Sunday, November 2, 2008

रेल समाचार

आदरणीय संपादक महोदय,रेल समाचार, आपका इरपोफ के महामंत्री महोदय के साथ हुए साक्षात्कार को कृपया देखने का कष्ट करें, आप द्वारा पूछे गए प्रश्नों को उन्होने कहीं कहीं बेबाक तो कहीं गोल उत्तरदिए हैं । मैं अपनी प्रतिक्रिया निम्न प्रकार व्यक्त करना चाहता हूं ।प्रथमदृष्टया व्यक्तिगत रूप से सर्वदा मैं अपने आपको उनसे ,उनकी कार्यशैली और सार्वजनिक व्यवहार के संबंध में अपने आप को असहमत पाता हू । परन्तु आपके लोकप्रिय समाचार में पूरा साक्षात्कार देखने के बाद मुझे यह प्रतीत होता है कि मैं Mis-Informed था, या भ्रांति का शिकार रहा ।मुझे दुख इस बात का है कि इरपोफ के बडे बडे नाम सहयोग और सहकार देने के बजाय अब भी पदासीन शैली में विद्यमान तंत्र की उपेक्षा कर , अपने आप को आगे बढाने का कुप्रयास कर रहे हैं । विद्यमान महामंत्री , पूर्व प्रभावशील मंडली की ही देन है, और अब जब वह स्वतंत्र और स्वविवेक और सूझ बूझ से कार्य करता है तो उसे दुत्कारना और निजी चर्चा में आलोचना करना व सार्वजनिक रूप से निरूत्साहित करना, श्रेयस्कर हो ही नहीं सकता, उनका धर्म नई पीढी को सहयोग देना है । जहां तक विद्यमान नेतृत्व की उपयोगिता का सरोकार है, यह उन्होने सिद्ध् किया है । डीपीसी को रेग्यूलर करवाना, उसे वर्ष प्रतिवर्ष सिकवेंस में लाना हो, प्रोमोटी अफसरों केलिए काडर और इंडक्शन आदि सभी क्षेत्रों में अभूतपूर्व प्रगति है । महामंत्री ने कुछ कमियां प्रकट की है, जो वर्षो से निरंतर चली आ रही हैं, काडर का 250 से 180 और 411 की यात्रा एक नया इतिहास है । वर्षवार डीपीसी शेड्यूल तकं तत्परता आना प्रगति का द्योतक है । ग्रुप ए में 1.1 के अनुपात केलिए प्रयासरत रहना तथा अपनी समस्याओं केलिए सभी श्रेणी - 3 फेडरेशनों के कंधे पर बंदूक रखकर, उन्हे आगे करना ये तथ्य वर्तमान नेतृत्व की बुद्ध्मित्ता और कल्पनाशील मानस का द्योतक है। नए जोनों में अधिकारियों को वरीयता का लाभ दिलवाना, यह भी एक उपलब्धि है ।विद्यमान महामंत्री और अध्यक्ष महोदय से मेरी यदा कदा चर्चा होती है और अब जब फेडरेशन के अध्यक्ष ने विजन 2011 की प्रोमोटी अफसरों केलिए कल्पना की है तो अर्थ यह है कि इरपोफ की पूरी वर्तमान मंडली अपने कार्यक्रम , लक्ष्य, प्रयास आअैर अन्य पर्यायी या आगे कुछ करने केलिए आवश्यक ऐसी एहतियात बरतने के सचेष्ट और सर्तक है । यह संगठन शिक्षण, नेतृत्व, वार्ताकौशल्य, और कल्याणकारी योजनाओं से आगे कुछ करता ही रहेगा और अपने सामुदायिक नेतृत्व को पुष्ट , सबल-सचल और सशक्त बनाने में कोई कोर कसर नहीं छोडेगा ।

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