Thursday, April 30, 2015

सीएसटी मुंबई-पटना के बीच 16 सुपरफास्ट प्रीमियम विशेष गाड़ियां चलाने का फैसला

सेंट्रल रेलवे ने ग्रीष्मकालीन अवकाश में यात्रियों की बढ़ी हुई भीड़ को देखते हुए सीएसटी मुंबई-पटना के बीच 16 सुपरफास्ट प्रीमियम विशेष गाड़ियां चलाने का फैसला किया है।
गाड़ी संख्या 02053 प्रति मंगलवार दिनांक 5.5.2015 से 23.6.2015 तक सीएसटी से 00:55 बजे प्रस्थान कर दूसरे दिन 08:00 बजे पटना पहुंचेगी।
गाड़ी संख्या 02054 प्रति बुधवार दिनांक 6.5.2015 से 24.6.2015 तक पटना से 12:50 बजे प्रस्थान कर अगले दिन 16:05 बजे सीएसटी पहुंचेगी।
ठहराव: कल्याण, इगतपुरी, भुसावल, जबलपुर, छिउकी और मुगलसराय। इस ट्रेन के लिए 1 मई से इंटरनेट पर बुकिंग होगी। शेष दिन प्रस्थान करने वाली गाड़ी संख्या 02053 के लिए आरक्षण 10 दिन अडवांस रिजर्वेशन अवधि में (प्रस्थान करने वाले दिन को छोडकर) शुरू होगा।
गोरखपुर के लिए जनसाधारण ट्रेन
छत्रपति शिवाजी टर्मिनस मुंबई-गोरखपुर के बीच 18 जनसाधारण विशेष गाड़ियां चलाई जाएंगी। जनसाधारण गाड़ी में सभी डिब्बे सामान्य द्वितीय श्रेणी के रहते हैं।
गाड़ी क्र.02598 दिनांक 3.5.2015 से 28.6.2015 तक प्रति रविवार छत्रपति शिवाजी टर्मिनस मुंबई से 14:20 बजे प्रस्थान कर अगले दिन 18:45 बजे गोरखपुर पहुंचेगी।
गाड़ी क्र.02597 दिनांक 2.5.2015 से 27.6.2015 तक प्रति शनिवार गोरखपुर से 08:25 बजे प्रस्थान कर अगले दिन 12:15 बजे छत्रपति शिवाजी टर्मिनस मुंबई पहुंचेगी।

ठहराव : कल्याण, भुसावल, इटारसी, भोपाल, झांसी, कानपुर, लखनऊ, गोंडा, बस्ती, खलीलाबाद। इस ट्रेन में 17 सामान्य द्वितीय श्रेणी के कोच लगे होंगे।

Tuesday, April 28, 2015

नवंबर माह की 23 तारीख से देशव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल

केंद्र सरकार के विभिन्न निर्णयों के खिलाफ नैशनल फेडरेशन आफ इंडियन रेलवेमेन ने आगामी नवंबर माह की 23 तारीख से देशव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का फैसला किया है। सोमवार की शाम दिल्ली में नैशनल जॉइंट काउंसिल ऑफ ऐक्शन की संपन्न हुई एक मीटिंग में यह निर्णय लिया गया। नैशनल फेडरेशन आफ इंडियन रेलवेमेन के जनरल सेक्रेटरी एम़ राघवैया की अध्यक्षता में दिल्ली में हुई मीटिंग में सेंट्रल, वेस्टर्न रेलवे सहित तमाम यूनियन के पदाधिकारी उपस्थित थे। मीटिंग में उपस्थित सेंट्रल रेलवे के अध्यक्ष आर.पी.भटनागर तथा जनरल सेक्रेटरी प्रवीण वाजपेयी के मुताबिक देशव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल में रेलवे के अलावा केंद्र सरकार के सभी विभागों के कर्मचारी भी शामिल होंगे।

यूनियन की तरफ से केंद्र सरकार द्वारा रेलवे में सौ फीसदी विदेशी निवेश ,कामों को बाहर ठेके पर दिए जाने तथा निजीकरण के अलावा नई पेंशन स्कीम को रद्द किए जाने तथा डीए को बेसिक के साथ मिलाए जाने सहित कुल 11 निर्णयों का जोरदार विरोध किया गया है। सोमवार की मीटिंग में हुए फैसले में सरकार द्वारा सौ फीसदी विदेशी निवेश, कामों को बाहर ठेके पर दिए जाने तथा निजीकरण के फैसले को वापस लिए जाने तथा नई पेंशन स्कीम को रद्द करने तथा डीए को बेसिक के साथ मिलाए जाने के फैसले को रद्द करने तक हड़ताल को जारी रखने का फैसला किया गया है। हड़ताल 23 नवंबर की सुबह 6 बजे शुरू होगी।

नेपाल वासी वापिस अपने देश लौट सकें, इसके लिए विशेष ट्रेनें चलाने की तैयारी

मुंबई में बसे नेपाल वासी वापिस अपने देश लौट सकें, इसके लिए विशेष ट्रेनें चलाने की तैयारी है। रेल मंत्री सुरेश प्रभू ने ऐक्जिक्यूटिव डायरेक्टर (पैसेंजर मार्केटिंग) बी. प्रशांत कुमार को इस आशय के आदेश दिए हैं। मुंबई बीजेपी के महासचिव अमरजीत मिश्र ने इस संबंध में पहल की है।
मुंबई में बसे हजारों नेपाल के प्रवासी लोगों में से कई ने अपने खो दिए हैं। कुछ को परिजन के इलाज के लिए वापिस जाना है। टूटे घरों को संभालने के लिए और वहां बसे लोगों को ढाढ़स देने के लिए नेपाल जाना चाहते हैं। छुट्टियों की भारी भीड़ की वजह से यह मुमकिन नहीं हो पा रहा है। मुंबई बीजेपी ने इस मसले को हाथ में लेते हुए इस बारे में सीधे रेल मंत्री से संपर्क किया। मिश्र ने एनबीटी को बताया कि रेल मंत्री ने 'सकारात्मक' रवैया अपनाते हुए तत्काल उपाय के आदेश दिए हैं।
रेल मंत्री ने अपने आईएएस सचिव डॉ संजीव कुमारन को खुद इस मुद्दे पर नजर रखने का निर्देश दिया है। रेल बोर्ड से बातचीत के दौरान यह तय हुआ है कि नेपाल वासियों को गोरखपुर तक की ट्रेनों में प्राथमिकता दी जाएगी। इस दिशा की ट्रेनों में उनके लिए विशेष डिब्बे लगाए जाएंगे। जरूरत पड़ने पर विशेष गाड़ी भी चलाने का निर्णय किया गया है। मुंबई बीजेपी ने इस तत्काल कार्रवाई के लिए रेल मंत्री का अभिनंदन किया है।

इधर, सोमवार को नेपाल के लिए निकली डॉक्टरों की चार टीमे मुंबई से दिल्ली के लिए रवाना हो गईं। स्वास्थ्य सचिव सुजाता सौनिक ने बताया कि पुणे में डॉक्टरों की दो और टीमों को इस काम के लिए तैयार रहने को कहा गया है। शाम तक की जानकारी के अनुसार, महाराष्ट्र से नेपाल गए 1200 पर्यटकों से संपर्क किया जा चुका है। इनमें शाम तक 194 लोग नेपाल से दिल्ली पहुंच चुके थे।

Monday, April 27, 2015

दिल्ली से लखनउ के बीच आज से डबल डेकर एसी चेयरकार ट्रेन की सर्विस शुरू

दिल्ली से लखनउ के बीच आज से डबल डेकर एसी चेयरकार ट्रेन की सर्विस शुरू हो गई है। गृहमंत्री राजनाथ सिंह और रेल मंत्री सुरेश प्रभू ने हरी झंडी दिखाकर आनंद विहार रेलवे स्टेशन से ट्रेन को लखनऊ के लिए रवाना किया। यह ट्रेन सप्ताह में दो दिन शुक्रवार और रविवार को चलेगी। लखनऊ से यह ट्रेन सुबह 5 बजे रवाना होगी। दिल्ली से यह ट्रेन दोपहर 2 बजकर 5 मिनट पर चलेगी। ट्रेन आठ घंटे में सफर पूरा करेगी।
रास्ते में गाजियाबाद, मुरादाबाद और बरेली स्टेशन पर स्टॉप होंगे। इस ट्रेन में 1440 यात्री सफर कर सकते हैं। एक कोच में 120 पैसेंजर बैठ सकते हैं। प्रत्येक कोच के लोअर डेक में 70 और अपर डेक में 50 यात्री बैठ सकते हैं। चीफ पीआरओ नीरज शर्मा के मुताबिक इसका किराया शताब्दी से कम है। शताब्दी में दिल्ली से लखनऊ के लिए 875 रुपये लगते है, जबकि इसमें 640 रुपये लगेंगे।
डबल डेकर के रूप में देश में यह 9वीं और दिल्ली से चलने वाली यह दूसरी ट्रेन है। अभी सराय रोहिल्ला से जयपुर रूट पर एक डबल डेकर ट्रेन दौड़ रही है। रेल मंत्री सुरेश प्रभू ने कहा कि जीपीएस से इस ट्रेन की स्पीड और लोकेशन का पता लगाया जा सकता है। उद्घाटन के मौके पर राज्य रेल मंत्री मनोज सिन्हा, ईस्ट दिल्ली के सांसद महेश गिरी, विश्वास नगर से बीजेपी विधायक ओमप्रकाश शर्मा, नॉर्दर्न रेलवे के जीएम एके पूठिया, दिल्ली डिवीजन के डीआरएम अरूण अरोड़ा और आरपीएफ के डीजी राजीव रंजन सहित कई अन्य सीनियर अधिकारी उपस्थित थे।

Friday, April 24, 2015

अनारक्षित टिकट भी मोबाइल फोन पर

रेल यात्री अब अनारक्षित कैटिगरी के लिए एक मोबाइल फोन ऐप से टिकट हासिल कर सकेंगे। भारतीय रेलवे ने पेपरलेस टिकटिंग की दिशा में नया कदम उठाते हुए एक ऐप लॉन्च किया है जिसके जरिये अनारक्षित टिकट भी मोबाइल फोन पर पाए जा सकेंगे।

रेल मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'हम आज नया मोबाइल आधारित पेपरलेस अनारक्षित टिकटिंग ऐप्लिकेशन लॉन्च कर रहे हैं।'
इस ऐप पर टिकट बुक करने के बाद यात्रियों को उसका प्रिंट आउट नहीं लेना होगा और वे अपने सेलफोन पर ही उसकी सॉफ्ट कॉपी ट्रेन में मौजूद टिकट चेकर को दिखा सकेंगे। 
यह न सिर्फ पर्यावरण के लिए अच्छा होगा, बल्कि टिकट खिड़की पर लाइन लगाकर खड़े रहने की असुविधा से भी यात्री बच सकेंगे।
योजना के मुताबिक, इस ऐप को ऐंड्रॉयड स्मार्टफोन्स के लिए गूगल ऐप स्टोर से डाउनलोड किया जा सकता है। डाउनलोड किये जाने के बाद, यूजर को रेलवे ई-वॉलट क्रिएट करने के लिए एक रजिस्ट्रेशन आईडी नंबर मिलेगा।
टिकट खरीदने के लिए पैसे ई-वॉलट मोबाइल पेमेंट सिस्टम के जरिये ऑनलाइन या किसी स्टेशन के टिकट काउंटर से लोड करने होंगे।
डेबिट या क्रेडिट कार्ड रखने वाले यात्रियों के पास आईआरसीटीसी वेबसाइट से ई-वॉलट टॉप अप करवाने का विकल्प भी रहेगा।
टिकट्स बुक करने के अलावा, इस ऐप के जरिये सीजन टिकट्स को भी रीन्यू करवाया जा सकेगा। अधिकारी का कहना है कि इससे अनारक्षित टिकट पर सफर करने वाले मुसाफिरो को काफी सुविधा होगी।
ऐप आधारित टिकटिंग सिस्टम को मुंबई और चेन्नै के उपनगरीय सेक्टर में पायलट बेसिस पर टेस्ट किया जा रहा है। यह ऐप ऐंड्रॉयड स्मार्टफोन के लिए ही उपलब्ध होगी। ब्लैकबेरी के लिए ऐप को बाद में उतारा जाएगा।

Thursday, April 16, 2015

मोनोरेल मास पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम है ही नहीं

मुंबई में मोनोरेल प्रॉजेक्ट्स को 2014 में बड़े तामझाम के साथ शुरू किया गया था। इस पर 1,208 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन अब राज्य सरकार इससे अपने हाथ खींच रही है। अब राज्य में किसी भी मोनोरेल प्रॉजेक्ट पर काम नहीं होगा।
मुंबई में लगभग 10 साल पहले मोनोरेल बनाए जाने का पहला एनाउंसमेंट किया गया था। इसको मेट्रो के साथ चेंबूर से जैकब सर्किल तक बनाया जाना था। कहा जा रहा था कि इससे शहर में ट्रैवलिंग का तरीका बदल जाएगा। कुल मिलाकर लोग इसको गेमचेंजर मान रहे थे। इसको लेकर उत्साह इतना ज्यादा था कि सरकार और मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन डिवेलपमेंट अथॉरिटी (MMRDA) ने तो ठाणे और कल्याण को जोड़ने वाले एक और प्रॉजेक्ट का भी एलान कर दिया था। साथ ही वह ऐसे रूट पर कई और प्रॉजेक्ट्स का प्लान बनाने लगे थे। लेकिन अब लगता है कि गेम पूरी तरह से खराब हो गया है। MMRDA के एक टॉप ऑफिसर ने इकनॉमिक टाइम्स को बताया कि मोनोरेल के फ्यूचर प्लान बंद कर दिए गए हैं। उन्होंने कहा, 'ठाणे से कल्याण और भिवंडी के बीच एक मोनोरेल प्रपोजल था। इसके अलावा ठाणे से वडाला के लिए भी एक लाइन बनाने का प्लान था। अब ये सभी प्लान खत्म कर दिए गए हैं। अब कोई नया मोनोरेल प्रॉजेक्ट नहीं होगा।'
मोनोरेल का पहला फेज (वडाला से चेंबूर) नवंबर 2010 और दूसरा फेज (वडाला से जैकब सर्किल) मई 2011 में पूरा होना था। पहला फेज 38 महीने की देरी से दिसंबर 2013 में पूरा हुआ जबकि फेज 2 का कंपलीशन को 52 महीने आगे सितंबर 2015 तक कर दिया गया है। सरकार ने अब अपने हाथ पीछे खींच लिए हैं। महाराष्ट्र के बहुत से टॉप ब्यूरोक्रेट्स कह रहे हैं कि मोनोरेल सिस्टम मुंबई के लिए नहीं है। वे यह भी कह रहे हैं कि मोनोरेल मास पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम है ही नहीं।
एक सरकारी ऑफिसर ने पहचान जाहिर नहीं किए जाने की शर्त पर कहा, 'मोनोरेल मास पब्लिक ट्रांसपोर्ट लायक एकदम नहीं है। मास ट्रांसपोर्ट सिस्टम के तौर पर इसका यूज दुनिया में कहीं नहीं हो रहा है। मुंबई मोनोरेल तो फेल होना ही था। यह प्रॉजेक्ट पैसेंजर्स नहीं बिल्डर्स के हितों को ध्यान में रखकर बनाया गया था।'
ब्यूरोक्रेट ने बिल्डर्स के हितों का खुलासा करते हुए कहा कि मोनोरेल के सभी रूट वडाला के डिवेलपर्स को फायदा दिलाने के वास्ते बनाए गए थे। कम से कम तीन स्टेशन - VNP, RC मार्ग और फर्टिलाइजर टाउनशिप बियाबान हैं। मोनोरेल का मकसद सड़कों पर भीड़ कम करना और ज्यादा से ज्यादा लोगों को ट्रेन से सफर करने को बढ़ावा देना था। लेकिन स्टेशन ऐसी जगह बनाए गए हैं जहां बहुत कम लोग रहते हैं। इससे इसका मकसद पूरा नहीं हो पाया।

Wednesday, April 15, 2015

रियायती टिकटों के दुरुपयोग

रियायती टिकटों के दुरुपयोग के मामले सामने आने के बाद अब रेलवे ने राजस्व के नुकसान को रोकने के इरादे से मरीजों को पहचान पत्र जारी करने सहित अनेक उपाय करने का निर्णय किया है।
रेल मंत्रालय के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि मरीजों को मिलने वाली रियायती सुविधाओं के दुरुपयोग के कई मामले सामने आए हैं, यह न सिर्फ रेलवे के राजस्व को नुकसान पहुंचा रहे हैं बल्कि वास्तविक यात्री इस तरह के टिकटों के लाभ से वंचित हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि मरीजों को मिलने वाली छूट को फर्जी तरीके से डॉक्टर का सर्टिफिकेट दिखाकर हड़पा जा रहा है। अब रेलवे विशिष्ट पहचान पत्र जारी करने से पहले डॉक्टर का नाम, उसका रजिस्ट्रेशन नंबर और अन्य जरूरी जानकारियों की पड़ताल करेगा।

इसके लिए जांच पड़ताल की व्यवस्था को मजबूत बनाया गया है, ताकि रियायती सुविधाओं के दुरुपयोग को रोका जा सके और सिर्फ जरूरतमंद व्यक्तियों को लाभ मिले। पहचान पत्र में एक नंबर होगा जिसका इस्तेमाल ई-टिकटों की बुकिंग के लिए भी किया जा सकेगा।
मरीजों को विभिन्न किस्म की रियायत उल्लेखनीय है कि रेलवे कुछ खास किस्म की बीमारी के मरीजों को रेल यात्रा में विभिन्न किस्म की रियायत देता है। जैसे कैंसर के मरीजों को अकेले या एक सहयोगी के साथ निश्चित समय पर चेकअप कराने के लिए स्लीपर और एसी-3 में यात्रा करने में 100 पर्सेंट, एसी चेयर कार में 75 पर्सेंट और एसी फर्स्ट एवं एसी टू में 50 पर्सेंट रियायत मिलती है। इसके अलावा थैलीसिमिया, टीबी, कुष्ठ रोगियों के मरीजों, हार्ट सर्जरी और ऑर्गन ट्रांसप्लांटेशन के ऑपरेशन के लिए यात्रा करने वालों को भी ट्रेन यात्रा में अलग-अलग रियायत मिलती है।

Monday, April 13, 2015

अफसरों की लापरवाही- एसी क्लास की 900 में 894 बर्थ खाली

मुंबई के लिए एक-एक बर्थ की मारामारी के बावजूद दिल्ली स्थित उत्तर रेलवे मुख्यालय के वाणिज्य विभाग के अफसरों की लापरवाही से रविवार को लोकमान्य तिलक एसी स्पेशल (02112) खाली चली गई। ट्रेन में एसी क्लास की 900 में 894 बर्थ खाली रह जाने से जहां रेलवे को करीब 16 लाख रुपये का नुकसान हुआ, वहीं मुंबई की अन्य ट्रेनों में लंबी वेटिंग होने के कारण तमाम यात्री खड़े-खड़े गए और कई लोगों को यात्रा तक स्थगित करनी पड़ गई। अफसरों की लापरवाही का यह आलम रहा कि लखनऊ-एलटीटी ऐसी स्पेशल का रविवार दोपहर 01:10 बजे रिजर्वेशन खोला गया जबकि इसके छूटने का समय शाम 04:20 बजे था।
अगर किसी पैसेंजर को मुंबई जाना है तो उसे 120 दिन पहले ही कन्फर्म टिकट मिल पा रहा है। इसके अलावा कन्फर्म टिकट लेना है तो तत्काल टिकट लेने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। वह भी रात से ही कतार में लगने वालों को ही बड़ी मुश्किल से नसीब हो पाता है। यह बात सभी रेल अफसरों को अच्छी तरह पता है। उत्तर रेलवे मुख्यालय के वाणिज्य विभाग के अफसरों ने शनिवार को मुंबई से यह ट्रेन (02111) चलने के बावजूद लखनऊ से इस ट्रेन का आरक्षण नहीं खोला। दिल्ली के सीसीएम (पीएम) के यहां लखनऊ मंडल के अफसर ट्रेन का रिजर्वेशन खुलवाने के लिए हाथ-पैर मारते रहे, लेकिन दिल्ली के अफसर हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे। अफसरों ने रविवार दोपहर 01:10 बजे जब इसका आरक्षण खोला तो चार्ट बनने का समय हो चुका था। कुछ देर ही बुकिंग हुई उसके बाद ट्रेन का चार्ट बना दिया गया। हालांकि ट्रेन के मुंबई से आने की जानकारी पाकर सीनियर डीसीएम अश्विनी श्रीवास्तव ने दोपहर सवा बजे से ही चारबाग स्टेशन और लखनऊ जंक्शन पर ट्रेन में सीटें खाली होने का अनाउंसमेंट शुरू करा दिया। रविवार की वजह से रिजर्वेशन सेंटर पर दो बजे ही रिजर्वेशन बंद हो गया, जिससे रिजर्वेशन नहीं हो सका। मुंबई स्पेशल की 894 बर्थ खाली रह जाने से रेलवे को 15,67,880 रुपये का नुकसान भी हुआ। ट्रेन का चार्ट बनने के बाद फर्स्ट एसी में 24 बर्थ खाली थीं। लखनऊ से मुंबई का फर्स्ट एसी का किराया 3895 रुपये है। इस तरह 93,480 रुपये का नुकसान हुआ। वहीं, सेकंड एसी की 155 सीटें खाली थीं। एक यात्री का किराया 2270 रुपये है, जिसके हिसाब से 3,51,850 रुपये का नुकसान हुआ। थर्ड एसी की 715 सीटें खाली होने से प्रति बर्थ 1570 रुपये के हिसाब से 11,22,550 रुपये का नुकसान हुआ।
जब किसी स्पेशल या नई ट्रेन के चलाने की घोषणा होती है तो इसकी जानकारी चीफ कमर्शल मैनेजर (सीसीएम पीएम) के यहां भेजी जाती है। उसके बाद उनके कार्यालय से क्रिस (सेंटर फॉर रेलवे इंफर्मेशन सिस्टम) के जरिए ट्रेन का रिजर्वेशन खोलने की फीडिंग कराई जाती है। इसके बाद ऑनलाइन और ऑफलाइन रिजर्वेशन होने लगता है। इस मामले में जिम्मेदार अफसरों ने पीआरएस सिस्टम में गाड़ी की फीडिंग ही नहीं कराई।

''मुंबई की ट्रेन में सैकड़ों सीटें खाली रह जाएं, यह घोर लापरवाही है। जीएम से मांग की गई है कि मामले की जांच कराकर दोषी अफसरों के वेतन से रेलवे को हुए नुकसान की भरपाई की जाए।''

एक ही रात में चार ट्रेनों में पांच वारदात

एक ही रात में चार ट्रेनों में हुईं पांच वारदातों के मामले में जीआरपी ने पकड़े गए तीन शातिर चोरों को जेल भेज दिया है। हालांकि गहन पूछताछ के दौरान पता चला कि वह इन घटनाओं में शामिल नहीं थे। वहीं, वारदातों में शामिल चोर फिलहाल लखनऊ से फरार हैं। उस रात बड़ा हाथ मारने के चक्कर में ही वह ताबड़तोड़ वारदातें कर गए थे।
जीआरपी के एसपी आनंद कुलकर्णी ने रविवार को भी चारबाग स्टेशन पहुंचकर सीओ आरडी यादव व इंस्पेक्टर डीके उपाध्याय से घटना को वर्कआउट करने के लिए हो रही छापेमारी की जानकारी ली। इंस्पेक्टर ने उन्हें बताया कि अभी तक कई लोगों को पकड़ा जा चुका है, जिनमें कुछ को निर्दोष होने के कारण रिहा कर दिया गया है, जबकि पकड़े गए तीनों शातिर चोरों को जेल भेज दिया गया है। पुलिस इस समय चार अन्य संदिग्धों से पूछताछ कर रही है। जबकि पद्मावत में महिला का मोबाइल चुरा कर भागने वाला बर्खास्त वर्दीधारी अभी फरार चल रहा है। पुलिस उसकी तलाश में कई जगहों पर छापेमारी कर चुकी है। छानबीन में यह भी पता चला है कि बदमाश उस रात बड़ा हाथ मारने के कारण ही कई ट्रेनों में छिनैती की वारदातें करते गए। दूसरी ओर जीआरपी के मौके पर न पहुंचने से उनके मंसूबे बढ़ गए।
तीन ट्रेनों में हुईं चार चोरियां

गोरखपुर इंटरसिटी के डी-4 कोच में सफर कर रहे अजय कुमार अग्रवाल का गोंडा स्टेशन पर टैबलेट चोरी हो गया, जबकि जनता एक्सप्रेस से आ रही अर्चना वर्मा के बैग से हरिद्वार से ट्रेन चलते ही पांच हजर रुपये व शैक्षिक प्रमाण-पत्र चोरी हो गए। वहीं, कुम्भ एक्सप्रेस में कोलकाता से सेकेंड एसी कोच में बैठीं डियाना बाला का कीमती मोबाइल और जयनंदन खाडसे का लैपटॉप चोरी हो गया। चारों पैसेंजर्स से इस मामले में चारबाग जीआरपी थाने पर तहरीर देकर रिपोर्ट दर्ज कराई है।

Friday, April 10, 2015

कल्याण रेलवे स्टेशन के प्लैटफॉर्म नंबर 3 पर जाने वाले पुल के छज्जा गिर गया

मध्य रेलवे के महत्वपूर्ण कल्याण रेलवे स्टेशन के प्लैटफॉर्म नंबर 3 पर जाने वाले पुल के छज्जे का कुछ भाग गुरुवार को गिर गया। राहत की बात रही कि इस हादसे में कोई जख्मी नहीं हुआ। इसके बाद से इस पुल को एक ओर से यात्रियों के लिए बंद कर दिया गया है।

कल्याण जंक्शन बहुत भीड़-भाड़ वाला स्टेशन है। यहां से लोकल और एक्सप्रेस ट्रेनों से लगभग ढाई लाख लोग यात्रा करते हैं। दोपहर 1.30 बजे के करीब कल्याण स्टेशन पर पादचारी पुल का एक हिस्सा ढह गया। रेलवे के अनुसार, इस पुल के मरम्मत की प्रक्रिया शुरु हो गई है, 4-5 दिनों उस पादचारी पुल को यात्रियों के लिए खोल दिया जाएगा। हादसे का कारण के बारे में पूछे जाने पर एक अधिकारी ने बताया कि तकरीबन साढ़े तीन दशक पहले पादचारी पुल के संबंधित हिस्से में अतिरिक्त स्लैब डालकर चौड़ा किया गया था, प्रथम दृष्टया ऐसा लग रहा है कि स्लैब के उस अतिरिक्त हिस्से का सपोर्ट कमजोर हो जाने की वजह से यह हादसा हुआ।

रेल फैक्चर हो जाने के कारण सुबह के वक्त लोकल सेवाएं प्रभावित

 गुरुवार को सेंट्रल रेलवे पर कुर्ला-शीव के बीच रेल फैक्चर हो जाने के कारण सुबह के वक्त लोकल सेवाएं प्रभावित हुईं। प्राप्त जानकारी के अनुसार कुर्ला-शीव के बीच अप फास्ट लाइन की रेल की पट्टी (गर्डर के किनारे वाला भाग) टूट गई थी, जिसकी वजह से जहां 45 लोकल गाड़ियां देरी से चलीं। इस घटना के कारण वहीं 5 सेवाएं रद करनी पड़ीं।
सेंट्रल रेलवे के अनुसार सुबह 5 बजे के करीब पॉइंट फेल हो जाने की सूचना मिली, उसके बाद संबंधित अधिकारी और कर्मचारी मौके पर पहुंच गए। निरीक्षण के दौरान रेल (गर्डर) की पट्टी टूटी पाई गई, जिसे सुबह 7.20 बजे तक ठीक कर यातायात व्यवस्था पूर्ववत कर दी गई। इस दौरान अप फास्ट लाइन की गाड़ियों को विक्रोली-माटुंगा के बीच अप स्लो लाइन से चलाया गया। सेवाओं को डायवर्ट के कारण स्लो ट्रैक पर भी बंचिग जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई।

तिब्बत और नेपाल के बीच 540 किलोमीटर लंबा रेल लिंक बनाने की योजना

चीन की योजना तिब्बत और नेपाल के बीच 540 किलोमीटर लंबा रेल लिंक बनाने की है, जो माउंट एवरेस्ट के नीचे एक सुरंग से होकर गुजरेगा। भारत के पड़ोस में प्रभाव बढ़ाने की कोशिश वाले चीन के इस कदम से भारत को चिंता हो सकती है।
चीन के सरकारी अखबार चाइना डेली में कहा गया कि छिंगहाय-तिब्बत रेलवे के तिब्बत के रास्ते किए जाने वाले इस प्रस्तावित विस्तार से द्विपक्षीय व्यापार (खासतौर पर कृषि उत्पादों का) और टूरिजम को बढ़ावा मिलेगा, क्योंकि दोनों देशों को जोड़ने वाला कोई रेल मार्ग नहीं है। इस रेल लिंक के 2020 तक पूरा होने के आसार हैं। बहरहाल, इस प्रोजेक्ट की लागत पर कुछ नहीं कहा गया। आपको बता दें 1,956 किलोमीटर लंबी छिंगहाय-तिब्बत रेलवे फिलहाल चीन के शेष हिस्सों को तिब्बत की राजधानी ल्हासा और इससे परे के इलाकों से जोड़ती है। चाइनीज अकैडमी ऑफ इंजीनियरिंग के रेल एक्सपर्ट वांग मेंगशू ने कहा कि प्रोजेक्ट शुरू होने के बाद इंजीनियरों को कई कठिनाइयों का सामना करना होगा। अखबार के मुताबिक, इस योजना के तहत माउंट एवरेस्ट के नीचे सुरंग बनाई जा सकती है। इस लाइन पर ऊंचाई में आने वाले बदलाव उल्लेखनीय हैं। इस रेल लाइन को संभवत: कोमोलांग्मा से होकर गुजरना पड़ेगा, इसलिए कर्मचारियों को कई बहुत लंबी सुरंगें भी खोदनी पड़ सकती हैं। कोमोलांग्मा पर्वत दरअसल माउंट एवरेस्ट का तिब्बती नाम है। हिमालय के दुर्गम पहाड़ों और यहां ऊंचाइयों में आने वाले अहम बदलावों के कारण इस लाइन पर ट्रेनों की अधिकतम गति संभवत: 120 किलोमीटर प्रति घंटा होगी। इस परियोजना पर काम नेपाल के अनुरोध पर किया जा रहा है और चीन ने तैयारी शुरू कर दी है।
तिब्बत स्वायत्तशासी क्षेत्र के अध्यक्ष लोसांग जामकन ने पिछले महीने तिब्बत की राजधानी ल्हासा की यात्रा पर आए नेपाली राष्ट्रपति रामबरन यादव को बताया था कि चीन की योजना तिब्बत रेलवे को केरमंग तक विस्तार देने की है। केरमंग शहर नेपाल की सीमा के पास स्थित है और यहां सीमा व्यापार पत्तन बनाया गया है।
चीन अपने तिब्बती रेल नेटवर्क का विस्तार भूटान और भारत तक करने की घोषणा पहले ही कर चुका है। अपनी हालिया नेपाल यात्रा के दौरान चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने अधिकारियों से कहा था कि वे काठमांडू और इससे आगे रेल नेटवर्क के विस्तार की व्यवहारिकता की स्टडी करें। चाइना इंस्टिट्यूट ऑफ कंटेंपररी इंटरनैशनल रिलेशन्स के डायरेक्टर हू शिशेंग ने बताया कि रेल लाइन का लक्ष्य स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं और लोगों की आजीविकाओं में सुधार लाना भर है। चीन नेपाल के साथ संबंध बढ़ा रहा है, ताकि नेपाल के रास्ते धर्मशाला जाकर दलाई लामा से मिलने वाले तिब्बतियों के प्रवाह को रोका जा सके। यह भारत के लिए चिंता का सबब हो सकता है। चीन ने हाल में नेपाल को दी जाने वाली 2.4 करोड डॉलर की सालाना मदद बढ़ाकर 12.8 करोड डॉलर कर दी थी।
चीन ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश पर भारत के साथ विवाद अकाट्य तथ्य है। हालांकि चीन ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विचारों से सहमति जताई कि दोनों देशों को सीमा मुद्दे का परस्पर स्वीकार्य हल निकालने के लिए साथ मिलकर अनुकूल वातावरण तैयार करना चाहिए। अरुणाचल प्रदेश में सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम (AFSPA) की अवधि बढ़ाने के बारे में पूछे सवालों का जवाब में चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता ने यह बात कही। उसके मुताबिक, सीमा मुद्दे पर चीन का रुख हमेशा स्पष्ट रहा है। दोनों पक्षों को सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए साझा प्रयास करना चाहिए और इस मुद्दे पर बातचीत के लिए अनुकूल परिस्थितियां तैयार करनी चाहिए।
अरुणाचल प्रदेश की 1,126 किलोमीटर लंबी सीमा चीन के साथ और 520 किलोमीटर लंबी सीमा म्यांमार के साथ मिलती है। चीन अरुणाचल प्रदेश को दक्षिण तिब्बत का हिस्सा बताकर उस पर दावा करता रहा है। अब चीन ने जिस तरह सीमा मुद्दे को 'बड़ा विवाद' और 'अकाट्य तथ्य' बताया है, उससे ऐसा मालूम होता है कि वह मोदी की अगले महीने पेइचिंग यात्रा से पहले अरुणाचल पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहता है। चीन के विदेश मंत्रालय से यह टिप्पणी ऐसे वक्त हुई है, जब शुक्रवार को दोनों देशों के टॉप डिफेंस अफसरों के बीच बातचीत होने जा रही है।

विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता ने यह भी कहा कि हमने प्रधानमंत्री मोदी की टिप्पणी पर गौर किया है। सीमा मुद्दे पर चीन ने हमेशा सकारात्मक रवैया अपनाया है। पिछले साल सितंबर में भारत यात्रा के दौरान, चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि चीन मित्रवत बातचीत और सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखते हुए भारत के साथ मिलकर सीमा मुद्दे को सुलझाने के प्रति आश्वस्त है। विचारों के आदान-प्रदान हेतु 18 दौर की विशेष प्रतिनिधि वार्ता का उल्लेख करते हुए चीनी प्रवक्ता ने कहा कि सीमा मुद्दे को सुलझाना भारत और चीन की समान अकांक्षा की समान जिम्मेदारी है। हमने इस दिशा में काफी प्रयास किए हैं। दोनों पक्षों को स्वीकार्य विस्तृत और तर्कपूर्ण हल पर पहुंचने के लिए वार्ता प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की खातिर हम भारत के साथ मिलकर काम करने के इच्छुक हैं।

Thursday, April 9, 2015

गाड़ी पहुंचने से आधे घंटे पहले ही यात्री के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एलर्ट

रेलयात्रियों की सुविधा और रेलवे यात्रा को ज्यादा-से-ज्यादा आरामदेह बनाने के इरादे से भारतीय रेल ने ट्रेन के स्टेशन आने संबंधी जानकारी देने के लिए नई फोन कॉल सेवा शुरु की है।
रेल यात्रियों को अब अपने गंतव्य स्टेशन के छूट जाने की चिंता में जागते रहने के झंझट से छुटकारा मिल जाएगा।
नई योजना के मुताबिक, गंतव्य आने की जानकारी स्टेशन पर गाड़ी पहुंचने से आधे घंटे पहले ही यात्री के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एलर्ट फोन कॉल द्वारा भेज दी जाएगी।
यह सेवा आई.आर.सी.टी.सी. और भारत बी.पी.ओ. के बीच संयुक्त पहल का हिस्सा है। इस सेवा के इस्तेमाल के लिए यात्री को रेलवे सहायता नंबर 139 पर फोन मिलाना होगा।
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इस सेवा का लाभ उठाने के लिए यात्री को 139 पर फोन मिला कर अपना पी.एन.आर. नंबर, स्टेशन का नाम, स्टेशन का एस.टी.डी. कोड जैसी बुनियादी जानकारी देनी होगी। इसके बाद ही उन्हें वेक-अप फोन कॉल के माध्यम से रेलवे द्वारा उक्त जानकारी मुहैया कराई जाएगी," एक वरिष्ठ रेलवे मंत्रालय के अधिकारी ने मीडिया से बातचीत में यह बताया।
यात्री द्वारा उक्त जानकारियां देने के बाद, सिस्टम उस ट्रेन की तत्कालीन स्थिति का पता लगाकर वेक-अप फोन कॉल के माध्यम से यात्री को सही जानकारी मुहैया कराएगा।
139
सेवा, जो कि एक प्रमुख रेलवे इनक्वायरी नंबर है, में पिछले कुछ समय के दौरान काफी बदलाव किए गए हैं। इस सेवा को अधिक-से-अधिक विश्वसनीय बनाने की कोशिश की जा रही है। इस सेवा के माध्यम से न केवल ट्रेन के आगमन और प्रस्थान संबंधी जानकारी हासिल की जा सकती है, बल्कि ट्रेन की तत्कालीन स्थिति और किराया भाड़ा जैसी जानकारियां भी आसानी से मिल जाती हैं।
इन सेवाओं के साथ-ही-साथ, 139 नंबर के माध्यम से तत्काल सेवा के अंतर्गत रेलवे सीट की उपलब्धता, सीट कैंसल करना, रिफंड संबंधी नियम और ट्रेन की प्लेटफॉर्म स्थिति के विषय में भी जाना जा सकता है।

Tuesday, April 7, 2015

रेलवे स्टेशन की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल

फरीदाबाद रेलवे स्टेशन की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। सोमवार को प्लैटफॉर्म नंबर-4 पर एक युवक का शव बरामद किया गया। मामला मर्डर का लग रहा है। सूचना मिलने पर जीआरपी के एसएचओ मौके पर पहुंचे। इसके अलावा फरेंसिक साइंस लैब की टीम और डॉग स्क्वॉड भी मौके पर पहुंची। जीआरपी इस मामले में कोई स्पष्ट जानकारी देने से मना कर रही है। इतने गंभीर मामले को जीआरपी महज हादसा बता रही है।

मोना नामक शख्स संत नगर में अपनी बहन अनीता के घर में रहता था। मोना डेंटिंग पैंटिंग का काम करता है। रविवार सुबह करीब 11 बजे अपने घरवालों से यह कहकर गया था कि वह ओवरटाइम करने जा रहा है, लेकिन इसके बाद से वह घर नहीं लौटा। सोमवार सुबह करीब सवा 8 बजे जीआरपी फरीदाबाद को सूचना मिली कि रेलवे स्टेशन के प्लैटफॉर्म नंबर 4 पर किसी व्यक्ति का खून से लथपथ शव पड़ा हुआ है। मृतक के चेहरे पर गहरी चोट के निशान थे। इसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची। परिजनों का कहना है कि मृतक मोना का पर्स और मोबाइल गायब है। मृतक की बहन अनीता ने बताया कि रविवार को उसे तनख्वाह भी मिलनी थी, लेकिन अब उसके पास से पैसा बरामद नहीं हुआ है। उन्होंने आशंका जताई है कि लूटपाट के इरादे से मोना की हत्या की गई होगी। जिस स्थान से पुलिस ने मोना का शव बरामद किया, वहां खून की धार बह रही थी। जीआरपी एसएचओ अरविंद कुमार ने बताया कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट मिलने के बाद ही मौत के कारणों का पता चल सकेगा।

Monday, April 6, 2015

मालगाड़ी के डिब्बें में आग

यमुना ब्रिज रेलवे स्टेशन पर कोयला लदी एक मालगाड़ी के डिब्बें में आग लग गई। फायर ब्रिगेड ने आग पर काबू पाया। वहीं गार्ड से मैसेज मिलने के बाद अप रेल लाइन पर ट्रेनों का संचालन बंद करा दिया गया। काफी देर मशक्कत करने के बाद आग पर काबू पाया जा सका। सुबह करीब 10 बजे टूंडला से कोयले से लदी मालगाड़ी आगरा फोर्ट की ओर जा रही थी। इसी दौरान एक डिब्बे से धुंआ उठता देखकर चालक ने ट्रेन को यमुना ब्रिज पर ही रोक लिया। गार्ड ने देखा तो दो बोगियों में कोयला सुलग रहा था और धुआं उठ रहा था। गार्ड ने इसकी सूचना आगरा फोर्ट के एसएस को दी। इसके बाद टूंडला-आगरा फोर्ट की अप लाइन पर ट्रेनों का आवागमन रोक दिया गया। आग पर काबू पाने के लिए फायर ब्रिगेड की दो गाड़ियां मौके पर पहुंची और काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। कोयले में आग कैसे लगी अभी इसके बारे में पता नहीं चल सका है।

Saturday, April 4, 2015

रोबो फॉर्म नाम के सॉफ्टवेयर की मदद से अवैध तरीके से टिकटों की बुकिंग

एक तरफ रेलवे ने दलालों को रोकने का तर्क देकर अग्रिम आरक्षण की अवधि बढ़ाकर 120 दिनों की कर दी दूसरी तरफ इंटरनेट पर हो रही टिकटों की धांधली को रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं। हाल ही में सेंट्रल और वेस्टर्न रेलवे ने कई जगहों पर छापामारी कर इंटरनेट पर अवैध तरीके से टिकट बुकिंग करने वालों को पकड़ा है। सेंट्रल रेलवे द्वारा की गई एक और छापामारी में पता चला है कि इंटरनेट पर मौजूद रोबो फॉर्म नाम के सॉफ्टवेयर की मदद से अवैध तरीके से टिकटों की बुकिंग की जा रही है 

सेंट्रल रेलवे आरपीएफ की दादर क्राइम ब्रांच ने एक सूचना के आधार पर कोपरेखैरने में छापा मारकर 4,21,694 रुपये मूल्य 122 ई-टिकट जब्त किए हैं। आरपीएफ निरीक्षक राजेश कांबले, उप निरीक्षक संदीप ओंबासे तथा सुधीर शिंदे द्वारा की गई छापे मारी की इस कार्रवाई में नितिन महादेव पटेल नामक एक आरोपी को गिरफ्तार तुर्भे आरपीएफ के हवाले कर दिया गया है।
सेंट्रल रेलवे के मुंबई मंडल के वरिष्ठ सुरक्षा आयुक्त आलोक बोहरा ने इस छापेमारी की कार्रवाई की पुष्टि करते हुए कहा कि आरोपी रोबो फॉर्म नामक ऐप का इस्तेमाल कर फर्जी आईडी बनाकर रेलवे के आरक्षित टिकट बुक करता था।
इंटरनेट से रोबो फॉर्म ऐप को आसानी से डाउनलोड कर घर बैठे रेलवे के टिकटों की अवैध तरीके से बुकिंग की जा रही है। इस ऐप की मदद से 15 सेकंड में आईआरसीटीसी (इंडियन रेलवे कैटरिंग ऐंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन) की वेबसाइट से टिकट निकाले जा सकते हैं। इतना ही नहीं, बल्कि इस तरह की ऐप से होने वाले फायदे तथा उपयोग विधि को भी विस्तार से दिया गया है।
रोबो फॉर्म पासवर्ड मैनजेर का अपग्रेडेड वर्जन हैं, जिससे न केवल स्पीड से सर्फिंग की जा सकती है, बल्कि एक साथ संबंधित विडों ओपन कर उसमें डिटेल भी भरे जा सकते हैं। साइबर एक्सपर्ट्स की मानें तो इस तरह के ऐप ऑन लाइन शॉपिंग को ध्यान में रखते हुए डिवेलप किए गए हैं, जिसका इस्तेमाल फर्जी आईडी बनाकर टिकट दलालों ने शुरू कर दिया है।

जायकेदार फास्ट फूड का आप ट्रेन में मजा

अब पिज्जा हट और केएफसी के लजीज और जायकेदार फास्ट फूड का आप ट्रेन में मजा ले सकेंगे। रेलवे के लिए ई-टिकटिंग, कैटरिंग और टूरिजम के काम को संभालने वाली आईआरसीटीसी ने ई-कैटरिंग के लिए पिज्जा हट और केएफसी के आवेदन को मंजूरी दे दी है।
इन वेंडर्स के खाने के लिए यात्रा की तिथि से 48 घंटे पहले आईआरसीटीसी वेबसाइट के माध्यम से ऑर्डर करना होगा। ऑर्डर बुक होने के बाद वेंडर की ओर से कस्टमर के मोबाइल फोन पर एक पासवर्ड भेजा जाएगा जिसे डिलिवरी के समय बताना जरूरी होगा। 12 स्टेशनों आगरा छावनी, अलवर, जयपुर, अंबाला, जालंधर, मथुरा जंक्शन, मुजफ्फरनगर, न्यू दिल्ली, पठानकोट, वापी, भरूच एवं वडोदरा पर पिज्जा डिलिवर करने के लिए फरवरी में आईआरसीटीसी ने देश में डोमिनोस पिज्ज ब्रैंड चलाने वाली कंपनी से डील की।
आईआरसीटीसी के चेयरमैन और एमडी ए.के.मनोचा ने ईटी से बातचीत में बताया, 'शुरू में यह सर्विस उन ट्रेनों में चालू होग जिनमें पैंट्री कार नहीं है। बाद में इस सर्विस का विस्तार उन ट्रेनों तक भी किया जाएगा जिनमें पैंट्री कार होती है जैसे राजधानी और दुरंतो। उन्होंने बताया कि पिज्जा हट और केएफसी से खाने की डिलिवरी के लिए और भी स्थानों को चिह्नित किया जा रहा है। लंबी दूरी की ट्रेनों में इस प्रकार के सिस्टम को चालू करने में समस्या यह है कि खाने की कीमत यात्री के भाड़े में शामिल होती है।
योजना के अनुसार फूड चेंस ऑनलाइन दिए गए खाने के ऑर्डर को सीधे डिलिवर कर सकते हैं या ट्रेनों में डिलिवर करने के लिए रेलवे के फूड प्लाजा नेटवर्क का इस्तेमाल कर सकते हैं।
मनोचा ने बताया, ''अगर पिज्जा हट जैसी कंपनी का फूड प्लाजा में आउटलेट नहीं होगा ते यह शहर में स्टेशन के समीप अपने सामान्य आउटलेट से डिलिवरी कर सकती है।

Thursday, April 2, 2015

10 हजार करोड़ रुपए का चूना

मेट्रो मैन के नाम से मशहूर  श्रीधरन ने कहा है कि भारतीय रेलवे को सामानों की खरीदारी में हर साल कम से कम 10 हजार करोड़ रुपए का चूना लग रहा है । श्रीधरन की रिपोर्ट में कहा गया है कि खरीद अधिकारों को विकेंद्रित करने यानी निचले स्तर तक देने से इस लूट को रोका जा सकता है।
श्रीधरन ने रेलवे के जनरल मैनेजर्स को वित्तीय अधिकार देने और अधिकारों के विकेंद्रीकरण संबंधी अपनी फाइनल रिपोर्ट में कहा है कि इस समय खरीद अधिकार सीमित होने से रेलवे का बहुत ज्यादा पैसा महज कुछ हाथों में है। इससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है।
श्रीधरन की अध्यक्षता वाली इस कमिटी ने अपनी रिपोर्ट में रेलवे के कई वरिष्ठ अधिकारियों की भी राय ली है। मौजूदा खरीद प्रक्रिया का विश्लेषण कर कमिटी इस नतीजे पर पहुंची है कि जवाबदेही तय करने और अधिकारों को विकेंद्रित करने से रेलवे की सालाना आय में भारी अंतर आ जाएगा। इससे हर साल सामान की खरीद में करीब 5 हजार करोड़ रुपए और कामों के ठेके देने में भी इतने ही रुपयों की बचत होगी।
कमिटी ने अपनी फाइनल रिपोर्ट 15 मार्च को दाखिल की थी। इसमें कहा गया है कि बोर्ड को कोई भी वित्तीय फैसले नहीं लेने चाहिए। खुद अपनी जरूरत के सामान की खरीदारी भी उत्तरी रेलवे से करानी चाहिए। ये अधिकार जनरल मैनेजर और निचले स्तर के अधिकारियों को दिए जाने की भी सिफारिश की गई है।
आपको बता दें कि रेलवे देश में सबसे ज्यादा खरीदारी करने वाली दूसरी सबसे बड़ी एजेंसी है। इससे ज्यादा की खरीदारी सिर्फ डिफेंस के सामान की होती है। रेलवे हर साल खरीदारी पर करीब 1 लाख करोड़ रुपए खर्च करती है, जिसमें से करीब आधी रकम से रेलवे बोर्ड खरीदारी करता है।
पिछले साल नवंबर में श्रीधरन के प्रारंभिक रिपोर्ट देने के बाद से ही रेलवे ने अधिकारों के विकेंद्रीकरण का काम शुरू कर दिया है। अब श्रीधरन कमिटी ने कहा है कि रेलवे बोर्ड का गठन रेलवे की नीतियां, योजनाएं, नियम और सिद्धांतों को बनाने, इनकी जांच करने और रेलवे को दिशानिर्देश देने को हुआ था, लेकिन आज बोर्ड इनमें से कोई भी काम नहीं कर रहा है।
कमिटी ने विस्तार से विश्लेषण के लिए डीजल, कंक्रीट स्लीपर्स, 53-s सीमेंट जैसे सामनों की खरीद प्रक्रिया का भी अध्धयन किया। उनके मुताबिक, रेलवे देश में सबसे ज्यादा डीजल की खरीद करता है और पिछले 15 महीनों से इसका नया ठेका ही फाइनल नहीं हुआ है। कई चीजों के ठेके तो दशकों से फाइनल नहीं हुए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, हालात इतने खराब हो गए हैं कि रेलवे के कामकाज की इस व्यवस्था को अच्छे से झकझोरने की जरूरत है, जिससे प्रभावी और बेहतर बिजनस के फैसले लिए जा सकें। इसमें कहा गया है कि बोर्ड को फील्ड में मौजूद अपने शीर्ष अधिकारियों यानी जनरल मैनेजर्स की बिजनस की क्षमता पर ही शक है।
इसके अलावा रिपोर्ट में रेलवे की ढुलाई और यात्रियों की संख्या (हवाई और सड़क के मुकाबले) कम होने पर भी चिंता जताई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक 1960-61 के 82 फीसदी (टन के हिसाब से) के मुकाबले आज रेलवे से केवल 30 फीसदी ढुलाई होती है। श्रीधरन ने कहा है कि शायद ही रेलवे के मुकाबले किसी और भारतीय संस्था की इतनी ज्यादा समितियों ने समीक्षा की होगी, लेकिन विडंबना यह है कि सारी सिफारिशें आज भी धूल फांक रही हैं।

वकीलों ने सिटी स्टेशन पहुंच कर रेल रोक दी

वेस्ट यूपी में हाई कोर्ट बेंच की मांग को लेकर वकीलों ने सिटी स्टेशन पहुंच कर रेल रोक दी। अपनी मांगों के सर्मथन में नारेबाजी करते हुए कुछ वकील ट्रेन के इंजन पर चढ़ गए, जबकि उनके बाकी साथी पटरी पर खड़े हो गए। इस दौरान यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा।

हाई कोर्ट बेंच की मांग को लेकर लंबे समय से आंदोलन कर रहे वकीलों ने केंद्रीय संघर्ष समिति वेस्ट यूपी की बैठक कर मेरठ, मुरादाबाद, सहारनपुर व अलीगढ़ मंडल के सभी जिलों में दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक रेल रोकने का ऐलान किया गया था। बुधवार को मेरठ सिटी स्टेशन पंहुचे वकीलों ने करीब 12 बजकर 25 मिनट पर स्टेशन पहुंची बलसाड़-हरिद्वार एक्सप्रेस सिटी का रास्ता रोक दिया। पुलिस ने वकीलों को पटरी से हटने के लिए कहा, तो उनके बीच नोकझोंक हुई। इस दौरान करीब आधे घंटे तक रेल रुकी रही और यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। संघर्ष समिति के अध्यक्ष डीडी शर्मा ने बताया कि मेरठ समेत हापुड़, गाजियाबाद, सहारनपुर व मुजफ्फरनगर में भी वकीलों ने ट्रेन रोक कर पूरे वेस्ट यूपी मे दो घंटे के लिए रेल सेवा ठप कर दी थी। उन्होंने कहा कि अपनी मांग पूरी होने तक वकील अपना संर्घष जारी रखेंगे। डीडी शर्मा ने बताया कि छह अप्रैल को बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने वकीलों को अशोक रोड स्थित पार्टी कार्यालय पर बुलाया है। इसकी सूचना उन्हें बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ़ लक्ष्मीकांत बाजपेयी व केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री संजीव बालियान से मिली है। उन्होंने कहा कि संघर्ष समिति के पदाधिकारियों का प्रतिनिधमंडल अमित शाह से मिलने जाएगा।

बुधवार को 11 लाख टिकट ऑनलाइन बिके

रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने अडवांस रेल टिकट बुकिंग की अवधि बढ़ाकर 4 महीने करने का असर पहले ही दिन दिखा। नियम के लागू होने के बाद बुधवार को आईआरसीटीसी की वेबसाइट पर लोग टूट पड़े। जहां आम दिनों में औसत 5 लाख टिकट ऑनलाइन बुक होते थे, इस नियम के लागू होने के पहले दिन यानी बुधवार को 11 लाख टिकट ऑनलाइन बिके।
सबसे बड़ी समस्या ट्रैफिक के बढ़ने को लेकर है जिसके कारण आईआरसीटीसी का सर्वर दिन में कई बार ठप पड़ गया। सीनियर आईआरसीटीसी अधिकारियों ने बताया कि बुधवार उनके लिए काफी बिजी दिन रहा।

इस तरह की समस्या को देखते हुए कुछ लोगों का कहना है कि इससे आम लोगों का कम और दलालों का ज्यादा फायदा होगा। नाम न छापने की शर्त पर नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के पास एक ट्रैवल एजेंट ने बताया, 'बुकिंग टिकट के लिए विंडो बढ़ाने के निर्णय से दक्षिण की तरफ जाने वाले लोगों की तो फायदा होगा क्योंकि वहां के लिए भीड़-भाड़ ज्यादा नहीं होती है लेकिन पूर्व की तरफ यात्रा करने वालों को दलालों के चंगुल में फंसने की संभावना है।
जहां ऑनलाइन टिकट दिन के अंत तक 11 लाख बिके थे वहीं काउंटर से भी कई लाख टिकट बिके लेकिन उसका डेटा अभी उपलब्ध नहीं है। 4 महीने पहले अडवांस टिकट बुक करने का नियम बुधवार से शुरू हुआ, इससे पहले दो महीने पहले टिकट बुक करने की सुविधा थी।
इस सुविधा की शुरुआत होने से गर्मी छुट्टी बिताने की योजना बनाने वाले लोगों की काफी सहूलियत होगी। स्कूलों में गर्मी छुट्टी पड़ने के बाद मई के महीने में दिल्ली के रेलवे स्टेशनों पर भारी भीड़भाड़ देखी जाती है। मंगलवार तक तो पैसेंजर सिर्फ 60 दिन के अंदर के लिए ही टिकट बुक करा सकते थे, लेकिन अब इस नियम में बदलाव होने से लोगों को थोड़ी सहूलियत होगी।