Monday, June 30, 2014

कई ट्रेनों के स्लीपर डिब्बों से परीक्षार्थियों को उतारा

लखनऊ रेलवे भर्ती बोर्ड व नेट के लिए आए हजारों परीक्षार्थियों की भीड़ से रविवार शाम तक चारबाग स्टेशन पर अफरा-तफरी मची रही। जनरल डिब्बों में जगह न मिलने पर युवकों ने कई गाड़ियों के स्लीपर कोचों पर कब्जा जमा लिया। जीआरपी और आरपीएफ ने बमुश्किल कई ट्रेनों के स्लीपर डिब्बों से परीक्षार्थियों को उतारा। राजधानी में रविवार को करीब 61 हजार युवकों को सहायक लोको पाइलट की परीक्षा देनी थी। 
इनमें से करीब 56 फीसदी परीक्षा देने आए। इनके अलावा 23,330 लोगों को नेट की परीक्षा के लिए प्रवेश पत्र भेजे गए थे। परीक्षा खत्म होने के बाद दूसरे जिलों से आए हजारों छात्रों को वापस जाने के लिए घंटों परेशान होना पड़ा। ट्रेनों के जनरल डिब्बों में जगह न मिलने के बाद बड़ी तादात में परीक्षार्थियों ने स्लीपर डिब्बों में कब्जा जमा लिया। आरक्षण करवाकर चलने वाले यात्रियों के विरोध के बावजूद वह डिब्बों से उतरने के लिए तैयार नहीं हुए। 
हालांकि, जीआरपी और आरपीएफ के हस्तक्षेप के बाद नीलांचल, पंजाब मेल, डुप्लीकेट पंजाब मेल, जनता एक्सप्रेस, चित्रकूट एक्सप्रेस और त्रिवेणी एक्सप्रेस के आरक्षित डिब्बों से परीक्षार्थी उतारे जा सके। जनरल डिब्बों में जगह नहीं मिलने पर वो हंगामा करने लगे। पुलिसकर्मियों के समझाने के बाद वह शांत हुए। आलमबाग बस स्टेशन पर अफरातफरी ट्रेनों में जगह न मिल पाने के बाद सैकड़ों परीक्षार्थी आलमबाग बस अड्डे पहुंच गए। बस स्टेशन पर परीक्षार्थियों की भीड़ के चलते रोडवेज को 20 अतिरिक्त बसों का संचालन करना पड़ा। एआरएम आरके त्रिपाठी और प्रशांत दीक्षित देर शाम तक उन्हें भेजने की व्यवस्था में जुटे रहे।

Thursday, June 26, 2014

मुंबई में सीजन टिकटों की बिक्री बढ़ गई

रेल किराया वृद्धि की घोषणा के बाद मुंबई में सीजन टिकटों की बिक्री बढ़ गई। यात्री वार्षिक और अर्द्धवार्षिक टिकट बुक कर ज्यादा से ज्यादा पैसे बचाने में जुट गए। हालांकि सीजन टिकट में की जाने वाली दोगुना से ज्यादा वृद्धि के फैसले को मंगलवार को रेल मंत्रालय ने वापस ले लिया, अब यात्रियों को सीजन टिकट पर 14.2 फीसदी ज्यादा चुकाना होगा। बहरहाल 21 जून से 24 जून तक वेस्टर्न रेलवे ने 40 करोड़ तो सेंट्रल रेलवे ने 29 करोड़ रुपये के सीजन टिकट बेचे। वेस्टर्न रेलवे ने इन चार दिनों में कुल 3,24,686 पास बेचे, तो सेंट्रल रेलवे ने इतने ही दिनों में 3,38,276 सीजन टिकट बेचे।
दोनों जोनल रेलवे पर रोजाना औसतन 50 वार्षिक टिकटों की बिक्री होती थी, लेकिन पिछले चार दिनों में कुल 95,192 लोगों ने एक साल का सीजन टिकट निकाला। वेस्टर्न रेलवे पर 60,374 लोगों ने साल भर का इंतजाम किया, इसमें से भी 16,591 लोगों ने फर्स्ट क्लास का सालभर का पास निकाला।

Wednesday, June 25, 2014

सेकंड क्लास रेल यात्रियों को बढ़े हुए रेल किराए में राहत देने का फैसला

मुंबई के आम लोकल ट्रेन यात्री के जनाक्रोश और अक्टूबर में होने वाले महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में इस जनाक्रोश के भड़कने के डर से दिल्ली की मोदी सरकार को सेकंड क्लास रेल यात्रियों को बढ़े हुए रेल किराए में राहत देने का फैसला करना पड़ा।
सरकार ने अपने पहले के किराया वृद्धि आदेश में सुधार करते हुए 80 किलोमीटर तक के सेकंड क्लास कार्ड टिकट पर यात्रा करने वालों को किराया वृद्धि के भार से मुक्त कर दिया। इसी तरह सेकंड क्लास के सीजन टिकट पर सफर करने वाले सबअर्बन और नॉन सबअर्बन रेल यात्रियों को अब सिर्फ 14.2 पर्सेंट की ही भाड़ा वृद्धि का भार सहन करना पड़ेगा।
सरकार ने अपने पूर्वादेश में सुधार करते हुए सेकंड क्लास के सीजन टिकट रेल यात्रियों को यह राहत दी है कि वे अपने एक महीने का सीजन टिकट मौजूदा पैटर्न पर ही खरीद सकेंगे। मौजूदा पैटर्न में एक महीने का सीजन टिकट खरीदने पर रेल यात्री को 15 दिन की रेल यात्रा का ही पैसा देना पड़ता है, जिसे सरकार के नए आदेश में 15 दिन से बढ़ाकर 30 दिन कर दिया था।
यानी मंथली पास पर रेल यात्री को 30 दिन की यात्रा का पैसा और ऊपर से 14.2% की दर से किराया वृद्धि का डबल बोझ पड़ रहा था। इसी वजह से किराया बढ़कर लगभग दोगुना हो गया था। अब सुधारित आदेश के मुताबिक मंथली पास के लिए 30 दिन की यात्रा का नहीं, सिर्फ 15 दिन की यात्रा का ही पैसा वसूला जाएगा। अलबत्ता 14.2 % की किराया वृद्धि इस पर भी लागू रहेगी। इससे यात्रियों पर पड़ने वाले दो गुने किराए का बोझ काफी हद तक कम हो गया है।
 
फर्स्ट क्लास के सीजन पास धारकों के लिए सरकार ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि 25 जून से पहले मासिक, त्रैमासिक, छमाही और वार्षिक सीजन टिकट खरीदने वालों से कोई डिफरेंस नहीं वसूला जाएगा। इसी तरह प्रीमियम और डायनामिक ट्रेन के टिकट धारकों से भी कोई डिफरेंस नहीं वसूला जाएगा।
 

Monday, June 23, 2014

रेल किराये में बेतहाशा वृद्धि से लोग दंग है

रेल किराये में बेतहाशा वृद्धि से लोग दंग है। मोदी को वोट देने वाले आज कांग्रेस का गुणगान कर रहे हैं। लोकल ट्रेन हो या फिर बेस्ट की बस हो-सभी जगह रेल किराये में बढ़ोतरी की चर्चा है। अगर किसी ने मोदी सरकार का समर्थन कर दिया, तो उसकी खैर नहीं। मोदी समर्थकों की बोलती बंद करने के लिए कई लोग एक साथ बोल पड़ते हैं। लोग कहने लगे हैं कि मोदी को उन्होंने गुड गर्वनेंस के लिए वोट दिया था न कि नेताओं की चोरी और अधिकारियों की कमजोरी जनता पर लादने के लिए।
साथ ही चुनौती देते हैं कि आगामी विधानसभा चुनाव में बताएंगे कि बेतहाशा किराया बढ़ाने के क्या मायने होते हैं। प्रतिदिन लोकल ट्रेन की यात्रा करने वाले लोग सरकार के निर्णय से बेहद खफा हैं। कभी मोदी की गुणगान करने वाले नरेंद्र भाई कहते हैं कि रेल यात्रियों को इतने बुरे का कतई अनुमान नहीं था। अंधेरी अंबावाडी के अवधेश यादव कहते हैं, पहले से ही महंगाई की मार झेल रहे हम लोगों पर मोदी कहर बनकर टूटे हैं। दुर्गा प्रसाद यादव का कहना है कि किराया बढ़ाने से हम लोगों के यात्रा खर्च में बेतहाशा वृद्धि हो गई है।
शनिवार को अंधेरी स्टेशन के बाहर विरोध प्रदर्शन करने वाले कांग्रेसी नेता मुकेश शर्मा कहते हैं कि इतिहास में पहली बार रेल किराये में इतनी बढ़ोतरी हुई है। कांग्रेस भी केंद्र में थी, उसने इस तरह की किराये में बढ़ोतरी कभी नहीं की थी। कुर्ला के जाहिद अली खान कहते हैं कि रेलवे में मिस-मैनेजमेंट बहुत ज्यादा है जिस पर कंट्रोल कर घाटा कम किया जा सकता है। ऐसे में किराया बढ़ाने की नौबत नहीं आती।
वाशीनाका से सैयद महबूब कहते हैं कि मोदी ने अपने लिए अच्छे दिन ला दिए, जो जनता के बुरे दिन साबित हो रहे हैं। चेंबूर निवासी कुरबान अलीखान कहते हैं, रेल किराया बढ़ाए जाने से मुंबईकरों का बजट बिगड़ जाएगा। देश में मुंबई एकमात्र ऐसा शहर है जहां कदम-कदम पर लोग लोकल सेवा का उपयोग करते हैं। स्कूल, कॉलेज, नौकरी, रिश्तेदारों के यहां आने-जाने के लिए लोकल सेवा का ही उपयोग करते है। ऐसे में मोदी ने किराया बढ़ाकर हम सभी की जेब पर डाका डाला है।
 

Friday, June 20, 2014

रेलवे को वर्ल्ड क्लास बनाना

इंडियन रेलवे में बदलाव को लेकर आतुर रेलमंत्री डी.वी. सदानंद गौड़ा ने गुरुवार को रेलवे के आला अफसरों को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि वे अब परफॉर्म करके दिखाएं या फिर कुर्सी छोड़ दें। उन्होंने कहा कि नॉन परफॉर्मर को किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने अफसरों को आउट ऑफ बॉक्स सोचने की सलाह देते हुए कहा कि अब किसी भी नाकामी के लिए बहाने की परंपरा को वे तिलांजलि दें। 
रेलवे बोर्ड के मेंबरों के अलावा सभी जोन के जनरल मैनेजर, डिविजनल मैनेजर और बोर्ड के मातहत आने वाले पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग के आला अधिकारी भी गुरुवार को हुई मीटिंग मौजूद थे। रेलमंत्री ने कहा कि चीन की रेलवे के कर्मचारी प्रति पैसेंजर और माल ढुलाई के मामले में भारत से चौगुना ज्यादा एफिशिंएट है। उन्होंने कहा विश्व की ज्यदातर ट्रेनें वक्त पर चलती हैं, लेकिन रेलवे अभी इस मामले में भी पीछे हैं।
 
रेलमंत्री ने अफसरों से कहा कि देश के लोग फौरन रेलवे की परफॉर्मेंस में बदलाव चाहते हैं। उन्होंने कहा कि भले ही प्लानिंग पांच साल की हो, लेकिन नतीजे जल्द से जल्द दिखने चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि रेलवे बोर्ड के सदस्य से लेकर रेल के कर्मचारी तक हर व्यक्ति को अपनी परफॉर्मेंस दिखानी होगी या फिर उसे हटना होगा।
 
गौड़ा ने रेलवे के अफसरों से यह भी कहा कि वे अपनी बात खुलकर रखें और अगर वे चाहें तो उन तक या रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा के पास भी अपनी बात पहुंचा सकते हैं और वे उसे गोपनीय भी रखेंगे। उनका इशारा डिविजनल मैनेजरों की ओर था। उन्होंने कहा कि रेलवे में बड़े सुधारों के लिए रेलवे अफसर अपनी बात और विचार भी रखें। उनके सुझावों और समस्याओं पर भी विचार किया जाएगा। उन्होंने रेल अफसरों से एक टीम के रूप में काम करने की भी हिदायत दी।
 
रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा ने कुछ स्टेशनों पर सफाई की बेहद खराब व्यवस्था के बारे में मीडिया रिपोर्ट्स का जिक्र करते हुए डिविजनल रेलवे मैनेजरों से कहा कि वे सफाई व्यवस्था और पैसेंजरों से जुड़ी समस्याओं की खुद निगरानी करें। उन्होंने पैसेंजरों की सेफ्टी के साथ ही वक्त पर ट्रेन चलाने पर भी जोर दिया। उन्होंने रेलवे में बड़े पैमाने पर कम्प्यूटराइजेशन और डिजिटलाइजेशन पर भी जोर दिया। रेलवे बोर्ड के चेयरमैन अरुणेन्द्र कुमार ने वर्क कल्चर को बेहतर बनाने पर जोर दिया।
1. सेफ्टी और सिक्यॉरिटी 2. ट्रेनों की औसतन स्पीड 150 से 200 किमी प्रति घंटा करना 3. बुलेट ट्रेन चालू कराना 4. पंक्चुएलिटी को सुधारकर उसे 100 फीसदी करना 5. ट्रेनों और स्टेशनों पर सफाई 6. खाने की क्वॉलिटी संतोषजनक करना 7. रेलवे को वर्ल्ड क्लास बनाना

Thursday, June 19, 2014

रेल में 100 फीसदी एफडीआई की इजाजत

मोदी सरकार भारतीय रेल खासकर मालगाड़ियों और हाई-स्पीड ट्रेनों के इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की इजाजत देने की तैयारी कर रही है। रेल में 100 फीसदी एफडीआई की इजाजत दी जा सकती है। 
कॉमर्स ऐंड इंडस्ट्री मिनिस्ट्री ने रेलवे के कई हिस्सों में 100 फीसदी एफडीआई की इजाजत देने की प्रक्रिया पर काम शुरू कर दिया है। इससे पहले रेलवे के कुछ ही सेक्टरों जैसे हाई-स्पीड ट्रेन, मालगाड़ियों के लिए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के जरिए बने विशेष कॉरिडोर और शहरी-अर्धशहरी क्षेत्रों के रेल नेटवर्क में ही इसकी इजाजत की प्लानिंग थी। फिलहाल मास रैपिड ट्रांसपोर्ट सिस्टम को छोड़कर रेलवे के किसी भी क्षेत्र में एफडीआई की इजाजत नहीं है।
सूत्रों का कहना है कि इसके लिए एक ड्राफ्ट नोट तैयार कर लिया गया है। इसे रेल सहित दूसरे मंत्रालयों से चर्चा के बाद औपचारिक प्रस्ताव तैयार किया जाएगा। हाई-स्पीड ट्रेन और विशेष कॉरिडोर बीजेपी सरकार की प्राथमिकताओं में है। रेल के इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने के अजेंडे का जिक्र राष्ट्रपति के अभिभाषण में भी था।
टीओआई के एक इंटरव्यू में कॉमर्स ऐंड इंडस्ट्री मिनिस्टर निर्मला सीतारमन ने भी माना था रेलने को इन्वेस्टमेंट की सख्त जरूरत है। इसे विस्तार, सुरक्षा, मॉडर्नाइजेशन के लिए बहुत इन्वेस्टमेंट की जरूरत है और इतना निवेश भारत से नहीं आ सकता। ऐसे में एफडीआई एक अच्छा अवसर है।
 
डिफेंस के बाद रेलवे दूसरा सेक्टर है जिसमें मोदी सरकार 100 फीसदी एफडीआई की बात कर रही है। रेल मंत्री सदानंद गौड़ा ने कहा था कि रेलवे को मॉडर्नाइजेशन के लिए 5 लाख करोड़ रुपये की जरूरत है। इसका बड़ा हिस्सा प्राइवेट सेक्टर से ही आएगा।

Tuesday, June 17, 2014

आपत्ति पर यूपी के अधिकारियों ने सुझाव

हाईस्पीड ट्रेन चलाए जाने के लिए रैपिड रेल ट्रांजिट सिस्टम को मंजूरी दिए जाने से जहां मेरठ के लोग खुश हैं, वहीं वे यह भी नहीं समझ पा रहे हैं कि आखिर अधर में लटका यह प्रोजेक्ट कैसे और कब तक पूरा होगा। तीन साल की कड़ी मेहनत और करोड़ों रुपये खर्च कर इस रूट के लिए तैयार किए गए अलाइनमेंट पर एनएचएआई की ओर से आपत्ति लगा दी गई थी। उसने नया रूट तैयार करने का सुझाव दिया था। अगर इसके लिए नया रूट तैयार किया जाता है, तो इसके लिए फिर से पुरानी प्रक्रिया दोहरानी होगी और उसमें खर्च भी काफी आएगा। इससे यह प्रोजेक्ट काफी डिले हो सकता है और इसकी कॉस्ट भी बढ़ जाएगी। 
तीन साल की मेहनत के बाद इस रूट के लिए अलाइनमेंट तैयार किया गया था। दिल्ली सराय काले खां से आनंद विहार होते हुए गाजियाबाद, मुरादनगर व मोदीनगर होते हुए हाईस्पीड ट्रेन को मेरठ पहंचाने की प्लानिंग थी। गाजियाबाद से इस रूट के लिए एनएच- 58 के बीच पीलर खड़े कर उसके उपर ट्रेन को दौड़ाने की योजना थी। जब रूट को लेकर सबकुछ तय हो गया, तो एनएचएआई ने अपनी अपत्ति लगा दी। उसका कहना था कि एनएच-58 की चौड़ाई पहले ही बहुत कम है। उसपर यातायात का भारी दबाव रहता है। ऐसे में उसके बीच में आठ से दस फुट चौड़ाई के पीलर खड़े करने से वाहनों का इस रोड पर चलना ही दूभर हो जाएगा।
 
एनएचएआई की इस आपत्ति पर यूपी के अधिकारियों ने सुझाव दिया था कि वे पीलर निर्माण से पहले मुरादनगर की पटरी को दुरूस्त कर देंगें। कुछ ट्रैफिक हापुड़ होकर निकल जाएगा। इसके अलावा वे कुछ वैकल्पिक मार्ग तैयार कर देगे जिससे वाहनों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में कोई कठिनाई नहीं होगी।
 
एनएचएआई के अधिकारी इस तर्क से सहमत नहीं हुए और उन्होंने प्रस्तावित एक्सप्रेस-वे पर डासना से आगे पीलर खड़े कर उसपर हाइस्पीड ट्रेन चलाने के लिए अलाइनमेंट तैयार करने का सुझाव दिया। इस काम के लिए नए सिरे से धन की आवशयकता पड़नी थी। साथ ही एक बार फिर से लंबी प्रक्रिया से जझना पड़ता। रूट की लंबाई बढ़ने से प्रोजेक्ट कॉस्ट बढ़ जाती। नए रूट की वाएबिलिटि की भी समीक्ष की जानी थी। इन्हीं बातों को लेकर यह प्रोजेक्ट अधर में लटका हुआ था।
 
इस
 प्रोजेक्ट को हरी झंडी मिल जाने के बाद फिर से यह प्रशन खड़ा हो गया है कि आखिर किस रूट से यह ट्रेनआएगी। जिले के अधिकारी भी इस सवाल का कोई जवाब नहीं दे पा रहे है। एमडीए अधिकारी भी इस मामलेमें अपनी अनभिज्ञता जता रहे हैं। 

Wednesday, June 11, 2014

ट्रेन रोकने की भी रणनीति बनाई

विजय पंडित मर्डर मामले में बीजेपी लगातार गंभीर रुख अपनाए हुए हैं। पार्टी ने हत्या के विरोध और हत्यारों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर दादरी में चल रहे अनिश्चितकालीन धरने के लिए बाकायदा टीमें गठित कर दी हैं। हर रोज अलग टीम व्यापारियों के साथ धरने पर बैठेगी। पार्टी के पदाधिकारियों ने बाकायदा मीटिंग कर रणनीति बनाई है। इसके अलावा ट्रेन रोकने की भी रणनीति बनाई जा रही है।
बीजेपी जिलाध्यक्ष ठाकुर हरीश सिंह ने बताया कि ग्रेटर नोएडा कैंप कार्यालय में मीटिंग कर उन्होंने इस बाबत रणनीति तैयार की है। मंगलवार को राजा रावल, अश्विनी शर्मा और कपिल गुर्जर के साथ बीजेपी के ग्रेटर नोएडा व कासना मंडल के साथ युवा मोर्चा, पंचायत राज प्रकोष्ठ व समाज कल्याण प्रकोष्ठ ने दादरी में धरना दिया।
बुधवार को जिला उपाध्यक्ष चरनजीत नागर, अनिल पंडित और गणपत सूबेदार के साथ बिसरख मंडल, जेवर नगर मंडल, किसान मोर्चा, श्रम प्रकोष्ठ और गौ-वंश प्रकोष्ठ धरना देंगे। गुरुवार को जिला मंत्री हरीश शिशोदिया, बिजेंद्र चौधरी व सुशील शर्मा के साथ दादरी देहात मंडल, रबुपुरा देहात मंडल, अनुसूचित मोर्चा, विधि और सूचना प्रकोष्ठ के पदाधिकारी धरने में शामिल होंगे। शुक्रवार को सीनियर नेता सुधा पुंडीर, नीरज शर्मा व योगेंद्र भाटी के साथ जारचा मंडल, जेवर मंडल, महिला मोर्चा, सहकारिता प्रकोष्ठ और मानवाधिकार प्रकोष्ठ के कार्यकर्ता धरना देंगे। शनिवार को जिला मंत्री आरती शर्मा, संतराम जाटव, विजय भाटी आदि के साथ जहांगीरपुर व बिलासपुर नगर, सामाजिक न्याय मोर्चा और व्यापार प्रकोष्ठ के नेता दादरी के धरना स्थल पर मौजूद रहेंगे। जिलाध्यक्ष ने बताया कि हत्याकांड का खुलासा कर दोषियों की गिरफ्तारी होने तक उनका धरना लगातार चलता रहेगा। अगर पुलिस हत्या करने वालों को गिरफ्तार न कर सकी तो आगे की रणनीति बनाई जाएगी।
उधर, बीजेपी नेता अतुल शर्मा ने बताया कि हत्यारों की गिरफ्तारी तक वह चुप नहीं बैठेंगे। आंदोलन को तेज किया जाएगा। रेल रोकने की भी रणनीति बनाई जा रही है। अगर पुलिस कार्रवाई में फेल होती है तो रेल रोकी जाएंगी।

Wednesday, June 4, 2014

पश्चिम रेलवे इसके नजदीक से गुजरने वाली ट्रेनों की गति कम करने पर सहमत

गुजरात के अमरेली जिले में स्थित गिर वन क्षेत्र के रेल ट्रैकों के आसपास घूमने वाले एशियाई शेरों को दुर्घटना से बचाने के लिये पश्चिम रेलवे इसके नजदीक से गुजरने वाली ट्रेनों की गति कम करने पर सहमत हो गया है। 
गुजरात के मुख्य वन संरक्षक आरएल मीणा ने बताया कि पश्चिमी रेलवे एशियाटिक शेरों की गतिविधियों वाले क्षेत्रों से गुजरने वाले मार्गों पर मालवाहक गाड़ियों की गति धीमी करने पर राजी हो गया है। ताकि ट्रेन चालक रेल पटरियों को पार करते शेरों या शावकों को हादसों से बचा सकें। 
बैठक का आयोजन इस वर्ष गिर वन के छह शेरों की अलग अलग दुर्घटनाओं में ट्रेन की चपेट में आने से हुई मृत्यु को ध्यान में रखते हुये किया गया था। मीना ने बताया कि रेलवे प्रशासन इस मांग पर भी विचार करने को सहमत हो गया है कि सुबह और शाम के समय मालवाहक गाड़ियों का संचालन नहीं किया जाए क्योंकि उस समय क्षेत्र से गुजरने वाली पटरियों पर शेरों की आवाजाही अधिक होती है।