Monday, July 20, 2015

रेल हादसों में 25,006 लोगों की जान गई

बीता साल रेल हादसों के लिहाज से थोड़ा सा बेहतर रहा। 2014 में हुए रेल हादसों में थोड़ी कमी आई, लेकिन इसके बावजूद इन हादसों में 25,006 लोगों की जान गई और 3,882 लोग घायल हुए।
नैशनल क्राइम रेकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के मुताबिक, 2014 में रेल हादसों के 28,360 मामले दर्ज हुए। इनमें 2013 के मुकाबले 9.2 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। 2013 में 31,236 हादसे दर्ज किए गए थे।
इसमें से ज्यादातर मामले (करीब 61.6 फीसदी) लोगों के ट्रेन से गिरने या रेलवे ट्रैक पर ट्रेन की चपेट में आने के रहे। कुल 28,360 में से 17,480 हादसे ऐसे ही मामलों के थे।
दुर्घटनाओं के मामले सबसे ज्यादा महाराष्ट्र में हुए। ट्रेन से गिरने या टक्कर के कुल हादसों में से 42.5 फीसदी मामले इसी राज्य के हैं। रेलवे के एक अधिकारी का कहना था कि इस तरह के ज्यादातर मामले शहर के बाहरी इलाकों में हुए। उन्होंने कहा कि लोगों को रेलवे ट्रैक पार न करने के बारे में जागरुक किया जा रहा है, ताकि ऐसे हादसों को कम किया जा सके।
आंध्र प्रदेश में 469 रेल हादसे तकनीकी खामी की वजह से हुए। इसमें खराब डिजाइन, ट्रैक में खराबी, पुल या सुरंग में खराबी जैसी वजहें प्रमुख हैं। इन हादसों में 385 लोगों की मौत हुई।
उग्रवादियों, आतंकियों और दूसरे लोगों द्वारा तोड़-फोड़ से मध्य प्रदेश में 13 और उत्तर प्रदेश में पांच ऐक्सिडेंट हुए, जिनमें कुल 18 लोगों की मौत हुई।
रिपोर्ट के मुताबिक करीब 60 ऐक्सिडेंट ड्राइवरों की गलती से हुए, जिनमें 67 लोगों की जान गई। आश्चर्यजनक तौर पर ज्यादातर रेल हादसे (28,360 में से 4,966 ऐक्सिडेंट) सुबह 6 से 9 बजे के बीच हुए। यह कुल हादसों का 17.5 फीसदी है।

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