हरियाणा पुलिस के
एक सिपाही ने 6 बेरोजगार
युवाओं को रेलवे में नौकरी दिलाने के नाम पर 34 लाख रुपये ठग
लिए और उन्हें फर्जी अपॉइंटमेंट लैटर थमा कर फरार हो गया। पुलिस उनकी तलाश कर रही
है। युवाओं को रुपये मांगने पर धमकी भी दी गई है।
समाचारों के अनुसार भगत सिंह की हरियाणा पुलिस के सिपाही गणेश कुमार से मित्रता थी और उसके यहां आना-जाना था। गणेश कुमार की पत्नी सरस्वती देवी जीआरपी में नियुक्त है। गणेश ने भगत सिंह को भरोसा दिलाया कि वह उन्हें रेलवे में टिकट कलेक्टर (टीसी) की नौकरी दिला सकता है। इसके ऐवज में उसने 7.50 लाख रुपये की मांग की। भगत सिंह का कहना है कि उसने उसे यह राशि दे दी। इसके अलावा उसके झांसे में माजरी कलां का विनय व नठेड़ा का देवेन्द्र भी आ गया और इन्होंने भी 7-7 लाख रुपये उसे दे दिए। इसके अलावा उसने आरपीएफ में भर्ती के लिए उसके साले सुरेन्द्र, निमोठ, जितेन्द्र कुमार से 4.50 लाख प्रत्येक से ले लिए। दिलचस्प बात यह है कि गणेश ने भगत सिंह, विनय और देवेन्द्र को दिल्ली के लिए फर्जी ज्वॉइनिंग लैटर और सुरेन्द्र, महीपाल व जितेन्द्र को कोतकाता के अपॉइंटमेंट लैटर थमा दिए। इसके अलावा गणेश ने अपने आप को साफ-सुथरा दिखाने के लिए भर्ती का परिणाम इंटरनेट पर भी डाल दिया। जिसमें इन्हें क्वॉलीफाइड दिखाया गया था।
भगत सिंह ने बताया कि 13 अगस्त 2013 को सुरेन्द्र, जितेन्द्र व महीपाल जब ज्वाइनिंग के लिए कोतकाता पहुंचे तो वहां जाकर पता चला कि अपॉइंटमेंट लैटर फर्जी हैं। इसके बाद विनय, देवेन्द्र और उसके भी ज्वाइनिंग लैटर फर्जी पाए गए। उसने कहा कि हम सभी ने गणेश को व उसकी पत्नी सरस्वती को कुल 34.50 लाख रुपये दिए थे। जब इस फ्रॉड का भांडा फूट गया तो सभी ने गणेश से अपने रुपये जब वापस मांगे तो उसने धमकी दी कि यदि पुलिस में शिकायत की तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। भगत सिंह ने बताया कि पुलिस ने उनकी शिकायत पर जब कोई गौर नहीं किया तो उन्हें अदालत का सहारा लेना पड़ा। अब अदालत ने दंपति के खिलाफ थाना शहर में मामला दर्ज कराया है और उन्हें उम्मीद है कि उन्हें जल्द ही न्याय मिलेगा। इस बारे में जब थाना प्रभारी से बात की गई तो उन्होंने कहा कि आरोपियों को शीघ्र गिरफ्तार किया जाएगा।
समाचारों के अनुसार भगत सिंह की हरियाणा पुलिस के सिपाही गणेश कुमार से मित्रता थी और उसके यहां आना-जाना था। गणेश कुमार की पत्नी सरस्वती देवी जीआरपी में नियुक्त है। गणेश ने भगत सिंह को भरोसा दिलाया कि वह उन्हें रेलवे में टिकट कलेक्टर (टीसी) की नौकरी दिला सकता है। इसके ऐवज में उसने 7.50 लाख रुपये की मांग की। भगत सिंह का कहना है कि उसने उसे यह राशि दे दी। इसके अलावा उसके झांसे में माजरी कलां का विनय व नठेड़ा का देवेन्द्र भी आ गया और इन्होंने भी 7-7 लाख रुपये उसे दे दिए। इसके अलावा उसने आरपीएफ में भर्ती के लिए उसके साले सुरेन्द्र, निमोठ, जितेन्द्र कुमार से 4.50 लाख प्रत्येक से ले लिए। दिलचस्प बात यह है कि गणेश ने भगत सिंह, विनय और देवेन्द्र को दिल्ली के लिए फर्जी ज्वॉइनिंग लैटर और सुरेन्द्र, महीपाल व जितेन्द्र को कोतकाता के अपॉइंटमेंट लैटर थमा दिए। इसके अलावा गणेश ने अपने आप को साफ-सुथरा दिखाने के लिए भर्ती का परिणाम इंटरनेट पर भी डाल दिया। जिसमें इन्हें क्वॉलीफाइड दिखाया गया था।
भगत सिंह ने बताया कि 13 अगस्त 2013 को सुरेन्द्र, जितेन्द्र व महीपाल जब ज्वाइनिंग के लिए कोतकाता पहुंचे तो वहां जाकर पता चला कि अपॉइंटमेंट लैटर फर्जी हैं। इसके बाद विनय, देवेन्द्र और उसके भी ज्वाइनिंग लैटर फर्जी पाए गए। उसने कहा कि हम सभी ने गणेश को व उसकी पत्नी सरस्वती को कुल 34.50 लाख रुपये दिए थे। जब इस फ्रॉड का भांडा फूट गया तो सभी ने गणेश से अपने रुपये जब वापस मांगे तो उसने धमकी दी कि यदि पुलिस में शिकायत की तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। भगत सिंह ने बताया कि पुलिस ने उनकी शिकायत पर जब कोई गौर नहीं किया तो उन्हें अदालत का सहारा लेना पड़ा। अब अदालत ने दंपति के खिलाफ थाना शहर में मामला दर्ज कराया है और उन्हें उम्मीद है कि उन्हें जल्द ही न्याय मिलेगा। इस बारे में जब थाना प्रभारी से बात की गई तो उन्होंने कहा कि आरोपियों को शीघ्र गिरफ्तार किया जाएगा।
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