Tuesday, January 29, 2013

पैसेंजर ट्रेन के कोच में एक साधु का शव

 यूपी के जिला मुजफ्फरनगर में एक पैसेंजर ट्रेन के कोच में एक साधु का शव बरामद हुआ। पुलिस ने बताया कि यह शव दिल्ली-हरिद्वार पैसेंजर ट्रेन के अंदर बरामद हुआ। शव की पहचान नहीं हो पाई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। 

Sunday, January 27, 2013

भीड़ भाड़ वाले इलाके को मोनो रेल


चुनाव नजदीक आते देख दिल्ली सरकारने वादों की झड़ी लगानी शुरू कर दी है। अभी से चुनावीरैलियों और जनसभाओं का रोड मैप तैयार किया जा रहा है।इसी रोड मैप के बीच 3 मार्च को मुख्यमंत्री शीला दीक्षित कीरैली मोहन गार्डन में होगी। इस रैली के मद्देनजर मुख्यमंत्री केसंसदीय सचिव मुकेश शर्मा ने मोहन गार्डन में एक जनसभाकी। 

जनसभा
 में कहा गया कि रैली के दौरान मुख्यमंत्री के सामने 5प्रस्ताव रखे जाएंगे। पहला प्रस्ताव उत्तम नगर वाले भीड़ भाड़ वाले इलाके को मोनो रेल से जोड़ने का है। दूसरा प्रस्ताव मोहन गार्डन में 200 बिस्तरों का अस्पताल बनानेका रखा जाएगा। तीसरा प्रस्ताव मोहन गार्डन एरिया में लगातार बिजली की सप्लाई के लिए 66 केवी का सबस्टेशन बनाने की मांग की जाएगी। इलाके में 1 एमजीडी का अंडरग्राउंड जलाशय भी बनाने की मांग होगी।

Sunday, January 20, 2013

बढ़ाए गए रेल किराए सोमवार-मंगलवार की मध्य रात्रि से लागू

 लगभग 10 साल के अंतराल के बाद बढ़ाए गए रेल किराए सोमवार-मंगलवार की मध्य रात्रि से लागू होने जा रहे हैं। हालांकि, रेलवे ने कहने के लिए 2 पैसे से लेकर 10 पैसे प्रति किमी की दर से किराया बढ़ाया है, लेकिन जब इसे वास्तव में टिकट पर काउंट किया जाएगा तो लंबी दूरी वाले पैसेंजरों की जेब पर इसका असर होना लाजिमी है।

रेलवे का कहना है कि बढ़ा हुआ किराया, उन पैसेंजरों पर भी लागू होगा, जिन्होंने पहले से ही टिकट बुक करा रखे हैं यानी 21 जनवरी की रात 12 बजे के बाद जो भी पैसेंजर ट्रेन में सवार होंगे, उन्हें बढ़ा हुआ किराया देना होगा। यह बढ़ा हुआ अतिरिक्त किराया टीटीई ट्रेन में ही पैसेंजर से वसूलेंगे। दिलचस्प तथ्य यह है कि रेलमंत्री ने 9 जनवरी को किराया बढ़ाने का ऐलान करते वक्त कहा था कि इससे सालाना रेलवे को 6600 करोड़ रुपये मिलेंगे, जिससे उसकी आर्थिक हालत सुधरेगी। लेकिन यह फैसला लागू होने से पहले ही डीजल के दामों में बढ़ोतरी हो गई और अब रेलवे को डीजल पर ही ढाई हजार करोड़ रुपये से अतिरिक्त अदा करना होगा।

राजधानीएक्सप्रेस की चपेट में आकर तीन युवकों की मौत


महाराजपुर रेलवे क्रॉसिंग के पास राजधानीएक्सप्रेस की चपेट में आकर तीन युवकों की मौत हो गई। इनतीनों के साथ एक और युवक था , लेकिन वह पटरियों से दूरथा , इस वजह से वह बच गया। सभी युवक शाहदरा इलाकेकी जनता कॉलोनी के रहने वाले हैं। मरने वाले युवकों के नामईश्वर (23), मोनू (24) और कमल (24) हैं। इनके चौथे साथीरोहित ने अपने दोस्तों के साथ हुए हादसे की खबर पुलिस औरदोस्तों के परिजनों को दी। 

अडिशनल एसपी आर . के . पांडे ने बताया कि चारों युवकदिल्ली के शाहदरा इलाके की जनता कॉलोनी के रहने वाले हैं। वह सभी यहां शाहदरा से रेलवे ट्रैक होते हुएपंपलेट बांटने आए थे। चारों युवकों ने रामपुरी , बृज विहार , रामप्रस्थ आदि इलाकों में पंपलेट बांटी और उसकेबाद ये सभी ट्रैक के बगल से शाम 4 बजे के बाद वापस शाहदरा जाने लगे। पुलिस ने बताया कि महाराजपुररेलवे क्रॉसिंग के पास सभी ने अपने - अपने मोबाइल फोन निकाल लिए। कोई मोबाइल से रेलवे ट्रैक की विडियोबनाने लगा और कोई फोटो खींचने में व्यस्त हो गया। 

कमल , ईश्वर और मोनू ट्रेन की पटरी के बिल्कुल पास खड़े थे , जबकि रोहित पटरी से कुछ दूर था। इसी दौरानतेज रफ्तार से राजधानी एक्सप्रेस उसी पटरी पर  गई। इन तीनों को ट्रेन आने का कोई अहसास ही नहीं होपाया। ट्रेन ने सबसे पहले ईश्वर को टक्कर मारी , उसके बाद मोनू उसकी चपेट में  गया फिर ट्रेन कमल कोचपेट में लेते हुए आगे निकल गई। ईश्वर और मोनू की मौके पर ही मौत हो गइर् , जबकि कमल बुरी तरह सेघायल हो गया। उसे कौशांबी के एक प्राइवेट हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया , जहां उसकी मौत हो गई। अपनेदोस्तों के साथ हुए हादसे को देखकर रोहित ने पुलिस कंट्रोल रूम और बाकी जगहों पर फोन किए। जिस जगहपर हादसा हुआ उससे कुछ ही दूरी पर जीआरपी के जवान भी ड्यूटी पर थे , जवानों ने जब भीड़ जमा होते देखीतो वो भी मौके पर पहुंचे और कंट्रोल रूम को भी सूचना दी।

Saturday, January 19, 2013

चलती ट्रेन में सुगौली स्टेशन के पास गोलीबारी

 बिहार में पूर्व मध्य रेल(ईसीआर) जोन अंतर्गत नरकटियागंज-समस्तीपुर रेलखंड पर शुक्रवार सुबह डकैतों ने चलती ट्रेन में सुगौली स्टेशन के पास गोलीबारी कर तीन यात्रियों को घायल कर दिया, जिसमें से एक की मौत हो गई। 

रेल पुलिस सूत्रों ने बताया कि यात्रियों के विरोध करने पर करीब सात हथियारबंद डकैतों ने गोरखपुर-सोनपुर पैसेंजर ट्रेन में सुगौली स्टेशन के पास चलती ट्रेन में गोलीबारी कर दी, जिससे एक व्यक्ति की मौत हो गई। 

उन्होंने बताया कि डकैतों ने सुगौली स्टेशन के पास वैक्यूम काटकर यात्रियों से नकद और अन्य बहुमूल्य वस्तुएं लूट लीं। घायल यात्री चंद्रभूषण प्रसाद (35) की एक अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई जबकि उनके भाई दामोदर प्रसाद और हरिदर्शन चौधरी का इलाज पीएमसीएच में चल रहा है। 

Wednesday, January 16, 2013

आखिरकार रेलवे का किराया बढ़ाया गया


दस साल बाद आखिरकार रेलवे का किराया बढ़ाया गया। यह बात और है कि सवारी गाड़ियों पर आने वाले 25 हजार करोड़ रुपये के घाटे में से मात्र 6600 करोड़ रुपयों की भरपाई ही इस वृद्धि से हो पाएगी। सरकारें रेल किरायों पर इतनी ज्यादा सब्सिडी इतने लंबे समय से आखिर क्यों देती आ रही हैं? अन्य किसी भी सब्सिडी की तुलना में रेल सब्सिडी का औचित्य सबसे कम है। न तो रेलों का ज्यादा इस्तेमाल गरीबों द्वारा किया जाता है, न ही इन्हें किसी अर्थ में अपरिहार्य माना जा सकता है। ज्यादातर रेलें विकसित इलाकों में चलती हैं। पिछड़े इलाकों की सेवा करना उनका मुख्य काम नहीं है। वैसे भी रेलवे 19वीं सदी की टेक्नोलॉजी है। 20वीं सदी में इनकी जगह बसों ने ले ली और दुनिया में हर जगह बसें ट्रेनों से कहीं ज्यादा सस्ती हैं। तो फिर इस महंगे और पुराने जमाने के यात्रा साधन को, जिसकी गरीबी या पिछड़ापन मिटाने में कोई भूमिका नहीं है, इतनी सब्सिडी क्यों दी जा रही है?

दिल्ली-चेन्नई जैसी लंबी दूरियों के लिए बस का सफर बहुत असुविधाजनक होगा। लेकिन इतनी लंबी यात्राएं व्यापार, रोजगार, संबंधियों से मिलने और तीर्थयात्रा या पर्यटन के उद्देश्य से की जाती हैं। एक गरीब देश में ऐसे कामों को सरकारी मदद के दायरे में नहीं लिया जाना चाहिए। सबसे ज्यादा सब्सिडी महानगरों के इर्दगिर्द चलने वाली ट्रेनों के किराये पर दी जाती है। कुछ विश्लेषकों की दलील है कि इससे गरीब लोगों को शहर आने में मदद मिलती है। लेकिन सचाई यह है कि इन गाड़ियों से सफर करने वाले ज्यादातर पैसेंजरों का व्यापारिक उद्देश्य होता है। कोई अस्थायी श्रमिक शायद ही कभी रेल से कहीं आता-जाता हो, जबकि व्यापारिक उद्देश्यों वाले यात्री अपने आने-जाने का खर्च अपनी चीजों के विक्रय मूल्य में शामिल कर लेते हैं।

तजुर्बा बताता है कि आप लोकल किराये बढ़ाएंगे तो रोजगारदाता अपने कर्मचारियों का यात्रा भत्ता बढ़ा देंगे। यानी रेल सब्सिडी का फायदा रोजगारदाता को मिलता है, कर्मचारी को नहीं। जो लोग सचमुच गरीब हैं वे काम के लिए लंबा सफर नहीं करते। वे तो अपने काम की जगह के आसपास ही गैरकानूनी ढंग से कोई झुग्गी डाल लेते हैं। विजय जगन्नाथन ने इस संबंध में इकनॉमिक एंड पॉलिटिकल वीकली में प्रकाशित अपने एक लेख में कोलकाता का शानदार ब्यौरा दिया है। दिल्ली की 80 फीसदी कॉलोनियां इसी प्रक्रिया में बसी हैं, बाद में इन्हें कानूनी शक्ल दे दी गई। बहरहाल, लोकल ट्रेन वाले बड़े शहरों में गरीबी उतनी ज्यादा नहीं है, लिहाजा यहां तो सब्सिडी की वैसे भी कोई वजह नहीं बनती। इसके अलावा शहर दिनोंदिन पहले से ज्यादा भीड़ भरे और प्रदूषित होते जा रहे हैं। लोकल ट्रेनों के लिए दी जाने वाली सब्सिडी भीड़ और प्रदूषण बढ़ाने में मददगार बनती है। मुंबई में हर साल 4000 लोग खचाखच भरी ट्रेनों से गिरकर या उनसे कुचलकर मारे जाते हैं। अफसोस कि लोकल ट्रेन सब्सिडी इस तरह की मौतों को और बढ़ाने वाली साबित हो रही है।
पिछले एक दशक में रेलवे ने माल भाड़ा बढ़ाया है लेकिन यात्री किराये नहीं बढ़ाए। हमारे यहां भाड़े और किरायेका अनुपात संसार में सबसे ज्यादा है। यानी यात्री किराये सस्ते रखने के लिए निर्यात समेत सारे सामानों पर एकपरोक्ष कर लगाया जा रहा है। विश्व बाजार में हमारा सामान महंगा होने और निर्यात घटने की एक वजह यह भीहै। ब्रिटिश राज ने अलग रेलवे बजट की व्यवस्था इसलिए बनाई थी क्योंकि सरकारी आमदनी का एक बड़ाहिस्सा रेलवे से आता था। लेकिन आज रेल की आमदनी इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन जैसी एक तेल कंपनी से भीकम है। गठबंधन सरकारों के मौजूदा दौर में रेल मंत्रालय मजबूत गठबंधन सहयोगियों को रिझाने का जरिया बनगया है। रेलमंत्री कमोबेश वित्तमंत्री जैसे ही तामझाम के साथ रेल बजट पेश करता है। यह एक ऐसाविशेषाधिकार हैजो संसार में अन्य किसी भी रेलवे को हासिल नहीं है। यह भी विचित्र है कि अपने यहां रेलवेको नौकरियां और ठेके बांटने का जरिया समझा जाता है। रेलमंत्री अपने पसंद के इलाकों में नई-नई ट्रेनें चलातेहैंभले ही ये इलाके रेलवे की प्राथमिकता में बहुत नीचे हों। यही नहींइस ओवरस्टाफ संगठन में और ज्यादानियुक्तियों को जायज ठहराने के लिए वे नए क्षेत्रीय मुख्यालय भी बना देते हैं।
सरकारी धन के इस निर्मम दुरुपयोग को कैसे रोका जाएइससे पूरी तरह छुटकारा पाना राजनीतिक दृष्टि सेअसंभव है। लेकिन टेलीकॉम सेक्टर की तरह रेलवे को कॉरपोरेशन में बदलकर एक बीच का रास्ता निकाला जासकता है। आदर्श स्थिति यह होगी कि रेलवे को आपस में होड़ करने वाली कई कंपनियों में तोड़ दिया जाए। इससेएकाधिकार का मामला कमजोर पड़ेगा और विभिन्न रेल कंपनियों को अलग-अलग विचार आजमा कर देखने काहौसला मिलेगा। कुछ लोगों की राय है कि कॉरपोरेशन भी कोई रामबाण नुस्खा नहीं है कई मंत्री सरकारीकॉरपोरेशनों को अपनी मुट्ठी में रखने के लिए ही जाने जाते हैं। फिर भी कॉरपोरेट प्रक्रिया खुले राजनीतिकहस्तक्षेप को तो एक हद तक नियंत्रित करती ही है। कानून इनके बोर्ड में स्वतंत्र निदेशकों की उपस्थिति जरूरीबनाता हैजो इनके निकृष्टतम दुरुपयोग पर रोक लगा सकते हैं।

Monday, January 7, 2013

आगरा-लखनऊ इंटरसिटी एक्सप्रेस


आगरा-लखनऊ इंटरसिटी एक्सप्रेस 15 तारीख से कानपुर देहात जिले के झींझक रेलवे स्टेशन पर भी रुकेगी। फिलहाल प्रयोग के तौर पर 6 महीने के लिये ट्रेन को झींझक रेलवे स्टेशन पर ठहराव मिला है, जिसे बाद में आगे बढ़ाया जा सकता है। 
कानपुर के सांसद और केन्द्रीय कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल ने बताया कि जनता की पुरानी मांग को पूरा करने के लिए आगरा इंटरसिटी एक्सप्रेस को झींझक रेलवे स्टेशन पर ठहराव देने का फैसला किया गया। उन्होंने बताया कि 15 जनवरी से यह ट्रेन 6 माह के लिये प्रयोग के आधार पर झींझक स्टेशन पर रुकेगी। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ समय से नई दिल्ली लखनऊ गोमती एक्सप्रेस के झींझक में ठहराव को रेलवे बोर्ड ने 6 माह के लिये स्वीकृत दी है