Monday, November 30, 2015

मौजूदा टीटीई को टिकट चेकिंग के बजाय यात्रियों की देखभाल के काम में

रेलवे में टीटीई की नई भर्ती पर अंकुश लगेगा, जबकि मौजूदा टीटीई को टिकट चेकिंग के बजाय यात्रियों की देखभाल के काम में लगाया जा सकता है। रेल मंत्रालय इस योजना पर काम कर रहा है। सातवें वेतन आयोग की रिपोर्ट से उसका काम आसान हो गया है।
आयोग ने अपनी रिपोर्ट में टीटीई/टीसी, इंक्वायरी- कम-रिजर्वेशन क्लर्क (ईसीआरसी) और कमर्शियल क्लर्क को कमर्शियल व टिकट चेकिंग स्टाफ मानते हुए इनके मर्जर की सिफारिश की है। इनके लिए मौजूदा छह के बजाय चार ग्रेड पे सुझाए हैं। इसका सर्वाधिक लाभ टीटीई व टीसी को मिलेगा, लेकिन इन पर रेलवे के खर्च में बढ़ोतरी हो जाएगी क्योंकि बुकिंग क्लर्क व ईसीआरसी के मुकाबले टीटीई/टीसी का वेतन और संख्या दोनों ज्यादा है। यही वजह है कि रेलवे इनकी संख्या सीमित करने व मौजूदा टीटीई से दूसरे काम लेने पर विचार कर रहा है।
कर्मचारी संगठनों ने उक्त तीनों श्रेणियों के वेतनमान में बढ़ोतरी की मांग की थी। जबकि रेलवे बोर्ड का सुझाव था कि चूंकि आरक्षित व अनारक्षित टिकटों की बुकिंग में प्रौद्योगिकी का बड़े पैमाने पर उपयोग होने लगा है लिहाजा अब इनकी उतनी जरूरत नहीं है।
हालांकि ट्रेनों की बढ़ती संख्या के कारण यूनियनों की ओर से इनकी भर्ती बढ़ाने का दबाव बढ़ता जा रहा है। इस दबाव से निजात पाने का एक ही तरीका है कि टिकटिंग स्टाफ की भर्ती की न्यूनतम योग्यता मैट्रिक से बढ़ाकर स्नातक कर दी जाए।
रेलवे बोर्ड के सदस्य वाणिज्यिक शरत चंद्र जेठी ने रिफंड नियमों में बदलाव व रद्दीकरण शुल्क में बढ़ोतरी के फैसले को सही ठहराते हुए कहा है कि इससे टीटीई की मिलीभगत से चलने वाले दलालों के धंधे पर अंकुश लगा है। इसका प्रमाण यह है कि 13 से 20 नवंबर के दौरान बुकिंग में 10 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। ऐसा प्रतीक्षा सूची के टिकट रद्द कराए जाने व नई बुकिंग होने से संभव हुआ है।

पहले टिकट कन्फर्म न होने पर लोग टीटीई की मदद लेते थे। अब चाहेंगे तो भी यह संभव न होगा, क्योंकि इसके लिए टीटीई ही नहीं होंगे। वहीं, ऑल इंडिया रेलवेमेन्स फेडरेशन के महासचिव शिवगोपाल मिश्रा के अनुसार अभी मात्र 48-49 हजार टीटीई हैं। बीस हजार टीटीई की मांग थी। जिसमें पांच हजार की भर्ती हो रही है। इनकी संख्या घटने से आमदनी में और कमी आएगी।

Friday, November 27, 2015

· ट्रेन मे आग लगने का मामला

इस महीने के शुरू में देश के तीन राज्यों की छह ट्रेनों में आगजनी हुई थी। हालांकि कोई बड़ी हानि नहीं हुई और रेलवे ने सामान्य घटना मानकर उन्हें ठंडे बस्ते में डाल दिया गया हो, लेकिन सुरक्षा अधिकारियों के मन में एक बड़ी शंका घर कर गई है। उन्हें आशंका है कि कहीं यह आतंकी हमले का ट्रालय तो नहीं?
एचटी की खबर के मुताबिक, अधिकारियों का मानना है कि यह यात्रियों से खचाखच भरी ट्रेन में आग लगाने का ट्रायल रन हो सकता है। इस एंगल से घटनाओं की जांच शुरू कर दी गई है और चार संदिग्ध जेहादियों की तलाश भी शुरू कर दी गई है।
गृहमंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया है कि आतंक से तार जुड़ने के बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को जांच सौंप दी गई है। यह संयोग है कि यह सब घटनाक्रमम 26/11 मुंबई आतंक हमले की सातवीं बरसी पर हुआ।
कहां-कहां लगी थी आग
·         ट्रेन मे आग लगने का पहला मामला 4 नवंबर को सामने आया था। तब हरिद्वार रेलवे स्टेशन पर खड़ी ऋषिकेश-दिल्ली पैसेंजर के चार खाली डिब्बों में आग लग गई थी।
·         इसके बाद 12 नवंबर को पश्चिम बंगाल के खड़गपुर और ओडिशा के भुवनेश्वर तथा पुरी की कुल पांच ट्रेनों में आग लगने की सूचना आई।
·         हरिद्वार की तरह इन दो राज्यों में भी खाली ट्रेनों को निशाना बनाया गया।
·         सीसीटीवी फुटेज के आधार पर तमिलनाडु के सुभाष रामचंद्रन को हिरासत में लिया गया है।
·         रामचंद्रन ने 12 नवंबर को कोलकाता से खड़गपुर और फिर भुवनेश्वर और पुरी की यात्रा की थी।
·         रामचंद्रन ने शुरू में खुद को मानसिकतौर पर बीमार बता कर अधिकारियों को धोखा देने की कोशिश की, लेकिन सख्त पूछताछ के बाद उसने चौंकाने वाले खुलासे किए।
·         उसने बताया कि ऐसे करने के एवज में चार मुस्लिम युवकों ने उसे पैसे दिए थे। पटाखों के विस्फोट से आग लगाने की शुरुआत की गई थी।
·         रामचंद्रन के मुताबिक, चारों मुस्लिम महाराष्ट्र के हो सकते हैं और इससे पहले हुए एक अन्य ट्रेन हमले में उनका हाथ था।
·         1 मई 2014 को चेन्नई में बेंगलुरू-गुवाहाटी एक्सप्रेस में हुए दोहरे धमाके में एक महिला की मौत हो गई थी, जबकि 14 अन्य घायल हुए थे।

·         अधिकारियों को आशंका है कि इसके पीछे मप्र की खंडवा जेल से भागे सिमी आतंकियों का हाथ हो सकता है। आईएम से लिंक को लेकर भी जांच जारी है।

Tuesday, November 24, 2015

'तमाशा' की प्रमोशन के लिए ट्रेन से दिल्‍ली पहुंच गए

रणबीर कपूर और दीपिका पादुकोण अपनी अपकमिंग फिल्‍म 'तमाशा' की प्रमोशन के लिए ट्रेन से दिल्‍ली पहुंच गए हैं। रणबीर-दीपिका जैसे ही ट्रेन से नई दिल्‍ली रेलवे स्‍टेशन पर उतरे फैन्‍स ने उन्‍हें घेर लिया।
रणबीर-दीपिका, फिल्‍म के डायरेक्‍टर इम्तियाज अली के साथ कल मुंबई से सुविधा एक्‍सप्रेस में बैठ दिल्‍ली के लिए रवाना हुए थे। फिल्‍म 27 नवंबर को सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है।
बता दें कि दीपिका और रणबीर इन दिनों फिल्‍म 'तमाशा' की प्रमोशन में जुटे हुए हैं। प्रमोशन के दौरान ये दोनों काफी तमाशा करते हुए नजर आ रहे हैं। दीपिका ने आखिरी पल में ट्रेन से सफर करने की इच्‍छा जाहिर की। इसके बाद फ्लाइट के टिकट तुरंत रद कराए गए और ट्रेन में बुकिंग कराई गई।
'तमाशा' के निर्देशक इम्तियाज अली हैं। दीपिका और रणबीर, इम्तियाज अली के साथ मुंबई से ट्रेन लेंगे और दिल्‍ली तक आएंगे। वैसे बता दें कि रणबीर ने इससे पहले कभी भारतीय रेल में सफर नहीं किया है। उन्‍होंने बताया, 'मैंने भारत में कभी ट्रेन में सफर नहीं किया है। हांलाकि मैं अमेरिका में एक बार ट्रेन में सफर कर चुका हूं। इसलिए यह दूसरी बार होगा जब मैं ट्रेन में सफर करूंगा।'

रणबीर और दीपिका इससे पहले फिल्‍म 'ये जवानी है दीवानी' में सिल्‍वर स्‍क्रीन पर साथ नजर आए थे। इस फिल्‍म को बॉक्‍स ऑफिस पर अच्‍छा रिस्‍पॉन्‍स मिला था। ऐसी उम्‍मीद लगाई जा रही है कि 'तमाशा' देखने के लिए भी सिनेमाघरों में खूब भीड़ जुटेगी।

ट्रेन से 80 लाख की ज्वेलरी से भरा बैग चोरी

 ट्रेन से 80 लाख की ज्वेलरी से भरा बैग चोरीहो गया, लेकिन उसके चेहरे पर जरा सी शिकन नहीं थी। उसने तत्काल ट्रेन से ही इंश्योरेंस कंपनी के एक एजेंट को मोबाइल लगाया और पूछा कि क्लेम लेने के लिए क्या-क्या जरूरी है। फिर वह ट्रेन की सीट के नीचे वापस अपना सारा सामान रखकर उसकी फोटो खींचने लगा। शिकायतकर्ता के पास बैठे पैसेंजर के इस बयान ने जीआरपी के सामने मामले की पूरी तस्वीर साफ कर दी। पुलिस ने इस मामले में खुलासा किया है कि ज्वेलरी का बैग चोरी नहीं हुआ था, बल्कि क्लेम लेने के लिए झूठा मामला बनाया गया। पूरे मामले का डायरी में लाने के लिए जीआरपी को 500 पन्नों की डायरी बनानी पड़ी।
डेढ़ करोड़ रुपए ट्रैक्स देते थे, फिर भी...
मुम्बई के व्यापारी ने इंश्योरेंस लेने के लिए हर काम अपना एक नंबर में किया। आयकर से लेकर टीडीएस जमा करने तक के एक-एक दस्तावेज संभालकर रखे। इतना ही नहीं व्यापारी साल में डेढ़ करोड़ इनकम टैक्स और टीडीएस जमा करता है। छानबीन में इन दस्तावेजों को देखने के बाद यह समझ आया कि ज्लेवरी के काम में कहीं भी गड़बड़ी न होना, कहीं ने कहीं संदेह पैदा कर रहा था।
मुम्बई से यूजी तक पैसेंजर के बयान दर्ज
- पूरे मामले को सामने लाने के लिए जीआरपी ने 13 टीम बनाई
- एक को गोपनीय तरीके से मुम्बई पूरा और दूसरी टीम को सर्वाजनिक रखा
- कोच में सफर कर रहे हर पैसेंजर की जानकारी मांगवाई गई
- एक-एक पैसेंजर के ऑडियो-वीडियो बयान दर्ज हुए
- पैसेंजर के बयान एक थे, लेकिन व्यापारी, एजेंट बयान बदल रहे थे।
किसकी क्या भूमिका
1.व्यापारी मुकेश रायमलानी और मनीष रायमलानी- मुम्बई में हीरो-जवाहरात को थोक का बिजनेस, जबलपुर के कई ज्वेलरी संचालकों को माल बेचते हैं।
2.एजेंट भामिल तोमड़िया- व्यापारी का एजेंट, जो माल की सेलिंग करने से लेकर माल की डिलेवरी तक का काम करता है।
3. कानूनी सलाहकार और मित्र अशोक जैन- यह पहले एडवोकेट थे, अब व्यापारी के कानूनी सलाहकार की जिम्मेदारी निभाते हैं।
इनसे मिली क्लू
- फोन की डिटेल
- रिजर्वेशन चार्ट
- स्टेशन के कैमरे
- पैसेंजर के बयान
बार-बार बदले बयान
- व्यापारी का कहना था कि उसे मुम्बई में अपनी दुकान से माल बैग में रखा और फिर उसे लेकर घर आया और फिर अपने एजेंट को दे दिया। इधर एजेंट का कहना था कि वह खुद बैग लेकर दुकान से घर आया और फिर वहां से स्टेशन चला आया। शिकायतकर्ता के एक बयान ने जांच अधिकारियों का चौंका दिया। उसने बताया कि वह सुबह ट्रेन में मुम्बई से बैठा और इटारसी तक गेम खेलते आया। इटारसी से जबलपुर के बीच 3 घंटे के सफर में वह सो गया

Monday, November 23, 2015

रियायत और लोअर बर्थ देने के आदेश

रेलवे ने स्लीपर क्लास में विकलांगों के लिए दो सीटों का कोटा आरक्षित करने के आदेश दिए हैं। विकलांग कोटे से दोनों सीटें आरक्षित होने के बाद भी अन्य विकलांगों को भी लोअर बर्थ अलाट की जाएगी। यदि विकलांग कोटे से दोनों सीटें खाली रह जाती हैं तो इन्हें एक एक कर सीनियर सीटीजन या फिर आरएसी को जारी कर दिया जाएगा।
रेल मंत्रालय 22 दिसंबर से पहले यह आदेश लागू करने और साफ्टवेयर को अपडेट करने के आदेश जारी कर दिए हैं। सूत्रों के मुताबिक स्लीपर कोच में दो तरह के विकलांगों का कोटा है। एक विकलांग जो अपने सहायक को लेकर यात्रा करते हैं और दूसरा विकलांग पर निर्भर है कि वह सहायक को साथ लेकर जाना चाहता हैं या नहीं। इनमें विकलांग को लोअर बर्थ और सहायक या मददगार को मिडिल बर्थ अलाट की जाती है।
रेल मंत्रालय को शिकायत मिली थी कि विकलांग खुद यात्रा करना चाहता है तो उसे कोटे से दूर रखा जाता है। मंत्रालय ने स्पष्ट हिदायत जारी कर दी है कि रियायती टिकट पर यदि विकलांग अकेला भी यात्रा करना चाहता है तो उसे लोअर बर्थ अलाट की जाए और साथ वाली बची मिडिल बर्थ सीनियर सीटीजन को अलाट कर दी जाए।

विकलांग कोटा अलाट करने में पहले आओ, पहले पाओ की नीति है। कोटा खत्म होने के बावजूद अन्य विकलांगों को लोअर बर्थ जारी करने के आदेश जारी किए गए हैं। यह सुविधा हर ट्रेन के स्लीपर कोच में दी जाएगी, खासतौर पर विकलांग कोटा एक ही डिब्बे में आमने सामने की सीट पर अलाट किए जाने का प्रयास किया जाएगा। जिन विकलांगों को डाक्टरों द्वारा प्रमाण पत्र जारी किया गया है उन्हीं को ही रियायत और लोअर बर्थ देने के आदेश हैं।

Wednesday, November 18, 2015

ई-टिकट वालों को राहत

ट्रेनों में अब वीवीआईपी को पांच घंटे पहले सीट आवंटित होगी। अभी तक कोटा आवंटित न होने तक अफसर मनमानी कर चार्ट बनाने की प्रक्रिया रुकवा देते थे। नए नियम के मुताबिक कोटा आवंटित हो या नहीं कंप्यूटर खुद चार्ट बना देगा। सोमवार को एसएमएस कर इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए गए थे। इसके तहत 18 नवंबर से चार्ट चार घंटे पहले बनाने की नई व्यवस्था लागू हो रही है। अन्य जोन की तरह दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे में भी यह व्यवस्था लागू हो रही है।
दरअसल चार्ट को देरी से बनाने का मुख्य कारण वीवीआईपी कोटा है। अलॉटमेंट देरी से होने के कारण चार्ट बनाने की प्रक्रिया रुकी रहती है जिसका खामियाजा मुसाफिरों को भुगतना पड़ता है। नेट हो या रेलवे की पूछताछ सेवा, मुसाफिर बार-बार चेक करता रहता है कि उसकी सीट कंफर्म हुई या नहीं। वहीं अफसर इस माथापच्ची में रहते हैं कि किस वीवीआईपी को सीट अलॉट करें। ट्रेनों में हर क्लॉस में वीवीआईपी कोटे की सीटें होती हैं।
कई बार शताब्‍दी, राजधानी, दूरंतो, गरीब रथ जैसी ट्रेनों में वीवीआईपी की सीटें अधिक देने की सिफारिश आ जाती है। चार्ट चार घंटे पहले बनाए जाने के कारण अब आधा घंटा पहले तय करना होगा। ऐसा नहीं हुआ तो कंप्यूटर खुद चार्ट बना देगा। चार्ट तैयार होने के तुरंत बाद एक बार फिर उक्त ट्रेन के लिए मौजूद आरक्षण पीआरएस खिड़कियां व इंटरनेट (ई- टिकट) पर खुल जाएगा और यात्री सीट खाली रहने की स्थिति में अगर आरएसी या प्रतीक्षा सूची नहीं है तब लंबी दूरी या फिर कम दूरी की यात्रा के लिए ट्रेन में सीट बुक करा सकते हैं। यह प्रकिया पूरी होने के बाद दूसरा चार्ट ट्रेन छूटने के आधे घंटे पहले जारी होगा। जो सीधे टिकट चेकिंग स्टॉफ को उपलब्ध कराया जाएगा। रेलवे का मानना है कि इस नई व्यवस्था से सीटों की अधिकतम उपयोग होगा।
ई-टिकट वालों को राहत

चार घंटे पहले चार्ट बनने से ई-टिकट बनवाने वाले मुसाफिरों को सबसे ज्यादा राहत मिलेगी। अब सीटें खाली होने पर आधा घंटा पहले एक चार्ट बनेगा। इसके जरिए ई टिकट वाले मुसाफिर आधा घंटा पहले भी टिकट बुक करा सकेंगे। इस दौरान सीट खाली होने की स्थिति में उन्हें कंफर्म सीट मिल जाएगी और वे आराम से सफर कर सकते

Monday, November 16, 2015

ट्रेन आने से 30 मिनट पहले तक ई-टिकट मिलेगा

यह खबर यात्रियों के लिए राहतभरी है। आरक्षण केंद्र की विंडो पर रेल टिकट के लिए यात्रियों को लंबी लाइन में लगने के बावजूद टिकट नहीं मिल पाता, लेकिन अब यात्रियों को इस समस्या से जल्द निजात मिल जाएगी। इसके लिए रेलवे बोर्ड ने इंडियन रेलवे कैटरिग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (आईआरसीटीसी) को हरी झंडी दे दी है। आईआरसीटीसी सिस्टम में बदलाव के लिए जुट चुका है। सिस्टम 30 नवंबर तक दुरुस्त हो जाएगा। एक दिसंबर से यात्रियों को ट्रेन आने से 30 मिनट पहले तक ई-टिकट मिलेगा। अभी तक 16 घंटे पहले तक ई-टिकट मुहैया हो सकता है।

Friday, November 13, 2015

विंडो से रेल टिकट बुक कराने पर भी एसएमएस

ई-टिकट की तर्ज पर पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (पीआरएस) यानी विंडो से रेल टिकट बुक कराने पर भी एसएमएस मिलेगा। रिजर्वेशन फॉर्म में यात्री द्वारा दिए गए मोबाइल नंबर पर रेलवे एसएमएस भेजेगी। टिकट के साथ ही यात्रियों के मोबाइल में भी टिकट का ब्योरा रहेगा। इसका फायदा यह होगा की एसएमएस के जरिए ट्रेन के आगमन-प्रस्थान आदि की जानकारी साथी यात्रियों को दी जा सकेगी।
साथ ही टिकट गुम होने पर पीएनआर व अन्य जानकारी मैसेज में होने पर यात्री नया टिकट बनवा सकेंगे व टिकट कैंसल करा सकेंगे। विंडो टिकट में अभी टिकट कन्फर्म होने या कैंसिल होने पर एसएमएस अपडेट दिया जाता है।

रेलवे बोर्ड के डिप्टी डायरेक्टर ट्रैफिक एंड कामर्शियल संजय मनोचा ने सभी महाप्रबंधकों को इस संबंध में दिशा निर्देश जारी कर दिए हैं। उन्होंने सॉफ्टवेयर में बदलाव के लिए सेंटर फॉर रेलवे इन्फॉरमेशन सर्विसेस (क्रिस) को भी निर्देश जारी किए हैं।

Thursday, November 12, 2015

ट्रेन रवाना होने के आधा घंटा पहले तक टिकट बुकिंग की सुविधा देने का फैसला किया

यात्रियों के हित में एक बड़ा कदम उठाते हुए रेल विभाग ने ट्रेन रवाना होने के आधा घंटा पहले तक टिकट बुकिंग की सुविधा देने का फैसला किया है। इसके लिए 12 नवंबर से टिकट आरक्षण की वर्तमान प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया जा रहा है।
रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस समय यात्रियों की आरक्षण सूची एक बार जारी की जाती है। लेकिन आगे से यह सूची दो बार जारी की जाएगी। पहली सूची गाड़ी के प्रस्थान करने से चार घंटे पहले तैयार होगी और दूसरी सूची आधा घंटा पहले तैयार की जाएगी।
नए प्रावधानों के अनुसार, पहली सूची तैयार होने के बाद भी सीटें उपलब्ध रहने पर इंटरनेट से टिकट का आरक्षण जारी रहेगा। कुछ चुने हुए ट्रेनों में काउंटर से भी टिकट कटाने की सुविधा रहेगी।

रेलवे ने संबंधित विभागों को सख्त हिदायत दी है कि गाड़ी के प्रस्थान करने से चार घंटा पहले हर हाल में आरक्षण तालिका बनाकर जारी कर दी जाए, ताकि समय रहते यात्रियों को स्थिति का पता चल सके। इस कवायद से अधिकतम बर्थ का इस्तेमाल भी सुनिश्चित हो सकेगा। इसके अलावा आरक्षण चार्ट बनाने में जान-बूझकर देरी और धांधली की शिकायतों का भी समाधान हो सकेगा।

Tuesday, November 10, 2015

शुभकामनायें

साथियों ,

आप सभी को तथा सभी के परिवार को  मेरी और मेरी पत्नी की ओर से दीपावली की  हार्दिक
शुभकामनायें

Monday, November 9, 2015

यात्री के पास गुल्लक में बम

सियालदह राजधानी एक्सप्रेस के एक यात्री के पास गुल्लक में बम मिलने से कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर सनसनी फैल गई। जीआरपी ने यात्री को हिरासत में लिया है।
प्रदेश की प्रमुख औद्योगिक नगरी कानपुर में आज कानपुर रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों की चेकिंग हो रही थी। इस दौरान सियालदाह राजधानी एक्सप्रेस में एक यात्री के पास गुल्लक में बम मिला। बम डिस्पोजल स्क्वाड ने इसको बारूद बताया। ट्रेन की बम की सूचना के बाद प्लेटफार्म पर सनसनी फैल गई। जीआरपी ने यात्री को अपनी हिरासत में लिया है। उससे पूछताछ जारी है।
नवाबगंज कर्बला के पास मिला बम

कानपुर में दीपावली त्यौहार के चलते जहां शहर का मौहाल खुश मिजाज बना हुआ है वहीं कल नवाबगंज में कर्बला के पास बम की अफवाह से सनसनी फैल गई नवाबगंज पुलिस के साथ बीडीएस टीम पहुंच गई। टीम की छानबीन के बाद मामला फर्जी निकला। कल नवाबगंज में कर्बला के पास सड़क के किनारे कुछ डिब्बे पड़े थे। यह देखकर किसी ने क्षेत्र में बम की अफवाह फैला कर सूचना पुलिस को दे दी। वहीं बम की जानकारी मिलने पर इलाके में दहशत फैल गई। पुलिस मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने पूरे इलाके को बंद करते हुए जांच के लिए बीडीएस टीम को वहां बुलाया। बम निरोधक दस्ते ने डिब्बे की जांच की तो उसमे कुछ भी नहीं था। बीडीएस टीम ने पड़े डिब्बे को फर्जी बताया है और कहा कि किसी ने इस शहर के मौहाल को बिगाडऩे के लिए यह किया है।

Friday, November 6, 2015

भोपाल में लगेंगे दो एस्केलेटर और लिफ्ट, दिसंबर तक तैयार होगा नया एफओबी

भोपाल स्टेशन के रिजर्वेशन काउंटर पर वॉयस रिकार्ड सिस्टम लगेगा। इस सिस्टम के लगने से रिजर्वेशन क्लर्क यदि आपको बेवजह खुल्ले के लिए परेशान करेगा या आपकी बारी में किसी और का आरक्षण करेगा तो ये सभी बातें रेलवे अधिकारियों तक पहुंच जाएगी और फिर उस पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। 
दरअसल, वॉयस रिकार्डर में रिजर्वेशन कराने वाले यात्री और रिजर्वेशन क्लर्क के बीच बातचीत रिकार्ड हो जाएगी। इसे डीआरएम, सीनियर डीसीएम व अन्य अधिकारी कभी भी सुन सकते हैं। हबीबगंज आरक्षण केन्द्र के कुछ विंडों में इसका प्रयोग सफल रहा है। भोपाल के अलावा दूसरे आरक्षण केन्द्रों में भी ऐसे रिकार्डर लगाए जाएंगे। डीआरएम आलोक कुमार ने कहा कि हबीबगंज आरक्षण केन्द्र में वॉयस रिकार्डर लगने के बाद महीने भर में दुर्व्यवहार की एक भी शिकायत नहीं मिली है। इसके पहले दो-तीन शिकायतें हर माह आ जाती थीं। उन्होंने बताया कि किसी भी विंडों से रिकार्डिंग के कुछ अंश सुने जाते हैं। 
भोपाल में लगेंगे दो एस्केलेटर और लिफ्ट, दिसंबर तक तैयार होगा नया एफओबी 
डीआरएम आलोक कुमार ने बताया कि भोपाल स्टेशन में नया फुट ओवर ब्रिज (एफओबी) इस साल दिसंबर तक तैयार हो जाएगा। पहले 28 नवंबर तक इसे पूरा करने की तैयारी थी, पर काम में देरी के चलते इसे आगे बढ़ा दिया गया है। उन्होंने बताया कि नया एफओबी तैयार होने के बाद इसमें छह नंबर प्लेटफार्म की ओर से चढ़ने और उतरने के लिए एक-एक एस्केलेटर लगाए जाएंगे। पुराने एफओबी पर भी दो लिफ्ट लगाए जाएंगे। मार्च के पहले यह काम पूरा हो जाएगा।
यह भी होगा 
-भोपाल-बीना के बीच तीसरी लाइन का काम पहले अगले साल जून तक पूरा करने लक्ष्य था, लेकिन यह काम अब 31 मार्च तक पूरा करना है। 144 किमी के सेक्शन में अभी 71 किमी चालू है।
- हबीबगंज के री-डेवलपमेंट के लिए नवंबर के अंत तक फाइनेंसियल बिड बुलाई जाएगी। 
-भोपाल स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर छह की ओर स्टेशन बिल्डिंग के लिए 5 करोड़ स्वीकृत हुए हैं। इससे टिकट विंडो और वेटिंग हॉल बनाया जाएगा। 
- हबीबगंज-इटारसी तीसरी लाइन में हबीबगंज-बरखेड़ा और बुदनी-इटारसी सेक्शन में काम शुरू हो गया है। बरखेड़ा-बुदनी घाट सेक्शन है। यहां वन विभाग से भी एनओसी लेना पड़ेगी, इसलिए यहां सबसे बाद में काम शुरू होगा। 
- आरपीएफ के 150 जवान मिल गए हैं, जिससे अब 90 मंडल से गुजरने वाली ट्रेनों में स्काटिंग की जा रही है। इसके अलावा 34 ट्रेनों में जीआरपी स्काटिंग कर रही है।
यह रहीं उपलब्धियां 
- इटारसी को क्लीन ट्रेन स्टेशन बनाया गया है। दूर से आने वाली ट्रेनों की यहां भी सफाई की जाएगी। 
-भोपाल मंडल सितंबर के बाद एक भी बिना चौकीदार वाला रेल फाटक नहीं है। 8 जगह सब वे व बाकी जगह चौकीदार लगाए गए हैं। 

-भोपाल, हबीबगंज समेत छह स्टेशनों पर मशीनों से सफाई की जा रही है। होशंगाबाद व हरदा में भी जल्द मैकेनाइज्ड क्लीनिंग शुरू होगी।

रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में साफ-सफाई- सौहार्द की गंगा-जमुनी तहजीब

देश में असहिष्णुता को लेकर छिड़ी बहस के बीच रेलवे ने साफ-सफाई के मामले में सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल पेश की है। रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों को साफ-सुथरा बनाए रखने में जिस तरह विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने मिल-जुलकर कार्य किया है उससे रेलमंत्री सुरेश प्रभु खासा प्रभावित हैं। उन्होंने इसकी सराहना की है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान का सबसे ज्यादा असर अगर कहीं दिखाई देता है तो वह शायद रेलवे में। पिछले एक साल में रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में साफ-सफाई के स्तर में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल रहा है। लेकिन इसमें रेलकर्मियों से ज्यादा जन प्रतिनिधियों, निजी प्रतिष्ठानों और धार्मिक व सामाजिक स्वयंसेवी संगठनों की भूमिका है। खासकर धार्मिक संगठनों ने अभियान के जरिए सामाजिक सौहार्द की गंगा-जमुनी तहजीब पेश की है।
इन धार्मिक संगठनों में हिंदू, मुसलिम, सिख, ईसाई समेत सभी समुदायों से जुड़े लोग शामिल हैं। उदाहरण के लिए जहां महाराष्ट्र में कर्मयोगी प्रतिष्ठान के लोगों को मुंबई के किंग्स सर्किल स्टेशन की सफाई का जिम्मा लेते देखा गया है। वहीं संत निरंकारी चेरिटेबल फाउंडेशन के लोगों को कानपुर, मथुरा, पुणे जैसे स्टेशनों में सफाई करते पाया जाता है।
केरल में ईसाई मिशनरियों से जुड़े लोग कभी-कभी स्टेशनों व ट्रेनों को चमकाते देखे जा सकते हैं। जबकि गुरदासपुर स्टेशन की सफाई में मुसलिम संगठनों की भूमिका भी देखी गई है। गुरमीत राम रहीम के डेरा सच्चा सौदा से जुड़े लोग राजस्थान में अजमेर अथवा हरियाणा में हिसार जैसे स्टेशनों पर अक्सर झाड़ू लगाते देखे जाते हैं।
रेलमंत्री का गृह प्रदेश होने के नाते महाराष्ट्र में सांप्रदायिक सौहार्द के इस स्वच्छ स्वरूप की झलक मध्य रेलवे के 29 और पश्चिम रेलवे के 11 स्टेशनों में देखी जा सकती है। यहां रोटरी इंटरनेशनल से लेकर विद्यासागर इंस्टीट्यूट जैसे अनेक शैक्षिक प्रतिष्ठान सफाई से जुड़े हुए हैं।
गुजरात के वडोदरा में सेवादल के स्वयंसेवकों को भी कभी-कभार रेलवे स्टेशनों की सफाई करते देखा जा सकता है। दूसरी ओर महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली जैसे संपन्न राज्यों में निजी कंपनियों के ट्रस्ट अस्वच्छ छवि से निजात दिलाने में रेलवे की मदद कर रहे हैं।

रेलमंत्री सुरेश प्रभु के अनुसार इन संगठनों की भूमिका भले ही रेलवे के सफाईकर्मियों की तरह दैनिक व नियमित न हो। लेकिन ये लगभग हर माह किसी न किसी स्टेशन या ट्रेन में पहुंचते हैं और पूरी श्रद्धा और लगन के साथ सफाई को अंजाम देते हैं। इनके समर्पण से रेलकर्मियों में भी उत्साह बढ़ा है।

Wednesday, November 4, 2015

रेलवे लंबी दूरी की ट्रेनों से पैंट्री कार खत्म करने जा रही है

भारतीय रेलवे लंबी दूरी की ट्रेनों से पैंट्री कार खत्म करने जा रही है। इसका क्रियान्वयन भारतीय रेलवे कैटरिंग और पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) द्वारा ई-कैटरिंग सर्विस की शुरुआत के साथ कर दिया गया है। हालांकि, रेलवे के इस कदम से फिलहाल यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
इनमें से कुछ ट्रेनें ऐसी भी हैं जो नाश्ता, लंच या डिनर के समय ऐसे स्टेशनों से होकर गुजरतीं हैं, जहां ई-कैटरिंग सुविधा उपलब्ध नहीं है। इस कारण अब मुसाफिरों को अपने साथ खाना लेकर चलने या बिना भरोसे वाले प्राइवेट कैटरर की सुविधाओं पर निर्भर रहना होगा। इसके अलावा उनके पास और कोई विकल्प नहीं बचेगा।
पूर्व रेलवे ने विज्ञप्ति जारी कर बताया है कि हावड़ा-देहरादून उपासना एक्सप्रेस और हावड़ा-हरिद्वार कुंभ एक्सप्रेस से पैंट्री कार सेवा खत्म कर ली जाएगी। दोनों ट्रेने हावड़ा से दोपहर 1 बजे चलती हैं, तो दोपहर के खाने की तो कोई समस्या नहीं होगी। हावड़ा स्टेशन पर ई-कैटरिंग सुविधा भी उपलब्ध है। शाम के स्नैक्स आसनसोल स्टेशन से लिए जा सकते हैं। पटना में रात का खाना आसानी से मिल जाएगा क्योंकि यहां भी दोनों स्टेशनों पर ई-कैटरिंग सर्विस दी जा रही है। लेकिन, समस्या अगले दिन के लंच की है। लखनऊ से चारबाग और हरिद्वार से देहरादून तक किसी भी स्टेशन पर ई-कैटरिंग सुविधा नहीं मिलेगी।

इससे यह बात तो साफ है कि पैंट्री कार हटाने का रेलवे का फैसला यात्रियों की समस्या का कारण बनने वाला है।

एक हैंड बैग चोरी हो गया- दूरंतो एक्सप्रेस

बीते 4 जनवरी को दूरंतो एक्सप्रेस से सफर कर रहे ठाणे निवासी अखिलेश पांडेय व उनके परिवार का एक हैंड बैग चोरी हो गया और उन्होंने इसके मिलने की आस छोड़ दी थी।
सफर के दौरान चोरी गए इस हैंडबैग में सवा लाख रुपए का मंगलसूत्र, 8 हजार रुपए का मोबाइल, चांदी की ग्लास, अखिलेश का पर्स जिसमें साढ़े तीन हजार रुपए नकद सहित ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड, कई डेबिट व क्रेडिट कार्ड्स रखे हुए थे। इनकी चोरी के बाद उन्होंने इनके मिलने की आस छोड़ दी थी। हालांकि, उन्होंने इसकी चोरी की एफआईआर पुलिस में दर्ज करवा दी थी।
चोरी के काफी दिनों बाद फरवरी माह में अखिलेश को डाक से एक लिफाफा मिला। उन्होंने लिफाफा खोला तो उनके आश्चर्य की कोई सीमा नहीं रही क्योंकि लिफाफे में उनका पैन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस था। उन्होंने तुरंत लिफाफा देखा और पाया कि यह इगतपुरी पोस्ट ऑफिस से भेजा गया है। उनका बैग भी इगतपुरी से चोरी हुआ था।

पैन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस मिलने से खुश अखिलेश ने बताया कि चोर ने आधी ईमानदारी दिखाई है। उसने गहने व नकद अपने पास रख लिए और उनके जरूरी कागजात वापस भेज दिए। उन्होंने लिफाफे को इगतपुरी रेलवे पुलिस को सौंप दिया है और इसके आधार पर आगे की छानबीन कर रही है।

Monday, November 2, 2015

रेल टिकट कन्फर्म (आरक्षित) न होने से फिक्रमंद मुसाफिरों के लिए खुशखबरी

रेल टिकट कन्फर्म (आरक्षित) न होने से फिक्रमंद मुसाफिरों के लिए खुशखबरी। रेलवे एक नवंबर यानी आज से वेटिंग (प्रतीक्षारत) टिकट वाले यात्रियों को कन्फर्म (आरक्षित) सीट देने की योजना शुरू करने जा रही है। विकल्प नामक इस योजना के तहत वेटिंग टिकट वाले मुसाफिरों को उसी रूट पर चलने वाली अगली ट्रेन में कन्फर्म सीट मिलेगी, बशर्ते उन्होंने इंटरनेट से टिकट बुक किया हो और इस विकल्प को चुना हो।
रेल मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इंटरनेट के जरिये टिकट बुक कराते समय विकल्प योजना का चुनाव करना होगा। इसके बाद रेलवे मुसाफिर को उसके मोबाइल फोन पर वैकल्पिक ट्रेन में कन्फर्म सीट दिए जाने का एसएमएस भेज देगा। इस योजना को प्रयोग के तौर पर दिल्ली-लखनऊ और दिल्ली जम्मू रेल खंड पर चलने वाली चुनिंदा मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों में शुरू किया जा रहा है।

इससे रेलवे के दो उद्देश्य पूरे होंगे। पहला प्रतीक्षारत मुसाफिरों को आरक्षित सीट प्राप्त हो जाएगी। दूसरा उसी रूट पर चलने वाली अन्य ट्रेनों की रिक्त सीटें भर जाएंगी। अधिकारी के मुताबिक, प्रयोग सफल रहा तो योजना को टिकट बुकिंग काउंटर (खिड़की) पर भी शुरू किया जाएगा। साथ ही इसे अन्य रेल खंड में चलने वाली ट्रेनों में भी लागू किया जाएगा।