रेलवे भर्ती परीक्षा में 96 फीसद अंक हासिल करने वाले ललित
कुमार को रेलवे नौकरी नहीं दे रहा है। उन्होंने दिसंबर 2013 में
उत्तर रेलवे की ग्रुप डी परीक्षा में हिस्सा लिया था। मगर, रेलवे
भर्ती प्रकोष्ठ को लगता है कि यह अंक ललित ने 'गलत तरीके'
से हासिल किए हैं। ऐसे में उसे रेलवे ने नौकरी देने के लिए कॉल नहीं
किया।
31 साल
के ललित ने इस बात से निराश होकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मदद मांगी है।
दरअसल, भर्ती परीक्षा का परिणाम आने पर ललित का चयन नहीं
हुआ। उन्हें पूरी उम्मीद थी कि वह परीक्षा में पास हुए हैं, लिहाजा उन्होंने सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत जानकारी मांगी।
एक साल बाद ललित को दिए गए जवाब में बताया गया कि उसकी उम्मीदवारी रेलवे
भर्ती प्रकोष्ठ ने इसलिए रद्द कर दी, क्योंकि उनके अंक कट-ऑफ
से ज्यादा हैं। प्रकोष्ठ का मानना है कि यह अंक उसने परीक्षा में किसी गलत तरीके
का इस्तेमाल करके हासिल किए हैं। ललित ने बताया कि वह गरीब परिवार से हैं और उनके
लिए यह परीक्षा काफी मायने रखती है।
वर्तमान में इग्नू से बैचलर ऑफ सोशल वर्क की पढ़ाई कर रहे ललित अपने परिवार
की देखभाल के लिए दिल्ली परिवहन निगम में कंडक्टर का काम भी कर रहे हैं। इस जबाव
से असंतुष्ट ललित बड़ौदा हाउस में स्थित उत्तर रेलवे के कार्यालय में केंद्रीय जन
सूचना अधिकारी के पास जाते रहे।
वहां उन्हें बताया गया कि वह केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) में अपील दायर
करें। ललित ने बताया, मैंने प्रथम अपील प्राधिकरण (एफएए) और सीआईसी में अपनी
अपील दायर की। सीआईसी ने जुलाई 2015 का समय सुनवाई के लिए तय
किया, लेकिन एफएए ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

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