Thursday, December 18, 2008

केंद्रीय मंत्री ए. आर. अंतुले के बयानों पर हंगामा खड़ा हो गया है।

अल्पसंख्यक मामलों के केंद्रीय मंत्री ए. आर. अंतुले के बयानों पर हंगामा खड़ा हो गया है। इसकी
आंच कांग्रेस को लग रही है। केंद्र और राज्य दोनों जगह कांग्रेस के नेतृत्व में गठबंधन सरकारें हैं। विपक्ष ने अंतुले के सवालों को लपक लिया है। लोकसभा में भारी हंगामे के बीच विपक्ष ने प्रधानमंत्री से सफाई मांगी। अंतुले ने बुधवार को महाराष्ट्र एटीएस चीफ हेमंत करकरे और उनके वरिष्ठ सहयोगियों की हत्या पर कई सवाल उठाए। अंतुले के बयानों से सत्ता पक्ष स्तब्ध रह गया। कांग्रेस ने सदन के बाहर फौरन सफाई देते हुए खुद को उनके बयानों से अलग करने की कोशिश की और कहा कि ये अंतुले के अपने विचार हैं। लेकिन शिवसेना के अनंत गीते ने कहा कि अंतुले ने लोकसभा के बाहर कहा है कि करकरे की हत्या आतंकवादियों ने नहीं, बल्कि किसी और ने की। अंतुले ने इसका खंडन करते हुए कहा कि मैंने ऐसा नहीं कहा। लोकसभा में आतंकवाद के खिलाफ पेश दो विधेयकों पर सदन में आम सहमति के माहौल में अंतुले के सवालों ने सरकार और विपक्ष के बीच तनाव पैदा कर दिया। विपक्ष का कहना था कि प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, विदेश मंत्री सबका सदन में बयान है कि करकरे सहित 35 सुरक्षाकर्मी आतंकवादियों के हाथों मारे गए हैं। मगर सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री कुछ और कह रहे हैं। गृह मंत्री को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। अंतुले का सदन के बाहर दिया बयान टीवी चैनलों पर दिखाया जा रहा है। अंतुले का यह सवाल कांग्रेस के लिए सबसे ज्यादा मुश्किलें पैदा करने वाला है कि करकरे कामा अस्पताल अपनी मर्जी से गए थे या किसी ने उन्हें वहां जाने के लिए कहा था। एटीएस चीफ को निर्देश सरकार का कोई बड़ा आदमी ही दे सकता है। अंतुले ने कहा कि करकरे मालेगांव सहित कई संवेदनशील मामलों की जांच कर रहे थे। जांच प्रज्ञा सिंह, कर्नल श्रीकांत पुरोहित और अन्य लोगों के खिलाफ थी। अंतुले का निशाना राजनीतिक निहितार्थ लिए हुए है। मुंबई के आतंकवादी हमलों के बाद कांग्रेस द्वारा केंद्रीय गृह मंत्री, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री, गृह मंत्री को हटाने और आतंकवाद के खिलाफ दो कड़े कानून लाने से उसके पक्ष में जो माहौल बन रहा था, अंतुले के सवालों से उस रंग में भंग पड़ गया है। कांग्रेस का कहना है कि हम अंतुले से सहमत नहीं हैं। फिलहाल यह पता लगाया जा रहा है कि अंतुले के इस सवाल के पीछे क्या महाराष्ट्र की अंदरूनी राजनीति है?

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