Saturday, July 25, 2009
एमसीए कर रहे स्टूडेंट को पर रेलवे भर्ती बोर्ड की एक वेबसाइट बने के आरोप में गिरफ्तार
Tuesday, July 21, 2009
दिल्ली मेट्रो अपनी लाइनों को तय टाइम टेबल के मुताबिक ही चालू करने की कोशिश करेगी।
पिछले साल अक्टूबर में लक्ष्मी नगर और इसी महीने जमरूदपुर में मेट्रो हादसे के बाद डीएमआरसी पर यह आरोप लगाया गया है कि वह जल्द काम निपटाने के लिए क्वॉलिटी से समझौता कर रही है। जिससे लगातार हादसे हो रहे हैं। डीएमआरसी सूत्रों के मुताबिक इन आरोपों को देखते हुए अब शायद दिल्ली मेट्रो अपनी किसी भी लाइन को तय वक्त से पहले खोलने से बचेगी। उसकी कोशिश यही होगी कि टाइम टेबल के मुताबिक या उससे कुछ दिन पहले ही मेट्रो रेल लाइनों को चालू किया जाए ताकि उस पर जल्दबाजी का आरोप न लगे।
सूत्रों के मुताबिक दिल्ली मेट्रो के प्रबंध निदेशक ई. श्रीधरन इस समय दिल्ली से बाहर हैं। वह मंगलवार को दिल्ली पहुंचेंगे। दिल्ली आने के बाद मंगलवार शाम या फिर बुधवार सुबह उन्हें इस हादसे की जांच करने वाली कमिटी अपनी रिपोर्ट सौंप सकती है। इस रिपोर्ट से ही हादसे के कारणों का पता चल पाएगा। वैसे खुद मेट्रो यह मान चुकी है कि इस हादसे की वजह या तो पिलर नंबर 67 की कैप का गलत डिजाइन है या फिर कैप में लगाया गया मटीरिअल ही खराब था। कमिटी इस बारे में अपनी विस्तृत रिपोर्ट देगी। माना जा रहा है कि कमिटी की रिपोर्ट के बाद दिल्ली मेट्रो के कुछ अफसरों पर गाज गिर सकती है। इसकी वजह यह है कि अगर डिजाइन में गड़बड़ है तो मेट्रो में डिजाइन तैयार करने वालों पर कार्रवाई होगी। इससे पहले इस मामले में दिल्ली मेट्रो अपने सबसे वरिष्ठ अधिकारियों में से एक डायरेक्टर विजय आनंद को दिल्ली मेट्रो से उनके मूल विभाग भारतीय रेलवे में वापस भेज चुकी है। इस बीच जमरूदपुर हादसे का शिकार बने पीड़ितों की ओर से दिल्ली हाई कोर्ट में डीएमआरसी और मेट्रो लाइन का निर्माण करने वाली फर्म गैमन इंडिया लिमिटेड के खिलाफ मुआवजे का मामला दायर किया। श्रमिक रेफरल सेंटर की चेअरपर्सन श्रीमती एस. मित्रा चौधरी की ओर से दायर याचिका में हादसे का शिकार बनने वालों के लिए मुआवजे की मांग की गई है।
Saturday, July 18, 2009
रेल टैक में पूरा रूट एलिवेटेड नहीं
नोएडा से ग्रेटर नोएडा के बीच लगभग 22 किलोमीटर लंबे लाइट रेल टैक में पूरा रूट एलिवेटेड नहीं होगा। नोएडा और ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के अफसर इस बात पर सहमत हो गए हैं कि जहां जरूरी नहीं, वहां पर एलआरटी क्यों न जमीन पर ही चलाई जाए। पहले सिर्फ स्टेशनों को ही जमीन पर बनाने की बात चल रही थी। अब डीपीआर में इस तरह के बदलाव के निर्देश दे दिए गए हैं। यह जानकारी नोएडा अथॉरिटी के सीईओ मोहिंदर सिंह ने दी। उन्होंने बताया कि एलआरटी का टैक काफी लंबा है। इस टैक में कहीं-कहीं पर तो सीधा और खुला रास्ता है। इसमें एलिवेटेड टैक बनाने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने बताया कि भीड़ भरे रास्तों में तो एलिवेटेड टैक बनाना ठीक है, मगर जब एक्सप्रेस-वे के किनारे हमारे पास जमीन मौजूद है तब ऐसे रास्तों पर सिर्फ स्टेशन ही नहीं, बल्कि पूरा टैक ही जमीन पर बनाने में समझदारी है। इसी वजह से एलआरटी मेट्रो की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट आने में देरी हो रही है।
