Wednesday, March 31, 2010

मेट्रो में अलग से कोई इंतजाम नहीं किया

मॉस्को में आतंकियों ने मेट्रो को अपना निशाना बनाया है। इस घटना के बाद दिल्ली में भी अलर्ट जारी किया गया है, लेकिन मेट्रो में अलग से कोई इंतजाम नहीं किया गया है। मेट्रो सुरक्षा की कमान संभाल रही सीआईएसएफ के अधिकारियों का दावा है कि हम हर समय अलर्ट रहते हैं, ऐसे में अलग से किसी इंतजाम की जरूरत नहीं है, जबकि मेट्रो स्टेशनों और डिपो की सुरक्षा में कई सेंध दिखाई देते हैं। यहां होने वाली छोटी- छोटी लापरवाही बड़े हादसे के लिए जिम्मेदार हो सकती है। रोज की तरह सोमवार को भी मेट्रो के कई स्टेशनों पर सुरक्षा जांच में ढील दिखी। उदाहरण के तौर पर द्वारका-नोएडा-आनंद विहार लाइन पर बिना बैगेज स्कैनर वाले कुछ स्टेशनों पर महिलाओं की चेकिंग के लिए महिला सीआईएसएफ कर्मचारी नहीं थी तो कुछ जगह बैग चेकिंग के नाम पर सिर्फ खानापूरी हो रही थी। सूत्रों के मुताबिक इस दिन भी स्टिल क्लोज सर्किट कैमरों की लगातार मॉनिटरिंग नहीं हो रही थी और डीएमआरसी के स्टिकर वाली गाड़ियों की डिपो में एंट्री के समय कोई जांच नहीं की जा रही थी। मेट्रो डिपो में बाउंड्री वॉल है और उस पर तार भी लगे हैं, मगर उनकी ऊंचाई इतनी भी ज्यादा नहीं है कि किसी के छलांग लगाकर अंदर आने के खतरे से पूरी तरह इनकार किया जा सके। बावजूद इसके सर्विसिंग के बाद प्लैटफॉर्म पर लगने से पहले ट्रेनों की जांच नहीं की जाती। अभी मेट्रो की चार लाइनें काम कर रही हैं। इनमें दिलशाद गार्डन- रिठाला लाइन की लंबाई 25.9 किमी है और इस पर स्टेशनों की संख्या 21 है। लाइन पर 23 ट्रेनें चल रही हैं। सेंट्रल सेक्रेटरिएट- जहांगीरपुरी लाइन 17.36 किमी लंबी है, जिसमें 15 स्टेशन हैं और 16 ट्रेनें चल रही हैं। द्वारका- नोएडा सिटी सेंटर लाइन की लंबाई 47.4 किमी है। इस पर 42 स्टेशन और 43 ट्रेनें हैं। यमुना बैंक से आनंद विहार लाइन की दूरी 6.25 किमी है और इस पर 5 स्टेशन और 4 ट्रेनें हैं। कुल मिलाकर करीब 83 स्टेशन हैं और मेट्रो लाइनों का कवरेज एरिया 96.6 किमी के आसपास है। आमतौर पर रोजाना मेट्रो से नौ लाख लोग सफर करते हैं। मेट्रो की सुरक्षा के लिए अभी सीआईएसएफ के 3800 जवानों की तैनाती की गई है और स्टेशनों पर 1200 क्लोज सर्किट कैमरे लगाए गए हैं। इनमें से कुछ कैमरे मूविंग हैं तो कुछ स्टिल हैं। मेट्रो के तीन डिपो हैं, जो शास्त्री पार्क, नजफगढ़ और मुंडका में बने हैं। अगले कुछ दिनों में इंदलोक- मुंडका लाइन भी शुरू होने वाली है और कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले केंद्रीय सचिवालय और बदरपुर लाइन भी पूरी हो जाएगी। इसके बाद स्टेशनों की संख्या 120 के करीब पहुंच जाएगी। इसके साथ ही यात्रियों की संख्या भी बढ़ेगी। कॉमनवेल्थ गेम्स के कुल 11 वेन्यू में से 10 से मेट्रो कनेक्ट हो रही है। ऐसे में सुरक्षा के क्या इंतजाम होंगे, इस पर सीआईएसएफ के प्रवक्ता रोहित कटियार का कहना है कि जैसे- जैसे स्टेशनों की संख्या बढ़ेगी वैसे- वैसे स्टाफ भी बढ़ेगा। कॉमनवेल्थ गेम्स तक 1600 और सुरक्षाकर्मियों की व्यवस्था की जाएगी। जल्द ही सभी स्टेशनों पर बैगेज स्कैनर लगा दिए जाएंगे। मेट्रो पार्किन्ग में भी 600 सीसीटीवी कैमरे लगाने की योजना है।

Monday, March 29, 2010

रेलवे पुलिस की हद में पिछले वर्ष 406 नागरिकों की रेल पटरी पर मौत

कल्याण रेलवे पुलिस की हद में पिछले वर्ष 406 नागरिकों की रेल पटरी पर मौत हो गई। कल्याण रेल पुलिस की हद पतरी पुल से दक्षिण में बदलापुर तक तथा उत्तर में कसारा तक फैली है। 406 नागरिकों की मौत के अलावा 401 यात्री वर्ष 2009 में घायल हो गए थे। वर्ष-दर-वर्ष बढ़ती दुर्घटनाओं से गंभीर सुरक्षा खामियों की पोल खुलती जा रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार कल्याण रेल पुलिस की हद में वर्ष 2006 में 182 यात्रियों की मौत हुई थी व 294 लोग घायल हुए थे। वर्ष 2007 में यह मामूली रूप से घटकर 178 मृत व 270 घायलों पर आई तथा वर्ष 2008 में पुन: तेजी से बढ़कर 237 मृत तथा 293 घायलों तक जा पहुंची। वर्ष 2009 के 365 दिनों में यह 406 मृत व 401 घायलों के उच्च स्तर पर जा पहुंचा है। औसतन रोज एक यात्री की मौत व एक यात्री के घायल होने से रेल यात्रा के सुरक्षित होने की पोल खुल गई है। मारे गए 406 यात्रियों में 231 यात्री पटरी पार करते हुए मारे गए। इसमें भी उल्हासनगर में सर्वाधिक, कल्याण जंक्शन में 42, अंबरनाथ में 30 यात्री शामिल थे। 79 यात्री चलती गाड़ी से नीचे गिरने के कारण अपनी जान गंवा बैठे। लंबी दूरी की मेल, एक्सप्रेस व पैसेंजर गाड़ियों के दरवाजों पर बैठे व लटक कर यात्रा कर रहे 12 यात्री कल्याण क्षेत्र में व 10-10 यात्री कसारा व आसनगांव स्टेशन क्षेत्र में गिर कर मर गये। रेलवे पोल की टक्कर से 4 यात्रियों की मौत हो गई थी, इसमें आसनगांव में दो तथा कल्याण व उल्हासनगर में एक-एक यात्री मरे थे। रेल विभाग ने रेल पटरी से सटे लगभग सभी खंभों को हटा दिया है। प्लेटफार्म व ट्रेन के बीच वाले अंतर (गैप) में गिरकर पिछले वर्ष एक भी मोत नहीं हुई है। वर्ष 2009 में आत्महत्या व अन्य कारणों से 15 लोगों की जानें गईं। यात्रा के दौरान दिल का दौरा पड़ने, वृद्धवस्था, बीमारी तथा आंतरिक रोगों के चलते 84 लोगों की मौत हुई, इसमें नशेड़ियों, भिखारियों व गर्दुल्लों की संख्या सर्वाधिक थी। रेल पुलिस की सीमा में तीन हत्याएं भी हुईं थीं। वर्ष 2009 में 401 घायलों में से 362 यात्रियों को इलाज के दौरान बचा लिया गया था पर 38 यात्री इलाज के दौरान नहीं बचाये जा सके। इनमें 48 क्रॉसिंग से, 176 चलती गाड़ी से गिरकर व 15 खंभे से टकरा कर गिरे थे। चालू वर्ष 2010 में जनवरी व फरवरी के दो महीनों में ही 49 यात्रियों की जान जा चुकी है। इसके अलावा 67 यात्री घायल हुए हैं। इसमें भी पटरी पार करने वालों की संख्या सबसे अधिक है। रेल पुलिस व रेल स्टाफ के तमाम प्रयासों के बावजूद यात्रियों में लापरवाही बरकरार है, वे इसी लापरवाही के चलते अपने प्राणों को खतरे में डाल रहे हैं।

दिल्ली-पलवल रेलमार्ग पर ट्रेनों को रफ्तार बढ़ाने की कोशिश

दिल्ली-पलवल रेलमार्ग पर ट्रेनों को रफ्तार बढ़ाने की कोशिश तेज हो गई है। रेलवे अब इस ट्रैक पर 150 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेनों को दौड़ाना चाहती है। इसके लिए फोर्थ लाइन से पहले ही थर्ड लाइन को बदलने का काम पूरा कर लिया जाएगा। 45 केजी आयरन वाली थर्ड लाइन को बदल कर 60 केजी आयरन का किया जाएगा। रेलमार्ग के सहायक खंड अभियंता जे. एल. मीणा ने बताया कि इस ट्रैक में कई जगह खराबी आ गई है। ट्रैक के स्लीपर कई जगह खराब हो चुके हैं। साथ ही यह ट्रैक भी बेहद पुराना हो चुका है। जिसकी वजह से इस पर ट्रेनों की स्पीड कम हो गई है। यही वजह है कि अब इसे बदलना लाजमी हो गया है। अप्रैल के अंत तक यह काम शुरू हो सकता है। इससे आगरा जाने वाले पर्यटकों को सहूलियत होगी। उन्होंने बताया कि जिस समय लाइन को बदलने का काम चलेगा, सिर्फ उस समय के लिए थर्ड लाइन पर रेल यातायात बंद रहेगा।

Friday, March 26, 2010

शुक्रवार को 4 मेट्रो स्टेशनों पर मॉक ड्रिल

किसी मेट्रो स्टेशन आतंकवादी हमले जैसी इमर्जेंसी में विभिन्न एजेंसियों के बीच कैसा तालमेल रहता है, इसी का जायजा लेने के लिए शुक्रवार को 4 मेट्रो स्टेशनों पर मॉक ड्रिल की जा रही है। इस वजह से सुबह 11 से दोपहर 12 बजे के बीच कुछ देर के लिए यात्रियों को परेशानी हो सकती है। मॉक ड्रिल के दौरान आतंकवादी हमले और उसके बाद के हालात का सीन क्रिएट किया जाएगा, इसलिए शुक्रवार को अगर आपको मेट्रो स्टेशन के अंदर धमाका होने या गोली चलने की आवाज सुनाई दे या स्टेशन के बाहर चारों तरफ पुलिस, दमकल और एंबुलेंस की गाड़ियां दिखें, तो घबराएं नहीं। यह इस ड्रिल का ही एक हिस्सा होगा। लोगों को पहले से सचेत करने के लिए डीएमआरसी ने मॉक ड्रिल से एक दिन पहले ही प्रेस रिलीज जारी करके इस बारे में विस्तार से जानकारी दी है। डीएमआरसी प्रवक्ता के मुताबिक, दिल्ली डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी के अधिकारियों के सुपरविजन में शुक्रवार सुबह 11:30 बजे के करीब चार मेट्रो स्टेशनों, लाइन-1 के नेताजी सुभाष प्लेस व दिलशाद गार्डन और लाइन-3 के राजौरी गार्डन और मंडी हाउस पर यह मॉक ड्रिल की जाएगी। ड्रिल की वजह से 15-20 मिनट के लिए यात्रियों को असुविधा का सामना करना पड़ सकता है। डीएमआरसी के मुताबिक, इस दौरान मेट्रो स्टेशनों पर आतंकवादी हमला जैसा माहौल बनाया जाएगा, जिसके तहत सीरियल बम ब्लास्ट होने, विस्फोटकों से लदे ट्रक के मेट्रो पिलर से टकराने, टिकट काउंटर के पास पावरफुल बम ब्लास्ट होने और मेट्रो स्टेशन पर फिदायीन हमले जैसे दृश्य पैदा किए जाएंगे और इस बात का मूल्यांकन किया जाएगा कि ऐसी हालत में विभिन्न आपातकालीन एजेंसियों जैसे स्थानीय पुलिस, दमकल, एंबुलेंस, डिजास्टर मैनेजमेंट की टीम, डीएमआरसी का स्टाफ और मेट्रो स्टेशनों पर सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाली सीआरपीएफ का कैसा रिएक्शन रहता है और इन एजेंसियों के बीच कैसा तालमेल बनता है। इस दौरान स्टेशन पर मौजूद यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालने, घायलों को अस्पताल पहुंचाने, आग बुझाने, स्टेशन और आसपास के इलाके को खाली कराने, मेट्रो के दूसरे स्टेशनों पर अलर्ट जारी करने जैसी तमाम बातों का जायजा लिया जाएगा। डीएमआरसी अधिकारियों के मुताबिक मॉक ड्रिल करने का मकसद यही है कि आपातकालीन परिस्थितियों में सभी एजेंसियों के बीच अच्छा तालमेल बन सके। पिछले 5 साल के दौरान 15 से ज्यादा मॉक ड्रिल की जा चुकी हैं।

Tuesday, March 23, 2010

महिलाओं को अब अराजक तत्वों से भय नहीं होगा।

ट्रेनों में डेली सफर करने वाली महिलाओं को अब अराजक तत्वों से भय नहीं होगा। रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स का विशेष महिला कमांडो दस्ता ट्रेनों के महिला कोचों में तैनात किया जा रहा है। इस दिशा में मुरादाबाद रेल मंडल ने यह पहल की है। यह महिला कमांडो दस्ता आधुनिक हथियारों से लैस होगा। मुरादाबाद मंडल रेलवे के सीनियर सुरक्षा आयुक्त के अनुसार महिला कमांडो का दस्ता फिलहाल काशी विश्वनाथ एक्सप्रेस एवं बरेली-दिल्ली इंटर सिटी में तैनात किया गया है। इन ट्रेनों में तीन महिला कमांडो तथा एक आरपीएफ अफसर तैनात रहेंगे। उन्होंने बताया कि आगे जरूरत के मुताबिक अन्य ट्रेनों में भी महिला कमांडो तैनात करने की प्लानिंग की जा रही है। सुरक्षा आयुक्त ने बताया कि ट्रेनों में दैनिक महिला पैसेंजरों के साथ आए दिन ट्रेनों में यात्रा के दौरान होने वाली छेड़छाड़ व अन्य वारदात को देखते हुए महिला कमांडो दस्ता तैनात करने का फैसला लिया गया है और मंगलवार से काशी विश्वनाथ तथा बरेली-दिल्ली इंटर सिटी एक्सप्रेस ट्रेनों में इनकी तैनाती कर दी गई है।

Monday, March 22, 2010

दिल्ली मेट्रो की पहली स्टैंडर्ड गेज लाइन पर ट्रेनें दौड़नी शुरू हो जाएंगी।

रेड, येलो और ब्लू के बाद अब ग्रीन लाइन मेट्रो में पैसेंजरों को स फर करने के लिए इसी महीने ग्रीन सिग्नल मिलने की उम्मीद है। हालांकि अभी मेट्रो रेल लाइन को चालू करने से पहले कमिश्नर रेलवे सेफ्टी (सीआरएस) की मंजूरी मिलनी है। लेकिन उम्मीद की जा रही है कि इसी महीने सीआरएस इस लाइन का इंस्पेक्शन करेंगे। उनकी इजाजत मिलने के बाद इसी महीने के अंतिम सप्ताह में दिल्ली मेट्रो की पहली स्टैंडर्ड गेज लाइन पर ट्रेनें दौड़नी शुरू हो जाएंगी। इंदलोक और मुंडका के बीच शुरू की जा रही इस लाइन के साथ कुछ ऐसी खासियतें भी जुड़ी हुई हैं, जो पैसेंजरों को पहली बार देखने को मिलेंगी। दिल्ली मेट्रो के दूसरे फेज की यह पहली ऐसी मेट्रो रेल लाइन होगी, जो पूरी तरह से इंडिपेंडेंट होगी। अब तक की जिन चार लाइनों को चालू किया गया है, वे पहले से ही चल रही किसी न किसी मेट्रो रेल लाइन का ही एक्सटेंशन थीं लेकिन यह ऐसी लाइन है, जो मुंडका से चलेगी और इंदलोक तक आएगी और मौजूदा इंदलोक स्टेशन से जुड़ेगी लेकिन इसके बावजूद इस लाइन पर दौड़ने वाली ट्रेनें इंदलोक आकर टमिर्नेट हो जाएंगी। हालांकि बाद में इसी साल इस लाइन को एक्सटेंशन देते हुए उसे कीतिर् नगर मेट्रो स्टेशन से भी जोड़ दिया जाएगा। इस तरह से महज दो किमी की लाइन बिछाकर मेट्रो उन पैसेंजरों के सफर को छोटा कर देगी, जो रिठाला, कश्मीरी गेट और कीर्ति नगर से होते हुए द्वारका की ओर आना-जाना चाहेंगे। दिल्ली मेट्रो रेल लाइन के प्रवक्ता के मुताबिक नई शुरू होने वाली इंदलोक-मुंडका लाइन का काम लगभग पूरा हो चुका है। शनिवार को दिल्ली मेट्रो के प्रबंध निदेशक ई. श्रीधरन ने 15.01 किमी लंबी इस लाइन का जायजा लिया। उन्होंने इस लाइन के मुख्य स्टेशनों केअलावा इस लाइन की ट्रेनों के लिए तैयार किया गया मुंडका मेट्रो डिपो का भी जायजा लिया। दिल्ली मेट्रो का टारगेट इसी महीने इस लाइन को पब्लिक के लिए शुरू करने का है। कमिश्नर रेलवे सेफ्टी आर. के. कर्दम ने बताया कि उन्हें इस लाइन से जुड़े कुछ कागजात अभी मिलने हैं। जैसे ही ये कागजात आ जाएंगे, उसके बाद वे इस लाइन का इंस्पेक्शन करेंगे।

Saturday, March 20, 2010

लोकमान्य तिलक टर्मिनस से हरिद्वार के बीच छह अप्रैल से एक विशेष वीकली ट्रेन शुरू

गर्मी की छुट्टियों के दौरान यात्रियों की अतिरिक्त भीड़ से निपटने के लिए रेलवे ने लोकमान्य तिलक
टर्मिनस से हरिद्वार के बीच छह अप्रैल से एक विशेष वीकली ट्रेन शुरू करने की घोषणा की। गाड़ी नंबर 113 स्पेशल ट्रेन छह अप्रैल से 29 जून तक हर मंगलवार को सुबह सात बजकर 55 मिनट पर लोकमान्य तिलक टर्मिनस से रवाना होगी और अगले दिन शाम पौने सात बजे हरिद्वार पहुंचेगी। वापसी में गाड़ी संख्या 114 हरिद्वार से आठ अप्रैल से एक जुलाई तक प्रत्येक गुरुवार को सुबह पौने सात बजे हरिद्वार से रवाना होगी और अगले दिन शाम सात बजे लोकमान्य तिलक टर्मिनस पहुंचेगी। इस विशेष वीकली ट्रेन में एसी टू टीयर का एक, एसी थ्री टीयर का एक और स्लीपर क्लास के दस डिब्बों के अलावा दो सामान्य डिब्बे होंगे। यह ट्रेन आते जाते समय रास्ते में रुड़की, सहारनपुर, मेरठ, गाजियाबाद, हजरत निजामुद्दीन, पलवल, मथुरा, आगरा, ग्वालियर, बीना, भोपाल, इटारसी खांडवा, भुसावल, जलगांव, नासिक और कल्याण स्टेशनों पर रुकेगी।

Friday, March 12, 2010

हरिद्वार महाकुंभ जाने वाले यात्रियों से रेलवे अधिक किराया वसूल रही है।

हरिद्वार महाकुंभ जाने वाले यात्रियों से रेलवे अधिक किराया वसूल रही है। रेल राज्य मंत्री के. एच. मुनियप्पा ने लोकसभा को बताया कि सेकंड क्लास के लिए 3 रुपये और स्लीपर क्लास के लिए 5 रुपये का मेला अधिभार वसूला जा रहा है। उन्होंने सुमित्रा महाजन के सवाल के लिखित जवाब में बताया कि एसी चेयर कार और एसी 3-टियर के लिए 7 रुपये, फर्स्ट क्लास और एसी 2 टियर के लिए 10 रुपये और एसी फर्स्ट क्लास के लिए 15 रुपये के रूप में मामूली मेला सर चार्ज केवल 15 रुपये से अधिक मूल किराये वाले टिकटों पर भी वसूला जाता है।

Monday, March 8, 2010

आज पंद्रह महिलाएं मेट्रो के ऑपरेशन की कमान संभाल रही हैं।

तकनीकी क्षेत्र में महिलाओं की पकड़ लगातार मजबूत हो रही है। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) इसका ताजा उदाहरण है, जहां शुरुआत तीन महिला ड्राइवरों से हुई थी और आज पंद्रह महिलाएं मेट्रो के ऑपरेशन की कमान संभाल रही हैं। इतना ही नहीं, मिडल लेवल के विभिन्न पदों पद भी 60 से ज्यादा महिलाएं काम कर रही हैं। मेट्रो की ड्राइविंग के लिए सबसे पहले तीन महिलाओं को नियुक्त किया गया था, जिनमें अंगली मिंज, मीनाक्षी शर्मा और विभा शामिल हैं। किसी बैंक में जॉब मिल जाने की वजह से अंजली ने तो डीएमआरसी छोड़ दी, मगर विभा अब प्रमोट होकर असिस्टेंट लाइन सुपरवाइजर हो गई हैं तो मीनाक्षी शाहदरा-वेलकम स्टेशन की कंट्रोलर बन गई हैं। इनके अलावा मेट्रो की दसों लाइनों पर कुल 15 महिला ड्राइवर काम कर रही हैं और दूसरे तकनीकी, एडमिनिस्ट्रेटिव और सुपरवाइजर के पद पर काम कर रही हैं। डीएमआरसी के अधिकारियों के मुताबिक यहां महिलाएं करीब- करीब हर तरह के पदों पर कार्यरत हैं और अपनी जिम्मेदारी को बखूबी निभा रही हैं। उम्मीद है कि कुछ सालों में यहां भी महिलाओं की भागीदारी पुरुषों के बराबर हो जाएगी। डीएमआरसी में ऐसे कर्मचारियों की संख्या 5000 है जिनकी सीधे तौर यहां नियुक्ति हुई है। इनके अलावा हायर लेवल के ज्यादातर एंप्लॉई डेप्युटेशन पर आए हैं। डीएमआरसी की एक लाइन सुपरवाइजर का कहना है, अगर कुल कर्मचारियों की संख्या से तुलना करें तो अभी भी यहां महिलाओं की संख्या काफी कम है, मेरे हिसाब से इसकी सबसे बड़ी वजह महिलाओं में जानकारी की कमी और कुछ हद तक उन पर भरोसा नहीं करने वाली सोच भी है।

Thursday, March 4, 2010

मेट्रो दिल्ली से मेरठ और दिल्ली से पानीपत

दिल्ली मेट्रो की तरह ही एनसीआर के शहरों तक डेडिकेटेड रेल लाइनें बिछाने के लिए डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करने का काम जल्द शुरू हो जाएगा। फिलहाल दिल्ली से एनसीआर के चार शहरों को जोड़ने के लिए डीपीआर तैयार कराई जा रही है। उम्मीद की जा रही है कि अगले एक साल में यह रिपोर्ट बन जाएगी। उसके बाद तय किया जाएगा कि डेडिकेटेड रेल लाइनों को तैयार करने के लिए किसी नई कंपनी का गठन किया जाए या फिर किसी प्राइवेट कंपनी की भागीदारी से यह काम किया जाए। एनसीआर प्लानिंग बोर्ड के सूत्रों का कहना है कि केंद सरकार ने बोर्ड को डीपीआर तैयार कराने के लिए अपनी सहमति दे दी है। अब यह काम दो अलग-अलग कंपनियों को सौंपा जा रहा है। दोनों कंपनियां दिल्ली से दो-दो शहरों तक रेल लाइनें बिछाने के लिए स्टडी करके अपनी रिपोर्ट देगी। बोर्ड के सचिव डॉ. नूर मोहम्मद का कहना है कि दिल्ली से रेवाड़ी और दिल्ली से अलवर तक बिछाई जाने वाली लाइन के लिए स्टडी यूएमटीसी करेगी। दिल्ली से मेरठ और दिल्ली से पानीपत के लिए स्टडी करके डीपीआर तैयार करने का काम दिल्ली सरकार की भागीदारी वाली कंपनी डिम्ट्स को सौंपा गया है। प्लानिंग बोर्ड का कहना है कि केंद्र सरकार ने डीपीआर तैयार कराने के लिए अपनी सहमति दे दी है। उसके आधार पर ही डीपीआर तैयार कराने के लिए दोनों कंपनियों का चयन किया गया है। इस काम में रेलवे की मदद भी ली जाएगी। एनसीआरपीबी की इस योजना का मकसद है कि एनसीआर के शहरों को तीव्र रेल सेवा के जरिए जोड़ा जाए। बोर्ड ने इस रेल सेवा के लिए जो कंसेप्ट तैयार किया है, उसके मुताबिक इन शहरों के लिए डेडिकेटेड लाइनें बिछाई जाएंगी। हर शहर के लिए दो लाइनें यानी अप और डाउन लाइन होगी।