ती है। वजह साफ है। भारतीय रेल को वक्त के साथ और ज्यादा एफिशिएंट नहीं बनाया गया। उसकी क्षमता नई जरूरतों के अनुसार नहीं बढ़ाई गई। ट्रेनों की संख्या और सर्विस की क्वॉलिटी में अपेक्षित सुधार नहीं किए गए। लेकिन उसकी मुश्किलें इसलिए बढ़ रही हैं क्योंकि उसकी कमाई में इजाफा नहीं हो रहा। आज रेलवे की सालाना आय करीब 80-90 हजार करोड़ रुपये है। इसमें से 70 फीसदी कमाई माल ढुलाई से, 25 फीसदी पैसेंजरों से और पांच फीसदी अन्य उपायों से, जैसे रेलवे की जमीनों के कमर्शल इस्तेमाल से होती है। पैसेंजरों से होने वाली कमाई का शेयर पिछले कई वर्षों से नहीं बढ़ा है, जबकि उन्हें दी जाने वाली सेवा पर खर्च काफी बढ़ चुका है। इसकी वजह है लोक-लुभावन रेल बजट। साधारण श्रेणी का किराया बढ़ाने की हिम्मत कोई रेल मंत्री नहीं करता। वातानुकूलित श्रेणी के किरायों में बढ़ोतरी की एक सीमा है क्योंकि तब उनका मुकाबला एयर फेयर से होने लगता है। जबकि रनिंग कॉस्ट बढ़ गई है, जैसे डीजल की कीमतें, महंगाई और कर्मचारियों के वेतन पर खर्च। अगर किराये थोड़े-थोड़े अंतराल पर बढ़ते रहते, तो यह नौबत नहीं आती। आज रेलवे इस घाटे को पूरा करना चाहे तो किराया 60 से 70 फीसदी बढ़ाना होगा। आपका संदर्भ तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव की कार्यप्रणाली से है। उनका ज्यादा योगदान यह था कि उन्होंने रेलवे को कमर्शल लाइन पर दौड़ाने की कोशिश की। मिसाल के तौर पर, उन्होंने पर-एक्सल लोड बढ़ा दिया। यानी माल ढोने वाले वैगंस से ज्यादा ढुलाई होने लगी। फिर उन्हीं के कार्यकाल में रिजर्वेशन की तत्काल योजना लाई गई। इन तरीकों से रेलवे को 10 पर्सेंट अतिरिक्त आय हुई। पर लालू जी की कार्यप्रणाली की दूसरा पहलू यह रहा कि उन्होंने इस कमाई को रेलवे के विस्तार में नहीं लगाया। निजीकरण वहीं हो सकता है, जहां वह आर्थिक रूप से फायदेमंद दिखेगा। रेलवे की खाली जमीनों के इस्तेमाल के दिल्ली-गुड़गांव में तो अच्छे दाम मिल सकते हैं, पर उड़ीसा-बिहार में तो इससे प्राइवेट पार्टियों को नुकसान होगा। और फिर आम राय इसके उलट है कि रेलवे के निजीकरण से देश और जनता को कोई विशेष फायदा होगा। मेट्रो की एयरपोर्ट लाइन का उदाहरण हमारे सामने है। रेलवे की जमीनें बेचना अच्छा नहीं है क्योंकि आगे जरूरत पड़ने पर उसी जमीन की बहुत ज्यादा कीमत देनी पड़ सकती है। यह सच है। आजादी से पहले देश में हर साल 600-700 किलोमीटर नई रेल लाइनें बिछाई जाती थीं, बाद में प्रतिवर्ष 200 किलोमीटर लाइनें ही बिछाई जा पा रही हैं। रेल ट्रैक पर मौजूद 1 लाख 20 हजार छोटे-बड़े पुलों में से आधे सौ साल पुराने हैं। हालांकि आधुनिकीकरण की रफ्तार धीमी है पर इन सभी पहलुओं पर काम हो रहा है। पर रेलवे के वास्तविक आधुनिकीकरण के लिए कुछ दूसरे मोर्चों पर काम करना जरूरी है। जैसे, ऑटोमैटिक सिग्लिनिंग, ट्रैक मेंटिनेंस की मॉडर्न टेक्नीक लाना, करीब 36 हजार लेवल क्रॉसिंग खत्म करना और हाई स्पीड रेल लाइनें बिछाना। हाई स्पीड रेल लाइनों से मेरा आशय मौजूदा रेल लाइनों को इस तरह दुरुस्त करना है कि उन पर 200-250 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेनें दौड़ाई जा सकें।

Wednesday, February 16, 2011

अबतक 1 लाख 38 हजार भरे हुए फार्म जमा

रेलवे ने हाल में रिक्त पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किए थे। इसके लिए मनसे ने अपने चुनाव चिह्न इंजिन को सार्थक करते हुए मराठी माणुस को फॉर्म भरने में हर संभव मदद की। रेलवे के फॉर्म थोक में अपने केंद्रों पर रखकर जानकार लोगों की निगरानी में फार्म भरवाने का काम किया गया। मुंबई और मुंबई से बाहर जी - जान से इस काम में लगे मनसे कार्यकर्ताओं ने अबतक 1 लाख 38 हजार भरे हुए फार्म जमा करके बड़ा मैदान मारा है। राज्य के कोने - कोने से फार्म राजगडा में जमा किए गए और वहां से ट्रक में लादकर रेलवे आफिस भेजे जा रहे हैं। पार्टी विधायक नितिन सरदेसाई ने बताया कि माहिम स्थित मनसे मुख्यालय में अबतक एक लाख 38 हजार 117 फार्म जमा हुए हैं। अब इन फार्मों को ट्रक में लादकर रेलवे भर्ती बोर्ड के आफिस भेजा जाएगा। कुछ लोगों ने फार्म भरकर खुद ही भेजे हैं। अभी फार्म भरने की अंतिम तिथि दूर है , इसलिए और फार्म भरे जाएंगे। मनसे द्वारा चलाए गए जन जागरण अभियान के कारण इस बार करीब 5 लाख मराठी माणुस ये फार्म भरेंगे। राडा के बदले मार्गदर्शन : उन्होंने बताया कि रेलवे भर्ती के विज्ञापन मराठी अखबारों में नहीं आते इसलिए मराठी लोगों को इस बात का पता नहीं चलता था। मगर इस बार मनसे ने समय रहते राज्य के कोने - कोने में लोगों को यह सूचना दी और फॉर्म भरने भी मदद की। यह काम आंदोलन से हटकर था और बताया जा रहा है कि आगामी मनपा चुनाव में मनसे को इस मुहिम का भारी लाभ मिलेगा। दो साल पहले मनसे से अन्य राज्यों विशेष रूप से बिहार और उत्तर प्रदेश से आने वाले उम्मीदवारों की पिटाई की थी , लेकिन इस बार मार्गदर्शन का काम करके जनता का दिल जीतने की कोशिश की है। राज्यव्यापी मुहिम : इसके लिए राज्य भर में मनसे ने मराठी युवा वर्ग को रेलवे भर्ती के फॉर्म वितरित किए गए। साथ ही उन्हें आवश्यक सारी जानकारी उपलब्ध करवाई। होर्डिंग लगाकर और सूचना बुक्स के माध्यम से मराठी युवा वर्ग का मार्गदर्शन किया। रेलवे की नौकरियों में मराठी माणुस की उपेक्षा हो रही है इस मुद्दे को राज ठाकरे में शिवसेना में रहते समय ही उठाया था। अलग पार्टी बनाने के बाद भी वे इस बात को भूले नहीं। इसके लिए पिछली बार कल्याण में मारपीट और हंगामा किया गया। इस पर जमकर पार्टी और राज की आलोचना हुई। इसलिए कानून के दायरे में रहकर मराठी लोगों का हित साधने का उपाय सोचा गया और उसे राज्य स्तर पर मुहिम चलाकर साधा गया।