Thursday, December 31, 2015

पहली जनवरी से बुजुर्ग दंपती एक साथ सफर करने की सुविधा पाएंगे

पहली जनवरी से बुजुर्ग दंपती एक साथ सफर करने की सुविधा पाएंगे। रेलवे सीनियर सिटिजन का कोटा दो से बढ़ाकर चार करने जा रहा है। अब दोनों को अलग-अलग बर्थों पर सफर नहीं करना पड़ेगा। रेलवे यात्रियों की सेवा में लगातार सुधार कर रहा है। बुजुर्ग व महिला यात्रियों पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
वर्तमान में मेल, एक्सप्रेस, शताब्दी व राजधानी एक्सप्रेस में सीनियर सिटिजन के लिए अलग-अलग श्रेणी में दो बर्थ आरक्षित होती हैं। इस बर्थ पर केवल अकेले सफर करने वाले सीनियर सिटिजन को टिकट मिलता है। ऐसी स्थिति में बुजुर्ग दंपती को एक साथ बर्थ नहीं मिल पाती है। कई बार तो बर्थ नहीं मिलने से बुजुर्ग दंपती को एक ही बर्थ पर यात्रा करना पड़ती है, जिससे उन्हें काफी परेशानी होती है।
रेल मंत्रालय नए साल से बुजुर्ग दंपती को "साथ" का तोहफा देने जा रहा है। पहली जनवरी से सभी ट्रेनों के स्लीपर व एसी थ्री में सीनियर सिटिजन के लिए बर्थ की संख्या दो से बढ़ाकर चार की जा रही हैं, जिससे बुजुर्ग दंपती को एक साथ दो बर्थ आवंटित हो सकेंगी। सफर के दौरान सीनियर सिटिजन को आयु प्रमाण पत्र व पति पत्नी होने का प्रमाण पत्र टीटीई को दिखाना पड़ेगा।

सीनियर सिटिजन को नीचे की बर्थ उपलब्ध होगी। जो बुजुर्ग यात्री आरक्षित कोटे से बर्थ नहीं ले रहे हैं, उन्हें भी नीचे की बर्थ उपलब्ध कराई जाएगी। ट्रेन में ड्यूटी करने वाले टीटीई को आदेश दिया गया है कि अगर किसी सीनियर सिटिजन को ऊपर की बर्थ मिली है तो वह नीचे की बर्थ वाले यात्रियों से अनुरोध कर सीनियर सिटिजन को नीचे का बर्थ उपलब्ध कराएं। मुख्य जनसंपर्क अधिकारी नीरज शर्मा ने बताया कि पहली जनवरी से ट्रेनों में सीनियर सिटिजन के लिए यह सुविधा शुरू हो जाएगी।

Wednesday, December 30, 2015

चलती ट्रेन में नवजात को जन्म देने का मामला

उत्तरप्रदेश में चलती ट्रेन में नवजात को जन्म देने का मामला सामने आया है। खास बात यह रही कि बच्ची चलती ट्रेन से ट्रैक पर गिर गई थी। इसके बावजूद वक्त पर इलाज मिलने से उसकी जान बच गई। स्थानीय सरकारी अस्पताल में दोनों का इलाज चल रहा है।
रेलवे प्रवक्ता राजेंद्र सिंह ने बताया, यह मामला भोजीपुरा रेलवे स्टेशन के पास का है। तत्काल कुछ यात्री बच्ची को अस्पताल ले गए, जहां उसे बचा लिया गया।
नेपाल में कंचनपुर की रहने वाली पुष्पा तनकपुर-बरेली पैसेंजर से यात्रा कर रही थी। सोमवार दोपहर को ट्रेन भोजीपुर की ओर बढ़ रही थी। तभी पुष्पा को प्रसव पीड़ा हुई। वह बाथरूम गई, जहां प्रसव हो गया। महिला कुछ समझ पाती इससे पहले नवजात ट्रैक पर गिर गया। उसने मदद की गुहार लगाई। यात्रियों ने चेन खींचकर ट्रेन रुकवाई और ड्राइवर को सूचना दी।
ड्राइवर ने तुरंत स्टेशन मास्टर को खबर की और एंबुलेंस बुलवाई, जिसकी मदद से दोनों को अस्पताल पहुंचाया गया। सरकारी अस्पताल के डॉक्ट

रों के मुताबिक, मां-बेटी दोनों अब ठीक हैं। बच्ची को मामूली चोट आई है, लेकिन वह पूरी तरह स्वस्थ्य है। पुष्पा गरीब परिवार की एकल मां है।

Wednesday, December 23, 2015

रेलवे भर्ती सेल (आरआरसी) इलाहाबाद की ग्रुप डी भर्ती परीक्षा में फर्जीवाड़ा

रेलवे भर्ती सेल (आरआरसी) इलाहाबाद की ग्रुप डी भर्ती परीक्षा में फर्जीवाड़ा करने वालों पर शिकंजा कस गया है। फर्जीवाड़ा करने वालों में सबसे आगे बिहार के अभ्यर्थी हैं। फिर उत्तर प्रदेश के हैं और उसमें भी इलाहाबाद के ज्यादा।
इन्हें डिबार कर दिया गया है। अब यह रेलवे की किसी परीक्षा में नहीं बैठ सकेंगे। आरआरसी इलाहाबाद ने ग्रुप डी के 2609 पदों पर भर्ती के लिए देशभर में नंवबर-दिसंबर 2014 में लिखित परीक्षा कराई थी। मार्च 2015 में रिजल्ट जारी हुआ और इसके तुरंत बाद फिजिकल टेस्ट की प्रक्रिया पूरी हुई।
फिजिकल में ही 54 फर्जी अभ्यर्थी पकड़े गए थे। फिजिकल में सफल अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों की जांच सितंबर-अक्टूबर 2015 में हुई तो 339 अभ्यर्थी ऐसे मिले, जिनके बारे में कहा जा रहा है कि उन्होंने फर्जीवाड़ा किया।
बिहार के 176, उत्तर प्रदेश के 123 (इनमें 55 इलाहाबाद के ही हैं), राजस्थान के 35, दिल्ली और हरियाणा के दो-दो और कर्नाटक का एक अभ्यर्थी है। शेष 2141 को नियुक्ति पत्र देने की प्रक्रिया चल रही है। पिछली दो भर्तियों के दौरान आरआरसी लगातार फर्जीवाड़ा पकड़ रहा है।
अब तक वह पांच सौ से अधिक अभ्यर्थियों को डिबार कर चुका है। इन सभी की सूची सार्वजनिक की जाएगी, ताकि यह कहीं और परीक्षा में शामिल नहीं हो सकें। जानकारों की मानें तो दलालों ने भर्ती कराने के एवज में ऐसे अभ्यर्थियों से ढाई से पांच लाख रुपये लिए थे।
शातिराना अंदाज में काम
भर्ती में दलालों ने शातिराना अंदाज में काम किया। लिखित परीक्षा में दूसरे युवक को बैठाया। उसी को फिजिकल में भेजा। हां, प्रमाण पत्र की जांच के दौरान असली अभ्यर्थी भेजे गए। परीक्षा के दौरान ही आरआरसी ने अभ्यर्थियों का थंब इंप्रेशन लिया था। साथ ही उनसे एक पैराग्राफ लिखवाया। एक फोटो भी मंगवाई गई। प्रमाणपत्रों की जांच के दौरान सभी बातें मैच नहीं हुईं।

आरआरसी इलाहाबाद चेयरमैन संजीव कुमार को आशंका है कि अभी कुछ और ऐसे फर्जी अभ्यर्थी हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि नियुक्ति के लिए झांसी, आगरा और इलाहाबाद डीआरएम को सूची भेजी जा रही है। वहां भी मिलान कराया जाएगा। ऐसा इसलिए है क्योंकि कतिपय दलाल अपने अभ्यर्थियों को सीधे ज्वाइन करने के लिए भेज सकते हैं। इसलिए नियुक्ति के दौरान भी अंगूठे के निशान, हैंडराइटिंग और फोटो का मिलान कराया जाएगा।

Monday, December 21, 2015

रेलवे में नए नियमों की लिस्ट लंबी होती जा रही है

रेलवे में रोज बन रहे नए नियम व रोज-रोज चल रहे जांच अभियान से यात्रियों की परेशानी बढ़ती जा रही है। यात्रियों का कहना है कि यदि स्टेशन में सुविधाएं बढ़ जाएं तो राशि खर्च करने में कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन असुविधाओं के बीच ही अतिरिक्त राशि वसूली की जाए तो यह रेलवे का गलत निर्णय है।
विगत कुछ दिनों से स्टेशन में अधिकारी पहुंच रहे हैं और अभियान चलाकर वसूली की जा रही है। सालों पहले स्टेशन को ए ग्रेड का दर्जा प्राप्त हुआ था, बावजूद अभी तक कोई भी सुविधाएं नहीं मिल सकी। रेलवे की घोषणा के अनुसार स्टेशन में वाई-फाई, एलसीडी टीवी के जरिए ट्रेनों की जानकारी, स्टेशन में फुव्वारा लगाना समेत कई सुविधाएं उपलब्ध कराना था। लेकिन एक भी योजना पर अब तक काम शुरू नहीं हो सका है। सारी योजनाएं वास्तविकता की धरातल से कोसों दूर हैं। ऐसे में यात्री रेलवे के नित नए बदलते नियमों से जहां परेशान हैं, वहीं स्टेशन में उपलब्ध सुविधाओं से नाखुश हैं।
पिछले कुछ समय से रेलवे में नए नियमों की लिस्ट लंबी होती जा रही है, इसे देखकर यात्री परेशान हैं। वहीं अधिकारियों का कहना है कि उन्हें जोन से जैसा आदेश प्राप्त हुआ है, उसी अनुरूप काम कर रहे हैं। जिससे यात्रियों की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही है।
रेलवे नियम तो हर रोज बना रही है लेकिन स्टेशन में अब तक बुनियादी सुविधाओं का अभाव ही दिखता है। स्टेशन के फर्श कई जगह से टूटे हैं, जिनको औपचारिकता वश सुधारकर छोड़ दिया गया है। वहीं यात्रियों के लिए खुलने वाला मल्टी शॉपिंग कॉम्पेलक्स व कई अन्य सुविधाएं जिनका अभाव बना है, जिसका आज भी यात्री इंतजार कर रहे है।
जानकारों की माने तो बिलासपुर जोन में सबसे ज्यादा आय देने वाला स्टेशन रायगढ़ है, लेकिन यात्री सुविधाएं नहीं के बराबर हैं। जोन में सबसे ज्यादा आय देने के बावजूद यह रोज अभियान चलाया जा रहा हैं। किसी भी सुविधा की बात पर करने पर रेलवे बजट में कमी का रोना रोने लगता है।
लोगों का कहना है कि रेलवे में रोज नियम बदलकर ट्रेनों का किराया बढ़ाया जा रहा है, पर सुविधाओं पर ध्यान नहीं दिया जाता है। जिसे लेकर यात्रियों में रेलवे के प्रति गलत छबि बन रही है। अभी भी कई योजनाएं ऐसी हैं जिनकी घोषणाएं तो हो चुकी है, लेकिन उनके उपलब्ध होने में समय लग रहा है।
कई योजनाएं ऐसी है जिनका टेंडर ठेकेदारों द्वारा नहीं भरे जाने से योजनाएं अधूरी छूट रही है। एलसीडी के लिए निकाला गया टेंडर हो या फिर रेलवे मल्टीप्लैक्स या फिर कर्मचारियों के साथ स्टेशनों में सुविधा उपलब्ध कराना। ऐसी कई चीजें है जिनमें टेंडर लेने वालों का इंतजार किया जा रहा है।

मंत्रालय में सारी प्रक्रिया चल रही है। स्टेशन को मिलने वाली वाई-फाई व अन्य सुविधाएं आगामी वर्ष तक पूर्ण होने की संभावना है।

Friday, December 18, 2015

आरक्षित टिकटों में फर्जीवाड़े को रोकने की कवायद शुरू

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने ट्रेनों के आरक्षित टिकटों में फर्जीवाड़े को रोकने की कवायद शुरू कर दी है। नए साल से आरक्षित टिकटों में बार कोड दर्ज किया जाएगा। रेल अफसरों का मानना है कि इस प्रक्रिया से फर्जीवाड़ा पर पूरी तरह से लगाम कसा जा सकेगा।
रेलवे के भरोसेमंद सूत्रों के अनुसार ट्रेनों के आरक्षित टिकटों में बार कोड दर्ज करने के लिए रेलवे ने अपने सॉफ्टवेयर में बदलाव की तैयारी कर ली है। इसके लिए क्रिस द्वारा सॉफ्टवेयर को अपडेट करने का काम तेजी से चल रहा है। कोशिश है कि दिसम्बर माह के आखिरी सप्ताह में नए सॉफ्टवेयर को अपडेट कर लिया जाए।
इसके बाद इस सॉफ्टवेयर को प्रायोगिक तौर पर जांचा जाएगा और फिर नए साल 2016 से आरक्षित श्रेणियों के टिकटों में बार कोड दर्ज होना शुरू हो जाएगा। इस संबंध में रेलवे के अधिकारियों से पूछे जाने पक उनका कहना था कि फिलहाल यह प्रक्रिया में है। आने वाले दिनों में बार कोड दर्ज टिकट मिलने लगेगी। 

बार कोड से असली-नकली टिकट की जांच करना सरल हो जाएगा। आरक्षण केंद्र और मुख्य स्टेशन प्रबंधक कार्यालय में विशेष मशीन में टिकट स्वैप करने पर बार कोड के आधार पर टिकट की जांच की जा सकेगी। टिकट में किसी प्रकार की गड़बड़ी होने पर तत्काल पता चल जाएगा। इस कवायद से टिकट दलालों के फर्जीवाड़े पर पूरी तरह से अंकुश लग सकेगा। वहीं निजी बुकिंग एजेंट भी यात्रियों के साथ धोखाधड़ी नहीं कर सकेंगे।

Tuesday, December 15, 2015

शकूरबस्‍ती गिराए जाने के बाद से ही इस राजनीति जारी

शकूरबस्‍ती गिराए जाने के बाद से ही इस राजनीति जारी है। इस बीच कांग्रेस नेता अजय माकन की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्‍ली हाई कोर्ट ने रेलवे और सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए उनके कदम को अमा‍नवीय बताया है।
हाई कोर्ट ने कहा है कि जिस तरह की घटना घटी वो दुखद है। अगर आपको अतिक्रमण हटाना था तो उसका तरीका होता है। बस्‍ती गिराए जाने के बाद ऐसे मौसम में लोगों के सिर पर छत नहीं है और ना खाने के लिए खाना। अब रेलवे और सरकार मिलकर पीड़‍ित लोगों को राहत पहुंचाने का काम करे।

कोर्ट ने आगे कहा कि मानवीय कार्रवाई से पहले भावनाओं को ख्‍याल नहीं रखा गया। हाई कोर्ट ने रेलवे, दिल्‍ली सरकार और पुलिस को नोटिस जारी कर गुरुवार तक बस्‍ती गिराए जाने से पहले की गई पूरी कार्रवाई की जानकारी देने के लिए भी कहा है।

Friday, December 11, 2015

रेलवे ने नए कोच में अधिकांश हिस्सों में एलईडी लगाया

ट्रेन के सफर में यात्रियों को एलईडी कुछ इस तरह से चुभी कि लगने से पहले ही रेलवे ने इसे बाहर कर दिया। अब यात्रियों की सुविधा के हिसाब से इसकी डिजाइन में बदलाव किया जा रहा है। इसके बाद ही ट्रनों में एलईडी लगेगी।
हाल ही में रेलवे ने कोचों में सीएफएल की जगह एलईडी लगाने का प्रस्ताव तैयार किया था। कुछ ट्रेनों में ट्रायल के रूप में इसे लगा भी दिया गया। लेकिन पैसेंजर फीडबैक में यात्रियों को कोच में एलईडी पसंद नहीं आ रही। उन्हें यह लाइट चुभ रही है। हालांकि रेलवे बोर्ड ने देश में सभी जोनों को अपने दफ्तर में जरूरी एलईडी लगाने के निर्देश जारी कर दिए हैं।
अब तक यह हुआ है
- रेलवे ने नए कोच में अधिकांश हिस्सों में एलईडी लगाया जा रहा था।
- कुछ पुराने कोच में बाथरूम के बाहर भी एलईडी लगाई गई है
- अधिकांश सिग्नल और प्लेटफार्म पर भी इनका उपयोग किया जा रहा है
- सभी कोच के रास्ते और कैबिन में सीएफएल की जगह एलर्डडी लगनी है
- बाथरूम के अंदर भी एलईडी ही लगाई जानी है
- कोच डोर के पास भी इनका प्रयोग होना है
- पैसेंजर से रेल सुविधा का फीडबैक लिया
- इसमें कोच में लगी एलईडी के बारे में भी पूछा
- अधिकांश पैसेंजर का कहना है कि इसकी लाइफ उन्हें चूभती है
- इस वजह से रात के वक्त कोच के लाइट बंद करनी पड़ती है
अब यह कर रहा रेलवे
- इस फीडबैक के बाद रेलवे कई बदलाव कर रहा है
- इसमें फिलहाल एलईडी की जगह सीएफएल ही लगाए जाएंगे
- एलईडी की नई डिजाइन पर काम चल रहा, ताकि चूभे ना
- इन्हें लगाकर चेक किया जाएगा, फिर इसका उपयोग होगा
आधुनिक रेल कोच में किए जा रहे बदलाव में उपयोग की जा रही सीएफएल की जगह रेलवे को एलईडी का उपयोग करना है। वह कोच ही नहीं बल्कि कैबिन, सीट के उपर और रास्ते में भी इन्हें लगाना चाहता है। हाल ही में भोपाल से दिल्ली के बीच ट्रेन में यह उपयोग किया गया। इससे रेल इंजन की बैटरी पर 60 फीसदी कम लोड़ पड़ता। प्रकाश व्यवस्था की लागत भी कम जाती । इतना ही नहीं इन बल्ब के मेंटनेंस पर भी रेलवे को आधा ही खर्च करना पड़ता।
हालांकि रेलवे बोर्ड ने कोच की बजाए रेलवे के दफ्तर में एलईडी का उपयोग बढ़ाने के निर्देश जारी किए है। नए आदेश में देशभर के सभी जोन और उनके मंडलों को सीएफएल की जगह एलईडी लगाने का आदेश दिया है। बोर्ड ने कहां है कि नए दफ्तर में इनका प्रयोग करना है साथ ही जो सीएफएल फ्यूज हो रही हैं, उनकी जगह अब एलईडी ही लगाना है। यही वजह है कि इन दिनों 1 लाख एलईडी पश्चिम मध्य रेलवे के कर्मचारियों को बांटी जाना है।

यात्रियों का एलईडी की लाइट चुभने जैसी बातें सामने आ रही है। इसलिए एलईडी लगाने वाले शेप की नई डिजाइन पर काम कर रहे हैं, ताकि यह समस्या न आए। हॉ यह जरूर है कि रेलवे बोर्ड ने अपने नए दफ्तर में एलईडी लगाने कहा है। यह भी निर्देश दिए हैं कि पुरानी सीएफएल को बदलें तो एलईडी ही लगाए।

Wednesday, December 9, 2015

रेल मंत्री सुरेभ प्रभु को एक ट्वीट- फूड पैकेट्स और पानी भिजवा दिए गए

रेलमंत्री सुरेश प्रभु और उनका रेल मंत्रालय एक बार फिर अच्छी वजह से सुर्खियों में हैं। सोमवार रात हरिद्वार से हावड़ा जा रही कुंभ एक्सप्रेस कोहरे के कारण्‍ा नौ घंटा लेट हो गई थी। ट्रेन में देहरादून एशियन स्कूल के कुछ बच्चे, बिहार और बंगाल में अपने घर जा रहे थे।
पैंट्री कार न होने की वजह से बच्चों को कुछ खाने को नहीं मिला था। इसके बाद, अमित नाम के एक युवक ने रेलवे मंत्रालय और रेल मंत्री सुरेभ प्रभु को एक ट्वीट किया।
अमित के ट्वीट के कुछ देर बाद रेलवे मंत्रालय ने उनसे मोबाइल नंबर और बच्चों के सीट नंबर मांगे। ट्रेन के अगले स्‍टेशन वाराणसी पहुंचते ही बच्चों की सीट पर फूड पैकेट्स और पानी भिजवा दिए गए।
अमित ने बताया कि वराणसी कैंट स्टेशन पर बच्चों के लिए पूड़ी, सब्जी, चावल, दाल और पानी का इंतजाम पहले ही किया जा चुका था। बच्चों को खाने से भी ज्यादा पसंद रेलवे मंत्रालय की तत्‍परता आई।

इससे पहले भी एक व्‍यक्‍ित ने ट्वीट कर अपने बीमार पिता को ट्रेन से उतारने के लिए ट्रेन को कुछ अतिरिक्‍त समय रोकने का आग्रह किया था। तब प्रभु ने ट्रेन को पांच मिनट तक स्‍टेशन पर अतिरिक्‍त समय के लिए रुकवा दिया था।

Tuesday, December 8, 2015

घनी धुंध के कारण ट्रेनें कई-कई घंटे देरी से

दिखाई देने की कोई तकनीक उपलब्ध नहीं है। घनी धुंध के कारण ट्रेनें कई-कई घंटे देरी से चलने के कारण रेलवे ने फिरोजपुर मंडल की 19 (पैसैंजर, मेल व एक्सप्रेस) गाड़ियां रद करने के साथ ही 86 गाड़ियों के फेरों में कटौती के अलावा सात गाड़ियों को आंशिक रूप से रद कर दिया है।

फिरोजपुर मंडल के कुल 21 रेल खंडों में से 15 पर गाड़ियों की स्पीड घटाकर 40 किलोमीटर प्रति घंटा कर दी गई है। फिरोजपुर रेलवे मंडल के वरिष्ठ संरक्षा अधिकारी एनके वर्मा ने बताया कि जिन 6 रेल खंडों पर फॉग सिग्नलमैन तैनात किए गए हैं वे पटाखों के सहारे गाड़ियों का निर्वाध परिचालन सुनिश्चित करेंगे और इन छह रेल खंडों में ट्रेन की स्पीड 60 किलोमीटर प्रति घंटा होगी।

Thursday, December 3, 2015

कोहरे का प्रकोप शुरू- ट्रेनें घंटों देरी से

देश के उत्‍तरी राज्‍यों में कोहरे का प्रकोप शुरू होने के साथ हीं यात्रियों की परेशानी भी बढ़ने लगी है। ट्रेनें घंटों देरी से चल रही हैं। आने वाले दिनों में यह परेशानी और बढ़ेगी। रेल प्रशासन ने 8 जनवरी से 28 फरवरी तक लंबी दूरी की कई ट्रेनों को पूरी तरह से रद्द करने का फैसला किया है।
वहीं, राजधानी व शताब्दी जैसी वीआइपी ट्रेनों के साथ ही कई ट्रेनों के फेरे में कमी की जा सकती है। यदि ट्रेनें ज्यादा लेट हुईं तो मौके पर भी उन्हें रद्द करने का फैसला लिया जा सकता है।
पिछले वर्ष दिसंबर के अंतिम सप्ताह से इस वर्ष मार्च के पहले सप्ताह तक कोहरे से ट्रेनों की आवाजाही प्रभावित हुई थी। अधिकारियों का कहना है कि पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और असम में कोहरे का ज्यादा प्रकोप होता है। इसलिए इन स्थानों से गुजरने वाली ट्रेनें ज्यादा लेट होती हैं।

विलंब से चलने वाली ट्रेनों के प्रस्थान समय में बदलाव करने के साथ ही कई बार ट्रेनें रद्द भी करनी पड़ती है। ट्रेनों के विलंब से चलने के कारण रैक के साथ ही परिचालन कर्मचारियों की भी कमी हो जाती है। क्योंकि कर्मचारी कई घंटे तक सफर में ही रहते हैं। परिणामस्वरूप ट्रेन को रद करने के सिवाय कोई और विकल्प नहीं रहता है।

Tuesday, December 1, 2015

प्लेटफॉर्म टिकटों की कीमत दोगुनी

सर्दियों के दौरान प्लेटफॉर्म पर यात्रियों के परिजनों की भीड़ से निपटने के लिए रेलवे प्रशासन प्लेटफॉर्म टिकटों की कीमत दोगुनी करने की तैयारी में है। यानी इन सर्दियों में आप अपने प्रियजनों को ट्रेन में बैठाने के लिए प्लेटफॉर्म तक जाना चाहते हैं तो इसके लिए 10 रुपये के बजाय 20 रुपये खर्च करने पड़ेंगे।
दिल्ली के मंडल रेल प्रबंधक अरुण अरोड़ा ने बताया कि त्योहारों, गर्मियों व सर्दियों के दौरान भीड़ बढ़ने पर प्लेटफॉर्म टिकटों की बिक्री बंद कर दी जाती है ताकि यात्रियों के अलावा अन्य लोग स्टेशन परिसर में प्रवेश न कर सकें। इस बार प्लेटफॉर्म टिकटों की बिक्री बंद न करके उसकी कीमत दोगुनी करने का फैसला लिया गया है।

यह व्यवस्था राजधानी के चारों प्रमुख स्टेशनों नई दिल्ली, पुरानी दिल्ली, हजरत निजामुद्दीन और आनंद विहार स्टेशन पर लागू होगी। गौरतलब है कि रेलवे बोर्ड ने 16 मार्च, 2015 को सर्कुलर जारी कर डीआरएम को यह शक्ति प्रदान की है कि मेला, रैली या फिर किसी अन्य वजह से ज्यादा भीड़ होने की स्थिति में वह प्लेटफॉर्म टिकट की कीमत बढ़ा सकते हैं।