शहर में मेट्रो के विस्तार में पैसे की कमी आड़े नहीं आएगी। जीडीए ने विकास शुल्क में505 रुपये प्रति वर्ग मीटर का इजाफा कर दिया है। यह विकास शुल्क नया मैप स्वीकृत करने वालों से वसूल किया जाएगा। साथ ही , दस वर्षों तक अवस्थापना निधि का 50 पर्सेंट हिस्सा भी जीडीए को मिलेगा। यह फैसला शुक्रवार को जीडीए की बोर्ड बैठक में किया गया। इस बैठक में यूपी के प्रमुख सचिव ( आवास ) जगन्नाथ चैंबर , वीसी एन . के . चौधरी और अन्य अफसर भी मौजूद रहे। जीडीए बोर्ड की बैठक में कुल 24 प्रस्ताव रखे गए , जिनमें से बीस प्रस्तावों को मंजूरी मिल गई। जीडीए बोर्ड के अध्यक्ष जगन्नाथ चैंबर ने बताया कि मेट्रो रेल परियोजना पर होने वाले खर्च की पूर्ति करने के लिए विकास शुल्क मेेें 505 रुपये प्रति वर्ग मीटर की बढ़ोतरी की गई है। अब मैप स्वीकृत कराने वालों से 1840 रुपये के बजाए 2345 रुपये प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से वसूली की जाएगी। नए मास्टर प्लान के अनुसार अभी तक आठ हजार हेक्टेयर एरिया के 25 पर्सेंट हिस्से का डिवेलपमेंट हुआ है। अधिकारियों को उम्मीद है कि जब 75 पर्सेंट हिस्से का काम पूरा हो जाएगा , जीडीए को विकास शुल्क के रूप में ही 4500 करोड़ जीडीए को मिल जाएंगे। इसके अलावा दस वर्षों तक अवस्थापना निधि का 50 पर्सेंट हिस्सा भी अथॉरिटी को मिलेगा। गौरतलब है कि किसी भी प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री होने पर प्रति वर्ष दो प्रतिशत राशि ( लगभग 150 करोड़ रुपये ) अवस्थापना निधि के रूप में शासन से आती है। यह राशि जीडीए , नगर निगम और आवास विकास परिषद को बराबर - बराबर दी जाती है।
Saturday, July 3, 2010
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