Friday, May 30, 2014

ट्रैवलिंग टिकट एग्जामिनर (टीटीई) ने एक महिला को एसी डिब्बे से धक्का देकर गिरा दिया

नशे में धुत रेलवे के एक ट्रैवलिंग टिकट एग्जामिनर (टीटीई) ने एक महिला को एसी डिब्बे से धक्का देकर गिरा दिया, जिससे उसकी कुचलकर मौत हो गई। महिला के भतीजे राहुल पुरोहित ने सरकारी रेलवे पुलिस में कंप्लेंट दर्ज कराई है कि उज्ज्वला पांडे (38) जनरल टिकट लेकर एलटीटी-राजेंद्रनगर पटना एक्सप्रेस के एसी डिब्बे में चढ़ने की कोशिश कर रही थी, लेकिन टीटीई संपत सालूंखे ने उन्हें रोक दिया। 
राहुल के अनुसार यहां से जब ट्रेन चलने लगी, तब उन्हें (उज्ज्वला को) लगा कि ट्रेन कहीं छूट न जाए और एक बार फिर उन्होंने अपने दस साल के बच्चे के साथ एसी डिब्बे में चढ़ने की कोशिश की। लेकिन सालूंखे ने उन्हें कथित रूप से धक्का दे दिया। उज्ज्वला अपना संतुलन खो बैठी, जिससे डिब्बे और प्लेटफॉर्म के बीच गिर गई। ट्रेन ने उन्हें कुचल दिया। राहुल के मुताबिक वह अपनी बुआ को स्टेशन छोड़ने आया था, जो खंडवा जा रही थी। उसके अनुसार टीटीई शराब के नशे में था। यात्रियों के गुस्से के डर से सालूंखे पहले पैंटरी कार में छिप गया, लेकिन लोगों और राहुल ने उसे बाहर खींचकर जीआरपी थाने के हवाले कर दिया। उसे आईपीसी की धारा 304 (गैर इरादतन हत्या) के तहत अरेस्ट किया गया। पुलिस मामले की जांच कर रही है। 

Tuesday, May 27, 2014

चिल्लाए आतंकियों ने हमला कर दिया है

समय सुबह 11 बजे, स्थान गाजियाबाद रेलवे स्टेशन रेलवे स्टेशन, प्लैटफॉर्म नंबर: 3....सब कुछ सामान्य चल रहा था। रेलवे स्टेशन पर कई यात्री ट्रेन का इंतजार कर रहे थे। कुछ इधर उधर टहल रहे थे। इसी दौरान कुछ पुलिसकर्मी हाथों में हथियार लेकर दौड़ते हुए आए और चिल्लाए आतंकियों ने हमला कर दिया है.........। यह सुनते ही यात्रियों में अफरातफरी मच गई और प्लैटफार्म पर काम करने वाले वेंडर सहम गए। लोग इधर उधर भागने लगे। इस बीच बड़ी संख्या में पहुंचे पुलिसकर्मियों ने पूरे स्टेशन और प्लैटफार्म को घेर लिया। कुछ पुलिसकर्मिंयों ने पोजिशन भी ले ली, कुछ ने फायरिंग भी की। इस बीच पुलिसकर्मियों ने कुछ संदिग्ध लोगों को हिरासत में ले लिया। इसके बाद भी करीब 1 घंटे तक पुलिस ने तलाशी अभियान चलाया और वहां खड़े यात्रियों और भिखारियों तक की तलाशी ली। जब वहा आतंकी नहीं मिले तो एसएचओ जीआरपी अशोक राणा ने ऑपरेशन सर्च समाप्त करने की घोषणा कर दी। बाद में बताया गया कि यह मॉक ड्रिल थी। इसमें देखा गया कि अगर आतंकी हमला करते हैं तो मुसाफिरों को कैसे बचाया जाएगा। 
दिल्ली रेलवे हेडक्वॉटर्र में लश्कर-ए-तैयबा के नाम से एक लेटर मिला है। इसमें गाजियाबाद समेत यूपी के कई जिलों के रेलवे स्टेशनों को उड़ाने और प्राचीन सिद्धपीठ दुद्येश्वरनाथ मंदिर समेत कई मंदिरों पर हमले की धमकी दी गई है। इसके साथ ही सतर्कता बढ़ा दी गई है। मंदिर में भी सुरक्षा बढ़ा दी गई है। एसएचओ रेलवे अशोक राणा ने बताया कि पूरे स्टेशन पर नजर रखने के लिए चप्पे-चप्पे पर सीसीटीवी लगाए गए हैं। इसके लिए सिविल पुलिस से भी कोऑर्डिनेशन किया गया हैं। 

Friday, May 23, 2014

खासतौर से वेस्टर्न रेलवे-पिछले कुछ समय मुंबई की लोकल समय पाबंदी में पिछड़ रही है

इस शहर के लिए वक्त बड़ा कीमती है। शायद वक्त की पाबंदी ने ही मुंबई को मुंबई बनाया है। ये बात भी हम सब जानते हैं कि मुंबईकर अपनी घड़ियां लोकल के टाइम टेबल से मिलाते हैं। पिछले कुछ समय से शहर में ट्रैफिक का बोझ बढ़ने से मुंबई की लोकल समय पाबंदी में पिछड़ रही है, खासतौर से वेस्टर्न रेलवे। वैसे एक जमाने में वेस्टर्न रेलवे की सबर्बन लोकल को इंडियन रेलवे की सबसे पाबंद सर्विस माना जाता था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इस नेटवर्क पर ट्रैफिक बढ़ने से इंडिकेटर का टाइम लोकल के टाइम से मैच नहीं हो रहा है। वेस्टर्न रेलवे की मानें, तो सितंबर 2014 तक वेस्टर्न रेलवे पर होने वाले तीन बड़े काम के बाद गाड़ी पटरी पर लौट आएगी। 
विरार से चर्चगेट की तरफ जाने वाले लोकल ट्रेनों को कई बार बोरिवली स्टेशन के प्लैटफॉर्म के बाहर हॉल्ट पर रखा जाता है। दरअसल यहां से रेलवे को एक इंटरलोक हटाना है, जिसके लिए तकरीबन 3-4 साल से इंतजार हो रहा है। रेलवे के अनुसार बोरिवली के ईस्ट साइड में एक प्राइवेट प्रॉपर्टी हटाने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है, लेकिन अब इस प्रॉपर्टी को बिना छेड़े रेलवे ने दूसरा सॉल्यूशन निकाल लिया है। नई योजना के तहत रेलवे को 1400 वर्गफुट जमीन की जरूरत है, जो बीएमसी देने के लिए तैयार हो गई है। इसके बदले रेलवे बीएमसी को इतनी ही जमीन देगी और इसकी भी इजाजत रेलवे बोर्ड द्वारा मिल चुकी है। इंटरलॉकिंग का काम सितंबर तक पूरा कर लिया जाएगा, जिसके बाद विरार से चर्चगेट की ओर जाने वाली ट्रेनों को प्लैटफॉर्म के बाहर हॉल्ट नहीं करना पड़ेगा।
 
सांताक्रुज से माहिम के बीच 5वीं लाइन बिछाने का काम लगभग पूरा हो चुका है। रेलवे के अनुसार इस हिस्से छोटे-मोटे टेक्निकल काम बाकी है। ये काम पूरा होने के बाद इस पांचवीं लाइन को पीक ऑवर्स में यूज किया जाएगा, जिससे सर्विस समय पर चलाने में काफी मदद मिलेगी। दरअसल पांचवीं लाइन पर भी एक गेट बंद करने का काम है, जिसके कारण रेलवे को विलंब हो रहा है, लेकिन इस काम के लिए भी उपाय ढूंढ लिया गया है और अब इस ट्रैक को भी जल्द ही उपयोग में लाया जाएगा।
 

सीएसटी से अंधेरी तक चलने वाली हार्बर लाइन सर्विस सितंबर तक गोरेगांव तक दौड़ेगी। इस काम को मुंबई रेलवे विकास कॉर्पोरेशन (एमआरवीसी) कर रही है। लेकिन इस से प्रॉजेक्ट में वेस्टर्न रेलवे को अतिरिक्त लाइन मिलेगी, जिस पर धीमी गति की सर्विस को डायवर्ट किया जाएगा। फिलहाल धीमी गति के सर्विस को फास्ट लाइन पर चलाया जाता है, लेकिन इसके कारण दोनों दिशाओं में सेवाएं प्रभावित हो रही है। वेस्टर्न रेलवे को पीक ओवर्स में तकरीबन 10-15 मिनट वास्तविक वक्त से पिछड़ना पड़ रहा है। पिछले कुछ वर्षों में सर्विस की संख्या बढ़कर 1305 कर दी गई है, लंबी दूरी की गाड़ियों का ट्रैफिक भी बढ़ चुका है, लेकिन ट्रैक की स्थिति वही है। इस तरह बोझ बढ़ने के कारण कई स्टेशनों पर बोटल नेक बन चुके हैं, जहां रोजाना कई सर्विस को प्लैटफॉर्म तक भेजने के लिए इंतजार करना पड़ता है। 
'
 वेस्टर्न रेलवे पर उपनगरीय सेवाओं की पाबंदी सुधारने के लिए कुछ मुख्य काम शुरू हो चुके हैं। इसके अलावाअंधेरी में एक बड़ा काम होना बाकी है , जिसे पूरा होने में तकरीबन 2 साल लगेंगे। अंधेरी से बोरिवली की ओरजाने वाली सर्विस को जब फास्ट लाइन से स्लो लाइन पर डायवर्ट किया जाता है , तब उन्हें 15 किमी प्रति घंटाकी गति से चलाना पड़ता है। हम चाहते हैं कि इस गति को बढ़ाकर 30 किमी प्रति घंटा कर दिया जाए। इसकेलिए ट्रैक पर इंटरलॉक और रीले का काम करना है , जिसमें तकरीबन दो साल का वक्त लग सकता है। ' 

Monday, May 19, 2014

सीएम ऑफिस से कोई जवाब नहीं मिल रहा है।

दिवा-सावंतवाड़ी पैसेंजर ट्रेन हादसे के बाद गुरुवार को सीआरएस जांच शुरू हुई, जिसमें हादसे के चश्मदीद लोगों को बुलाया गया। इसी बीच रेलवे और राज्य सरकार के बीच आपातकालीन स्थिति में समन्वय की कमी भी खुलकर सामने आई, जहां सेंट्रल रेलवे के महाप्रबंधक सुनील कुमार सूद ने एक अखबार को स्टेटमेंट देते हुए कहा कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण से पिछले 6 माह से परेशानियों पर बात करने के लिए वक्त मांग रहे हैं, लेकिन सीएम ऑफिस से कोई जवाब नहीं मिल रहा है।
रेलवे की तथाकथित परेशानियों में आपातकालीन स्थितियों में राज्यों के अस्पतालों की व्यवस्था और सड़कों के हालात पर फोकस किया जाना था, इसके अलावा संसाधनों की कमी से जूझ रही रेलवे को किस तरह राज्य सरकार की मदद से उबारा जाए, इस पर चर्चा की जानी थी।

4 मई को नागोठाणे और रोहा के बीच हुई दुर्घटना के तकरीबन 2 घंटे बाद रेलवे की ऐक्सिडेंट रिलीफ मेडिकल वैन (एआरएमवी) घटनास्थल पर पहुंची थी। सेंट्रल रेलवे के पूरे मुंबई डिविजन में केवल एक एआरएमवी है, जो कि कल्याण स्टेशन पर स्थित है। सेंट्रल रेलवे के एक अधिकारी ने पहचान छुपाने की शर्त पर कहा, 'पूरे मुंबई डिविजन में एक एआरएमवी है, जो कि कल्याण स्थित है और 4 मई के दुर्घटना स्थल के सबसे नजदीक वही थी, उसे भी पहुंचने में 2 घंटे लग गए।
इसके अलावा लोनावाला, पुणे और इगतपुरी में एक-एक एआरएमवी उपलब्ध है। आपातकालीन स्थितियों में सड़कों की हालत देखते हुए सबसे जल्दी मेडिकल हेल्प पहुंचाने के लिए केवल एआरएमवी ही एक विकल्प बच जाता है, लेकिन इसकी संख्या बढ़ाने पर ही इसका सही लाभ मिल पाएगा।'
हादसे वाले दिन कल्याण पर मौजूद एआरएमवी हादसे के तकरीबन 40 मिनट बाद चली थी, कंट्रोल रूम से देरी से मिले संदेश को इसका कारण बताया जा रहा है।
'यदि रेलवे द्वारा एआरएमवी को प्रति सौ किलोमीटर के दायरे में भी लगा दिया जाए तो मेडिकल वैन के संचालन के लिए डॉक्टरों की जरूरत होगी, जिन्हें रखने के लिए आवास और अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध करानी होगी।'
 

Thursday, May 15, 2014

मालगाड़ी के 13 डिब्बे और 2 इंजन पुल से गिर गए

छत्तीसगढ़ में संदिग्ध नक्सली वारदात में मालगाड़ी के 13 डिब्बे और 2 इंजन पुल से गिर गए। पुलिस को शक है कि बस्तर जिले में कातलूर व कुमारसोडरा स्टेशन के बीच नक्सलियों ने रेल पुल की फिश प्लेट खोल दी होगी। इस कारण बुधवार सुबह 5 बजे मालगाड़ी के 13 डिब्बे और दो इंजन पुल के नीचे गिर गए। इस घटना से रेल ट्रैफिक रुक गया। 
इस मालगाड़ी से एनएमडीसी का लौह अयस्क ढोया जा रहा था, जिसमें अब रुकावट आ गई है। हालांकि घटना के समय यह मालगाड़ी खाली थी और विशाखापत्तनम से किरणदूल जा रही थी। हालांकि हादसे में किसी को चोट आने की जानकारी नहीं है। घटनास्थल पर पुलिस दल के साथ रिपेयरिंग स्टाफ को भेजा गया है। एक रेल अधिकारी के मुताबिक, रेलवे का जंबो रैक नक्सली गतिविधियों की जद में आ गया। मालगाड़ी में 118 डिब्बे और 6 इंजन लगे थे। बस्तर के एसपी का कहना है कि पूरी जांच के बाद ही घटना की सही वजह सामने आ पाएगी।
 
इससे पहले 29 मार्च को नक्सलियों ने इसी रेल खंड के कमलूर और दंतेवाड़ा स्टेशनों के बीच रेल पटरी उखाड़कर एक मालगाड़ी को पुल के नीचे गिरा दिया था। महज डेढ़ माह के भीतर नक्सलियों ने दूसरी बड़ी वारदात को अंजाम देकर रेलवे को भारी नुकसान पहुंचाया है।
 

स्टेशन पर पानी नहीं

मुंबई जैसे इंटरनैशनल शहर में अत्याधुनिक मेट्रो ट्रेन के मुसाफिरों को मेट्रो स्टेशनों पर न पीने का नसीब है और न ही टॉइलेट्स। लगभग 80 सीढ़ी चढ़कर ऊपर पहुंचने के बाद मोनो स्टेशन पर लगा वॉटर कूलर पानी न पीने की हिदायत वाला पेपर चिपकाए मुंह चिढ़ा रहा है। इन स्टेशन्स पर सामान्य यात्रियों के लिए टॉइलेट ना होने से भी काफी परेशानी हो रही है। मोनो के रेकॉर्ड के मुताबिक रोजाना 2000 से 3000 लोग मोनो रेल से सफर करते हैं। अलावा इसके मोनो रेल स्टेशनों पर काम करने वाले 500 सुरक्षारक्षक भी रोज बिना इन आवश्यक नागरिक सुविधाओं के ड्यूटी कर रहे हैं।
चेंबूर स्टेशन पर तैनात एक अधिकारी ने बताया कि बीएमसी की तरफ से पानी की सप्लाई नहीं हो रही है जिसकी वजह से पीने का पानी तो छोड़िए टॉइलेट्स में भी पानी नहीं आ रहा। इस हालत में मोनो रेल की कर्मचारियों को भी बिना पानी के टॉइलेट्स यूज करना पड़ रहा है।
इस मामले में बीएमसी की तरफ से चीफ हायड्रोलिक्स इंजिनियर रमेश बांबले ने बताया कि मोनो रेल मैनेजमेंट की तरफ से उन्हें इस तरह की कोई शिकायत नहीं मिली है। जहिर दो सरकारी एजेंसियों के आपसी तालमेल का अभाव लोगों के लिए परेशानी बनकर उभरा है।
मोनो रेल के 7 स्टेशन पर काफी संख्या में स्टाफ मौजूद हैं। इनमें महाराष्ट्र सुरक्षा बल, स्कॉमी और अन्य प्राइवेट सुरक्षाकर्मी को मिलाकर हर स्टेशन पर लगभग 100 का स्टाफ हैं। इनमें से बड़ी संख्या में सिक्युरिटी के लोग शामिल हैं। गर्मी के मौसम में बिना पानी के काम कर रहे इन स्टाफ को काफी दिक्कतें हो रही हैं, जबकि मोनो रेल में यात्रा करने वाले यात्रियों को बेसिक सुविधाओं से भी महरूम होना पड़ रहा है। एमएमआरडीए ने मोनो रेल की टाइमिंग बढ़ाकर सुबह 6 से रात 8 बजे तक कर दी है। ऐसे में यात्रियों को लुभाने की कोशिश में लगी एमएमआरडीए लोगों की सुविधाओं पर ध्यान नहीं दे रही है।
मोनो रेल पर मौजूद टॉइलेट केवल गर्भवती महिलाओं के साथ डायबिटिक पेशेंट के लिए हैं। यदि आम लोगों को जरूरत पड़े तो ना जाने वो कहां जाएं, यह तो एमएमआरडीए ही बता सकती है। एक अधिकारी के अनुसार, हमारे लिए भी जो टॉइलेट हैं, उसमें भी पानी नहीं है।
देश की पहली मोनो रेल पहले से ही घाटे में चल रही है। फिलहाल इसका पहला फेज ही चालू किया गया है। मोनो स्टेशन तक पहुंचने में लोगों को कनेक्टिविटी की काफी दिक्कत होती है। अभी फिलहाल जिस रूट पर मोनो चल रही है, उस पर ज्यादा तर तो लोग घूमने के लिए ही यात्रा कर रहे हैं।
वॉटर कूलर बंद पड़ा है।
यात्री -अरे भाई, पानी पीना है। यहां तो पानी नहीं है। बच्चे परेशान हैं।
कर्मचारी -तो हम क्या करें। पानी साथ लेकर आना चाहिए। जाकर बाहर से पी लो।
यात्री -बच्चे परेशान हैं। टॉइलेट की सुविधा भी नहीं है।
कर्मचारी -इसके लिए हम कुछ नहीं कर सकते। सारे स्टेशन पर पानी नहीं है। जाकर चेंबूर में देख लो, होगा तो मिल जाएगा।
यात्री -भाई साहब, पानी नहीं है। काफी दिक्कत हो रही है।
कर्मचारी -अरे यार, आपको कहां से मिलेगा, हमें तो मिल ही नहीं रहा है। बीएमसी पानी नहीं दे रही है। हम लोगों को भी काफी परेशानी हो रही है। टॉइलेट तक में पानी नहीं है।
हमें अभी तक पानी ना मिलने की कोई शिकायत नहीं मिली है। यदि ऐसी कोई शिकायत आएगी, तो हम उस पर कार्रवाई करेंगे।
हम पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं। यदि ऐसा कुछ है तो उसे हल किया जाएगा।
पानी क्यों नहीं आ रहा है, यह हम देख रहे हैं। टॉइलेट तो नहीं है। हां, इमर्जेंसी में लोग स्टाफ टॉइलेट्स का उपयोग कर सकते हैं।

Monday, May 12, 2014

कई महीने से अपराधी लूटपाट, स्नेचिंग और लूट के लिए हत्या की वारदात को अंजाम दे रहे थे

हिसार रेलवे स्टेशन पर रेल यात्रियों, रेल कर्मचारियों और राहगीरों को लूटने की 25 वारदात को अंजाम देने वाले गैंग के सरगना और उसके एक साथी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पिछले कई महीने से अपराधी लूटपाट, स्नेचिंग और लूट के लिए हत्या की वारदात को अंजाम दे रहे थे। 4 महीने में लूटपाट और छीना-झपटी की 25 से अधिक वारदात हुई हैं। इन दोनों आरोपियों को हिसार रेलवे स्टेशन पर 4 मई को ईश्वर नामक एक व्यक्ति की हत्या करने के आरोप में पुलिस ने गिरफ्तार किया। 
पुलिस ने जब इन दोनों अपराधियों से पूछताछ की तो दोनों ने पिछले 4 महीनों में 25 से अधिक वारदात कबूल कर ली। अरेस्ट किए गए दोनों आरोपियों के नाम पंकज और सूरज हैं 
आरोपियों ने बताया कि रात को रेलवे रोड पर अकेले किसी रेलवे कर्मी या राहगीर से वारदात की जाती थी। लूटपाट के बाद सभी अपने-अपने घर चले जाते थे। सुबह सभी रेलवे स्टेशन परिसर में तफरी करते थे। किसी को यह अनुमान नहीं था कि यही युवक रात को वारदात करते रहे हैं। कहने को पंकज एक परचून की दुकान पर काम करता था और सूरज बाजार में नौकरी करता था, पर 4-5 महीने में वह गिरोह बनाकर वारदात करने में सक्रिय हो गए। 
डीएसपी ने बताया कि घटना के दिन मीरान ढाणी का ईश्वर उर्फ इस्सर रेलवे स्टेशन पर टहलने आया था। पंकज ने उससे बीड़ी मांगी। जिस पर ईश्वर झल्ला गया। पंकज ने उसे भड़कने से रोका तो मामूली झगड़ा हो गया। ईश्वर का पीछा करते पंकज और सूरज बाहर रेलवे रोड पर आ गए। वहां पंकज ने चाकू निकाल कर ईश्वर के पेट में घोंप दिया। गले पर घूंसा मारते हुए चाकू हाथ में होने के कारण गला कट गया। दोनों आरोपी मौके से फरार हो गए थे। 
पंकज व सूरज ने पुलिस को बताया कि वारदात के बाद वे घर चले गए थे। अगले दिन सुबह 9 बजे स्टेशन पर पहुंचे तो पता चला कि रात को उक्त व्यक्ति की मौत हो गई। पता चलते ही दोनों ने 5-6 हजार रुपये उधार लिए और भिवानी होते हुए दिल्ली चले गए। मोबाइल ट्रेस करते हुए पुलिस की टीम ने हिसार स्टेशन पर दोनों को दबोच लिया गया। 

Thursday, May 8, 2014

मॉनसून पूर्व नालों की सफाई में सेंट्रल रेलवे पिछड़ती जा रही है

मॉनसून पूर्व नालों की सफाई में सेंट्रल रेलवे पिछड़ती जा रही है। कुछ वक्त पहले नालों की सफाई का जायजा लेने पहुंचे बीएमसी अधिकारियों ने इस बात का खुलासा किया। बीएमसी कमिश्नर सीताराम कुंटे ने अपने दौरे में पाया कि रेलवे के अधिकार क्षेत्र में आनेवाले नालों की सफाई बेहद धीमी गति से चल रही है। कुंटे ने इसके बाद रेलवे प्रशासन को सफाई की गति बढ़ाने आदेश दिया है।
पूर्व उपनगर में सायन, कुर्ला, विद्याविहार, घाटकोपर, भांडुप, मुलुंड रेलवे स्टेशनों की हद में कई बड़े नाले आते हैं। पटरियों के नीचे से नाले निकाले गए हैं, जिनके माध्यम से बारिश का पानी बड़े नालों में छोड़ा जाता है। हालांकि, ये नाले पूरी तरह कचरों से भरे हुए हैं। ऐसे में बारिश हो जाती है, तो पानी बाहर निकालने का रास्ता ही नहीं रह जाएगा, नतीजन हर साल की तरह इस बार भी रेलवे पटरियां पानी में डूबी होंगी। कुंटे पिछले हफ्ते पूर्वी उपनगर में स्थित नालों की सफाई का निरीक्षण करने पहुंचे थे।
रेलवे कल्वर्ट की सफाई काफी धीमी पाकर कमिश्नर ने कहा कि यदि मॉनसून के पहले सफाई पूरी नहीं होती तो आसपास के इलाकों में पानी भरने की संभावनाएं बढ़ जाएंगी। बीएमसी ने रेलवे की हद में मौजूद नालों की सफाई के लिए 2 करोड़ रुपये दिया है। बीएमसी स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज डिपार्टमेंट की ओर से मिली जानकारी के अनुसार, नालों की सफाई करीब 45 फीसदी पूरी हो चुकी है। वहीं, 2005 में मुंबई में बाढ़ का कारण बनी मीठी नदी की सफाई करीब 45 फीसदी पूरी की जा चुकी है।
 

Monday, May 5, 2014

कम से कम 19 यात्रियों की मौत हो गई और 100 से ज्यादा लोग घायल हुए

महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में कोंकण रेल खंड पर एक पैसेंजर ट्रेन के पटरी से उतर जाने से कम से कम 19 यात्रियों की मौत हो गई और 100 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। हादसा नीदी गांव के पास एक सुरंग के ठीक बाहर उस समय हुआ, जब दिवा-सावंतवाडी ट्रेन का इंजन और उसके चार डिब्बे नगोथाने और रोहा रेलवे स्टेशनों के बीच पटरी से उतर गए। हादसा सुबह करीब 10 बजे हुआ।
रायगढ़ पुलिस के मुताबिक, राहत अभियान जारी है और बचावकर्मी डिब्बों में फंसे लोगों को बाहर निकालने का प्रयास कर रहे हैं। अधिकारियों ने रेल हादसे में 19 यात्रियों की मौत की पुष्टि की है। पुलिस के अनुसार, शवों को नागोथने प्राथमिक स्वास्थ केंद्र में पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया है। कुछ शवों को सरकारी अस्पताल ले जाया गया। पुलिस ने बताया कि घायल यात्रियों को इलाज के लिए रोहा भेजा गया है।
रेल मंत्री मल्लिकार्जुन खड़गे ने हादसे में मारे जाने वालों के लिए दो लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा की है। गंभीर रूप से घायल लोगों को 50 हजार रुपये और मामूली रूप से जख्मी व्यक्ति को 10,000 हजार रुपये दिए जाएंगे।
इस हादसे के बाद कोंकण रेलखंड पर रेल सेवाओं को निलंबित कर दिया गया। पिछले महीने भी इस मार्ग पर एक मालगाड़ी पटरी से उतर गई थी। रेल विभाग ने इस हादसे की जांच के आदेश दे दिए हैं। रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष अरूणेंद्र कुमार ने कहा कि आयुक्त (रेल सुरक्षा) चेतन बक्शी इस घटना की जांच करेंगे।

कैबिनेट के अधिकार क्षेत्र की उपेक्षा कर अधिकारियों को प्रमोट करते पाए गए

रेलवे बोर्ड में दो सचिवालय संबंधी सेवाओं में प्रमोशन में बड़ी अनियमितता सामने आई है। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि रेल मंत्रालय के कुछ अधिकारी रेलवे की दो कम जानी पहचानी सेवाओं- रेलवे बोर्ड सचिवालय सेवा (आरबीएसएस) और रेलवे बोर्ड सचिवालय लिपिकीय सेवा (आरबीएससीएस) में उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना और कैबिनेट के अधिकार क्षेत्र की उपेक्षा कर अधिकारियों को प्रमोट करते पाए गए हैं।
उन्होंने कहा कि अधिकारियों को सेवा के न्यूनतम 16 साल के अनुभव के मानक को पूरा किए बिना इंडियन रेलवे सर्विस ऑफ मैकेनिकल इंजिनियर (आईआरएसएमई), इंडियन रेलवे पर्सनल सर्विस (आईआरपीएस) और यहां तक कि आईएएस जैसी ग्रुप '' की रेलवे सेवाओं की उपेक्षा कर उच्च प्रशासनिक ग्रेड (एचएजी) और वरिष्ठ प्रशासनिक ग्रेड (एसएजी) में प्रमोट किया जा रहा है। एचएजी और एसएजी को क्रमश: एक अतिरिक्त सचिव और संयुक्त सचिव स्तर का अधिकारी दिया जाता है।
सूत्रों ने बताया कि वर्तमान में सामान्य तौर पर केंद्रीय सचिवालय सेवा (सीएसएस) से ताल्लुक रखने वाले किसी अधिकारी को सेवा के 23 साल पूरे करने के बाद, ग्रुप '' के रेलवे सेवा अधिकारी को सेवा के 23 साल बाद और आईएएस अधिकारी को सेवा के 20 साल बाद एसएजी दिया जाता है। उन्होंने कहा कि आरबीएसएस में कई अधिकारियों को आवश्यक जरूरतों को पूरा किए बिना एसएजी ग्रेड दिया जा रहा है, जबकि उन्हें ग्रुप 'बी' सेवा में भर्ती किया गया था। इसे एक 'गंभीर गलती' करार देते हुए वित्त मंत्रालय ने हाल में रेलवे को लिखा है कि वह इन अधिकारियों को प्रमोट करने के अपने फैसले को रद्द करे, जिसके लिए लगभग एक साल पहले आदेश जारी किए गए थे।
वित्त मंत्रालय के तहत व्यय विभाग ने उल्लेख किया कि 'आरबीएसएस और आरबीएससीएस के कैडर का पुर्नगठन करते समय रेल मंत्रालय ने मामला स्वीकृति के लिए इस विभाग को नहीं भेजा और उल्टे मंत्रिमंडल की मंजूरी के बिना एसएजी स्तर के पांच अतिरिक्त पद सृजित कर दिए।' इसने रेलवे को लिखे कड़े शब्दों वाले आधिकारिक पत्र में कहा, 'यह निर्णय लेने वाले प्राधिकारी के समक्ष तथ्यात्मक स्थिति और नियम एवं शर्त रखने के जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से एक गंभीर खामी है।' नियमों के मुताबिक, एसएजी स्तर से नीचे के पद सृजित करने के लिए वित्त मंत्री और स्तर से उपर के संयुक्त सचिव तथा अन्य पद सृजित करने के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी आवश्यक होती है।
संदेश में कहा गया, 'यह उल्लेख करना उपयुक्त होगा कि कैडर समीक्षा में वित्तीय जटिलताएं होती हैं, जिसके लिए व्यय विभाग (डीओई) से सहमति लेना आवश्यक होता है। रेलवे बोर्ड को पूर्व में भी इस बारे में अवगत कराया जा चुका है।' डीओई ने दूसरे उदाहरण का जिक्र किया, जिसमें रेलवे बोर्ड ने रेल मंत्रालय में ग्रुप 'सी' और ग्रुप 'डी' कर्मियों के इन-हाउस कैडर पुनर्गठन की प्रक्रिया के लिए इसकी सहमति मांगी है। संदेश में कहा गया है कि तब ग्रुप 'सी' कर्मियों के इन-हाउस कैडर पुनर्गठन की मंजूरी देते हुए, 'रेल मंत्रालय को स्पष्ट रूप से कहा गया था कि ग्रुप '' और ग्रुप 'बी' सेवाओं की कैडर समीक्षा लगातार इस मंत्रालय को भेजी जाती रहे।'
गौरतलब है कि आरबीएसएस और आरबीएससीएस के ये अधिकारी रेलवे में ग्रुप '' के कैडर प्रबंधन के लिए जिम्मेदार हैं। आरबीएसएस और आरबीएससीएस कर्मी, जिनकी संख्या करीब 500 है, रेल मंत्रालय में सामान्य प्रशासन स्टाफ के रूप में काम करते हैं।

Friday, May 2, 2014

कुछ लोगों को रेलगाड़ी से दूर भागते देखा था

चेन्नै सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर गुरुवार को हुए धमाकों के बारे में एक प्रत्यक्षदर्शी का कहना है कि उसने कुछ लोगों को रेलगाड़ी से दूर भागते देखा था, जिसके बाद उसे अंदेशा हो गया था कि कुछ गड़बड़ है।
प्रत्यक्षदर्शी ने कहा, 'विस्फोट की आवाज बहुत तेज नहीं थी। हमने कुछ लोगों को रेलगाड़ी से दूर भागते देखा, जिसके बाद हमें अंदेशा हो गया था कि कुछ गड़बड़ है।' उसने बताया कि रेल के डिब्बों को बहुत नुकसान नहीं पहुंचा है, केवल एक सीट क्षतिग्रस्त हुई है। रेल के डिब्बे के भीतर एक यात्री का सामान बिखरा पड़ा था। बाद में पुलिस ने आसपास के क्षेत्र को घेर लिया।
चेन्नै रेलवे स्टेशन पर बेंगलुरु-गुवाहाटी रेलगाड़ी के दो डिब्बों में गुरुवार को हुए दो विस्फोटों में एक युवती की मौत हो गई, जबकि 11 घायल हो गए। विस्फोट रेलगाड़ी के रेलवे स्टेशन पर पहुंचने के 10 मिनट के भीतर हुए।

सीएसटी रेल्वे स्टेशन पर बुधवार रात तीन ट्रेनों के कुछ डिब्बों में आग

गुरुवार को चेन्नै में टि्वन बम ब्लॉस्ट और सीएसटी रेल्वे स्टेशन पर बुधवार रात तीन ट्रेनों के कुछ डिब्बों में आग लगने के बाद मुंबई पुलिस ने शहर की सुरक्षा और कड़ी कर दी है। मुंबई पुलिस के प्रवक्ता डीसीपी डा. महेश पाटील ने पत्रकारों को बताया कि हालांकि इन दो घटनाओं को एकसाथ देखना फिलहाल जल्दबाजी होगा, लेकिन पुलिस कोई कमी नहीं छोड़ना चाहती।
चेन्नै बम ब्लॉस्ट में एक महिला की मौत हो गई है और कुछ पैसेंजर घायल हुए हैं। मुंबई के सीएसटी स्टेशन पर बुधवार को डेक्कन क्वीन, सहयाद्रि एक्सप्रेस और हावडा मेल में कुछ कोच में आग लग जाने से सनसनी फैल गई थी।
उन्होंने बताया कि पुलिस ने शहर की अन्य सरकारी धर-पकड़ एजेंसियों- नेवी, रेल्वे पुलिस, कस्टम, हवाईअड्डा प्रॉधिकरण आदि के साथ मिलकर शहर की सुरक्षा व्यवस्था पर ताजा विचार-विमर्श किया और सबको अलर्ट रहने को कहा है।

गौरतलब है कि पुलिस ने इस काम के लिए नैशनल कॉउंटर टेररिजम सेंटर (एनसीटीसी) की सहायता भी ली है और इसकी सहायता से शहर के संवेदनशील जगहों पर व्याप्त खामियों पर निगाह रखी जाएगी।
चेन्नै की घटना के बाद केंद्रीय वित्त मंत्री ने सुरक्षा से संबंधित अनेक अधिकारियों से बातचीत कर अलर्ट रहने को कहा है। मुंबई हमेशा से आतंकियों के हमलों का केंद्र रहा है, क्योंकि यह इंडिया की कॉर्पोरेट, फाइनैंशल और कमर्शल कैपिटल भी है।
हालांकि सूत्रों के अनुसार, पुलिस को किसी हमले या विस्फोट की आशंका की कोई धमकी मिलने की जानकारी नहीं मिली है, लेकिन पुलिस डिपार्टमेंट ने सरकार से पूरे शहर में सीसीटीवी कैमरे लगाने पर जोर-शोर से काम करने को कहा है। रेल्वे स्टेशनों पर भी इंटीग्रेटेड सिक्युरिटी सिस्टम लगवाना भी उनकी योजना में शामिल मद है। इस समय पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के पास स्निफर डॉग्स भी पर्याप्त संख्या में नहीं है और एयरपोर्ट पर तैनात कस्टम डिपार्टमेंट ने इस कमी की और सरकार का ध्यान कई बार खींचा है।
गौरतलब है कि हाल ही में मुंबई पुलिस ने खुलासा किया था कि कुछ आतंकियों ने अपने टार्गेट के लिए मेक्डोनेल स्टोर्स, खासकर अंधेरी वेस्ट स्थित के दो आउटलैटों की रेकी की थी। इन आउटलैटों पर भारी संख्या में युवा वर्ग आता है जिसमें विदेशी कस्टमर भी होते हैं।
बीएमसी ने भी मेक्डोनेल आउटलैट मैनेजमेंट को अपनी सुरक्षा व्यवस्था और किचन में काम आने वाले गैस सिलिंडरों के स्टोर्स करने के सिस्टम को पूल प्रूफ करने को कहा है। इनके अलावा, मार्केट, मॉल, डिपार्टमेंटल स्टोर्स, मूवी हॉल, आदि पर भी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए संबंधित एजेंसियों को कहा गया है।

Thursday, May 1, 2014

जांच एजेंसियों के हाथ लगे दो संदिग्धों और कुछ अहम सुराग

चेन्नै सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर गुरुवार सुबह गुवाहाटी-बेंगलुरु एक्सप्रेस के दो डिब्बों में ब्लास्ट बेहद सुनियोजित तरीके से स्टेशन पर ही बम प्लांट कर किए गए थे और तीन से चार लोगों की टीम ने इसे अंजाम दिया था? जांच एजेंसियों के हाथ लगे दो संदिग्धों और कुछ अहम सुराग से यही निकलकर सामने आ रहा है। हालांकि अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
जांच एजेंसियों ने इस मामले में दो संदिग्धों को हिरासत में लिया है। इसमें से एक को ट्रेन से ही दबोचा गया। वह ब्लास्ट वाली ट्रेन में ही छिपा बैठा था। उससे पूछताछ के बाद दूसरे शख्स को एयरपोर्ट के रास्ते से दबोचा गया। जांच एजेंसियां को इस ब्लास्ट में तीन से चार लोगों के शामिल होने का शक है।
 
इसके अलावा पुलिस को रेलवे स्टेशन से एक संदिग्ध बैग मिला है। इसमें पाइप बम बनाने का सामान रखा था। इससे जांच एजेंसियां इस नतीजे पर पहुंच रही हैं कि दोनों बमों को स्टेशन पर ही ट्रेन में प्लांट किया गया था। इसकी वजह यह भी है कि किसी भी यात्री ने सीट के नीचे संदिग्ध वस्तु होने का जिक्र नहीं किया है।
जांच एजेंसिया मान रही हैं कि तीन से चार लोगों की टीम ने बेहद जल्दबाजी में बम को सीट के नीचे फिट किया। इसके बाद सभी अलग-अलग दिशा में भाग गए। खुफिया एजेंसिया अब इसकी जांच कर रही हैं कि क्या ये दोनों ब्लास्ट पाइप बम से किए गए हैं। गौरतलब है कि इससे पहले भी पाइप बम से धमाकों को अंजाम दिया जा चुका है।