Tuesday, November 4, 2008

मराठी माणुस को नौकरी कहां से मिलेगी

जाते-जाते किया कमाल
पश्चिम रेलवे के पूर्व महाप्रबंधक श्री अनूप कृषझिंगरन ने जाते जाते कम से कम १०० लोगों को नौकरी के बहाने वाहवाही लूटी है । कहते है कि ये नौकरियां लगवाने वालों की चांदी हो गई है । विशवस्त सूत्रों के जरिये पता चला है कि प्रति व्यक्ति नौकरी केलिए कम से कम 2लाख रूपयेलिए गए हैं । ये रकम कहां गई , इसपर अभी भी जांच होनी चाहिये ।
ऐसा कहा जाता है कि पूर्व में भी श्री आर के राव ने काफी लोगों को इसी तरह से नौकरियां दी थी, और उसकापरिणााम यह हुआ कि उन्हें पदोन्नति देकर रेलवे बोर्ड भेज दिया गया ।
जो भी महाप्रबंधक जाता है तो जाते समय ही श्रेणी ४ में लोगों को क्यो भर्ती करता है इसकी जांच होनी चाहिये तथा इसपर मार्गदर्शी निर्देश भी रेलवे बोर्ड को जारी करने चाहिये ।
सुना तो यहा तक है कि रेल मंत्री के यहां से ही भर्ती की लिस्ट आती है, तो स्वाभाविक है कि मराठी माणुस को नौकरी कहां से मिलेगी, यह प्रश्न अनसुलझा है । और यदि मंत्री ही बिहारियों को भर्ती कराते रहे तो लोकल भी शोर-शराबा करेगे, इसमें संदेह नहींहै ।
हमारी मांग हे कि इस कांड की पूरी जांच होनी चाहिये तथा इन भर्तियों पर तुरंत रोक लगाई जानी चाहिये ।

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