Tuesday, January 27, 2009

रायबरेली में रेल कोच कारखाने का उद्धटन, सोनिया का निशाना वोट पर,

रायबरेली में रेल कोच फैक्ट्री के प्रॉजेक्ट का उद्घाटन करने मंगलवार को यहां पहुंचीं यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी और आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने अपने भाषणों से आगामी लोकसभा चुनावों का बिगुल फूंक दिया। सोनिया ने पेट्रॉल और डीजल के दामों में जल्दी ही और कटौती के संकेत भी दिए। इस मौके पर जहां यूपीए की एकजुटता दिखाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी गई, वहीं एनडीए और मायावती पर भी जमकर प्रहार किए गए। यूपी की मुख्यमंत्री मायावती द्वारा रोके गए रेल कोच फैक्ट्री प्रॉजेक्ट की शुरुआत के मौके पर रेलमंत्री लालू यादव ने मायावती की जमकर ख़बर ली। उन्होंने कहा कि मायावती विकास के रास्ते में रोड़े अटकाकर अच्छा काम नहीं कर रही हैं। यहां उमड़ी भीड़ की ख़बर मिलने के बाद मायावती को समझना चाहिए कि जनता विकास के साथ है, विकास रोकने वालों के साथ नहीं। लालू ने कहा कि जिस रेल को वे मुनाफे में लाए हैं और यूपीए के पांच साल पूरे होने पर इस रेलवे को एक लाख करोड़ के मुनाफे तक पहुंचा कर जाएंगे, उसे एनडीए सरकार प्राइवेट हाथों में सौंपने जा रही थी। अपने संसदीय क्षेत्र रायबरेली में कोच फैक्ट्री का काम शुरू होने से खुश सोनिया ने आम चुनाव से पहले का माहौल भांपते हुए पेट्रॉल-डीजल के दामों में कमी के साफ संकेत दे दिए। गौरतलब है कि दामों में दोबारा कमी को लेकर यूपीए सरकार अपने फैसले का ऐलान नहीं कर पा रही थी। अभी दो महीने पहले ही यूपीए सरकार ने पेट्रॉल-डीजल के दामों में कटौती की थी। सोनिया ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के जल्दी स्वस्थ होने की कामना करते हुए कहा कि वे जल्दी ही अपनी जिम्मेदारी फिर संभालेंगे। इस मौके पर मौजूद राहुल ने कहा कि विकास के लिए शिक्षा और रोजगार दो महत्वपूर्ण चीजें हैं और हम इन दोनों पर फोकस कर रहे हैं। गौरतलब है कि रायबरेली की रेल कोच फैक्ट्री के सफर में केवल मायावती ही बाधा नहीं बनीं, बल्कि जब यूपी में मुलायम सिंह की सरकार थी तो उन्होंने भी फैक्ट्री को जमीन देने से इनकार कर दिया था। इस फैक्ट्री से 10,000 लोगों को सीधे और करीब 20 हजार लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा। भारत में अभी केवल दो ही कोच फैक्ट्री- चेन्नै और कपूरथला में हैं। ये भारतीय रेल की मांग को पूरा नहीं कर पा रही हैं इस कारण रायबरेली में नई तकनीक से कोच बनाए जाएंगे।

Friday, January 23, 2009

सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली में लगने वाले रेल कोच निर्माण कारखाने

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली में लगने वाले रेल कोच निर्माण कारखाने
का रास्ता साफ हो गया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने विवादित 189 एकड़ जमीन को रेलवे को दिए जाने का पट्टा जारी कर दिया है। कांग्रेस सूत्रों ने बताया है कि कांग्रेस अध्यक्ष 27-28 जनवरी को रायबरेली पहुंचकर प्रस्तावित रेल कोच कारखाने के निर्माण स्थल का निरीक्षण कर सकती हैं। गौरतलब है कि राज्य सरकार ने पहले यह जमीन रेलवे को देने से इनकार कर दिया था। सरकार ने यह फैसला उस समय लिया था जब सोनिया का फैक्ट्री की प्रस्तावित जगह पर एक प्रोग्रैम था। इसके अलावा सोनिया को रैली को संबोधित करने से भी रोका गया था। इस घटना के बाद दोनों पार्टियों के बीच राजनैतिक आरोपों का दौर शुरू हो गया था।

Thursday, January 22, 2009

पहले से नियुक्त नियमित अधिकारियों कोपूरा काम नहीं मिलता , हमारा मानना है कि तब तक सीधी भर्ती वालों को ज्वाइन नहीं करने देना चाहिये

रेलवे विभाग के राजभाषा विभाग में अब काम के बजाय चमचागिरी हावी हो गई है, जो साहेब की चमचागिरी नही करता वह अनेकानेक यातनाएं सहन करता है, यही हुआ अब तक और आज भी हो रहा है । हम बार बार कह रहे है कि रेलवे बोर्ड या किसी भी रेल में अधिकारियों को हिन्दी से कोई लेना देना नहीं है यहा तो बोर्ड में राजभाषा निदेशालय में बैठा उपनिदेशक जो कर दे वही फाइनल हो जाता है और वहां पर बैठा है सिंधी, कहते है कि यह कौम ही इस प्रकार की है कि इनसे खतरनाक तो सांप भी नहीं होता, एक बार सांप का काटा बच सकता है सिंधी का काटा नहीं बच सकता । यही किया है हाल में वरिष्ट राजभाषा अधिकारियों की तैनाती में , उसने जो कर दिया उस पर सभी ने अपनी मोहर लगा दी, और बेचारी परेशान हुए है पश्चिम रेल के और इलाहाबाद में नियुक्त राजभाषा अधिकारी ।ध्यान देने लायक जो तथ्य है उनपर गौर ही नहीं किया गया जैसे कि ः१ सभी रेलों पर एक एक अधिकारी समान अनुपात से दिया जाना चाहिये था२ उक्त रेलों पर नियमानुसार ५० प्रतिशत ही संघ लोक सेवा आयोग द्वारा चयनित तैनात किये जाने चाहिये थे परन्तु यह भी नहीं किया गया ।३ पश्चिम रेल पर पांच मण्डल है और पांच ही राजभाषा अधिकारी , यदि उक्त तीन अधिकारी आ जाएंगे तो पहले से ही कार्यरत नियमित रूप में चयनित अधिकारी कहां जाएंगे, यह सोचना बोर्ड का काम है ।४ उत्तर रेल और मध्य रेल में एक भी सीधी भर्गी वाला अधिकारी क्यों नहीं दिया गया, इन रेलों पर क्या मेहरबानी है ।५ यह ठीक है कि तदर्थ अधिकारियों को पदोन्नत किया जा सकता है लेकिन पदोन्नत होने के बाद वे कहां जाएंगे, क्योंकि उनकी रिक्ती तो नियमित चयन करके भर दी गई है और नियमित चयनित अधिकारियों को पदावनत नहीं किया जा सकता ।६ इसी प्रकार इलाहाबाद में दो सीधी तैनाती कर दी गई है और वहां पर कार्यरत अधिकारियों केलिए परेशानी खडी की गई है ।७ यदि सबसे जूनियर को ही पदोन्नति करनी है तो महाप्रबंधक को तदर्थ राजभाषा अधिकारी भरने की पावन बोर्ड ने क्यों नहीं दी ।८ मोटवानी ने पहले भी हिन्दी कंपटिंग फाउण्डेशन के मामले में अडंगा लगाया था जो कि संसदीय राजभाषा समिति के हस्तक्षेप के कारण ठीक हुआ है , अतः जब बोर्ड जानता है कि यह व्यक्ति गलत है और गलत कार्य कराता है तो उसे रेल क्लेम ट्रीबुनल में क्यों नहीं भेजा जाता ।९ बोर्ड को पहले भी एक प्रस्ताव भेजा गया था कि निमार्ण विभाग में जिस प्रकार सब विभागों केलिए पद सृजन हेतु एक प्रतिशत निर्धारित कर दिया है उसमें हिनदी केलिए भी कुछ प्रतिशत होना चाहिये, लेकिन ऐसे प्रस्तावों पर बोर्ड विचार ही नहीं करता क्योंकि इनसे रेलों पर नियुक्त कर्मचारियों का भला होता है ।अब देखते है कि इन रेलों के महाप्रबंधक अपने अधिकारियों को बचाने केलिए क्या करते है, उन्हे करना भी चाहिये और यह फर्ज भी है । जब तक पहले से नियुक्त नियमित अधिकारियों कोपूरा काम नहीं मिलता , हमारा मानना है कि तब तक सीधी भर्ती वालों को ज्वाइन नहीं करने देना चाहिये,

जो चमचागिरी नहीं करे, तो भरे डिमोशन और स्थानान्तरण

जो चमचागिरी नहीं करे, तो भरे डिमोशन और स्थानान्तरण
जो चमचागिरी नहीं करे, तो भरे डिमोशन और स्थानान्तारानारेलावे विभाग के राजभाषा विभाग में अब काम के बजाय चमचागिरी हावी हो गई है, जो साहेब की चमचागिरी नही करता वह अनेकानेक यातनाएं सहन करता है, यही हुआ अब तक और आज भी हो रहा है । हम बार बार कह रहे है कि रेलवे बोर्ड या किसी भी रेल में अधिकारियों को हिन्दी से कोई लेना देना नहीं है यहा तो बोर्ड में राजभाषा निदेशालय में बैठा उपनिदेशक जो कर दे वही फाइनल हो जाता है और वहां पर बैठा है सिंधी, कहते है कि यह कौम ही इस प्रकार की है कि इनसे खतरनाक तो सांप भी नहीं होता, एक बार सांप का काटा बच सकता है सिंधी का काटा नहीं बच सकता । यही किया है हाल में वरिष्ट राजभाषा अधिकारियों की तैनाती में , उसने जो कर दिया उस पर सभी ने अपनी मोहर लगा दी, और बेचारी परेशान हुए है पश्चिम रेल के और इलाहाबाद में नियुक्त राजभाषा अधिकारी ।ध्यान देने लायक जो तथ्य है उनपर गौर ही नहीं किया गया जैसे कि ः१ सभी रेलों पर एक एक अधिकारी समान अनुपात से दिया जाना चाहिये था२ उक्त रेलों पर नियमानुसार ५० प्रतिशत ही संघ लोक सेवा आयोग द्वारा चयनित तैनात किये जाने चाहिये थे परन्तु यह भी नहीं किया गया ।३ पश्चिम रेल पर पांच मण्डल है और पांच ही राजभाषा अधिकारी , यदि उक्त तीन अधिकारी आ जाएंगे तो पहले से ही कार्यरत नियमित रूप में चयनित अधिकारी कहां जाएंगे, यह सोचना बोर्ड का काम है ।४ उत्तर रेल और मध्य रेल में एक भी सीधी भर्गी वाला अधिकारी क्यों नहीं दिया गया, इन रेलों पर क्या मेहरबानी है ।५ यह ठीक है कि तदर्थ अधिकारियों को पदोन्नत किया जा सकता है लेकिन पदोन्नत होने के बाद वे कहां जाएंगे, क्योंकि उनकी रिक्ती तो नियमित चयन करके भर दी गई है और नियमित चयनित अधिकारियों को पदावनत नहीं किया जा सकता ।६ इसी प्रकार इलाहाबाद में दो सीधी तैनाती कर दी गई है और वहां पर कार्यरत अधिकारियों केलिए परेशानी खडी की गई है ।७ यदि सबसे जूनियर को ही पदोन्नति करनी है तो महाप्रबंधक को तदर्थ राजभाषा अधिकारी भरने की पावन बोर्ड ने क्यों नहीं दी ।८ मोटवानी ने पहले भी हिन्दी कंपटिंग फाउण्डेशन के मामले में अडंगा लगाया था जो कि संसदीय राजभाषा समिति के हस्तक्षेप के कारण ठीक हुआ है , अतः जब बोर्ड जानता है कि यह व्यक्ति गलत है और गलत कार्य कराता है तो उसे रेल क्लेम ट्रीबुनल में क्यों नहीं भेजा जाता ।९ बोर्ड को पहले भी एक प्रस्ताव भेजा गया था कि निमार्ण विभाग में जिस प्रकार सब विभागों केलिए पद सृजन हेतु एक प्रतिशत निर्धारित कर दिया है उसमें हिनदी केलिए भी कुछ प्रतिशत होना चाहिये, लेकिन ऐसे प्रस्तावों पर बोर्ड विचार ही नहीं करता क्योंकि इनसे रेलों पर नियुक्त कर्मचारियों का भला होता है ।अब देखते है कि इन रेलों के महाप्रबंधक अपने अधिकारियों को बचाने केलिए क्या करते है, उन्हे करना भी चाहिये और यह फर्ज भी है । जब तक पहले से नियुक्त नियमित अधिकारियों कोपूरा काम नहीं मिलता , हमारा मानना है कि तब तक सीधी भर्ती वालों को ज्वाइन नहीं करने देना चाहिये,

Monday, January 19, 2009

नजीबाबाद स्टेशन के एक स्टेशन मास्टर को जैश-ए-मोहम्मद के नाम से एक खत मिला

नजीबाबाद स्टेशन के एक स्टेशन मास्टर को जैश-ए-मोहम्मद के नाम से एक खत मिला है। उसमें गणतंत्र दिवस के मौके पर यूपी और उत्तराखंड के आधा दर्जन रेलवे स्टेशन और धार्मिक स्थलों को उड़ाने की धमकी दी गई है। इस खत के बाद से सुरक्षाबल हतप्रभ हैं। मुरादाबाद के रेलवे अफसरों ने कहा है कि जीआरपी ने इस बारे में शिकायत दर्ज कर ली है और खत के स्त्रोत का पता लगा रही है। यह खत मूलरूप से नजीबाबाद स्टेशन मास्टर जे. एस. द्विवेदी को मिला है। इसमें रामपुर, नजीबाबाद, लक्सर, रुड़की और ऋषिकेश स्टेशनों को उड़ाने की धमकी दी गई है। खत को जम्मू-कश्मीर की किसी जगह से भेजा गया है। उसमें तस्लीम नाम के जैश कमांडर ने स्टेशन और धार्मिक स्थल उड़ाने का दावा किया है।

महिलाओं के डिब्बे में चाकू की धाक पर लूटपाट करने वाले दो लुटेरों को कल्याण रेलवे पुलिस ने गिरफ्तार

चलती लोकल ट्रेन में महिलाओं के डिब्बे में चाकू की धाक पर लूटपाट करने वाले दो लुटेरों को कल्याण रेलवे पुलिस ने गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार मोहम्मद वासीम शेख, एवं सिद्दीकी हसीम शेख के पास से साढ़े छ: हजार की नकदी एवं मोबाईल फोन पुलिस ने बरामद किया है। कल्याण रेल पुलिस के मुताबिक बुधवार की देर रात अंबरनाथ से बदलापुर की ओर जा रही लोकल के लेडीज डिब्बे में पकड़े गए दोनों युवक सवार हुए थे। इन दोनों युवकों ने लोकल शुरू होते ही चाकू की धाक पर डिब्बे में रही महिलाओं के पर्स छीनने लगे। बदलापुर स्टेशन पर ट्रेन के पहुंचते ही लोकल रुकने के पहले ही दोनों युवक छलांग लगा कर भागने लगे। ट्रेन रुकने पर महिलाओं ने मामले की शिकायत रेल पुलिस से की। तत्पश्चात रेल पुलिस ने फरार दोनों लुटेरों को धर दबोचा। गिरफ्तार दोनों मुम्बई के क्राफर्ड माकेर्ट परिसर के रहनेवाले हैं।

Sunday, January 18, 2009

आखिर मामला रेलमंत्री जी के इलाके का है

मंत्री भी बिहारी, कर्मचारी भी बिहारी, अफसर भी बिहारी, तो बिहारी भृष्टाचार क्यों नहीं हो सकता, दानापुर में सब कुछ संभव, आखिर मामला रेलमंत्री जी के इलाके का है ।
The CBI, which has started a thorough probe into the fraudulent withdrawal of huge public money under fictitious names under Danapur division of East Central Railway (ECR) by scamsters, will seek the help of experts to crack the mystery behind sabotaging of railway's internal system of salary-based computer. The CBI sleuths are yet to quiz railway officials and employees concerned to unravel the mystery behind defalcation of such a huge amount. According to sources, CBI sleuths have already made scrutiny of relevant documents. The modus operandi adopted by the scamsters is being studied by the apex investigating agency. It has come to light that the financial irregularities worth about Rs 1 crore took place in July and August, 2008, alone. Keeping in mind the fact that defalcation of railway money was in crores, CBI sleuths have decided to investigate the matter from the date since computerised salary system was introduced in Danapur division of ECR in 2005, sources said. A CBI official informed that it was the first railway cyber crime committed in Bihar. Though the CBI had got the wind of the defalcation and had alerted the railways about it, yet the railways did not take steps to prevent it. Even the railway vigilance could not nip the scam in the bud when it was first detected in 2005 itself, he said. The CBI sleuths did not rule out possibility of a nexus between some railway employees and officials in the defalcation of such a huge amount from Danapur division. "It is a fact that several railway officials belonging to personnel, accounts, computer and mechanical (power) failed to report about the scam in time," a CBI official said, adding accountability of the railway officials would be fixed soon after completion of the investigation. The scamsters involved in the racket made an abortive bid to set ablaze the record room of the office of divisional railway manager (DRM), Danapur, on December 18, 2008. The railways have stepped up security in and around DRM's office and deployed additional RPF personnel to guard the record room. Its windows and side doors have also been sealed, a railway security official said. According to sources, the CBI sleuths recently seized papers from the commercial department to check the records. It is learnt that the alleged kingpin of the scam, who has been absconding, had been preparing salary bills of the commercial employees of the division. The CBI sleuths suspect that he might have illegally withdrawn money in the name of non-existent persons, sources said. Meanwhile, Danapur DRM B D Garg told TOI that the railways would extend full cooperation to the CBI in carrying out a thorough investigation into the scam.

अब इंण्डिया में भी बुलेट ट्रेन की संभावनाएं बनती नजर आ रही हैं

कहते है लालू की जापान यात्रा भारत केलिए लाभदायक हो सकती है, अब इंण्डिया में भी बुलेट ट्रेन की संभावनाएं बनती नजर आ रही हैं

The visit of railway minister Lalu Prasad to Japan has one again raised hope of the railways exploring the feasibility of running bullet trains in the country. Though the present track condition in the country is not conducive to run high speed bullet trains, the railways can develop the required infrastructure to introduce this dream train on some routes. Bullet trains are specially designed to run at the maximum speed of 250 to 300 kmph per hour in foreign countries. In fact, separate tracks are required to run bullet trains which are substitute to air traffic in foreign countries. Besides, no goods trains would run on the special tracks of bullet trains from the safety point of view, technical experts said. According to sources, the railways propose to run bullet trains on the Mumbai-Ahmedabad and Delhi-Gwalior or Delhi-Lucknow routes. Tracks on these routes are safe to run the fastest trains. At present, the railways have been running the fastest Shatabdi Express on Delhi-Gwalior route at 130 kmph to 140 kmph. The railways could further strengthen track condition on any of these routes to introduce high speed bullet trains, sources said. According to a Railway Board official, a trial run in bullet train by Lalu and other technical experts in Japan recently is likely to brighten chances of running bullet trains on the select corridors of the railways in India. The railways will need minimum Rs 10,000 crore to build the infrastructure to run bullet trains. Though maintenance of bullet trains, particularly locomotives, is very costly, the Indian Railways are capable of maintaining bullet train coaches with the help of advanced technology, he said. According to sources, the signalling system of the bullet train path is entirely different and is based on the latest technology. When a bullet train leaves its originating station, tracks should be cleared up to its destination points. People of Japan, France and Spain prefer bullet trains as the only alternative to aeroplane, the fare of which is almost equal, sources said, adding the railways will have to consider all aspects while introducing bullet trains in the country. A technical expert of railways said the introduction of bullet trains would fill railway coffers too as elite class passengers would prefer journey by such high speed trains

Friday, January 16, 2009

एक से बढकर एक नए नए भृष्टाचार के नमूने रोज रोज खबरों में आते रहते हैं

रेलवे विभाग में भृष्टाचार कम होने का नाम नहीं , एक से बढकर एक नए नए भृष्टाचार के नमूने रोज रोज खबरों में आते रहते हैं । चपरासी से लेकर रेलवे के आला अफसर इस फेर के चक्कर में पडे हुए हैं और रोज रोज नई नई करामातें प्रस्तुत करते रहते हैं । सुना है कि आजकल रेलवे बोर्ड के कुछ अफसर मिलकर नई नई तरकीबें निकाल रहे है कि एक ही दिन में किस तरह से करोडपति हो जाएं और उनके आगे आने वाली पढि़यों का पूरा इन्तजाम कर जाएं ।
आपको यह समाचार काफी अनमना सा लग रहा होगा, परन्तु सच्चाई यही है कि एक ही दिन में किस तरह से मालामाल हो जाएं यही तरकीब निकालने में जो भी माहिर है वही अव्वल है और कामयाब है । हाल में ही महाप्रबंधकों की पोस्टों पर हुई तैनातियां इस का प्रमाण है । कितना किस महाप्रबंधक से लिया गया यह सब चुपके चुपके चल रहा है कोई भी बताने को तैयार नहीं है ।भगवान से प्रार्थना है कि भारत देश को इस प्र कार के भृष्टाचार से मुक्त करे ताकि आम भारतीय को कुछ राहत मिल सके ।

Friday, January 9, 2009

अफसरों को यात्रियों की बजाय लालू का ध्यान अधिक है

अफसरों को यात्रियों की बजाय लालू का ध्यान अधिक है और यही कारण है कि रेल यात्रियों को सहूलियतों के नाम पर परेशानी मिल रही है
Passengers who came to board the Patna-New Delhi Rajdhani Express (2309 UP) at Patna Junction on Friday had a tough time locating their bogies due to the non-functioning of the coach guidance display boards. There was total chaos on platform no. 3 when the premier train arrived there. The passengers complained that the coach combination was not in its usual sequence resulting in confusion. Two senior citizens, who had come to board the train, fell on the platform. However, Patna GRP personnel came to their rescue and helped them board the train, said a GRP official. According to the Danapur DRM, the coach guidance display boards were not working due to some technical reasons on platform no 3 and that might have caused inconvenience to the passengers on Friday. He, however, denied that there was any change in the sequence (marshalling) of coaches. He informed that he had already suspended three staff in connection with the non-functioning of the coach guidance display boards on January 3 during his surprise inspection at Patna Junction. Efforts are on to repair the fault in the coach guidance display boards, he said.

रेलवे में पुलिस का कारनामा, आर पी एफ तो रक्षक से भक्षक

रेलवे में पुलिस का कारनामा, आर पी एफ तो रक्षक से भक्षक बन गई है ।

Four constables of the Railway Protection Force (RPF) and one constable from the Bareilly police were arrested in Shahjahanpur for allegedly molesting and misbehaving with a batch of girl students on board Rapti Ganga Express train during the intervening night of Thursday and Friday. Police were on the lookout for two more cops from Bareilly who managed to get down from the train and escape before they could be apprehended. In a separate incident reported from Muzaffarnagar, a dismissed constable of the Central Industrial Security Force (CISF) and his associate allegedly hacked to death a 13-years old girl after she resisted rape and tried to raise an alarm. The miscreants left the minor girl's grandmother, who was with the victim, critically wounded. Additional director general of police (ADG) Law & Order, Crime and Special Task Force (STF) Brij Lal told TOI that the incident took place on board the train when the victims — a tour group of students from St Andrews Degree College in Gorakhpur — were on their way back from Dehradun. The accused RPF constables attached to the Hardoi railway RPF post were travelling as train escorts while the other accused cops had joined them. After the train left Bareilly, a group of cops entered the coach in which the tour group was travelling and began to misbehave with the girls. They were joined by some other local male passengers travelling on the train. The situation came to a point where the girls raised objection over the indecent conduct of the cops and the public but had to retreat after the accused threatened to retaliate. Eventually, when the train reached Shahjahanpur, Prof I Richard who was leading the tour group, lodged a written complaint with the Shahjahanpur Government Railway Police (GRP) on the basis of which the accused cops were arrested. They were identified as head constable Mahesh Chandra and constables Vijay Kumar, Prakash Chaturvedi and Sitaram — all from the RPF along with constable Ramdeo Misra of Cantonment police station in Bareilly. The absconding constables were identified as Ram Awtar of Sheeshgarh and Brijendra Singh of Shahi police stations in Bareilly. Two members of the public — Vipin Srivastava and Vishal — both hailing from Shahjahanpur, were also arrested. The accused were booked under section 294/506 (eve-teasing and threatening) and sent to jail. In Muzaffarnagar, a sacked constable of the CISF Vijay alias Pintu and his aide Monu allegedly hacked a 13-years old girl to death with a spade and left her grandmother critically wounded in Nai Mandi police circle on Thursday night. According to the police, the victim and her grandmother -- both residents of Charupur Mukhiyali village were going to the jungles to collect firewood when they were intercepted by Vijay and Monu. The two, who were under the influence of alcohol, allegedly tried to rape the girl and when she tried to raise an alarm, they attacked her with a spade killing her on the spot. Her grandmother, who was accompanying her, too was attacked by the duo and left critically wounded. She was found lying in a pool of blood by the villagers on Thursday evening and rushed to the hospital where she later narrated the incident. A case of attempted rape, murder and murder attempt was lodged against the duo who were arrested and sent to jail.

Sunday, January 4, 2009

क्योंकि इसमें लालू का फायदा है

पटना में दूसरा रेल टर्मिनल दानापुर होगा, रेलवे बोर्ड से इसकी मंजूरी हो गई, क्योंकि इसमें लालू का फायदा है

The railways have prepared a comprehensive plan to develop Danapur station as a satellite and second terminal station of Danapur division of the East Central Railway (ECR) at an estimated cost of Rs 2.5 crore. The Railway Board has already approved the new plan. Work on this project will begin soon, said Danapur DRM B D Garg. According to him, it will be the second terminal of Danapur division after the one constructed at Rajendra Nagar. About 110 pairs of passenger trains pass through this station while several pairs of passenger trains originate from here to different far off places. This station has been given a status of model station of the Indian Railways, he said. Danapur, which is one of the oldest stations of the Indian Railways, had come into being on January 1, 1925, after the erstwhile East Indian Railway (EIR) was taken over by the Government of India. The station has been the nerve centre of the division from the train operation point of view ever since. However, this station has been denied proper infrastructure to cope with the rush of heavy passenger traffic, sources said. Under the new plan, the railways intend to build a separate building of reservation office, booking office, inquiry, waiting rooms, refreshment halls and all other required infrastructure at Danapur station. Recently, the railways have completed the main concourse (main entrance) building of the station. A spacious circulating area is being built just outside the station building with a view to regulating the flow of traffic. According to the DRM, yard modelling and modernisation of the passenger-related safety measures are also part of the new plan approved for Danapur station. The railways have also approved the proposal to widen the lone foot overbridge (FOB) from the existing 12 feet to 16 feet at a cost of Rs 1.5 crore, he said. Keeping in view the future plan of the government to include Danapur under the Greater Patna Project, the railways intend to develop Danapur station into a hub for passenger trains, Garg said, adding the railways are bound to provide all amenities to the passengers at Danapur on the pattern of Rajendra Nagar Terminal. The DRM said the railways have decided on a long term plan for Danapur station to develop it from traffic operation point of view. The railways intend to expand it more so that all east bound trains could originate from here. As of now, the east bound trains are originating from Rajendra Nagar Terminal, he said.