Thursday, February 18, 2010

एक्स्ट्रा लोकल सेवाओं की सुविधा नहीं

आने वाले कुछ ही दिनों में बोरिवली से विरार के बीच एसी कन्वर्जन का काम पूरा होने और बोरिवली में प्लेटफार्म 6-ए का काम पूरा होने, और इसी स्टेशन पर नई बिल्डिंग बनने से भी यात्रियों को काफी सुविधाएं मिलने वाली हैं, मगर आने वाले एक साल में उन्हें एक्स्ट्रा लोकल सेवाओं की सुविधा नहीं मिलने वाली है। पश्चिम रेल से जुड़े सूत्रों के अनुसार मार्च 2011 तक पश्चिम रेल की लोकल सेवाओं की संख्या यथावत ही रहने वाली है, हां इसके बदले में 9 कोच वाले लोकलों को 12 कोचों वाले लोकल में कन्वर्ट करने का काम चलता रहेगा। पश्चिम रेल के अधिकारियों का कहना है कि इसका कारण यह है कि डीसी ट्रैक्शन पर चलने वाले रैकों की क्षमता अब पूरी हो चुकी है और डीसी से चलने वाली ट्रेनें अब और लोड वहन नहीं कर सकती हैं... और जब तक कि बोरिवली से चर्चगेट तक के ट्रैक्शन को डीसी से एसी में कन्वर्ट नहीं कर लिया जाएगा तब तक लोकल ट्रेनों की तादाद को नहीं बढ़ाया जा सकता है। दरअसल, यह समस्या इतनी जटिल हो गई है कि इसके चलते ही पिछले साल लोकल ट्रेनों की सिर्फ 14 सेवाएं ही बढ़ाई जा सकीं थीं, जिसमें से 15 कोच वाले लोकल और लेडीज स्पेशल (की मजबूरी) थी। याद रहे कि फिलहाल पश्चिम रेल पर लोकल ट्रेनों की रोजाना 1,210 सेवाएं चल रही हैं। गौरतलब है कि पश्चिम रेल 1,500 वोल्ट वाली डीसी ट्रैक्शन की जगह पर एसी (25,000 वोल्ट करेंट) से चलने वाले सिस्टम को बदल रहा है। इस महीने के अंत तक बोरिवली से विरार के बीच चारों लाइनों के डीसी से एसी में कन्वर्जन का काम पूरा हो जाएगा। मार्च 2011 तक बोरिवली से चर्चगेट तक पूरे रूट पर डीसी से एसी कन्वर्जन का काम पूरा करने का टारगेट रखा गया है और जब यह काम पूरा हो जाएगा, तभी नई सेवाओं का समावेश हो सकेगा। पश्चिम रेल के मुख्य प्रवक्ता एस.एस. गुप्ता बताते हैं कि हमारा मुख्य फोकस अब नई ट्रेनों को शुरू करना है न कि नई सेवाओं की तादाद में जोड़ करना है। श्री गुप्ता के मुताबिक जब भी हम नई ट्रेन शुरू करते हैं हमारी पैसेंजरों को ढोने की क्षमता 33 प्रतिशत बढ़ जाती है जिसकी यात्रियों को ज्यादा जरूरत होती है... मगर एकदम नई सेवाओं को शुरू करना तब तक बहुत मुश्किल है जब तक बोरिवली से चर्चगेट तक डीसी से एसी कन्वर्जन का काम पूरा नहीं हो जाता है। एक समस्या और है कि हमारे पास नई रेक फिलहाल उपलब्ध नहीं है। उनके मुताबिक मार्च 2011 तक सभी लोकल 12 डिब्बों की हो जाएंगी और तब हमारा फोकस इन्हें 15 डिब्बों की करना होगा। इन्होंने बताया कि पिछले 5 साल में यात्रियों की संख्या में 7 से 8 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है जबकि हमने हमारी यात्रियों को ढोने की क्षमता में 25 प्रतिशत का इजाफा किया है। इसे नई ट्रेनों को लाकर तथा नई सेवाएं शुरू करके हासिल की गई है। श्री गुप्ता ने बताया कि फरवरी 2008 से लेकर फरवरी 2010 तक हमने पूरे 160 नई सेवाओं को जोड़ा है, जो अपने आप में रेकॉर्ड है।

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