घने कोहरे की वजह से जहां एक तरफ रेलवे का इनक्वायरी सिस्टम पूरी तरह फेल हो गया है, वहीं डेली पैसेंजरों का कम्यूनिकेशन सिस्टम उनका काफी समय बचा रहा है। डेली पैसेंजरों की आपस में गजब की अंडरस्टेंडिंग के आगे इनक्वायरी सिस्टम बेबस हो गया है। कई बार तो यात्री इनक्वायरी को बताते हैं कि ट्रेन ने अभी फलां स्टेशन पास किया है। यात्रियों का इससे लंबा इंतजार भी बच रहा है। यात्री इस पूरी इनक्वायरी को अंजाम देते हैं मोबाइल नेटवर्किंग के जरिए। वह भी मुफ्त में, मिस्ड कॉल के जरिए। रेल यात्रियों ने बेहतर कम्यूनिकेशन के लिए बाकायदा मिस्ड कॉल की संख्या तक तय की हुई है। रूट हो चाहे कोई, हम हैं ना दिल्ली-पलवल रूट हो या दिल्ली गाजियाबाद रूट या फिर दिल्ली-रेवाड़ी रूट। खुद इनक्वायरी कर्मी डेली पैसेंजरों से ट्रेन की पॉजिशन पूछने आ रहे हैं। रेलवे की नेटवर्किंग सिस्टम के तहत ट्रेन जब मथुरा या पलवल से चलती है, तो उसके आधार पर आंकलन कर यात्रियों को समय बता दिया जाता है। लेकिन इन दिनों कोहरे की वजह से ट्रेन को एक स्टेशन से दूसरे स्टेशन की दूरी तय करने में आधे घंटे से एक घंटे का समय तक लग रहा है। पलवल से नई दिल्ली पहुंचने में ट्रेन को चार से पांच घंटे तक लग रहे हैं। इसकी वजह से रेलवे इनक्वायरी सिस्टम फेल हो गया है। क्या है मिस्ड कॉल का राज - एक मिस्ड कॉल का मतलब ट्रेन अपने तय समय पर चल रही है। - दो मिस्ड कॉल का मतलब ट्रेन दस मिनट लेट है। - तीन मिस्ड कॉल का मतलब तुरंत बात करो। - आपके कॉल करने के बाद यदि फोन पिक न हो, तो ट्रेन कैंसल कर दी गई है। - यदि आपका फोन सामने से कट कर दिया जाए मतलब ट्रेन एक घंटे से अधिक लेट है। - एक मिस्ड कॉल के बाद यदि कुछ देर में दोबारा मिस्ड कॉल बजे तो समझो ट्रेन बीच में ही अटक गई है। हमारा सिस्टम है लाजवाब : पैसेंजर दिल्ली-पलवल रेल मार्ग के दैनिक यात्री वी. एल. शर्मा का कहना है कि अब तो मिस्ड कॉल का ही सहारा है। वह तो ट्रेन आने से पहले ही पहुंच जाते हैं और कई बार बस से निकल लेते हैं। दिल्ली-रेवाड़ी रेल मार्ग के दैनिक यात्री संघ के प्रेस प्रवक्ता बाल कृष्ण अमरसरिया का कहना है कि रेलवे तो बीस मिनट लेट बताकर ट्रेन को पहुंचाने में घंटों लगा देती है। ऐसे में यात्रियों का कम्यूनिकेशन ही है जो उनका समय बचा रहा है।
Friday, January 22, 2010
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