Monday, January 31, 2011

आज भी बड़े-बड़े लोगों को शहर की लाइफलाइन लोकल ट्रेन की ही याद आती है।

भागमभाग का वक्त हो तो आज भी बड़े-बड़े लोगों को शहर की लाइफलाइन लोकल ट्रेन की ही याद आती है। यकीन नहीं आता हो तो मनसे प्रमुख राज ठाकरे से सबक लीजिए जब उन्हें सोमवार को डोंबिवली से दादर तक की यात्रा लोकल में करनी पड़ी। जी हां, समय बचाने के लिए डोंबिवली महानगरपालिका का दौरा करने गए राज ठाकरे ने डोंबिवली जिमखाना में अपने नगर सेवकों से मुलाकात की और वापस फास्ट लोकल से लौटे। वहां उन्होंने नगरसेवकों और एवं वरिष्ठ पदाधिकारियों से चर्चा की और सबके कामकाज की समीक्षा भी की। राज ठाकरे सोमवार को डोंबिवली स्टेशन पर लगभग 25 मिनट रहे और वहां से उन्होंने 2.40 की लोकल से दादर स्टेशन के लिए प्रस्थान किया। इसके लिए मनसे कार्यकर्ताओं ने उनकी यात्रा के लिए प्रथम श्रेणी के 50 टिकटों की व्यवस्था भी की थी। मनसे कार्यकर्ता प्रथम श्रेणी के डिब्बे की खिड़की के पास की सीट पर कल्याण से ही कब्जा जमाए बैठे थे, ताकि उनके नेता राज ठाकरे खिड़की के पास बैठकर यात्रा कर सकें। उनके साथ ट्रेन में यात्रा कर रहे टाइम्स ग्रुप के पत्रकारों से प्रश्नोत्तर के दौरान उन्होंने कहा कि वे राहुल गांधी की नकल नहीं कर रहे हैं। राहुल गांधी ने तो एटीएम से पैसा निकाल कर टिकट खरीदा था और यात्रा की थी। मनसे कार्यकर्ता उनकी आगामी 5 फरवरी की कल्याण यात्रा के कार्यक्रम में आज से ही जुट गए हैं। पत्रकारों से बातचीत करते हुए राज ठाकरे ने कहा कि मैं लगभग 25 वर्षों बाद लोकल ट्रेन से यात्रा कर रहा हूं।

मेट्रो दो फेज पूरे करके दिल्ली की जिंदगी का अहम हिस्सा

मेट्रो दो फेज पूरे करके दिल्ली की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुकी है। राजधानी की पब्लिक ट्रांसपोर्ट की समस्या से काफी तक हद तक निपटने के अलावा मेट्रो ने दिल्ली को क्या-क्या नहीं दिया - वर्क कल्चर सिखाया, वक्त की नजाकत बताई, लाइफ स्टाइल बदली, यूथ की सवारी बनी, दिल्ली को ग्रेटर दिल्ली बनाने के लिए एनसीआर की दूरियां कम कीं, इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया और रीयल एस्टेट को असली कीमत दिखाई। सिर्फ आठ साल में मेट्रो ने दिल्ली के दिल में एक खास मुकाम हासिल कर लिया है। ऐसा मुकाम जिसके बिना अब दिल्ली की कल्पना भी नहीं की जा सकती। मेट्रो अपने पांच रंग बिखेर चुकी है - लाल, पीला, नीला, हरा, जामुनी। ऑरेंज कलर एयरपोर्ट लाइन के चालू होते ही अस्तित्व में आ जाएगा। इन छह लाइनों से दिल्ली के 16 लाख पैसेंजर रोजाना 195 किमी. का सफर तय कर सकते हैं। यकीनन मेट्रो के बिना दिल्ली बेरंग ही हो जाती। अब मेट्रो के तीसरे फेज की तैयारी है। नई लाइनों का खाका तैयार हो रहा है और इन लाइनों पर सर्वे भी कराए गए हैं। कुछ प्रस्तावित लाइनों पर सहमति बनती दिखाई दे रही है जिनमें मुकुंदपुर-राजौरी गार्डन, धौलाकुआं-आनंद विहार, नोएडा-संजय गांधी ट्रांसपोर्ट नगर, केंदीय सचिवालय-कश्मीरी गेट और आनंद विहार-मुकुंदपुर लाइनें शामिल हैं। मगर, लाइनों का यह सिलसिला यही खत्म नहीं हो जाता। मेट्रो ने दिल्ली को जो दिया है, उसे देखते हुए हर दिल्ली वाला चाहता है कि मेट्रो उसके घर के पास जरूर पहुंचे। एनसीआर के सभी इलाके दिल्ली के हर कोने से जुड़ना चाहते हैं। चूंकि तीसरे फेज की तैयारी चल रही है तो ऐसे में यह मांग रखना जायज भी माना जा रहा है। एमपी, एमएलए और आरडब्ल्यूए अपने-अपने ज्ञापन बनाकर सरकार को भेज रहे हैं। मेट्रो की उपलब्धियों और सहूलियतों के कारण सभी की इच्छाएं और आशाएं बहुत ज्यादा बढ़ गई हैं। सचाई यह है कि तीसरे और यहां तक कि चौथे फेज को भी मिला लें तो भी सभी की इच्छाओं की पूर्ति कर पाना संभव नहीं है। हर सड़क के किनारे तो मेट्रो को नहीं दौड़ाया जा सकता। वास्तव में मेट्रो मास रैपिड ट्रांसपोर्ट सिस्टम का एक अहम हिस्सा है। इस सिस्टम के और भी हिस्से होते हैं। अगर मेट्रो 16 लाख लोगों को इधर से उधर पहुंचा रही है तो उनमें से बहुत-से लोगों को मंजिल तक पहुंचाना इन हिस्सों की जिम्मेदारी होती है। दिल्ली की सबसे बड़ी परेशानी यही है कि यहां पब्लिक ट्रांसपोर्ट में मेट्रो के अलावा कुछ भी दिखाई नहीं देता। मेट्रो के साथ डीटीसी के तालमेल की बातें तो बार-बार होती हैं लेकिन कभी सिरे नहीं चढ़तीं। कॉमन टिकट तक नहीं बन पा रहा। ऐसे कई इलाके हैं जिनके आसपास दो-चार किमी. से मेट्रो गुजरती है लेकिन मेट्रो उनके लिए दूर है। शालीमार बाग और अशोक विहार के आसपास दो मेट्रो हैं। प्रीत विहार और वेलकम के बीच मुश्किल से 3 किमी. की दूरी है लेकिन दोनों रूट आपस में नहीं जुड़ते। यही वजह है कि यमुना विहार हो या नजफगढ़, सभी अपने लिए अलग मेट्रो की मांग कर रहे हैं। डीटीसी इस गैप को भरने में पूरी तरह असफल रही है। उसके रूट या किराया इस तरह डिजाइन ही नहीं किए गए कि लोगों को अलग से मेट्रो की मांग न करनी पड़े। अगर डीटीसी की बसें मौजूद हैं तो उसका किराया और फिर मेट्रो का किराया आम जनता की कमर तोड़ देता है। मेट्रो ने इस गैप को भरने के लिए फीडर सर्विस शुरू की। 120 बसें दौड़ भी रही हैं मगर वे अपर्याप्त हैं। मेट्रो को सफलता से चलाने वाले फीडर सर्विस के लिए ऑपरेटर ही नहीं ढूंढ पा रहे। काफी समय तक तो सर्विस बंद ही करनी पड़ी। तीसरे फेज में मेट्रो के रूटों के बारे में अंतिम फैसला करने के साथ-साथ दिल्ली सरकार को पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम के शेष हिस्सों को भी संयोजित करना जरूरी है। मेट्रो तो दिल्ली की लाइफ लाइन बन रही है लेकिन पब्लिक ट्रांसपोर्ट के बाकी हिस्से चाहे वे बसें हों या ऑटो, दम निकालने में कोई कसर नहीं छोड़ते।

Monday, January 24, 2011

ट्रेन में लूट की वारदात को अंजाम

बिहार में अज्ञात हथियारबंद लुटेरों ने शनिवार तड़के एक ट्रेन में लूट की वारदात को अंजाम दिया।पटना से अहमदाबाद को जा रही अजीमाबाद एक्सप्रेस में लूट की यह घटना हुई। शनिवार सुबह उत्तर प्रदेश के मुगलसराय में रेलवे पुलिस थाने (जीआरपी) में इस घटना की रिपोर्ट दर्ज कराई गई। मुगलसराय जीआरपी थाने के एक अधिकारी ने कहा- यात्रियों से लूट की यह घटना तड़के तीन बजे बिहार के बक्सर रेल्वे स्टेशन के पास हुई। लूट के बाद लुटेरे रेल की आपातकालीन चेन खींचकर भाग गए। चंदौली जिले में मुगलसराय के जीआरपी निरीक्षक त्रिपुरारी पांडे ने कहा, 'हमने 10-12 अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इनमें से कुछ लोगों के पास बंदूकें थीं।' उन्होंने कहा, 'यात्रियों के मुताबिक लुटेरों ने रेल के दो स्लीपर कोच को निशाना बनाया। हम लूट की कुल राशि का आकलन कर रहे हैं।' शुरुआतीी जांच के मुताबिक लुटेरे बिहार के चौसा से रेलगाड़ी में दाखिल हुए थे।

दिल्ली मेट्रो के बाद अब उसकी छोटी बहन मोनो रेल को लाने के लिए फिर से कवायद शुरू

दिल्ली मेट्रो के बाद अब उसकी छोटी बहन मोनो रेल को लाने के लिए फिर से कवायद शुरू कर दी गई है। पहले मोनो रेल की तीन लाइनें बनाने का विचार था, लेकिन अब दिल्ली सरकार तीन की बजाय शुरू में सिर्फ एक ही लाइन बनाने के बारे में सोच रही है। यह लाइन पूर्वी दिल्ली के कोंडली इलाके को उत्तर पश्चिम दिल्ली के रोहिणी क्षेत्र से जोड़ेगी। दिल्ली सरकार ने ट्रांसपोर्ट विभाग से कहा है कि वह इस लाइन की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने के लिए बाकायदा प्रस्ताव बनाकर पेश करे ताकि डीपीआर तैयार कराने के बारे में फैसला लिया जा सके। ट्रांसपोर्ट विभाग के सूत्रों के मुताबिक, 2008 में भी विभाग ने टेक्नो फीजिबल स्टडी कराई थी। उस वक्त दिल्ली में मोनो रेल के 47 किमी के तीन कॉरिडोर बनाने का सुझाव दिया गया था। लेकिन बाद में आर्थिक तंगी की वजह से सरकार ने इस प्रस्ताव को ठंडे बस्ते में डाल दिया था। अब शुक्रवार को मोनो रेल तैयार करने के बारे में मल्टीनैशनल कंपनी हिताची की ओर से दिल्ली सरकार को बाकायदा प्रेजेंटेशन दिया गया। इस प्रेजेंटेशन के बाद ही ट्रांसपोर्ट विभाग से कहा गया कि वह मोनो रेल की प्रस्तावित एक ही लाइन के लिए डिटेल स्टडी रिपोर्ट तैयार कराने की कवायद शुरू करें। ट्रांसपोर्ट विभाग के अधिकारियों का कहना है कि दरअसल, पहले जिन तीन कॉरिडोर सुझाए गए थे, उनमें से कुछ जगह पहले से ही मेट्रो रेल की लाइनें तैयार हो गई हैं, जबकि कुछ जगह पर तीसरे फेज में मेट्रो रेल लाइन आ रही हैं। इसी वजह से पिछले साल अक्टूबर में राइट्स ने दिल्ली के ट्रांसपोर्ट ट्रैफिक के बारे में जो सिफारिश की है, उसके मुताबिक सुझाए गए मोनो रेल के एक ही कॉरिडोर की स्टडी कराई जाएगी। नया कॉरिडोर: 40.3 किमी का यह कॉरिडोर कोंडली से रोहिणी के बीच बनाया जाएगा और इसका वाया दिल्ली गेट होगा। दरअसल, पहले जो तीन कॉरिडोर बनाए जाने थे, उनमें से एक रोहिणी सेक्टर 21 से लालकिला, कल्याणपुरी से पुल मिठाई और गुलाबी बाग से डीयू था। अब रोहिणी सेक्टर 21 से लालकिला के बीच चांदनी चौक तक मेट्रो लाइन बन ही चुकी है। इसी तरह लालकिला तक फेज तीन में मेट्रो रेल लाइन आने जा रही है। इसी तरह से गुलाबी बाग और डीयू तक भी मेट्रो पहुंच चुकी है। ऐसे में अब मोनो रेल के लिए जिस नए कॉरिडोर की पहचान की गई है, वह कोंडली से रोहिणी का है। इसमें भी यह दरियागंज या लालकिला नहीं जाएगा, बल्कि इसे दिल्ली गेट से ही कमला मार्केट की ओर से रोहिणी की तरफ ले जाया जा सकता है। पैसे की किल्लत: मोनो रेल के इस कॉरिडोर को तैयार करने पर लगभग आठ हजार करोड़ रुपये का खर्च आने की उम्मीद है। चूंकि दिल्ली सरकार के पास पैसे की कमी है, इसलिए इसे पीपीपी या फिर बीओटी के आधार पर ही बनाया जाएगा। लगभग दो साल पहले की स्टडी के मुताबिक, इस प्रॉजेक्ट में ऑपरेशनल गैप यानी ऑपरेशनल लागत और आमदनी के बीच का अंतर लगभग 46 फीसदी का था। अब माना जा रहा है कि अगर सरकार बीओटी पर आने वाली कंपनी को टैक्सों से छूट देती है और कुछ सुविधाएं दे देती है तो यह गैप कम होकर 30 फीसदी रह जाएगा। इस गैप के बराबर की राशि दिल्ली सरकार किस तरह से देगी, इस पर भी सरकार को फैसला करना होगा। मेट्रो रेल बनाम मोनो रेल - मेट्रो 30 से 40 मीटर चौड़ी सड़क पर बन सकती है, जबकि मोनो रेल 15 से 25 मीटर चौड़ी सड़क पर - मेट्रो एक दिशा में हर घंटे 30 हजार पैसेंजर ढो सकती है, जबकि मोनो रेल प्रति दिशा 15 हजार प्रति घंटा - मेट्रो की स्पीड प्रति घंटे 25 से 40 किमी औसत होती है तो मोनो रेल की 20 से 30 किमी प्रति किमी, प्रति घंटा

Friday, January 14, 2011

नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से एयरपोर्ट तक जाने के लिए 80 रुपये का टिकट

मेट्रो की एयरपोर्ट लाइन पर सफर करने वाले पैसेंजरों को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से एयरपोर्ट तक जाने के लिए 80 रुपये का टिकट लेना पड़ेगा। लेकिन अगर सिर्फ एयरपोर्ट से द्वारका सेक्टर 21 तक कोई पैसेंजर जाता है या फिर वहां से सिर्फ एयरपोर्ट तक आता है तो इसके लिए 30 रुपये का किराया देना होगा। अलबत्ता पैसेंजरों को लगेज के लिए अतिरिक्त पैसा खर्च नहीं करना पड़ेगा। एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन का ऑपरेशंस करने वाली कंपनी दिल्ली एयरपोर्ट मेट्रो एक्सप्रेस के सूत्रों का कहना है कि नई दिल्ली से द्वारका सेक्टर 21 तक जाने के लिए पैसेंजरों को 100 रुपये देने होंगे। दरअसल, फिलहाल जो किराया तय किया गया है, उसे हर स्टेशन के लिए 20 रुपये रखा गया है यानी अगर पैसेंजर नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से सिर्फ शिवाजी स्टेडियम स्टेशन तक ही जाता है तो उसे 20 रुपये किराया खर्च करना होगा। इसी तरह अगर पैसेंजर धौलाकुआं स्टेशन पर उतरता है तो उसे 40 रुपये और एनएच 8 स्टेशन तक के लिए 60 रुपये का किराया देना होगा। अगर कोई पैसेंजर धौलाकुआं से ही एयरपोर्ट एक्सप्रेस ट्रेन में सवार होकर अगले स्टेशन पर उतरता है तो उसे 20 रुपये चुकाने होंगे। द्वारका सेक्टर 21 और एयरपोर्ट स्टेशन के बीच किराया 30 रुपये रखा गया है लेकिन अगर द्वारका सेक्टर 21 से कोई पैसेंजर ट्रेन में चढ़ता है और वह एनएच 8 पर उतरता है तो उसे 40 रुपये ही देने होंगे। सूत्रों का कहना है कि अभी चूंकि इस लाइन की शुरुआत होने जा रही है इसलिए शुरुआत में कंपनी यह किराया लागू करने की तैयारी में है लेकिन इसके बाद किराए में बढ़ोतरी होने की संभावना से भी सूत्रों ने इनकार नहीं किया है। कंपनी सूत्रों का कहना है कि हालांकि दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के साथ हुए करार के तहत वह डेढ़ सौ रुपये तक का किराया रख सकती है लेकिन वह फिलहाल किराया कम रख रही है। जानकारों का मानना है कि आने वाले कुछ महीनों में किराया बढ़ाने का फैसला पैसेंजरों की तादाद देखकर लिया जाएगा।

Monday, January 10, 2011

लेट हो रही ट्रेनों के यात्रियों को राहत देने के लिए उत्तर रेलवे ने कुछ और कदम उठाए

कोहरे की वजह से लेट हो रही ट्रेनों के यात्रियों को राहत देने के लिए उत्तर रेलवे ने कुछ और कदम उठाए हैं। इसके तहत नए हेल्पलाइन नंबर दिए गए हैं। कोहरे की मार से 70 रेलगाडि़यां 3 घंटे से भी अधिक देरी से चल रही हैं तो 33 रेलगाडि़यों का समय दोबारा बदला गया और 9 रेलगाडि़यों को रद्द किया गया। रद्द की जाने वाली रेलगाडि़यों में नई दिल्ली से पटना जाने वाली राजधानी एक्सप्रेस और हजरत निजामुद्दीन से झांसी के बीच चलने वाली ताज एक्सप्रेस भी शामिल हंै। उत्तर रेलवे के प्रवक्ता के मुताबिक, यात्रियों की सुविधा के लिए नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से संबंधित यात्रियों के लिए हेल्पलाइन नंबर- 23740020 और 23744052 दिल्ली जंक्शन के लिए टेलिफोन नंबर- 23967332 और 23962389 एवं हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन के लिए हेल्पलाइन नंबर- 24355964 दिए गए हैं। इन नंबरों पर फोन करके यात्री अपनी रेलगाडि़यों के बारे में जानकारी ले सकते हैं। इसके अलावा यात्रियों द्वारा कैंसल कराए जा रहे टिकटों के पैसे वापस करने के लिए अतिरिक्त काउंटर खोले गए हैं। यह काउंटर 24 घंटे कार्यरत होंगे। जबकि 139 रेलगाड़ी पूछताछ सेवा पर तो जानकारी दी ही जा रही है। उत्तर रेलवे का कहना है कि यात्रियों के मार्गदर्शन के लिए बड़ी संख्या में अधिकारियों और अन्य स्टाफ को तैनात किया गया है। सभी स्टेशनों पर पीने का पानी, शौचालयों की सफाई का इंतजाम दुरुस्त किया गया है। इसकी भी निगरानी की जा रही है कि खाने-पीने के लिए किसी चीज की कमी न होने पाए। रेलवे का कहना है कि रेलगाडि़यों का परिचालन सामान्य बनाए रखने के लिए अभी तक कुल 31 हजार डेटोनेटर्स का इस्तेमाल किया जा चुका है और प्रतिदिन औसतन 2 हजार से अधिक डेटोनेटर्स का उपयोग किया जा रहा है। यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न स्टेशनों पर और इंजनों में वरिष्ठ अधिकारी तैनात किए गए हैं।

ट्रेन लेट - लड़की की ट्रेन में ही मौत

पटना से इलाज के लिए नई दिल्ली लाई जा रही चार महीने की लड़की की ट्रेन में ही मौत हो गई। घने कोहरे और खराब मौसम के चलते ये ट्रेन लेट चल रही थी। पटना-दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस से अपने परिवार के साथ सफर कर रही चार महीने की रात की हालत ट्रेन में बिगड़ गई और उसे रेलवे के अस्पताल में पहुंचाना पड़ा। सांस लेने की बीमारी से पीडि़त लड़की का इलाज पटना में किया जा रहा था, लेकिन जब हालात काबू से बाहर हो गए तो उन्होंने लड़की को एम्स में ट्रीटमेंट के लिए रेफर कर दिया। घने कोहरे के चलते यह ट्रेन करीब 12 घंटे देरी से चल रही थी। हालत बिगड़ने के बाद लड़की रेलवे के डॉक्टरों की निगरानी में थी। उसे शहर के एक अस्पताल में ले जाया गया। पर मासूम लड़की की रास्ते में ही मौत हो गई। लड़की के परिजन लड़की को सड़क मार्ग से पटना ले गए।

Wednesday, January 5, 2011

ट्रेन की चपेट में आकर महिला की मौत

पूर्वी दिल्ली के शाहदरा स्टेशन पर मंगलवार शाम ट्रेन की चपेट में आकर महिला की मौत हो गई। महिला की प
हचान प्रेमवती (40) के रूप में हुई। बताया जाता है वह एमसीडी के उद्यान विभाग में काम करती थी। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भिजवा दिया।

Monday, January 3, 2011

दिल्लीवालों के लिए टाइम से दूध और सब्जियां सप्लाई नहीं हो पा रही

सुबह हो रहे कोहरा की वजह से ट्रेनें लेट होने का असर दूध की सप्लाई पर पड़ रहा है । ऐसे में जहां लोग ड्यूटी पर समय से नहीं पहुंच पा रहे हैं। वहीं, दिल्लीवालों के लिए टाइम से दूध और सब्जियां सप्लाई नहीं हो पा रही हैं। यही हाल रहा तो आने वाले एक सप्ताह में लोगों को सब्जियां खरीदने के लिए जेब ज्यादा ढीली करनी पड़ सकती है। दिल्ली के लिए खुर्जा, बुलंदशहर, अलीगढ़, जेवर, दनकौर, दादरी सिकंदराबाद से भारी मात्रा में दूध की सप्लाई की जाती है। यह दूध ट्रेनों में भरकर भेजा जाता है। इसके अलावा टाटा-407 गाड़ी से भी लेकर दूधिया जाते हैं। यहां सबसे ज्यादा ट्रेनों में लदकर दूध दिल्ली सप्लाई किया जाता है। पिछले कुछ दिनों से ट्रेन तीन से चार घंटे लेट चल रही हैं। दादरी रेलवे स्टेशन मास्टर आरसी मीणा ने बताया कि आए दिन 50 से 55 ट्रेनें प्रभावित हो रही हैं। इनमें सबसे ज्यादा दिक्कत लोकल ट्रेनों में सफर करने वाले लोगों को उठानी पड़ रही है। कारण यह है कि लोकल ट्रेनों से अलीगढ़ और हाथरस तक के व्यापारी और नौकरीपेशे वाले लोग दिल्ली एनसीआर में आते जाते हंै। कोहरा के कारण ईएमयू टे्रनें प्रभावित होने से दिक्कत बढ़ने लगी हैं। सुबह हो या शाम रेलवे स्टेशनों पर लोगों की भीड़ लगी रहती है। दूध कारोबारी करने वाले रमेश नागर का कहना है कि पिछले दो दिनों से उन्हें टाइम से ट्रेन नहीं मिल पा रही है। उन्होंने बताया कि वे 5 बजे वाली ईएमयू से दूध लेकर दिल्ली जाते थे। इन दिनों 12 बजे के बाद दूध पहुंचा पा रहा हंै। ट्रेने 4 से 8 घंटे तक लेट चल रही हंै। दिल्ली के लक्ष्मीनगर में चार्टर्ड अकाउंटेंट विरेश कुमार का कहना है कि कोहरे ने ट्रेनों को अधिक प्रभावित किया है। इससे लोगों की दिक्क्त बढ़ गई है।

नववर्ष आपको मंगलमय हो

नववर्ष आपको मंगलमय हो, जीवन पथ पर ज्योतिर्मय जय हो
सत्य न्याय और प्रेम पताका, सुगंध सुवासित नूतन किसलय हो
रहे कोई न शत्रु जग में, हे प्रभुराम प्रेममय जग हो
विपुल कीर्ती भारत की होवे, उच्च तिरंगा प्रखर अमर हो
कर जोर पुन: विनती करता, नववर्ष आपको मंगलमय हो