कल्याण रेलवे पुलिस की हद में पिछले वर्ष 406 नागरिकों की रेल पटरी पर मौत हो गई। कल्याण रेल पुलिस की हद पतरी पुल से दक्षिण में बदलापुर तक तथा उत्तर में कसारा तक फैली है। 406 नागरिकों की मौत के अलावा 401 यात्री वर्ष 2009 में घायल हो गए थे। वर्ष-दर-वर्ष बढ़ती दुर्घटनाओं से गंभीर सुरक्षा खामियों की पोल खुलती जा रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार कल्याण रेल पुलिस की हद में वर्ष 2006 में 182 यात्रियों की मौत हुई थी व 294 लोग घायल हुए थे। वर्ष 2007 में यह मामूली रूप से घटकर 178 मृत व 270 घायलों पर आई तथा वर्ष 2008 में पुन: तेजी से बढ़कर 237 मृत तथा 293 घायलों तक जा पहुंची। वर्ष 2009 के 365 दिनों में यह 406 मृत व 401 घायलों के उच्च स्तर पर जा पहुंचा है। औसतन रोज एक यात्री की मौत व एक यात्री के घायल होने से रेल यात्रा के सुरक्षित होने की पोल खुल गई है। मारे गए 406 यात्रियों में 231 यात्री पटरी पार करते हुए मारे गए। इसमें भी उल्हासनगर में सर्वाधिक, कल्याण जंक्शन में 42, अंबरनाथ में 30 यात्री शामिल थे। 79 यात्री चलती गाड़ी से नीचे गिरने के कारण अपनी जान गंवा बैठे। लंबी दूरी की मेल, एक्सप्रेस व पैसेंजर गाड़ियों के दरवाजों पर बैठे व लटक कर यात्रा कर रहे 12 यात्री कल्याण क्षेत्र में व 10-10 यात्री कसारा व आसनगांव स्टेशन क्षेत्र में गिर कर मर गये। रेलवे पोल की टक्कर से 4 यात्रियों की मौत हो गई थी, इसमें आसनगांव में दो तथा कल्याण व उल्हासनगर में एक-एक यात्री मरे थे। रेल विभाग ने रेल पटरी से सटे लगभग सभी खंभों को हटा दिया है। प्लेटफार्म व ट्रेन के बीच वाले अंतर (गैप) में गिरकर पिछले वर्ष एक भी मोत नहीं हुई है। वर्ष 2009 में आत्महत्या व अन्य कारणों से 15 लोगों की जानें गईं। यात्रा के दौरान दिल का दौरा पड़ने, वृद्धवस्था, बीमारी तथा आंतरिक रोगों के चलते 84 लोगों की मौत हुई, इसमें नशेड़ियों, भिखारियों व गर्दुल्लों की संख्या सर्वाधिक थी। रेल पुलिस की सीमा में तीन हत्याएं भी हुईं थीं। वर्ष 2009 में 401 घायलों में से 362 यात्रियों को इलाज के दौरान बचा लिया गया था पर 38 यात्री इलाज के दौरान नहीं बचाये जा सके। इनमें 48 क्रॉसिंग से, 176 चलती गाड़ी से गिरकर व 15 खंभे से टकरा कर गिरे थे। चालू वर्ष 2010 में जनवरी व फरवरी के दो महीनों में ही 49 यात्रियों की जान जा चुकी है। इसके अलावा 67 यात्री घायल हुए हैं। इसमें भी पटरी पार करने वालों की संख्या सबसे अधिक है। रेल पुलिस व रेल स्टाफ के तमाम प्रयासों के बावजूद यात्रियों में लापरवाही बरकरार है, वे इसी लापरवाही के चलते अपने प्राणों को खतरे में डाल रहे हैं।
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