Monday, February 28, 2011

ट्रेन की पटरी से चार सिरविहीन क्षत-विक्षत शव बरामद


उत्तर प्रदेश में कौशाम्बी जिले के सैनी क्षेत्र में आज ट्रेन की पटरी से चार सिरविहीन क्षत-विक्षत शव बरामद किये गए। पुलिस सूत्रों ने बया कि घुमाई गांव में ट्रेन की पटरी पर करीब 38 वर्षीय एक महिला, लगभग 42 साल के एक पुरुष तथा 10 एवं 12 वर्ष की दो लड़कियों के शव बरामद किए गए हैं। इन सिरविहीन शवों की शिनाख्त नहीं हो सकी है। माना जा रहा है कि इन लोगों की मृत्यु कल रात किसी ट्रेन की चपेट में आने से हुई है। हालांकि, इलाके में तलाश के बावजूद एक भी शव का सिर नहीं मिलने से पुलिस को शक है कि उन लोगों की हत्या करके शवों को रेल की पटरी पर डाल दिया गया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

Friday, February 25, 2011

रेल बजट में यात्री किरायों में कोई बढ़ोतरी नहीं

रेल मंत्री ममता बनर्जी ने रेल बजट में यात्री किरायों में कोई बढ़ोतरी नहीं की। इसके साथ ही उन्होंने पिछले साल शुरू की गई दुरंतो ट्रेनों का विस्तार करते हुए 9 नई दुरंतो, तीन शताब्दी, दो डबल डेकर एसी और 56 नई एक्सप्रेस ट्रेनों का ऐलान किया। लोकसभा में रेल बजट पेश करते हुए ममता ने कहा कि इलाहाबाद से मुंबई के बीच हफ्ते में दो बार एसी दुरंतो चलाई जाएगी। उन्होंने पुणे से अहमदाबाद, सिकंदराबाद से विशाखापट्टनम, मदुरै से चेन्नै, चेन्नै से तिरुवनंतपुरम, मुंबई से नई दिल्ली और शालीमार से पटना के बीच भी एसी दुरंतो गाड़ियां चलाने का ऐलान किया। रेल मंत्री ने सियालदह से पुरी और निजामुद्दीन से अजमेर के बीच नॉन एसी दुरंतो ट्रेनें चलाने की भी घोषणा की। दुरंतो ट्रेनें नॉन स्टॉप चलती हैं। उन्होंने जयपुर से दिल्ली और अहमदाबाद से मुंबई के बीच एसी डबल डेकर ट्रेनें शुरू करने का भी प्रस्ताव किया। इसके अलावा पुणे-सिकंदराबाद, जयपुर-आगरा और लुधियाना-दिल्ली तीन नई शताब्दी ट्रेनें चलाने की भी घोषणा की। ममता ने कुछ दुरंतो ट्रेनों के फेरों में बढ़ोतरी का जिक्र करते हुए बताया कि मुंबई से हावडा के बीच दुरंतो ट्रेन दो की बजाय हफ्ते में चार दिन चलेगी। मुंबई से अहमदाबाद के बीच दुरंतो तीन दिन की बजाय अब हफ्ते में हर दिन चलेगी। सियालदह से नई दिल्ली के बीच दुरंतो गाड़ी अब दो दिन की बजाय पांच दिन चलेगी। नागपुर से मुंबई के बीच दुरंतो गाड़ी तीन दिन की बजाय हफ्ते में हर दिन चलेगी। हावडा से यशवंतपुर के बीच दुरंतो ट्रेन चार दिन की बजाय अब हफ्ते में पांच दिन चलेगी। 56 नई एक्सप्रेस ट्रेनें: 1. रायबरेली-जौनपुर एक्सप्रेस (दैनिक) 2. तिरुपति-अमरावती एक्सप्रेस (सप्ताह में दो दिन) अकोला-निजामाबाद-गूत्ती-धर्मावरम के रास्ते 3. आसनसोल-गोरखपुर एक्सप्रेस (साप्ताहिक) छपरा-सिवान के रास्ते 4. नागपुर-कोल्हापुर एक्सप्रेस (सप्ताह में दो दिन) कुर्दुवाडी-लातूर रोड-पूर्णा-अकोला के रास्ते 5. मालदा टाऊन-दीघा एक्सप्रेस (साप्ताहिक) रामपुरहाट के रास्ते 6. पुणे-नांदेड़ एक्सप्रेस (साप्ताहिक) लातूर के रास्ते 7. विशाखापत्तनम-कोरापुट इंटरसिटी एक्सप्रेस (सप्ताह में 5 दिन) विजयनगरम के रास्ते 8. हावड़ा-सिकंदराबाद एक्सप्रेस (साप्ताहिक) खड़गपुर के रास्ते 9. मुंबई-चंडीगढ़ एक्सप्रेस (साप्ताहिक) के रास्ते 10. बर्द्धमान-रामपुरहाट एक्सप्रेस (सप्ताह में तीन दिन) 11. बीकानेर-दिल्ली सुपरफास्ट (दैनिक) रतनगढ़ के रास्ते 12. हैदराबाद-दरभंगा एक्सप्रेस (साप्ताहिक) मूरी-के रास्ते 13. हावड़ा-तिरुपति एक्सप्रेस (साप्ताहिक) 14. नरसापुर-नागरसोल एक्सप्रेस (सप्ताह में दो दिन) सिकंदराबाद-निजामाबाद के रास्ते 15. पुरी-शालीमार एक्सप्रेस (साप्ताहिक) 16. रांची-पुणे (सप्ताह में दो दिन) बिलासपुर के रास्ते 17. शालीमार-उदयपुर एक्सप्रेस (साप्ताहिक) कटनी-कोटा के रास्ते 18. चेन्नै-शिर्डी एक्सप्रेस (साप्ताहिक) बेंगलुरु के रास्ते 19. कोयंबटूर-तूतीकोरिन लिंक एक्सप्रेस (दैनिक) 20. हावड़ा-मैसूर एक्सप्रेस (साप्ताहिक) गोन्दिया-अदिलाबाद के रास्ते 21. यशवंतपुर-मैसूर एक्सप्रेस (दैनिक) 22. दीघा-विशाखापत्तनम एक्सप्रेस (साप्ताहिक) 23. मैसूर-चेन्नै एक्सप्रेस (साप्ताहिक) 24. अहमदाबाद-यशवंतपुर एसी एक्सप्रेस (साप्ताहिक) हुबली-बिजापुर के रास्ते 25. भावनगर-कोचुवेल्लि एक्सप्रेस (साप्ताहिक) पनवेल-मडगांव के रास्ते 26. गोरखपुर-यशवंतपुर एक्सप्रेस (साप्ताहिक) फैजाबाद-कानपुर-भोपाल-काचेगुडा के रास्ते 27. भुग-दादर एक्सप्रेस (सप्ताह में दो दिन) 28. कोलकाता-अजमेर एक्सप्रेस (साप्ताहिक) आसनसोल के रास्ते 29. जबलपुर-इंदौर इंटरसिटी एक्सप्रेस (सप्ताह में तीन दिन) गुना-बीना के रास्ते 30. पोरबंदर-कोचुवेल्लि एक्सप्रेस (साप्ताहिक) पनवेल-मडगांव के रास्ते 31. कोलकाता-आगरा एक्सप्रेस (साप्ताहिक) कासगंज-मथुरा के रास्ते 32. लखनऊ-भोपाल एक्सप्रेस (साप्ताहिक) 33. वाराणसी-सिंगरौली इंटरसिटी एक्सप्रेस (दैनिक) 34. नागपरु-भुसावल एक्सप्रेस (सप्ताह में तीन दिन) इटारसी-खंडवा के रास्ते 35. पूरी-गांधीधाम एक्सप्रेस (साप्ताहिक) दुर्ग के रास्ते 36. हावड़ा-विशाखापत्तनम एक्सप्रेस (साप्ताहिक) 37. गुवाहाटी-दीमापुर एक्सप्रेस (दैनिक) 38. हावड़ा-दरभंगा एक्सप्रेस (साप्ताहिक) 39. वास्को-वेलंकनी एक्सप्रेस (साप्ताहिक) 40. बिलासपुर-एर्णाकुलम सुपरफास्ट (साप्ताहिक) 41. दीघा-पुरी एक्सप्रेस (साप्ताहिक) 42. जोधपुर-दिल्ली एक्सप्रेस (सप्ताह में दो दिन) डेगाना-रतनगढ़ के रास्ते 43. खड़गपुर-विल्लुपुरम एक्सप्रेस (साप्ताहिक) वेल्लोर के रास्ते 44. उदयपुर-बांद्रा (ट) एक्सप्रेस (साप्ताहिक) रतलाम के रास्ते 45. पुरूलिया-विल्लुपुरम एक्सप्रेस (साप्ताहिक) मिदनापुर-खड़गपुर-वेल्लौर के रास्ते 46. आसनसोल-गोण्डा एक्सप्रेस (साप्ताहिक) छपरा-मऊ-शाहगंज अयोध्या के रास्ते 47. दिल्ली-पुडुचेरी एक्सप्रेस (साप्ताहिक) 48. आसनसोल-टाटानगर एक्सप्रेस (सप्ताह में तीन दिन) पुरूलिया के रास्ते 49. इंदौर-कोटा इंटरसिटी एक्सप्रेस (दैनिक) रूथियाई के रास्ते 50. भागलपुर-अजमेर एक्सप्रेस (साप्ताहिक) 51. हावड़ा-जैसलमेर एक्सप्रेस (साप्ताहिक) रायबरेली-रतनगढ़-लालगढ़ के रास्ते 52. एर्णाकुलम-बेंगलुरू एक्सप्रेस (साप्ताहिक) 53. मंगलोर-पालघाट इंटरसिटी एक्सप्रेस (दैनिक) 54. वाराणसी-अहमदाबाद एक्सप्रेस (साप्ताहिक) अजमेर के रास्ते 55. हावड़ा-नांदेड़ एक्सप्रेस (साप्ताहिक) 56. हरिद्वार-रामनगर लिंक एक्सप्रेस (सप्ताह में तीन दिन) ( नोटः बोल्ड की गई ट्रेनें पश्चिम बंगाल से हैं) जिनका रूट बढ़ाः उदयपुर-ग्वालियर एक्सप्रेस को दिल्ली तक, चंडीगढ़-जयपुर गरीबरथ एक्सप्रेस को अजमेर तक, इलाहाबाद-लखनऊ एक्सप्रेस को विंध्याचल तक, इंदौर-अजमेर एक्सप्रेस को जयपुर तक, वलसाड-वड़ोदरा एक्सप्रेस को दाहोद तक, सुल्तानपुर-अजमेर एक्सप्रेस को अहमदाबाद तक, अजमेर-किशनगंज एक्सपेस को न्यू जल्पाईगुडी तक, लखनऊ-भोपाल एक्सप्रेस को प्रतापगढ़ तक बढ़ाया गया है। जिनके फेरे बढ़ेः नई दिल्ली-अजमेर शताब्दी एक्सप्रेस को छह दिन से बढ़ाकर हफ्ते में हर दिन, निजामुद्दीन-देहरादून एसी एक्सप्रेस को सप्ताह में छह दिन से बढ़ाकर रोजाना, बेंगलुरु-हुबली जन शताब्दी को छह दिन की बजाय रोजाना, हबीबगंज-जबलपुर जनशताब्दी को छह दिन की बजाय रोजाना, मुंबई-मंगलौर एक्सप्रेस को तीन दिन से बढ़ाकर दैनिक किया गया। छुट्टियों, त्योहारों और कुंभ सहित विभिन्न मेलों के दौरान होने वाली यात्रियों की भीड़ के मद्देनजर रेलवे ने पूरे साल 40 हजार अतिरिक्त फेरे लगाने की योजना बनाई है। कविगुरु और विवेक एक्सप्रेसः स्वामी विवेकानंद के जन्मदिन की 150वीं वर्षगांठ के मौके पर ममता ने चार विवेक एक्सप्रेस ट्रेनें और गुरु रविंद्रनाथ टैगोर की 150वीं वर्षगांठ के मौके पर चार कविगुरु एक्सप्रेस चलाने का ऐलान किया। विवेक एक्सप्रेस ट्रेनें डिब्रूगढ से कन्याकुमारी, द्वारका से तूतीकोरिन, हावडा से मंगलौर और बांदा से जम्मूतवी के लिए चलेंगी। कविगुरु एक्सप्रेस हावडा से अजीमगंज, गुवाहाटी से जयपुर, हावडा से बोलपुर और हावडा से पोरबंदर के बीच चलेंगी। राज्यरानी एक्सप्रेसः ममता ने विभिन्न राज्यों के अहम शहरों को उनकी राजधानी से जोड़ने वाली दस राज्यरानी एक्सप्रेस ट्रेनें चलाने की भी घोषणा की। ये ट्रेनें सावंतवाडी रोड से मुंबई, सहरसा से पटना इंटरसिटी, मेरठ से लखनऊ इंटरसिटी, मैसूर से बंगलुरु, दमोह से भोपाल, सिलघट से धुबडी, बांकुरा से हावडा, नीलाम्बुर रोड से तिरुवनंतपुरम, से भुवनेश्वर और मनमाड से मुंबई के बीच चलेंगी। चार जन्मभूमि गौरव ट्रेनें: ये ट्रेनें हावडा से बोलपुर, राजगीर, पटना, वाराणसी, गया से वापस हावडा, बेंगलुरु, मैसूर, हासन, हुबली, बीजापुर से वापस बेंगलुरु, मुंबई, अहमदाबाद, भावनगर, गिर, दीव, सोमनाथ, राजकोट से वापस मुंबई तथा चेन्नै, पुडुचेरी, तिरुचिरापल्ली, मदुरै, तिरुवनंतपुरम, एर्णाकुलम से वापस चेन्नै के लिए होंगी। 13 नई पैसेंजर ट्रेनें: जिन रूट्स पर पैसेंजर ट्रेनें चलेंगी वे इस तरह हैं- 1. दिल्ली-गढ़ी हरसरू-फारूखानगर पैसेंजर (दैनिक), 2. केन्दुझारगढ़-भुवनेश्वर फास्ट पैसेंजर (सप्ताह में पांच दिन), 3. कोरापुट-बोलनगीर-सम्बलपुर पैसेंजर (दैनिक), 4. बरकाकाना-डेहरी ऑन सोन पैसेंजर (दैनिक), 5. जोधपुर-हिसार फास्ट पैसेंजर (दैनिक), 6. तिरुपतिगुंतकल पैसेंजर (दैनिक), 7. कोयम्बटूर-मेट्टूपलायम पैसेंजर (सप्ताह में छह दिन), 8. भुज-पालनपुर पैसेंजर (दैनिक), 9. सिलघाट-चापरमुख पैसेंजर (दैनिक), 10. सिलीगुड़ी-दिनहाटा पैसेंजर (दैनिक), 11. अबोहर-फाजिल्का पैसेंजर (दैनिक), 12. बिलासपुर-कटनी पैसेंजर (दैनिक), 13. रायपुर-कोरबा पैसेंजर (दैनिक)

Tuesday, February 22, 2011

रेलवे के अनुसार विभाग की आमदनी एक रुपये है, लेकिन खर्च 1.34 पैसे आ रहा है।

महंगाई के इस दौर में रेलवे की आमदनी घटती जा रही है, लेकिन उसके खर्चों में काफी इजाफा हो रहा है। रेलवे के अनुसार विभाग की आमदनी एक रुपये है, लेकिन खर्च 1.34 पैसे आ रहा है। रेलवे फिलहाल घाटे में हैं। इस हालात में यात्री सुविधाओं को ठीक ढंग से लागू नहीं किया जा रहा है। अफसर खर्च कम करने की युक्ति ढूंढ रहे हैं, ताकि रेलवे पर बढ़ते बोझ को कम किया जा सके। यूपी के नॉर्दर्न रेलवे लखनऊ डिविजन की बैठक में डीआरएम जीएस सोंधी ने यह आंकड़ा पेश किया। उन्होंने बताया कि रेलवे की आमदनी घटी है, वहीं सिक्स पे कमिशन लागू होने के बाद खर्च बढ़ता जा रहा है। ऐसे में खर्चों को कम करके ही स्थिति पर नियंत्रण पाया जा सकता है। बैठक में नॉर्दर्न रेलवे मैंस यूनियन, आरपीएफ असोसिएशन एवं रेलवे प्रमोटी ऑफिसर्स असोसिएशन ने भी विचार रखे। इस मौके पर एनआरएमयू के डिविजनल सेक्रेटरी आर. के. पांडेय ने सुझाव दिया कि रेलवे के विज्ञापन प्रदर्शित करने और खाली पड़ी जमीन को लीज पर उठाकर आमदनी बढ़ाई जा सकती है। इससे खर्च का अंतर कुछ हद तक कम हो जाएगा। इसके अलावा उन्होंने कई अन्य मुद्दे भी उठाए। इस अवसर पर एसी क्लास में यात्रियों को दी जाने वाली बेडशीट की धुलाई करने वाली एजेंसी के लाखों रुपये बकाया होने समेत कई मामले भी बैठक में सामने आए, जिन पर डीआरएम ने आश्वासन दिया कि एजेंसियों को भुगतान किया जा रहा है। इसके अलावा आरपीएफ असोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र यादव ने जवानों को सुविधाएं न के बराबर मिलने की बात भी उठाई। प्रमोटी ऑफिसर्स असोसिएशन ने भी कई मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। हालांकि बैठक में खर्च कम करने पर अधिक जोर दिया गया। डिविजनल रेलवे के अफसरों का कहना है कि खर्च अधिक होने से विकास कार्य में रुकावट आ रही है। साथ ही यात्री सुविधाओं की उस हिसाब से प्रगति नहीं हो पा रहा है, जितनी तेजी से सुविधाओं का विकास होना चाहिए। इसके लिए ठोस प्रयास करने की जरूरत है।

रेलवे इतनी गति से नहीं बढ़ रही।

रेलवे की तरक्की दो पैमानों पर नापी जा सकती है। एक, इसके एसेट्स का कैसा और कितना इस्तेमाल हो रहा है और दो, यह कितने पैसेंजर और सामान ढो रही है। हालात ये हैं कि देश में पूरा ट्रांसपोर्ट सेक्टर 9-10 फीसदी की गति से बढ़ रहा है, पर रेलवे इतनी गति से नहीं बढ़ रही। पचास के दशक में रेलवे का शेयर ट्रैफिक का 89 फीसदी तक था, जबकि रोड ट्रांसपोर्ट का 11 फीसदी। आज कुल ट्रैफिक में रेलवे का हिस्सा 20 पर्सेंट है जबकि 80 फीसदी ट्रांसपोर्ट सड़क के जरिए हो रहा है। भारतीय रेल का पिछड़ना कई अर्थों में नुकसानदेह है। सबसे पहला नुकसान पर्यावरण को हो रहा है। रोड ट्रांसपोर्ट के मुकाबले ट्रेनें 9 पर्सेंट फ्यूल एफिशिएंट होती हैं। दूसरे, ट्रक-बस की तुलना में इनकी रनिंग कॉस्ट कम होती है और तीसरे, इनसे यात्रा और माल ढुलाई सस्ती पड़ती है। वजह साफ है। भारतीय रेल को वक्त के साथ और ज्यादा एफिशिएंट नहीं बनाया गया। उसकी क्षमता नई जरूरतों के अनुसार नहीं बढ़ाई गई। ट्रेनों की संख्या और सर्विस की क्वॉलिटी में अपेक्षित सुधार नहीं किए गए। लेकिन उसकी मुश्किलें इसलिए बढ़ रही हैं क्योंकि उसकी कमाई में इजाफा नहीं हो रहा। आज रेलवे की सालाना आय करीब 80-90 हजार करोड़ रुपये है। इसमें से 70 फीसदी कमाई माल ढुलाई से, 25 फीसदी पैसेंजरों से और पांच फीसदी अन्य उपायों से, जैसे रेलवे की जमीनों के कमर्शल इस्तेमाल से होती है। पैसेंजरों से होने वाली कमाई का शेयर पिछले कई वर्षों से नहीं बढ़ा है, जबकि उन्हें दी जाने वाली सेवा पर खर्च काफी बढ़ चुका है। इसकी वजह है लोक-लुभावन रेल बजट। साधारण श्रेणी का किराया बढ़ाने की हिम्मत कोई रेल मंत्री नहीं करता। वातानुकूलित श्रेणी के किरायों में बढ़ोतरी की एक सीमा है क्योंकि तब उनका मुकाबला एयर फेयर से होने लगता है। जबकि रनिंग कॉस्ट बढ़ गई है, जैसे डीजल की कीमतें, महंगाई और कर्मचारियों के वेतन पर खर्च। अगर किराये थोड़े-थोड़े अंतराल पर बढ़ते रहते, तो यह नौबत नहीं आती। आज रेलवे इस घाटे को पूरा करना चाहे तो किराया 60 से 70 फीसदी बढ़ाना होगा। आपका संदर्भ तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव की कार्यप्रणाली से है। उनका ज्यादा योगदान यह था कि उन्होंने रेलवे को कमर्शल लाइन पर दौड़ाने की कोशिश की। मिसाल के तौर पर, उन्होंने पर-एक्सल लोड बढ़ा दिया। यानी माल ढोने वाले वैगंस से ज्यादा ढुलाई होने लगी। फिर उन्हीं के कार्यकाल में रिजर्वेशन की तत्काल योजना लाई गई। इन तरीकों से रेलवे को 10 पर्सेंट अतिरिक्त आय हुई। पर लालू जी की कार्यप्रणाली की दूसरा पहलू यह रहा कि उन्होंने इस कमाई को रेलवे के विस्तार में नहीं लगाया। निजीकरण वहीं हो सकता है, जहां वह आर्थिक रूप से फायदेमंद दिखेगा। रेलवे की खाली जमीनों के इस्तेमाल के दिल्ली-गुड़गांव में तो अच्छे दाम मिल सकते हैं, पर उड़ीसा-बिहार में तो इससे प्राइवेट पार्टियों को नुकसान होगा। और फिर आम राय इसके उलट है कि रेलवे के निजीकरण से देश और जनता को कोई विशेष फायदा होगा। मेट्रो की एयरपोर्ट लाइन का उदाहरण हमारे सामने है। रेलवे की जमीनें बेचना अच्छा नहीं है क्योंकि आगे जरूरत पड़ने पर उसी जमीन की बहुत ज्यादा कीमत देनी पड़ सकती है। यह सच है। आजादी से पहले देश में हर साल 600-700 किलोमीटर नई रेल लाइनें बिछाई जाती थीं, बाद में प्रतिवर्ष 200 किलोमीटर लाइनें ही बिछाई जा पा रही हैं। रेल ट्रैक पर मौजूद 1 लाख 20 हजार छोटे-बड़े पुलों में से आधे सौ साल पुराने हैं। हालांकि आधुनिकीकरण की रफ्तार धीमी है पर इन सभी पहलुओं पर काम हो रहा है। पर रेलवे के वास्तविक आधुनिकीकरण के लिए कुछ दूसरे मोर्चों पर काम करना जरूरी है। जैसे, ऑटोमैटिक सिग्लिनिंग, ट्रैक मेंटिनेंस की मॉडर्न टेक्नीक लाना, करीब 36 हजार लेवल क्रॉसिंग खत्म करना और हाई स्पीड रेल लाइनें बिछाना। हाई स्पीड रेल लाइनों से मेरा आशय मौजूदा रेल लाइनों को इस तरह दुरुस्त करना है कि उन पर 200-250 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेनें दौड़ाई जा सकें।

Wednesday, February 16, 2011

अबतक 1 लाख 38 हजार भरे हुए फार्म जमा

रेलवे ने हाल में रिक्त पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किए थे। इसके लिए मनसे ने अपने चुनाव चिह्न इंजिन को सार्थक करते हुए मराठी माणुस को फॉर्म भरने में हर संभव मदद की। रेलवे के फॉर्म थोक में अपने केंद्रों पर रखकर जानकार लोगों की निगरानी में फार्म भरवाने का काम किया गया। मुंबई और मुंबई से बाहर जी - जान से इस काम में लगे मनसे कार्यकर्ताओं ने अबतक 1 लाख 38 हजार भरे हुए फार्म जमा करके बड़ा मैदान मारा है। राज्य के कोने - कोने से फार्म राजगडा में जमा किए गए और वहां से ट्रक में लादकर रेलवे आफिस भेजे जा रहे हैं। पार्टी विधायक नितिन सरदेसाई ने बताया कि माहिम स्थित मनसे मुख्यालय में अबतक एक लाख 38 हजार 117 फार्म जमा हुए हैं। अब इन फार्मों को ट्रक में लादकर रेलवे भर्ती बोर्ड के आफिस भेजा जाएगा। कुछ लोगों ने फार्म भरकर खुद ही भेजे हैं। अभी फार्म भरने की अंतिम तिथि दूर है , इसलिए और फार्म भरे जाएंगे। मनसे द्वारा चलाए गए जन जागरण अभियान के कारण इस बार करीब 5 लाख मराठी माणुस ये फार्म भरेंगे। राडा के बदले मार्गदर्शन : उन्होंने बताया कि रेलवे भर्ती के विज्ञापन मराठी अखबारों में नहीं आते इसलिए मराठी लोगों को इस बात का पता नहीं चलता था। मगर इस बार मनसे ने समय रहते राज्य के कोने - कोने में लोगों को यह सूचना दी और फॉर्म भरने भी मदद की। यह काम आंदोलन से हटकर था और बताया जा रहा है कि आगामी मनपा चुनाव में मनसे को इस मुहिम का भारी लाभ मिलेगा। दो साल पहले मनसे से अन्य राज्यों विशेष रूप से बिहार और उत्तर प्रदेश से आने वाले उम्मीदवारों की पिटाई की थी , लेकिन इस बार मार्गदर्शन का काम करके जनता का दिल जीतने की कोशिश की है। राज्यव्यापी मुहिम : इसके लिए राज्य भर में मनसे ने मराठी युवा वर्ग को रेलवे भर्ती के फॉर्म वितरित किए गए। साथ ही उन्हें आवश्यक सारी जानकारी उपलब्ध करवाई। होर्डिंग लगाकर और सूचना बुक्स के माध्यम से मराठी युवा वर्ग का मार्गदर्शन किया। रेलवे की नौकरियों में मराठी माणुस की उपेक्षा हो रही है इस मुद्दे को राज ठाकरे में शिवसेना में रहते समय ही उठाया था। अलग पार्टी बनाने के बाद भी वे इस बात को भूले नहीं। इसके लिए पिछली बार कल्याण में मारपीट और हंगामा किया गया। इस पर जमकर पार्टी और राज की आलोचना हुई। इसलिए कानून के दायरे में रहकर मराठी लोगों का हित साधने का उपाय सोचा गया और उसे राज्य स्तर पर मुहिम चलाकर साधा गया।

Monday, February 14, 2011

मार्च माह में कुर्ला-ठाणे छठे रेलवे लाइन का काम पूरा हो जाएगा

आगामी मार्च माह में कुर्ला-ठाणे छठे रेलवे लाइन का काम पूरा हो जाएगा और उन पर रेलगाडि़यां दौड़ने लगेंगी। इससे मुंबई में मध्य रेलवे के उपनगरीय यात्रियों को बहुत राहत मिलेगी। पांचवें और छठे रेलवे ट्रैक पर अन्य बिजली के तारों जैसा ही अधिक वोल्टेज वाला विद्युत प्रवाह होने के कारण लोकल यात्रियों को सावधानी बरतनी पड़ेगी। 15 साल से चल रहे इस काम को गत दो वषोर्ं से गति मिली है। दौड़ेंगी लोकल और मेल बिना रुकावट: गत कुछ वर्षों से कुर्ला टर्मिनस से बाहर गांव की लंबी दूरी वाली रेलगाडि़यां छूटती हैं और टमिर्नस होने के कारण वहीं आकर रुकती भी होती हैं। इसलिए मध्य रेलवे की तेज लोकल विद्या विहार के पास आकर या खड़ी रहती हैं या फिर तेज लोकल मंद गति से आगे जा पाती हैं। कई बार लोकल को निकालने के लिए बाहर गांव वाली रेलगाडि़यों को भी विद्याविहार के पास लंबे समय तक रुकना पड़ता है और बिना किसी कारण कुर्ला टमिर्नस तक पहुंचने में घंटों लेट हो जाती हैं। फरवरी के अंत तक मेल ट्रेन चलेगी: मध्य रेलवे के अधिकारियों ने बताया कि कुछ समय तक दोनों नए ट्रैक पर लोकल रेलगाडि़यां ट्रायल के लिए चलाई जाएंगी। फिलहाल विक्रोली के पास काम करीब-करीब पूरा हो चुका है। मार्च माह में दोनों नए ट्रैक पर रेलगाडि़यां दौड़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है और लगता है कि फरवरी माह के अंत में ही काम पूरा हो जाएगा और इन ट्रैकों पर मेल गाडि़यां दौड़ने लगेंगी। बढ़ जाएगी विक्रोली वासियों की परेशानी: अलबत्ता इससे विक्रोली वासियों की परेशानी बढ़ जाएगी। कारण साफ है विक्रोली क्रासिंग पर फुट ओवर ब्रिज नहीं है और मजबूरन लोगों को रोजाना जान हथेली पर रखकर रेलवे लाइन पार करनी पड़ेगी। फुट ओवर ब्रिज की मांग लेकर विक्रोली वासियों ने आंदोलन भी किया था। पहले ही बेचारे 4-4 रेलवे लाइनें पार कर रहे हैं अब दो और यानि 6 रेलवे लाइन पार करनी पड़ेंगी। 15 साल का समय क्यों लगा: पांचवें और छठे ट्रैक को बनाने के लिए विक्रोली, कांजुरमार्ग के बीच चौथे ट्रैक के पास रहने वाले लोगों के पुनर्वास, विद्याविहार की इमारतों में रहने वाले लोगों का पुनर्वास सबसे बड़े चुनौती बनकर सामने आए थे। कई साल इसी प्रक्रिया में गुजर गए। स्टेशन के पूर्व में बनी चार इमारतों के पुनर्वास ने बहुत समय खाया। इससे काम में देरी होने के साथ ही योजना का खर्च भी बढ़ता गया।

Tuesday, February 8, 2011

आनंद विहार रेल टर्मिनल पर मंगलवार से तीन और ट्रेनों को शिफ्ट कर दिया जाएगा।

करीब एक साल पहले तैयार किए गए आनंद विहार रेल टर्मिनल पर मंगलवार से तीन और ट्रेनों को शिफ्ट कर दिया जाएगा। इसके बाद यहां से चलने वाली ट्रेनों की संख्या 12 हो जाएगी। मगध एक्सप्रेस को भी आनंद विहार शिफ्ट करने का फैसला ले लिया गया है लेकिन अभी उसकी तारीख का ऐलान नहीं किया है। जिन तीन ट्रेनों को मंगलवार से आनंद विहार शिफ्ट किया जा रहा है, उनकी शिफ्टिंग का ऐलान लगभग दो महीने पहले ही कर दिया गया था लेकिन ट्रेनें अब शिफ्ट की जा रही हैं। शिफ्ट होने वाली ट्रेनों में से एक अब तक नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से और बाकी दो हजरत निजामुद्दीन से चल रही थीं। उत्तर रेलवे के प्रवक्ता ने बताया कि शिफ्ट होने वाली ट्रेनों में से नई दिल्ली और गुवाहाटी के बीच चलने वाली नॉर्थ ईस्ट एक्सप्रेस ट्रेन मंगलवार को जब गुवाहाटी से जब दिल्ली आएगी तो वह नई दिल्ली की बजाय आनंद विहार में ही टर्मिनेट हो जाएगी और बुधवार को वापस यहीं से जाएगी। इसी तरह मंगलवार को जो गरीब रथ राजेंद्र नगर (पटना) से दिल्ली आएगी, वह हजरत निजामुद्दीन की बजाय आनंद विहार में ही टर्मिनेट हो जाएगी बुधवार को यहीं से चलेगी। आनंद विहार शिफ्ट होने वाली तीसरी ट्रेन हजरत निजामुद्दीन-जय नगर (बिहार) गरीब रथ है। सप्ताह में दो दिन चलने वाली यह ट्रेन मंगलवार को आनंद विहार से ही रवाना होगी। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि एक और महत्वपूर्ण ट्रेन मगध एक्सप्रेस भी आनंद विहार शिफ्ट की जानी है। पिछले साल ही इसे आनंद विहार शिफ्ट करने का ऐलान कर दिया गया था लेकिन अभी शिफ्ट होने की तारीख की घोषणा नहीं हुई है। दिसंबर 2009 में आनंद विहार रेल टर्मिनल का उद्घाटन किया गया था। उसके बाद से अब तक नौ जोड़ी ट्रेनों को इस रेल टर्मिनल पर शिफ्ट किया गया था। अब तीन जोड़ी और ट्रेनें यहां शिफ्ट की जा रही हैं। अभी यहां तीन प्लैटफॉर्म ही हैं लेकिन जल्द ही दो और मेंटिनेंस लाइनें भी यहां जुड़ जाएंगी। जिससे यहां और ट्रेनों को शिफ्ट किया जा सकेगा। इसके अलावा यहां कुछ और सुविधाएं भी जल्द ही जुटाई जाएंगी।

Thursday, February 3, 2011

चलती ट्रेन में 23 वर्षीय एक युवती का रेप किया गया और उसे ट्रेन से फेंक दिया गया।

केरल के त्रिचूर जिले में दिल दहला देने वाली एक घटना में चलती ट्रेन में 23 वर्षीय एक युवती का रेप किया गया और उसे ट्रेन से फेंक दिया गया। युवती गंभीर रूप से जख्मी है। पुलिस के अनुसार एर्नाकुलम-शोरनुर पैसेंजर ट्रेन के गार्ड ने रेलवे पुलिस को बताया कि मंगलवार रात एक महिला चलती ट्रेन से गिर गई, जिसके बाद तलाशी शुरू की गई। उसे वल्लाथोलनगर और शोरनुर स्टेशनों के बीच ट्रेन की पटरी पर घायल हालत में साढ़े़ नौ बजे पाया गया। महिला को तुरंत राजस्व मंत्री केपी राजेंद्रन के पुलिस काफिले के एक वाहन से त्रिचूर मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल के अधीक्षक डॉ. वीके मोहनन ने बताया कि महिला के साथ रेप किया गया है और उसकी हालत बहुत नाजुक है। उसके सिर में गहरी चोट लगी है। उसे वेंटिलेटर पर रखा गया है। मोहनन ने बताया कि ज्यादातर जख्म चेहरे और हाथ पर हैं और इसकी वजह यह हो सकती है उसे चलती ट्रेन से फेंक दिया गया। दरअसल जब कोई चलती ट्रेन से कूदता है तो उसके पैरों में चोट आती है। पुलिस के अनुसार वल्लाथोलनगर से ट्रेन से चलने के बाद उसके लगभग खाली पड़े महिला डिब्बे में एक व्यक्ति घुस आया। पुलिस इस बात की भी तहकीकात कर रही है कि वह कूद गई या उस व्यक्ति ने उसे ट्रेन से धक्का दे दिया। यह महिला कोच्चि में एक निजी कंपनी में नौकरी करती है और वह शोरनुर के समीप मांजकड में अपने घर लौट रही थी। वह शादी के एक प्रस्ताव के सिलसिले में घर आ रही थी।

मराठी उम्मीदवारों को नौकरी दिलाने के लिए कमर कस ली

एमएनएस ने रेलवे में मराठी उम्मीदवारों को नौकरी दिलाने के लिए कमर कस ली है। रेल भर्ती के मुद्दे
पर मनसे द्वारा पहली बार रचनात्मक कदम उठाया गया है। आगामी 15 फरवरी को रेलवे में नौकरी के लिए परीक्षा है। इसमें महाराष्ट्र के ज्यादा से ज्यादा युवकों और युवतियों को हिस्सा लेने के लिए प्रवृत्त करने के मकसद से राज ठाकरे ने एक मुहिम चलाई है। एमएनएस पदाधिकारियों की मंगलवार को संपन्न हुई बैठक में उन्होंने निर्देश दिया कि परीक्षा और अर्जी के बारे में इच्छुकों को मार्गदर्शन करने के लिए मौके की जगहों पर होर्डिंग्ज लगाए जाएं। राज ने आठ फरवरी तक होर्डिंग्ज लगाने और मार्गदर्शक बुक वितरित किए जाने का निर्देश दिया। बैठक में राज ने बताया कि रेलवे में मराठी लोगों को नौकरी दिलाने के लिए मनसे संघर्ष कर रही हैं। यह देखा गया है कि मराठी युवकों को नौकरियों और भर्ती की प्रक्रिया के बारे में जानकारी नहीं होती। उन्होंने पदाधिकारियों से यह जानकारी पहुंचाने के बारे में एक्टिव रहने की अपील की ताकि रेलवे में मराठी कर्मियों का प्रतिशत बढ़े। रेलवे में नौकरी के लिए इच्छुकों को मार्गदर्शन करने के लिए राज ने जो बुक बनवाई हैं, उसमें अर्जी भरने, सबमिट करने, आवश्यक कागजात जुटाने के बारे में जानकारी दी गई है। मनसे द्वारा इस तरह की उपयुक्त और रचनात्मक कार्रवाई पहली बार की जा रही है। इन नौकरियों के लिए वह उग्र आंदोलन कर चुकी है।

Tuesday, February 1, 2011

सिग्नल में खराबी आने से पैसेंजरों को परेशानी

दिल्ली मेट्रो की द्वारका लाइन पर मंगलवार को सिग्नल में खराबी आने से पैसेंजरों को परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि, मेट्रो का दावा है कि इस तकनीकी खराबी को 9 मिनट के भीतर ही दुरुस्त कर दिया गया लेकिन तब तक ट्रेनें एक के बाद एक रुक चुकी थीं। स्थिति सामान्य होने में आधे घंटे से भी ज्यादा का वक्त लगा। यह खराबी सुबह 8:29 बजे हुई। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के प्रवक्ता का कहना है कि राजौरी गार्डन और द्वारका सेक्टर 21 के बीच सिग्नल सिस्टम को पावर सप्लाई करने वाला यूपीएस सिस्टम में खराबी आ गई, इससे सिग्नल सिस्टम ने काम करना बंद कर दिया और ट्रेनें थम गईं। मेट्रो का दावा है कि खराबी को 8.38 मिनट पर ही दुरुस्त कर दिया गया लेकिन तब तक द्वारका से आनंद विहार/नोएडा लाइन पर ट्रेनें एक के बाद एक रुक चुकी थीं। पीक टाइम होने से कुछ स्टेशनों पर पैसेंजरों की भारी भीड़ जमा हो गई। कई जगह पैसेंजरों को 20-20 मिनट तक एक ही जगह पर रुकना पड़ा। लगभग आधे घंटे बाद ही जब सभी ट्रेनें चलने लगीं, तब स्थिति सामान्य हुई।