सेंट्रल रेलवे के
सबसे जरूरी प्रॉजेक्ट्स में से एक परेल टर्मिनस की राह आसान हो गई है। एमयूटीपी -2 के तहत बनाए
जाने वाले इसे प्रॉजेक्ट के लिए एसएफए (सब्सिडियरी फाइनैंस अग्रीमेंट) को क्लीयर
कर दिया गया है, इससे टर्मिनस बनाने की योजना को गति मिलेगी।
सेंट्रल ने एमआरवीसी (मुंबई रेल विकास कॉर्पोरेशन)साथ मिलकर एमयूटीपी -2 (5वी-6वीं लाइन) के तहत परेल में टर्मिनस बनाने की
योजना बनाई है। इस प्रॉजेक्ट के लिए पहले राज्य सरकार ने फंडिंग रोक दी थी।
राज्य सरकार के अनुसार आरएलडीए (रेल लैंड डिवेलपमेंट अथॉरिटी) के द्वारा की जाने वाले देरी की वजह से बांद्रा लैंड के विकास का काम अटका हुआ है। एमआरवीसी के सूत्रों के अनुसार एसएफए को चीफ मिनिस्टर का क्लीयरेंस मिल जाने के बाद एमयूटीपी -2 को तहत किए जा रहे कार्यों को गति मिलेगी।
एमआरवीसी के अनुसार राज्य सरकार की तरफ से 270 करोड़ रुपये रिलीज नहीं किए जा रहे थे। इस अग्रीमेंट के अनुसार राज्य सरकार द्वारा एमयूटीपी-2 का अपना हिस्सा जारी करती रहेगी और जब बांद्रा लैंड का निबटारा होगा तब संबधित राशि राज्य सरकार को रिफंड कर दी जाएगी। बहरहाल अग्रीमेंट क्लीयर होने के बावजूद हार्बर लाइन पर 12 डिब्बे का रैक चलाने से संबंधित एसएफए अभी राज्य सरकार के पास विचाराधीन हैं।
राज्य सरकार के अनुसार आरएलडीए (रेल लैंड डिवेलपमेंट अथॉरिटी) के द्वारा की जाने वाले देरी की वजह से बांद्रा लैंड के विकास का काम अटका हुआ है। एमआरवीसी के सूत्रों के अनुसार एसएफए को चीफ मिनिस्टर का क्लीयरेंस मिल जाने के बाद एमयूटीपी -2 को तहत किए जा रहे कार्यों को गति मिलेगी।
एमआरवीसी के अनुसार राज्य सरकार की तरफ से 270 करोड़ रुपये रिलीज नहीं किए जा रहे थे। इस अग्रीमेंट के अनुसार राज्य सरकार द्वारा एमयूटीपी-2 का अपना हिस्सा जारी करती रहेगी और जब बांद्रा लैंड का निबटारा होगा तब संबधित राशि राज्य सरकार को रिफंड कर दी जाएगी। बहरहाल अग्रीमेंट क्लीयर होने के बावजूद हार्बर लाइन पर 12 डिब्बे का रैक चलाने से संबंधित एसएफए अभी राज्य सरकार के पास विचाराधीन हैं।

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