चलती ट्रेन में खाना खाने के लिए उपयुक्त स्थान न होना और चाय व ठंडे पानी
के लिए यात्रियों को आने वाले समय में भटकना नहीं होगा। यात्रियों को इस तरह की
सुविधाएं बोगियों के भीतर मिलेंगी। इसके लिए रेलवे अपनी बोगियों की आंतरिक डिजाइन
को बदलने जा रहा है।
इस काम में रेलवे विदेशी विशेषज्ञों की मदद लेगा। यह विशेषज्ञ नौ और 10 अक्टूबर
को दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित एक इंटरनेशनल सेमिनार में जुटेंगे। यहां
रेलमंत्री सुरेश प्रभु और रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा की मौजूदगी में रेलवे बोर्ड
और उत्तर रेलवे के अधिकारी बोगियों की डिजाइन बदलने के प्रोजेक्ट पर मंथन करेंगे।
दरअसल तत्कालीन रेलमंत्री पवन बंसल ने आरामदायक सफर के लिए अनुभूति बोगियों
का डिजाइन करने का आदेश दिया था, जिसमें ऊपर की सीट पर चढऩे के लिए भी
सीढिय़ों का प्रावधान था। यह डिजाइन सुरक्षा मानकों पर खरी तो नहीं उतरी, साथ ही इनकी लागत भी अधिक रही।
इसे देखते हुए अब रेलवे नए सिरे से अपनी बोगियों के डिजाइन तैयार करने पर
विचार कर रहा है। इसके तहत संरक्षा मानकों के अनुसार सीटों की संख्या बढ़ाने के
साथ बेहतर सेवा देने की व्यवस्था की जाएगी। इंस्टीट्यूट ऑफ रोलिंग स्टॉक इंजीनियरिंग
और इंडियन रेलवे सर्विस ऑफ मैकेनिकल इंजीनियरिंग एसोसिएशन की ओर से दो दिवसीय रेल
कोच इंटीरियर इंटरनेशनल सेमिनार का आयोजन किया जाएगा।
इसमें 12 देशों के कई नामचीन इंटीरियर डिजाइनर विशेषज्ञ हिस्सा
लेंगे। यहां रेल कोच फैक्ट्री कपूरथला के अधिकारी भी होंगे। सेमिनार में बोगियों
के भीतर और बाहर का लुक बेहतर करने पर चर्चा होगी। रसोई यान में यात्री अपना खाना
खुद परोस सके इसके लिए बुफे और बोगियों में वेंडिंग मशीन लगाने पर भी चर्चा होगी।
रेलवे बोर्ड की तरफ से ईडीएमई कोचिंग शैलेंद्र सिंह ने बताया कि यात्रियों
के आरामदायक सफर के लिए अब बोगियों की नए सिरे से डिजाइन तैयार करने पर विचार चल
रहा है। इसके लिए विदेशी डिजाइनरों की मदद ली जाएगी।
No comments:
Post a Comment