Tuesday, September 22, 2009

एक वंशज, अली अकबर आदमजी पीरभॉय ने बताया कि इस रेल नेटवर्क को हमारे परिवार ने 102 साल पहले बनवाया था।

सौ साल पुराना नेराल-माथेरान रेलवे नेटवर्क विवादों में है। जहां इसके हेरिटेज स्टेटस के लिए यूनेस्को विचार कर रहा है, वहीं इस रेल नेटवर्क के संस्थापक के वंशजों ने सरकार से रॉयल्टी मांगी है। माथेरान रेलवे के संस्थापक अब्दुल हुसैन आदमजी पीरभॉय के वंशजों ने बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दायर करके सरकार से 90 करोड़ रुपये की रॉयल्टी मांगी है। एक वंशज, अली अकबर आदमजी पीरभॉय ने बताया कि इस रेल नेटवर्क को हमारे परिवार ने 102 साल पहले बनवाया था। इसके लिए तत्कालीन ब्रिटिश गवर्नमेंट से मंजूरी ली गई। तब कुल 16 लाख रुपये की लागत से नेटवर्क का निर्माण हुआ। भारत सरकार ने 1951 में इस नेटवर्क को अक्वॉयर कर लिया। वंशज अकबर का आरोप है कि अधिग्रहण के एवज में पीरभोय परिवार को मुआवजा देने के लिए जताई गई प्रतिबद्धता का सरकार ने सम्मान नहीं किया। अब अकबर ने बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दायर करके अपने और पीरभोय परिवार के कानूनी उत्तराधिकारियों के लिए इस नेटवर्क की रॉयल्टी मांगी है, जो 90 करोड़ रुपये से अधिक होगी। याचिकाकर्ता की दलील है कि 1904 में ब्रिटिश प्रशासन ने माथेरान ट्रॉमवे ऑर्डर जारी किया था, जिसके नेटवर्क का कानूनी अधिकार अब्दुल हुसैन आदमजी पीरभॉय के परिवार के पास था। इस आदेश में कहा गया था कि अगर सरकार यह नेटवर्क खरीदना चाहती है तो उसे इसके स्वामी को छह महीने का नोटिस देना होगा। जबकि इस प्रावधान का पालन नहीं किया गया। आदेश के 44वें क्लॉज में कहा गया था कि रेल नेटवर्क का परचेज प्राइस इसके द्वारा गत तीन वर्ष में अर्जित किए गए औसतन राजस्व का 25 गुना होगा। यह राशि खरीद की तारीख के तुरंत बाद दे दी जानी चाहिए। भुगतान न करने पर तीन फीसदी सालाना ब्याज की बात भी थी। लेकिन इनमें से किसी भी प्रावधान का पालन नहीं किया गया। सरकार की दलील है कि रेलवे की खरीद के लिए क्रेता और विक्रेता, दोनों पक्षों के बीच हुआ अनुबंध 1951 में सेल डीड के जरिए वापस ले लिया गया था। बहरहाल, पीरभॉय के वंशजों ने इस सेलडीड के बारे में कहा है कि उसमें क्रेता और विक्रेता के दस्तखत नहीं हैं। यह भी नहीं लिखा कि भुगतान चेक से हो या कैश। सरकार नेराल-माथेरान रेल नेटवर्क के अमन लॉज रेलवे स्टेशन से माथेरान के लिए मिनी ट्रेन की शटल सेवा शुरू करने वाली है। याचिकाकर्ता ने इसे भी चुनौती दी है और कहा है कि जब तक पीरभॉय परिवार को मुआवजा नहीं मिल जाता, यह सेवा शुरू नहीं की जा सकती। अली अकबर की याचिका को बॉम्बे हाई कोर्ट ने विचार के लिए स्वीकार कर लिया है। माथेरान मुंबई के नजदीक एक हिल स्टेशन है और और अपनी ट्रेन की सवारी के लिए पर्यटकों के दिलों में खास स्थान रखता है।

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