रेलवे में टीटीई की नई भर्ती पर अंकुश लगेगा, जबकि
मौजूदा टीटीई को टिकट चेकिंग के बजाय यात्रियों की देखभाल के काम में लगाया जा
सकता है। रेल मंत्रालय इस योजना पर काम कर रहा है। सातवें वेतन आयोग की रिपोर्ट से
उसका काम आसान हो गया है।
आयोग ने अपनी रिपोर्ट में टीटीई/टीसी, इंक्वायरी-
कम-रिजर्वेशन क्लर्क (ईसीआरसी) और कमर्शियल क्लर्क को कमर्शियल व टिकट चेकिंग
स्टाफ मानते हुए इनके मर्जर की सिफारिश की है। इनके लिए मौजूदा छह के बजाय चार
ग्रेड पे सुझाए हैं। इसका सर्वाधिक लाभ टीटीई व टीसी को मिलेगा, लेकिन इन पर रेलवे के खर्च में बढ़ोतरी हो जाएगी क्योंकि बुकिंग क्लर्क व
ईसीआरसी के मुकाबले टीटीई/टीसी का वेतन और संख्या दोनों ज्यादा है। यही वजह है कि
रेलवे इनकी संख्या सीमित करने व मौजूदा टीटीई से दूसरे काम लेने पर विचार कर रहा
है।
कर्मचारी संगठनों ने उक्त तीनों श्रेणियों के वेतनमान
में बढ़ोतरी की मांग की थी। जबकि रेलवे बोर्ड का सुझाव था कि चूंकि आरक्षित व अनारक्षित
टिकटों की बुकिंग में प्रौद्योगिकी का बड़े पैमाने पर उपयोग होने लगा है लिहाजा अब
इनकी उतनी जरूरत नहीं है।
हालांकि ट्रेनों की बढ़ती संख्या के कारण यूनियनों की
ओर से इनकी भर्ती बढ़ाने का दबाव बढ़ता जा रहा है। इस दबाव से निजात पाने का एक ही
तरीका है कि टिकटिंग स्टाफ की भर्ती की न्यूनतम योग्यता मैट्रिक से बढ़ाकर स्नातक
कर दी जाए।
रेलवे बोर्ड के सदस्य वाणिज्यिक शरत चंद्र जेठी ने
रिफंड नियमों में बदलाव व रद्दीकरण शुल्क में बढ़ोतरी के फैसले को सही ठहराते हुए
कहा है कि इससे टीटीई की मिलीभगत से चलने वाले दलालों के धंधे पर अंकुश लगा है।
इसका प्रमाण यह है कि 13 से 20 नवंबर के दौरान बुकिंग में 10
फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। ऐसा प्रतीक्षा सूची के टिकट रद्द कराए जाने
व नई बुकिंग होने से संभव हुआ है।
पहले टिकट कन्फर्म न होने पर लोग टीटीई की मदद लेते थे। अब चाहेंगे तो भी
यह संभव न होगा, क्योंकि इसके लिए टीटीई ही नहीं होंगे। वहीं, ऑल इंडिया रेलवेमेन्स फेडरेशन के महासचिव शिवगोपाल मिश्रा के अनुसार अभी
मात्र 48-49 हजार टीटीई हैं। बीस हजार टीटीई की मांग थी।
जिसमें पांच हजार की भर्ती हो रही है। इनकी संख्या घटने से आमदनी में और कमी आएगी।