Tuesday, June 17, 2014

आपत्ति पर यूपी के अधिकारियों ने सुझाव

हाईस्पीड ट्रेन चलाए जाने के लिए रैपिड रेल ट्रांजिट सिस्टम को मंजूरी दिए जाने से जहां मेरठ के लोग खुश हैं, वहीं वे यह भी नहीं समझ पा रहे हैं कि आखिर अधर में लटका यह प्रोजेक्ट कैसे और कब तक पूरा होगा। तीन साल की कड़ी मेहनत और करोड़ों रुपये खर्च कर इस रूट के लिए तैयार किए गए अलाइनमेंट पर एनएचएआई की ओर से आपत्ति लगा दी गई थी। उसने नया रूट तैयार करने का सुझाव दिया था। अगर इसके लिए नया रूट तैयार किया जाता है, तो इसके लिए फिर से पुरानी प्रक्रिया दोहरानी होगी और उसमें खर्च भी काफी आएगा। इससे यह प्रोजेक्ट काफी डिले हो सकता है और इसकी कॉस्ट भी बढ़ जाएगी। 
तीन साल की मेहनत के बाद इस रूट के लिए अलाइनमेंट तैयार किया गया था। दिल्ली सराय काले खां से आनंद विहार होते हुए गाजियाबाद, मुरादनगर व मोदीनगर होते हुए हाईस्पीड ट्रेन को मेरठ पहंचाने की प्लानिंग थी। गाजियाबाद से इस रूट के लिए एनएच- 58 के बीच पीलर खड़े कर उसके उपर ट्रेन को दौड़ाने की योजना थी। जब रूट को लेकर सबकुछ तय हो गया, तो एनएचएआई ने अपनी अपत्ति लगा दी। उसका कहना था कि एनएच-58 की चौड़ाई पहले ही बहुत कम है। उसपर यातायात का भारी दबाव रहता है। ऐसे में उसके बीच में आठ से दस फुट चौड़ाई के पीलर खड़े करने से वाहनों का इस रोड पर चलना ही दूभर हो जाएगा।
 
एनएचएआई की इस आपत्ति पर यूपी के अधिकारियों ने सुझाव दिया था कि वे पीलर निर्माण से पहले मुरादनगर की पटरी को दुरूस्त कर देंगें। कुछ ट्रैफिक हापुड़ होकर निकल जाएगा। इसके अलावा वे कुछ वैकल्पिक मार्ग तैयार कर देगे जिससे वाहनों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में कोई कठिनाई नहीं होगी।
 
एनएचएआई के अधिकारी इस तर्क से सहमत नहीं हुए और उन्होंने प्रस्तावित एक्सप्रेस-वे पर डासना से आगे पीलर खड़े कर उसपर हाइस्पीड ट्रेन चलाने के लिए अलाइनमेंट तैयार करने का सुझाव दिया। इस काम के लिए नए सिरे से धन की आवशयकता पड़नी थी। साथ ही एक बार फिर से लंबी प्रक्रिया से जझना पड़ता। रूट की लंबाई बढ़ने से प्रोजेक्ट कॉस्ट बढ़ जाती। नए रूट की वाएबिलिटि की भी समीक्ष की जानी थी। इन्हीं बातों को लेकर यह प्रोजेक्ट अधर में लटका हुआ था।
 
इस
 प्रोजेक्ट को हरी झंडी मिल जाने के बाद फिर से यह प्रशन खड़ा हो गया है कि आखिर किस रूट से यह ट्रेनआएगी। जिले के अधिकारी भी इस सवाल का कोई जवाब नहीं दे पा रहे है। एमडीए अधिकारी भी इस मामलेमें अपनी अनभिज्ञता जता रहे हैं। 

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