लखनऊ मेल में हुई
लूटपाट में पुलिस का लापरवाह चेहरा एक बार फिर सामने आया। बीजेपी के दिल्ली
प्रवक्ता और एडवोकेट अमन सिन्हा भी इसी ट्रेन में सफर कर रहे थे। उन्हीं की कॉल पर
लूट की एफआईआर दर्ज की गई, लेकिन
इसके लिए उन्हें काफी बहस करनी पड़ी। अमन सिन्हा ने हमें बताया कि क्या हुआ था उस
वक्त :
ट्रेन जब मुरादाबाद से कुछ ही आगे निकली थी कि अचानक रूक गई। या तो कोई पहले से ही ट्रेन में चढ़ा था या फिर वहीं से कोई ट्रेन में आया और चेन खींची। उस वक्त करीब साढ़े चार बजे थे। मैं ए-1 बोगी में था। गेट के पास वाली सीट पर एक महिला थी। उन्होंने अपना बैग सिर के नीचे दबाया हुआ था। अचानक एक बंदा आया और जोर जबरदस्ती कर बैग खींच लिया। उसके हाथ में बड़ा छुरा था। महिला जब शोर मचाने लगी तो हमने देखा कि एक शख्स भाग रहा है। हम उसके पीछे दौड़े और गेट तक पहुंचे लेकिन वह वहां से कूद गया। मेरे साथ उसी बोगी में जाने माने शायर मुनव्वर राणा भी थे। जब मैं भागकर गेट तक पहुंचा तो देखा नीचे से करीब 6-7 लोग ट्रेन पर बड़े बड़े पत्थर फेंक रहे हैं। उन पत्थरों से हमें चोट भी आई। मैंने दरवाजा बंद कर लिया। वह लगातार पत्थर फेंक रहे थे और उन पत्थरों से ट्रेन के शीशे भी टूट गए। मैंने करीब 4.50 पर मुरादाबाद पीसीआर फोन किया, लेकिन जिसने फोन उठाया वह मामले की गंभीरता समझने की बजाय मेरा ही परिचय पूछने लगा। वह बात बेवजह लंबी खींच रहा था, मेरी उससे काफी बहस भी हुई और मैंने उसे बताया कि यह इमरजेंसी सिचुएशन है। मैंने उसे फोन होल्ड कर लोकल पुलिस और रेलवे पुलिस को सूचना देने को कहा। जीपीएस में देखकर उन्हें जगह की जानकारी दी हमने। हैरानी की बात यह है कि ट्रेन करीब 45 मिनट वहां खड़ी रही। रेलवे का कोई स्टाफ तक नजर नहीं आया। लूटपाट गैंग 2 ग्रुप में काम कर रहा था। कुछ लोग अंदर लूट रहे थे और उनके साथ बाहर से लगातार पत्थर बरसा रहे थे। अंदर लोग डरे सहमे थे। पीसीआर फोन करने के करीब 20 मिनट बाद कुछ पुलिस वाले आए तब तक पथराव चलता रहा। पुलिस देखने के बाद भी लुटेरे आराम से टहलते हुए वहां से गए। जब ट्रेन हापुड़ पहुंची तो वहां पुलिस वाला एफआईआर रजिस्टर करने में आना कानी कर रहे थे। मुझे उनसे काफी बहस करनी पड़ी और मैंने उनसे कहा कि आप एफआईआर करने से मना नहीं कर सकते। बाद में केस ट्रांसफर करते रहना। काफी बहस के बाद उन्होंने एफआईआर की।
ट्रेन जब मुरादाबाद से कुछ ही आगे निकली थी कि अचानक रूक गई। या तो कोई पहले से ही ट्रेन में चढ़ा था या फिर वहीं से कोई ट्रेन में आया और चेन खींची। उस वक्त करीब साढ़े चार बजे थे। मैं ए-1 बोगी में था। गेट के पास वाली सीट पर एक महिला थी। उन्होंने अपना बैग सिर के नीचे दबाया हुआ था। अचानक एक बंदा आया और जोर जबरदस्ती कर बैग खींच लिया। उसके हाथ में बड़ा छुरा था। महिला जब शोर मचाने लगी तो हमने देखा कि एक शख्स भाग रहा है। हम उसके पीछे दौड़े और गेट तक पहुंचे लेकिन वह वहां से कूद गया। मेरे साथ उसी बोगी में जाने माने शायर मुनव्वर राणा भी थे। जब मैं भागकर गेट तक पहुंचा तो देखा नीचे से करीब 6-7 लोग ट्रेन पर बड़े बड़े पत्थर फेंक रहे हैं। उन पत्थरों से हमें चोट भी आई। मैंने दरवाजा बंद कर लिया। वह लगातार पत्थर फेंक रहे थे और उन पत्थरों से ट्रेन के शीशे भी टूट गए। मैंने करीब 4.50 पर मुरादाबाद पीसीआर फोन किया, लेकिन जिसने फोन उठाया वह मामले की गंभीरता समझने की बजाय मेरा ही परिचय पूछने लगा। वह बात बेवजह लंबी खींच रहा था, मेरी उससे काफी बहस भी हुई और मैंने उसे बताया कि यह इमरजेंसी सिचुएशन है। मैंने उसे फोन होल्ड कर लोकल पुलिस और रेलवे पुलिस को सूचना देने को कहा। जीपीएस में देखकर उन्हें जगह की जानकारी दी हमने। हैरानी की बात यह है कि ट्रेन करीब 45 मिनट वहां खड़ी रही। रेलवे का कोई स्टाफ तक नजर नहीं आया। लूटपाट गैंग 2 ग्रुप में काम कर रहा था। कुछ लोग अंदर लूट रहे थे और उनके साथ बाहर से लगातार पत्थर बरसा रहे थे। अंदर लोग डरे सहमे थे। पीसीआर फोन करने के करीब 20 मिनट बाद कुछ पुलिस वाले आए तब तक पथराव चलता रहा। पुलिस देखने के बाद भी लुटेरे आराम से टहलते हुए वहां से गए। जब ट्रेन हापुड़ पहुंची तो वहां पुलिस वाला एफआईआर रजिस्टर करने में आना कानी कर रहे थे। मुझे उनसे काफी बहस करनी पड़ी और मैंने उनसे कहा कि आप एफआईआर करने से मना नहीं कर सकते। बाद में केस ट्रांसफर करते रहना। काफी बहस के बाद उन्होंने एफआईआर की।
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