आतंकियों ने दिल्ली-कोलकाता के बीच पड़ने वाले रेलवे ट्रैक और रेलवे स्टेशन को उड़ाने की धमकी दी है। दिल्ली-हावड़ा रूट पर दादरी, अलीगढ़ समेत कई रेलवे स्टेशनों पर सुरक्षा-व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। धमकी को देखते हुए रेलवे ट्रैक पर 24 घंटे पेट्रोलिंग की जा रही है। वेस्टर्न यूपी के स्टेशनों और ट्रेनों में भी सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए हैं। दिल्ली-हावड़ा रूट के बीच रेलवे स्टेशन और रेलवे ट्रैक आतंकियों के निशाने पर हैं। इसका खुलासा तब हुआ, जब इलाहाबाद हेड क्वॉर्टर की ओर से भेजी गई चिट्ठी में वेस्टर्न यूपी के स्टेशनों और ट्रैक पर सुरक्षा सख्त करने की हिदायत दी गई। रेलवे अफसरों का कहना है कि स्टेशनों और ट्रैकों पर 24 घंटे ट्रैक पर पेट्रोलिंग करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा स्टेशन पर ट्रेनों की सघन चेकिंग कराई जा रही है। ट्रेन के गार्ड और ड्राइवर को भी चौकन्ना रहने को कहा गया है। ट्रेन के हर डिब्बे में वायरलेस फोन से लैस जीआरपीएफ का एक जवान तैनात किया गया है। ये जवान पल-पल की खबर संबंधित अफसरों को देंगे। दादरी आरपीएफ के थाना प्रभारी एम.पी. सिंह का कहना है कि इलाहाबाद हेडक्वॉर्टर के अफसरों को सूचना मिली है कि आतंकी दिल्ली-कोलकाता रूट में किसी बड़ी घटना को अंजाम देने की फिराक में है। इस कारण पूरे रीजन में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है।
Sunday, December 27, 2009
Sunday, December 20, 2009
ट्रेनें परफॉर्मिंग आर्ट के जरिए राष्ट्रीय एकता की भावना को देशभर में पहुंचाने का जरिया बनें।
ममता बनर्जी रेलों को बहुआयामी बनाना चाहती हैं। उनकी मंशा है कि ट्रेनें लोगों को उनके गंतव्य तक तो पहुंचाएं ही, साथ ही एक इलाके की संस्कृति का दूसरे इलाके की संस्कृति से संगम भी कराएं। कलाप्रेमी ममता चाहती हैं कि भारतीय रेलों के डिब्बे आधुनिक तकनीक, खूबसूरती, आरामदेह डिजाइन के साथ-साथ भारतीयता के पुट का सुंदर मिश्रण हों। अपने विजन-2020 डॉक्युमेंट में उन्होंने विशेष जोर दिया है कि आने वाले समय में ट्रेनें परफॉर्मिंग आर्ट के जरिए राष्ट्रीय एकता की भावना को देशभर में पहुंचाने का जरिया बनें। इसके लिए उन्होंने संस्कृति एक्सप्रेस और चलते-फिरते आर्ट म्यूजियम के रूप में विशेष गाड़ियां चलाने की बात कही है। उन्होंने सभी प्रमुख तीर्थ स्थानों के रेलवे स्टेशनों के आधुनिकीकरण और विस्तार की भी बात कही है। विशेष अवसरों पर सभी धर्मों के तीर्थस्थलों के लिए विशेष गाड़ियां चलाने का भी ऐलान किया है। ममता की मंशा है कि ट्रेनें सिर्फ सवारी ही न ढोएं बल्कि बैंकिंग, कॉन्फ्रेंसिंग और आईटी संबंधी सुविधाओं से सुसज्जित होकर सचल व्यापार और विद्या केंद्र के रूप में भी चले। उन्होंने ऐलान किया है कि अगले दो साल में राजधानी और दूसरी सुपर फास्ट ट्रेनों में ये सुविधाएं उपलब्ध करा दी जाएंगी। ट्रेनों को सचल स्वास्थ्य केंद्र के तौर पर भी इस्तेमाल किया जाएगा। रेल मंत्र का मकसद है कि पैसेंजरों को कम से कम समय में ज्यादा से ज्यादा सुविधा मिले। किसी भी श्रेणी का टिकट लेने के लिए उसे पांच मिनट से ज्यादा इंतजार न करना पड़े। उन्होंने नए शहरों में मेट्रो ट्रेन सेवा शुरू करने की बात भी कही है। ममता का मानना है कि ऐसी परियोजनाओं को कम लागत के साथ पूरा करने में भारतीय रेल पूरी तरह सक्षम है। इसके लिए उन्होंने अलग से भारतीय रेल मेट्रो विकास प्राधिकरण के गठन का भी सुझाव दिया है। यही प्राधिकरण लाइट रेल और मोनो रेल परियोजनाओं का भी निर्माण करेगा।
Wednesday, December 16, 2009
सबसे पुरानी मेट्रो रेलवे वातानुकुलित कोच के साथ जल्द ही दौड़ने लगेगी।
कोलकाता में देश की सबसे पुरानी मेट्रो रेलवे वातानुकुलित कोच के साथ जल्द ही दौड़ने लगेगी। एक वरिष्ठ मेट्रो अधिकारी ने बताया कि पेराम्बुर के इंटीग्रल कोच फैक्ट्री द्वारा मेट्रो के 13 एसी डिब्बे तैयार किए जा रहे हैं। इसमें से दो मार्च में कोलकाता आएंगे और प्रयोग के तौर पर चलाए जाएंगे। उन्होंने बताया कि बाकी 11 कोच सितंबर में कोलकातावासियों को दुर्गा पूजा के लिए उपहार के तौर पर मिलेंगे। अधिकारी ने बताया कि अन्य 14 एसी कोच 2011 की दुर्गा पुजा में कोलकाता आएंगे। इसके अलावा ट्रेनों के फेरे बढ़ाए जाएंगे और अत्याधुनिक सिग्नल प्रणाली लगाई जाएगी।
डीएमआर सी की 30 फीडर बसें नोएडा में आ जाएंगी।
शहर के पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम को बेहतर बनाने की दिशा में अगले महीने एक कदम और उठेगा। डीएमआर सी की 30 फीडर बसें नोएडा में आ जाएंगी। इन बसों को चलाने का अग्रीमेंट डीएमआरसी और यूपी रोडवेज के बीच होगा। इसके बाद शहर में लोकल लेवल पर फीडर बसों का संकट काफी हद तक कम हो जाएगा। ये फीडर बसें 32 सीटर होंगी। नोएडा अथॉरिटी के अडिशनल सीईओ पी. एन. बाथम ने यह जानकारी दी। ट्रैफिक सेल की मीटिंग के दौरान हुई चर्चा में यह जानकारी दी गई। इस मीटिंग में ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट, यूपी रोडवेज, ट्रैफिक पुलिस के अलावा अथॉरिटी के अफसर शामिल थे। बाथम ने बताया कि दिल्ली में ब्लू लाइन बसों पर पाबंदी लगने के बाद तय किया गया है कि इन बसों को लोकल लेवल पर भी प्रतिबंधित कर दिया जाए। इस बारे में ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट के अफसरों को बताया गया है। इसके साथ ही सेक्टर- 18 में अंडरपास के साथ लगे कटों को बंद किया जाएगा। ट्रैफिक डिपार्टमेंट के अफसरों की सिफारिश पर यह कदम उठाया जा रहा है। कटों से ट्रैफिक को कंट्रोल करने में दिक्कत आ रही है। अडिशनल सीईओ ने बताया कि शहर में जैसे मेन चौराहों पर सोलर सिग्नल लगाए गए हैं। इसी तरह एक्सप्रेस वे पर भी जरूरी पॉइंट पर सोलर लाइटें लगाने का काम किया जाएगा। इस बैठक में आरटीओ लालजी चौधरी, यूपी रोडवेज के आरएम पी. आर. बेलवारियार, अथॉरिटी के चीफ मेंटिनेंस इंजीनियर ए. के. गोयल व सीनियर प्रोजेक्ट इंजीनियर संदीप चंदा आदि मौजूद थे।
Sunday, December 13, 2009
जीआरपी के सिपाही असल में खुद मुसाफिरों को लूट रहे थे।
ट्रेन लूट को बचाने के लिए फायरिंग करने का दावा करने वाले जीआरपी के सिपाही असल में खुद मुसाफिरों को लूट रहे थे। यह जानकारी पुलिस द्वारा की गई शुरुआती जांच के बाद सामने आई है। इससे पहले कहा गया था कि लखीसराय जिले में जमालपुर-कियूल डीएमयू ट्रेन को धनौरी स्टेशन पर लूटने की कोशिश हुई। जिसे जीआरपी ने फायरिंग करके नाकाम कर दिया। इस गोलीबारी में एक विक्रेता गंभीर रूप से घायल हो गया था। मुख्यमंत्री के आदेश पर आईजी (रेलवे) एस. के. भारद्वाज मौके पर पहुंचे और स्थानीय पुलिस से मामले की रिपोर्ट मांगी। इसके बाद ही असल तस्वीर सामने आई। नतीजतन, सभी 6 जीआरपी कर्मियों की गिरफ्तारी के आदेश दे दिए गए हैं। इनमें एक सब इंस्पेक्टर, एक हवलदार और चार कॉन्स्टेबल शामिल हैं। भारद्वाज ने बताया कि जीआरपी के लोगों ने ट्रेन में सफर कर रहे एक व्यापारी से जबरन वसूली की कोशिश की, जिसका उसने विरोध किया। बाकी मुसाफिरों ने भी न केवल विरोध किया बल्कि उन्होंने अपने फोन से अपने परिचितों को मामले की जानकारी दे दी। जब ट्रेन धनौरी स्टेशन पर पहुंची तो जीआरपी कर्मियों को प्लेटफार्म पर नाराज भीड़ का सामना करना पड़ा। भीड़ द्वारा पिटाई के डर से उन्होंने फायरिंग कर दी। इसी फायरिंग में वेंडर राकेश कुमार गंभीर रूप से घायल हो गया। राकेश पास के ही पवई गांव का रहने वाला है। इससे भीड़ और भड़क गई। राकेश को पटना मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है जहां उसका ऑपरेशन किया गया है।
मेट्रो की इच्छा है कि उसके पास कम से कम चार नई ट्रेनें हों तो वह आनंद विहार लाइन को चालू करे।
नोएडा के बाद द्वारका लाइन को आनंद विहार से जोड़ने के लिए दिल्ली मेट्रो का ट्रायल शनिवार से
शुरू हो गया। इस लाइन को यमुना बैंक के रास्ते जोड़ा जाएगा। इस लाइन के चालू होने के बाद यमुना बैंक ऐसा पहला मेट्रो स्टेशन होगा, जिसके एक ही तल पर तीन तरफ जाने के लिए पैसेंजर ट्रेन पकड़ सकेंगे। यह ट्रायल कुछ दिनों तक चलता रहेगा। मेट्रो का इरादा इस लाइन को ट्रायल के बाद इसी महीने के अंत में या फिर अगले महीने के शुरू में पैसेंजरों के लिए चालू करने का है। इस लाइन पर ट्रायल शनिवार सुबह 10 बजे लक्ष्मी नगर से शुरू हुआ। मेट्रो ट्रेन प्रीत विहार तक गई और उसके बाद वापस आई। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के प्रवक्ता के मुताबिक, फिलहाल यह ट्रायल 10 किमी प्रति घंटे की रफ्तार पर ट्रेन चलाकर किया गया। धीरे-धीरे ट्रायल ट्रेन की स्पीड बढ़ाकर 20, फिर 50 और अंतत: 80 किमी प्रति घंटे की जाएगी। ट्रायल के दौरान इस लाइन के सिविल स्ट्रक्चर की जांच की जाएगी ओर देखा जाएगा कि ट्रेन के चलने से स्ट्रक्चर में किसी तरह की खामी तो सामने नहीं आती। यही नहीं, ट्रायल के दौरान पटरियों और ट्रेन चलाने के लिए की जाने वाली पावर सप्लाई की भी जांच की जाएगी। इस लाइन पर भी ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम लगाया गया है इसलिए उसकी भी जांच की जाएगी। इस सिस्टम के जरिए ट्रेनों की टक्कर की आशंका खत्म हो जाती है। मेट्रो अधिकारियों का कहना है कि ट्रेन चलते हुए ऑपरेशनल कंट्रोल सेंटर को सही सिग्नल दे और ट्रेन की सही मॉनीटरिंग हो, इसकी जांच भी होगी। जब दिल्ली मेट्रो अपने स्तर पर पूरी लाइन का ट्रायल कर लेगी, तब कमिश्नर रेलवे सेफ्टी (सीआरएस) को फाइनल ट्रॉयल के लिए आमंत्रित किया जाएगा। सीआरएस ट्रॉयल के दौरान न सिर्फ ट्रेन और ट्रैक से जुड़ी चीजों की जांच करेंगे बल्कि यह भी देखेंगे कि पैसेंजर की सेफ्टी से जुड़े सभी इंतजाम मेट्रो स्टेशनों पर किए गए हैं या नहीं। उनके ग्रीन सिग्नल के बाद ही मेट्रो लाइन को पैसेंजरों के लिए खोला जाएगा। रेलवे स्टेशन और आईएसबीटी मेट्रो के कवरेज एरिया में यमुना बैंक टु आनंद विहार लाइन दिल्ली मेट्रो की इस नाते महत्वपूर्ण लाइन है, क्योंकि इसी के जरिये आनंद विहार रेलवे स्टेशन और अंतरराज्यीय बस अड्डा - मेट्रो नेटवर्क से जुड़ जाएंगे। यही नहीं, यह पहली लाइन होगी, जो यमुनापार के मध्य हिस्से को मेट्रो नेटवर्क से जोड़ देगी। शाहदरा व दिलशाद गार्डन तो पहले ही मेट्रो नेटवर्क के दायरे में आ चुके हैं। पिछले दिनों नोएडा लाइन चालू होने के बाद यमुनापार का दक्षिणी हिस्सा पहले ही इस नेटवर्क से जुड़ गया है। अब 6.17 किमी लंबी इस लाइन के चालू होने के बाद विकास मार्ग के दोनों ओर की घनी आबादी के लिए मेट्रो फायदेमंद साबित हो सकती है। इस लाइन पर पांच नए स्टेशन - लक्ष्मी नगर, निर्माण विहार, प्रीत विहार, कड़कड़डूमा और आनंद विहार हैं। दिल्ली मेट्रो को उम्मीद है कि इस लाइन के चालू होने से उसके नेटवर्क में एक लाख नए पैसेंजर जुड़ जाएंगे। जरूरत कम से कम चार ट्रेनों की डीएमआरसी खुद यह मानता है कि इस लाइन को चालू करने में फिलहाल एक ही बड़ी बाधा है और वह है ट्रेनों की जरूरत। द्वारका लाइन पर चलने वाली ट्रेनें पहले ही ओवरलोडेड चल रही हैं। ऐसे में मेट्रो की इच्छा है कि उसके पास कम से कम चार नई ट्रेनें हों तो वह आनंद विहार लाइन को चालू करे। फिलहाल उसके पास तीन ट्रेनों की टेस्टिंग चल रही है। ऐसे में अगर चार ट्रेनें तैयार हो जाती हैं तो इसी महीने के अंत में मेट्रो की इस लाइन का तोहफा मिल सकता है। ...तब लेट नहीं होगी मेट्रो इस लाइन के चालू होने से मेट्रो को उस समस्या के हल होने की उम्मीद है, जो आए दिन द्वारका लाइन पर देखने को मिलती है। दरअसल, यमुना बैंक मेट्रो स्टेशन से कुछ ट्रेनें वापस द्वारका चली जाती हैं। लेकिन यहां जब ट्रेन को मोड़ना होता है तो ट्रेन को एक तीखे कर्व से गुजरना पड़ता है। ऐसी जगह पर मेट्रो की स्पीड को कम करके 15 किमी प्रति घंटा करना पड़ता है। इस तरह से यह ट्रेन तो लेट होती ही है, नोएडा से आने वाली ट्रेनों में भी देरी हो जाती है। मेट्रो अधिकारियों का कहना है कि आनंद विहार लाइन शुरू होने के बाद यमुना बैंक से ट्रेनें वापस द्वारका नहीं लौटेंगी। इससे कर्व पर स्पीड कम करने की जरूरत ही नहीं होगी। इस तरह से यमुना बैंक से ट्रेनें वापस द्वारका नहीं जाएंगी। ऐसे में कर्व पर ट्रेन को मोड़ने में जो वक्त खराब होता है, वह नहीं होगा और ट्रेनें तय वक्त पर चल सकेंगी।
शुरू हो गया। इस लाइन को यमुना बैंक के रास्ते जोड़ा जाएगा। इस लाइन के चालू होने के बाद यमुना बैंक ऐसा पहला मेट्रो स्टेशन होगा, जिसके एक ही तल पर तीन तरफ जाने के लिए पैसेंजर ट्रेन पकड़ सकेंगे। यह ट्रायल कुछ दिनों तक चलता रहेगा। मेट्रो का इरादा इस लाइन को ट्रायल के बाद इसी महीने के अंत में या फिर अगले महीने के शुरू में पैसेंजरों के लिए चालू करने का है। इस लाइन पर ट्रायल शनिवार सुबह 10 बजे लक्ष्मी नगर से शुरू हुआ। मेट्रो ट्रेन प्रीत विहार तक गई और उसके बाद वापस आई। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के प्रवक्ता के मुताबिक, फिलहाल यह ट्रायल 10 किमी प्रति घंटे की रफ्तार पर ट्रेन चलाकर किया गया। धीरे-धीरे ट्रायल ट्रेन की स्पीड बढ़ाकर 20, फिर 50 और अंतत: 80 किमी प्रति घंटे की जाएगी। ट्रायल के दौरान इस लाइन के सिविल स्ट्रक्चर की जांच की जाएगी ओर देखा जाएगा कि ट्रेन के चलने से स्ट्रक्चर में किसी तरह की खामी तो सामने नहीं आती। यही नहीं, ट्रायल के दौरान पटरियों और ट्रेन चलाने के लिए की जाने वाली पावर सप्लाई की भी जांच की जाएगी। इस लाइन पर भी ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम लगाया गया है इसलिए उसकी भी जांच की जाएगी। इस सिस्टम के जरिए ट्रेनों की टक्कर की आशंका खत्म हो जाती है। मेट्रो अधिकारियों का कहना है कि ट्रेन चलते हुए ऑपरेशनल कंट्रोल सेंटर को सही सिग्नल दे और ट्रेन की सही मॉनीटरिंग हो, इसकी जांच भी होगी। जब दिल्ली मेट्रो अपने स्तर पर पूरी लाइन का ट्रायल कर लेगी, तब कमिश्नर रेलवे सेफ्टी (सीआरएस) को फाइनल ट्रॉयल के लिए आमंत्रित किया जाएगा। सीआरएस ट्रॉयल के दौरान न सिर्फ ट्रेन और ट्रैक से जुड़ी चीजों की जांच करेंगे बल्कि यह भी देखेंगे कि पैसेंजर की सेफ्टी से जुड़े सभी इंतजाम मेट्रो स्टेशनों पर किए गए हैं या नहीं। उनके ग्रीन सिग्नल के बाद ही मेट्रो लाइन को पैसेंजरों के लिए खोला जाएगा। रेलवे स्टेशन और आईएसबीटी मेट्रो के कवरेज एरिया में यमुना बैंक टु आनंद विहार लाइन दिल्ली मेट्रो की इस नाते महत्वपूर्ण लाइन है, क्योंकि इसी के जरिये आनंद विहार रेलवे स्टेशन और अंतरराज्यीय बस अड्डा - मेट्रो नेटवर्क से जुड़ जाएंगे। यही नहीं, यह पहली लाइन होगी, जो यमुनापार के मध्य हिस्से को मेट्रो नेटवर्क से जोड़ देगी। शाहदरा व दिलशाद गार्डन तो पहले ही मेट्रो नेटवर्क के दायरे में आ चुके हैं। पिछले दिनों नोएडा लाइन चालू होने के बाद यमुनापार का दक्षिणी हिस्सा पहले ही इस नेटवर्क से जुड़ गया है। अब 6.17 किमी लंबी इस लाइन के चालू होने के बाद विकास मार्ग के दोनों ओर की घनी आबादी के लिए मेट्रो फायदेमंद साबित हो सकती है। इस लाइन पर पांच नए स्टेशन - लक्ष्मी नगर, निर्माण विहार, प्रीत विहार, कड़कड़डूमा और आनंद विहार हैं। दिल्ली मेट्रो को उम्मीद है कि इस लाइन के चालू होने से उसके नेटवर्क में एक लाख नए पैसेंजर जुड़ जाएंगे। जरूरत कम से कम चार ट्रेनों की डीएमआरसी खुद यह मानता है कि इस लाइन को चालू करने में फिलहाल एक ही बड़ी बाधा है और वह है ट्रेनों की जरूरत। द्वारका लाइन पर चलने वाली ट्रेनें पहले ही ओवरलोडेड चल रही हैं। ऐसे में मेट्रो की इच्छा है कि उसके पास कम से कम चार नई ट्रेनें हों तो वह आनंद विहार लाइन को चालू करे। फिलहाल उसके पास तीन ट्रेनों की टेस्टिंग चल रही है। ऐसे में अगर चार ट्रेनें तैयार हो जाती हैं तो इसी महीने के अंत में मेट्रो की इस लाइन का तोहफा मिल सकता है। ...तब लेट नहीं होगी मेट्रो इस लाइन के चालू होने से मेट्रो को उस समस्या के हल होने की उम्मीद है, जो आए दिन द्वारका लाइन पर देखने को मिलती है। दरअसल, यमुना बैंक मेट्रो स्टेशन से कुछ ट्रेनें वापस द्वारका चली जाती हैं। लेकिन यहां जब ट्रेन को मोड़ना होता है तो ट्रेन को एक तीखे कर्व से गुजरना पड़ता है। ऐसी जगह पर मेट्रो की स्पीड को कम करके 15 किमी प्रति घंटा करना पड़ता है। इस तरह से यह ट्रेन तो लेट होती ही है, नोएडा से आने वाली ट्रेनों में भी देरी हो जाती है। मेट्रो अधिकारियों का कहना है कि आनंद विहार लाइन शुरू होने के बाद यमुना बैंक से ट्रेनें वापस द्वारका नहीं लौटेंगी। इससे कर्व पर स्पीड कम करने की जरूरत ही नहीं होगी। इस तरह से यमुना बैंक से ट्रेनें वापस द्वारका नहीं जाएंगी। ऐसे में कर्व पर ट्रेन को मोड़ने में जो वक्त खराब होता है, वह नहीं होगा और ट्रेनें तय वक्त पर चल सकेंगी।
Tuesday, December 8, 2009
शिवसागर रेलवे स्टेशन के नजदीक सोमवार सुबह कोयले से लदी एक मालगाड़ी के 15 डिब्बे पटरी से उतर गए।
पूर्व-मध्य रेलवे के मुगलसराय-गया रेलखंड पर शिवसागर रेलवे स्टेशन के नजदीक सोमवार सुबह कोयले से लदी एक मालगाड़ी के 15 डिब्बे पटरी से उतर गए। इस वजह से रेल यातायात में बड़ी रुकावट आई। रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के अधिकारी अशोक कुमार ने बताया कि यह दुर्घटना सोमवार सुबह करीब तीन बजकर 40 मिनट पर हुई। उन्होंने बताया कि रेल यातायात को फिर से चालू कराने के लिए मुगलसराय से रेलवे के तकनीकी कर्मचारी दुर्घटनास्थल पहुंच गए हैं। रेलवे सूत्रों के मुताबिक दुर्घटना के कारण उस मार्ग से गुजरने वाली हावड़ा-कालका एक्सप्रेस ट्रेन, हावड़ा-मुंबई मेल ट्रेन, पटना-वाराणसी बुद्ध पूर्णिमा एक्सप्रेस और रांची-वाराणसी ट्रेन को विभिन्न स्टेशनों पर रोक कर रखा गया है।
Monday, December 7, 2009
दिल्ली मेट्रो के रास्ते में अब केवल ट्रेनें ही बाधा बनकर खड़ी हैं।
दिल्ली को नोएडा से जोड़ने के बाद अब यमुना बैंक और आनंद विहार को लिंक करने की तैयारी कर चुकी दिल्ली मेट्रो के रास्ते में अब केवल ट्रेनें ही बाधा बनकर खड़ी हैं। इस लाइन को चालू करने के लिए दिल्ली मेट्रो को कम से कम चार और ट्रेनों की जरूरत है, जबकि उसके पास अभी तीन नई ट्रेनें हैं, जिनकी टेस्टिंग चल रही है। ऐसे में अब इस लाइन के शुरू होने का दारोमदार मेट्रो ट्रेनों पर ही है। अगर इसी महीने के अंत तक चार नई ट्रेनें तैयार हो जाती हैं, तो इस लाइन को अभी ही शुरू कर दिया जाएगा। वरना इसमें एक पखवाड़े से एक महीने तक की देरी हो सकती है। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के सूत्रों का कहना है कि इस बार दिल्ली मेट्रो पर्याप्त ट्रेनों के बिना इस लाइन को शुरू नहीं करना चाहता। इसकी वजह यह है कि नोएडा लाइन शुरू होने के बाद लगभग एक पखवाड़े तक इस लाइन के पैसेंजरों को भारी दिक्कत का सामना करना पड़ा था। ट्रेनें कम थीं और पैसेंजर ज्यादा। जिसका नतीजा यह हुआ कि डीएमआरसी ही लोगों के निशाने पर आ गई। दिल्ली मेट्रो के सूत्रों का कहना है कि नोएडा लाइन पर स्थिति अब कुछ हद तक सामान्य हो गई है। पहले इस लाइन के टाइम टेबल में 36 ट्रेनें थीं, लेकिन अब 38 टेनों का टाइम टेबल कर दिया गया है। इससे नोएडा रूट पर ट्रेनों की फ्रिक्वेंसी पहले 12 मिनट से कम होकर 7-8 मिनट रह गई है। दिल्ली मेट्रो के अधिकारियों का कहना है कि पहले हर तीसरी ट्रेन द्वारका से नोएडा जाती थी लेकिन अब पीक आवर में हर दूसरी ट्रेन नोएडा जाती है। ऑफ पीक आवर में भी यही स्थिति रहती है, लेकिन कुछ ट्रेनों के बाद हर वैकल्पिक ट्रेन की बजाय बीच में दो ट्रेनों के बाद तीसरी ट्रेन नोएडा भेजी जाती है। मेट्रो अधिकारियों का मानना है कि अगर आनंद विहार लाइन को शुरू किया जाता है तो इससे उतनी समस्या नहीं बढ़ेगी, जितनी आशंका जताई जा रही है। उनका कहना है कि अभी आनंद विहार लाइन शुरू न होने की वजह से यमुना बैंक से वापस द्वारका जाने वाली ट्रेन को यमुना बैंक स्टेशन से आगे लेकर वापस लाया जाता है। जिस जगह ट्रैक बदला जाता है, वहां तीखा कर्व है। इसकी वजह से ट्रैक बदलते वक्त मेट्रो की स्पीड को कम करके 15 किमी कर दिया जाता है। इससे पूरी लाइन पर ट्रेनों की रफ्तार कम हो जाती है। आनंद विहार लाइन शुरू होने के बाद इन ट्रेनों को यमुना बैंक से वापस नहीं लाया जाएगा, बल्कि ये ट्रेनें आनंद विहार तक जाएंगी। इस तरह ट्रैक बदलने में लगने वाला वक्त बच जाएगा। मेट्रो अधिकारियों का कहना है कि यमुना बैंक से आनंद विहार तक की 6.17 किमी लाइन लगभग तैयार हो गई है, और फिनिशिंग का काम भी इस महीने के अंतिम सप्ताह तक पूरा हो जाएगा। इसके बाद सिर्फ ट्रेनों की जरूरत रहेगी। अगर ट्रेनें आ जाती हैं तो इस लाइन को इसी महीने के अंत तक चालू कर दिया जाएगा।
Friday, December 4, 2009
छत्रपति शिवाजी टर्मिनस (सीएसटी)में आग लग जाने से यात्रियों में दहशत फैल गई।
शुक्रवार आज तड़के मुंबई के छत्रपति शिवाजी टर्मिनस (सीएसटी)में आग लग जाने से यात्रियों में दहशत फैल गई। रेल अधिकारियों ने बताया कि आग सुबह पांच बजे सीएसटी की इमारत के वाणिज्य कार्यालय में लगी। अधिकारियों ने बताया कि आग लगने के तुरंत बाद फायरब्रिगेड को बुलाया गया। आग लगने के कारणों का अभी पता नहीं चल सका है। अधिकारियों ने बताया कि अभी तक किसी के हताहत होने की खबर नही है।
रेल ठेकेदारों के बीच कभी भी वर्चस्व की खूनी लड़ाई शुरू हो सकती है।
झारखंड के पूर्व सीएम मधु कोड़ा की गिरफ्तारी और उनके सहयोगियों द्वारा यूपी में लिए गए अरबों रुपये के ठेके से निकल रहे तथ्य साफ संदेश दे रहे हैं कि दिल्ली से लेकर यूपी-बिहार और झारखंड जैसे राज्यों के माफिया रेल ठेकेदारों के बीच कभी भी वर्चस्व की खूनी लड़ाई शुरू हो सकती है। एसटीएफ के हत्थे चढे़ झारखंड के शातिर बदमाशों के खुलासे के बाद अंडरवर्ल्ड के बदलते समीकरण पुलिस के सामने आए हैं।
एसटीएफ सूत्र का कहना है कि झारखंड के पकड़े गए अपराधियों से मिली जानकारी के आधार पर यूपी पुलिस ने दिल्ली पुलिस, झारखंड पुलिस, बिहार पुलिस और इन सभी राज्यों में जीआरपी को भी अनहोनी से बचने एवं आवश्यक कदम उठाने की सलाह दे दी है। यूपी में एक रेल माफिया पर भी शिकंजा कसने वाला है। पूर्वांचल के इस माफिया के संबंध कोड़ा एवं उनके सहयोगियों से बताये गए हैं। गिरफ्तार किए गए लोग, जो झारखंड के कोयला एवं रेल माफिया से जुड़े हुए हैं, से मिली जानकारी में अगर सचाई है तो उसका असर नीचे तक के रेलवे टेंडरों पर पड़ सकता है। ऐसे में गैंगवॉर को रोकना पुलिस के लिए चुनौती होगी।
झारखंड के इन बदमाशों ने कबूल किया है कि रेलवे के बाहुबली ठेकेदार दीपा सरदार की हत्या के लिए लखनऊ के एक माफिया का खास ठेकेदार भोला इस समय पूर्वांचल के उक्त माफिया की शरण में पहुंच चुका है। दीपा सरदार और भोला के बीच तकरीबन सात साल पहले रेलवे ठेकों में वर्चस्व को लेकर खूनी संघर्ष की शुरुआत हुई थी। इसी रंजिश में भोला के भाई हरप्रीत सिंह उर्फ काले की हत्या कर दी गई थी। हरप्रीत की हत्या में दीपा व उसके साथी नामजद हुए थे। कोड़ा की गिरफ्तारी के बाद यूपी, बिहार और झारखंड में उनके पार्टनरों से जुड़े माने जाने वाले माफिया अब खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। यूपी के एक चर्चित माफिया अजित सिंह के खास रहे लोगों ने पहले रेलवे के कई बड़े ठेकों पर अपना कब्जा जमाया था। जब तक लखनऊ का यह चर्चित माफिया जीवित रहा, तब तक उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल और आसपास के ठेकों में पूर्वांचल का उक्त माफिया चाहकर भी अपनी दखलंदाजी नहीं कर पाया था। माफिया समझे जाने वाले बृजेश सिंह, हरिशंकर तिवारी, वीरेंद्र प्रताप शाही, मुख्तार अंसारी और कृष्णानंद राय की पकड़ शुरू से ही रेलवे के कई जोन में रही। गैंगवॉर में शाही और राय की हत्या पहले ही हो चुकी है। छत्तीसगढ़ से गहरा रिश्ता रखने वाले और झारखंड में पकड़े गए यूपी के राकेश पांडेय उर्फ बाबा का नाम भी माफियाओं की लिस्ट में है। यूपी एसटीएफ और एटीएस सहित अन्य राज्यों की खुफिया पुलिस इन सब संबंधों का विश्लेषण अपने तरीके से कर रही है। यूपी में गिरफ्तार झारखंड के शातिर बदमाश सुनील सिंह उर्फ सोना, सिद्धांत सिंह उर्फ बाबू राजा, लखनऊ के सुरेश कुमार, धनबाद के संतोष उर्फ ठेठा और वहीं के विजय शर्मा से हुई पूछताछ से पता लगा कि उनके साथ एक और ग्रुप था। उस ग्रुप के पास तीन एके-47 असॉल्ट राइफलें हैं।
एसटीएफ सूत्र का कहना है कि झारखंड के पकड़े गए अपराधियों से मिली जानकारी के आधार पर यूपी पुलिस ने दिल्ली पुलिस, झारखंड पुलिस, बिहार पुलिस और इन सभी राज्यों में जीआरपी को भी अनहोनी से बचने एवं आवश्यक कदम उठाने की सलाह दे दी है। यूपी में एक रेल माफिया पर भी शिकंजा कसने वाला है। पूर्वांचल के इस माफिया के संबंध कोड़ा एवं उनके सहयोगियों से बताये गए हैं। गिरफ्तार किए गए लोग, जो झारखंड के कोयला एवं रेल माफिया से जुड़े हुए हैं, से मिली जानकारी में अगर सचाई है तो उसका असर नीचे तक के रेलवे टेंडरों पर पड़ सकता है। ऐसे में गैंगवॉर को रोकना पुलिस के लिए चुनौती होगी।
झारखंड के इन बदमाशों ने कबूल किया है कि रेलवे के बाहुबली ठेकेदार दीपा सरदार की हत्या के लिए लखनऊ के एक माफिया का खास ठेकेदार भोला इस समय पूर्वांचल के उक्त माफिया की शरण में पहुंच चुका है। दीपा सरदार और भोला के बीच तकरीबन सात साल पहले रेलवे ठेकों में वर्चस्व को लेकर खूनी संघर्ष की शुरुआत हुई थी। इसी रंजिश में भोला के भाई हरप्रीत सिंह उर्फ काले की हत्या कर दी गई थी। हरप्रीत की हत्या में दीपा व उसके साथी नामजद हुए थे। कोड़ा की गिरफ्तारी के बाद यूपी, बिहार और झारखंड में उनके पार्टनरों से जुड़े माने जाने वाले माफिया अब खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। यूपी के एक चर्चित माफिया अजित सिंह के खास रहे लोगों ने पहले रेलवे के कई बड़े ठेकों पर अपना कब्जा जमाया था। जब तक लखनऊ का यह चर्चित माफिया जीवित रहा, तब तक उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल और आसपास के ठेकों में पूर्वांचल का उक्त माफिया चाहकर भी अपनी दखलंदाजी नहीं कर पाया था। माफिया समझे जाने वाले बृजेश सिंह, हरिशंकर तिवारी, वीरेंद्र प्रताप शाही, मुख्तार अंसारी और कृष्णानंद राय की पकड़ शुरू से ही रेलवे के कई जोन में रही। गैंगवॉर में शाही और राय की हत्या पहले ही हो चुकी है। छत्तीसगढ़ से गहरा रिश्ता रखने वाले और झारखंड में पकड़े गए यूपी के राकेश पांडेय उर्फ बाबा का नाम भी माफियाओं की लिस्ट में है। यूपी एसटीएफ और एटीएस सहित अन्य राज्यों की खुफिया पुलिस इन सब संबंधों का विश्लेषण अपने तरीके से कर रही है। यूपी में गिरफ्तार झारखंड के शातिर बदमाश सुनील सिंह उर्फ सोना, सिद्धांत सिंह उर्फ बाबू राजा, लखनऊ के सुरेश कुमार, धनबाद के संतोष उर्फ ठेठा और वहीं के विजय शर्मा से हुई पूछताछ से पता लगा कि उनके साथ एक और ग्रुप था। उस ग्रुप के पास तीन एके-47 असॉल्ट राइफलें हैं।
Wednesday, December 2, 2009
कुछ समय बाद दिल्ली के शाहदरा से नए बस अड्डे तक भी मेट्रो की सीटी लगेगी।
दिल्ली के आनंद विहार से वैशाली तक ही नहीं जनाब प्लान के हिसाब से कार्य हुआ तो कुछ समय बाद दिल्ली के शाहदरा से नए बस अड्डे तक भी मेट्रो की सीटी लगेगी। मेट्रो के इस नए प्रोजेक्ट के लिए अब जीडीए ने नई प्लानिंग की है। करीब 12 किलोमीटर लंबे प्रोजेक्ट को तैयार करने के लिए 1200 करोड़ रुपये खर्च होने हैं। जीडीए का कहना है कि वह इस प्रोजेक्ट के वित्तीय भार को वहन नहीं कर सकता है। जीडीए ने शासन से निवेदन किया है कि वह मेट्रो सैस लगाकर इस प्रोजेक्ट पर वाले खर्च में प्राइवेट या फिर सरकारी विभागों की शेयरिंग तय कर सकते हैं। सूत्रों का कहना है कि इस प्रोजेक्ट के लिए सैस लगाने के प्रस्ताव को तैयार करने के लिए शासन ने ही जीडीए को आदेश दिया था। 'मेट्रो सैस' मेट्रो के लिए टैक्स, के इस प्रस्ताव को सबसे पहले जीडीए ने वैशाली के सेक्टर 4 से वसुंधरा होते हुए करीब साढे़ 7 किलोमीटर लंबे इंदिरापुरम के सीआईएसएफ तक के प्रोजेक्ट के लिए भेजा था। निवर्तमान वीसी एस. के. द्विवेदी की अध्यक्षता में हुई एक बैठक में कई बिल्डरों ने सलाह दी थी कि मेट्रो सैस के तौर पर वह प्रतिवर्ग मीटर साढे़ 3 सौ रुपये देने को तैयार है, ताकि इस प्रोजेक्ट पर आने वाली करीब साढे़ 7 सौ करोड़ रुपये की लागत की भरपाई की जा सके। लेकिन जब शासन को जीडीए ने यह प्रस्ताव भेजा तो उसे निरस्त कर दिया। शासन का जीडीए से उल्टे एक सवाल था कि क्या इससे पहले यूपी में कहीं पहले मेट्रो सैस लगा है? अगर ऐसा हुआ है तो उसकी थ्योरी के साथ प्रस्ताव भेजे। लेकिन जीडीए अब दिल्ली के दिलशाद गार्डन से नए बस अड्डे तक के मेट्रो प्रोजेक्ट को भी गंभीरता से ले रहा है। जीडीए के चीफ इंजीनियर अनिल कुमार गर्ग की माने तो इस प्रोजेक्ट पर करीब 1200 करोड़ रुपया खर्च आएगा। इसका वित्तीय भार जीडीए वहन नहीं कर सकता। ऐसे में शासन को सुझाव दिया गया है कि वह 2 तरह से मेट्रो सैस लगा सकता है एक सरकारी विभागों और दूसरे प्राइवेट प्रॉपर्टी पर।
सरकारी विभागों से मतलब नगर निगम, जीडीए, आवास विकास परिषद, यूपीएसआईडीसी आदि विभागों पर। मेट्रो के नए बस अड्डा तक आने से शहर में प्रॉपर्टी का रेट बढ़ेगा इससे इन सभी विभागों का सीधा फायदा है। मेट्रो प्रोजेक्ट पर खर्च होने वाले पैसे को कुछ विभाग टैक्स में बढ़ोतरी कर पब्लिक से भी भरपाई कर सकते हैं। इनके अलावा इलाके के प्राइवेट टाउनशिप पर भी अलग से मेट्रो सैस लगाने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। इससे इतना तो साफ हो गया कि वैशाली के प्रोजेक्ट के बाद अब जीडीए और शासन नए बस अड्डे तक के मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए संसाधन जुटाने की कोशिश में जुट गए हैं।
सरकारी विभागों से मतलब नगर निगम, जीडीए, आवास विकास परिषद, यूपीएसआईडीसी आदि विभागों पर। मेट्रो के नए बस अड्डा तक आने से शहर में प्रॉपर्टी का रेट बढ़ेगा इससे इन सभी विभागों का सीधा फायदा है। मेट्रो प्रोजेक्ट पर खर्च होने वाले पैसे को कुछ विभाग टैक्स में बढ़ोतरी कर पब्लिक से भी भरपाई कर सकते हैं। इनके अलावा इलाके के प्राइवेट टाउनशिप पर भी अलग से मेट्रो सैस लगाने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। इससे इतना तो साफ हो गया कि वैशाली के प्रोजेक्ट के बाद अब जीडीए और शासन नए बस अड्डे तक के मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए संसाधन जुटाने की कोशिश में जुट गए हैं।
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