Saturday, October 30, 2010

गोरखपुर से मुंबई के बीच चलने वाली लोकमान्य तिलक एक्सप्रेस के सेकंड क्लास कंपार्टमेंट में सफर

आम आदमी की तरह उनका ट्रेन में सफर करना नई बात नहीं है। लेकिन राजनीतिक समझ पैदा करने का राहुल गांधी का यह अनोखा अंदाज उत्तर प्रदेश सरकार को नागवार गुजरा रहा है। राज्य के होम सेक्रेट्री दीपक कुमार ने बताया कि राज्य के एडीजी ( सिक्युरिटी ) रमेश सहगल ने एनएसजी डायरेक्टर को राहुल गांधी की ट्रेन यात्रा के संबंध में पूर्व में सूचना न दिए जाने के मुद्दे पर पत्र लिखा है। गौरतलब है कि कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने पिछले 18 अक्टूबर को बगैर किसी पूर्व सूचना के गोरखपुर से मुंबई के बीच चलने वाली लोकमान्य तिलक एक्सप्रेस के सेकंड क्लास कंपार्टमेंट में सफर किया था। एक सवाल के जवाब में गृह सचिव ने कहा कि इस संबंध में राज्य सरकार से किसी भी स्तर पर कोई संपर्क नहीं किया गया।

बढ़ती भीड़ को देखते हुए कई स्टेशनों पर लोगों की एंट्री रोक दी गई।

दिल्ली मेट्रो ने एक बार फिर यात्रियों को परेशान किया। गुरुवार सुबह पीक आवर के दौरान ही द्वारका-आनंद विहार और द्वारका-नोएडा रूट में तकनीकी खराबी आ गई, जिसके बाद इस रूट पर मेट्रो ट्रेनें थम गईं। यात्रियों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए कई स्टेशनों पर लोगों की एंट्री रोक दी गई। गुरुवार की सुबह एक बार फिर मेट्रो में तकनीकी खराबी आ गई। द्वारका-आनंद विहार और द्वारका-नोएडा रूट पर ट्रेनें थम गईं। ट्रेनों को मैनुअली चलाने की कोशिश की गई, लेकिन वह कारगर साबित नहीं हुई। डीएमआरसी के सुत्रों के मुताबिक, सिग्नल सिस्टम में खराबी पाई गई है। उसे ठीक करने की कोशिश की जा रही है।

Thursday, October 21, 2010

मेन लाइन रूट पर सिर्फ 12 डिब्बों की लोकल चलाने का फैसला

मध्य रेल ने अपने यात्रियों को अधिक सुविधा देने के इरादे से अब हर रविवार तथा दूसरी छुट्टियों के दिन मेन लाइन रूट पर सिर्फ 12 डिब्बों की लोकल चलाने का फैसला किया है। इसकी शुरुआत 24 अक्टूबर से हो जाएगी। चूंकि संडे और अन्य छुट्टियों के दिन कम संख्या में ट्रेनें चलाईं जाती हैं, अत: इस दिन 12 डिब्बों की लोकल चलाए जाने से यात्रियों को काफी राहत होगी। इसी दिन से मध्य रेल अपनी 12 डिब्बों वाली सेवाओं का विस्तार करते हुए 19 और सेवाएं जोड़ने का फैसला किया है। अब सेंट्रल पर प्रतिदिन चलने वाली 12 डिब्बों की सेवा 594 से बढ़कर 613 हो जाएगी। जबकि 9 डिब्बों और 12 डिब्बों की सेवा मिलाकर 24 अक्टूबर के बाद से संडे तथा अन्य छुट्टियों के दिन चलने वाली कुल लोकल सेवाओं की संख्या 1,240 से बढ़कर 1,259 हो जाएगी। रेलवे के इस कदम का यात्री संघ मुंबई के अध्यक्ष और रेल कार्यकर्ता सुभाष गुप्ता ने स्वागत किया है और कहा है कि इससे मेगा ब्लाक का प्रेेशर भी कम होगा और यात्रियों को सुविधा मिलेगी सो अलग। मध्य रेल के मुख्य प्रवक्ता श्रीनिवास मुडगेरिकर के अनुसार, हमने वांगनी और कल्याण सेक्शन के बीच डीसी से एसी कंवर्जन का काम पूरा कर लिया है, अब इसका फायदा यात्रियों को मिलना शुरू हो जाएगा। उन्होंने बताया कि अब हम 12 कार वाली सेवाएं 782 से बढ़ाकर 785 करने वाले हैं। उन्होंने यह भी बताया कि हम अपनी मेल गाडि़यों के कोचों में बेहतर रख-रखाव के लिए रेडियो फ्रीक्वेंसी सिस्टम लगा रहे हैं।

Friday, October 15, 2010

सभी पांच लाइनें स्टैंडर्ड गेज की ही बनाई जाएंगी।

तीसरा फेज पूरा होने के बाद रोज 43 लाख से ज्यादा पैसेंजर मेट्रो में सफर किया करेंगे। अभी यह तादाद औसतन 12-13 लाख है। यही नहीं, अगर मेट्रो के प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो एक लाइन को छोड़कर बाकी सभी पांच लाइनें स्टैंडर्ड गेज की ही बनाई जाएंगी। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के सूत्रों के मुताबिक, मेट्रो ने तीसरे फेज के लिए एक सर्वे किया है। इसके मुताबिक, अनुमान लगाया गया है कि 2016 में फेज तीन पूरा होने पर 43 लाख से ज्यादा पैसेंजर मेट्रो में सफर करेंगे। इस तरह तीसरा फेज पूरा होने के बाद पब्लिक ट्रांसपोर्ट के रूप में मेट्रो ही दिल्ली का सबसे बड़ा साधन बन जाएगा। दिल्ली मेट्रो ने अपनी जो सर्वे रिपोर्ट तैयार की है, उसके मुताबिक तब तक दिल्ली मेट्रो के तीनों फेज पूरे हो चुके होंगे। यानी उस वक्त पहले फेज में बनाई गई तीन लाइनों पर ही 7.5 लाख से ज्यादा पैसेंजर सफर किया करेंगे। इसके बाद दूसरे फेज की लाइनों पर सफर करने वालों का आंकड़ा 16.87 लाख से ज्यादा हो जाएगा, लेकिन सबसे ज्यादा सफर करने वालों की तादाद तीसरे फेज की लाइनों पर होगी। तीसरे फेज की लाइनों पर सफर करने वालों का आंकड़ा 18 लाख 85 हजार से ज्यादा हो जाएगा। इस तरह कुल मिलाकर उस वक्त सिर्फ दिल्ली के हिस्से में ही बनी मेट्रो रेल लाइनों पर सफर करने वालों की संख्या 43.31 लाख से ज्यादा हो जाएगी। दिल्ली मेट्रो के सूत्रों का कहना है कि इसके पांच साल बाद इन लाइनों पर ही सफर करने वालों की तादाद बढ़कर 51 लाख से भी ज्यादा हो चुकी होगी। उस वक्त मेट्रो का औसत ट्रिप लगभग 15.41 किमी का हो जाएगा। तीसरे फेज की रिपोर्ट में दिल्ली मेट्रो ने कहा है कि अगर मेट्रो की प्रस्तावित छह लाइनें बनाने के प्रस्ताव को हरी झंडी मिलती है, तो जहांगीरपुरी-बादली लाइन के अलावा बाकी सभी लाइनें स्टैंडर्ड गेज की होंगी। मेट्रो के मुताबिक, प्रस्तावित नई लाइनों में से अशोक पार्क-दिल्ली गेट, केंद्रीय सचिवालय-लाल किला और जहांगीरपुरी-बादली मौजूदा लाइनों का ही एक्सटेंशन होंगी। लिहाजा इन तीनों लाइनों का वही गेज होगा, जो मौजूदा लाइनों का है। इस तरह से जहांगीरपुरी-बादली लाइन ही ब्रॉडगेज होगी, जबकि बाकी सभी लाइनें स्टैंडर्ड गेज की होंगी। मेट्रो का कहना है कि नई लाइनों में आनंद विहार - धौला कुआं , मुकुंदपुर - राजौरी गार्डन और मालवीय नगर - कालिंदी कुंज नए कॉरिडोर होंगे , लिहाजा ये तीनों लाइनें भी स्टैंडर्ड गेज की ही होंगी। स्टैंडर्ड गेज की लाइनें बनाने का सबसे बड़ा फायदा यही होगा कि इससे मेट्रो लाइनों की लागत में कमी आएगी। स्टैंडर्ड गेज की लाइन के लिए पटरी की चौड़ाई भी कम होती है। ऐसे में मेट्रो रेल लाइन बनाने के लिए भी जगह की कम जरूरत पड़ती है। इसके अलावा स्टैंडर्ड गेज के लिए तकनीक और कोच भी आसानी से उपलब्ध हैं। मेट्रो का कहना है कि अगर सरकार वक्त पर उसकी लाइनों को मंजूरी देती है तो तीसरे फेज की सबसे पहली लाइन जहांगीरपुरी - बादली चालू होगी। यह लाइन जनवरी 2015 में चालू हो जाएगी। इसके बाद केंद्रीय सचिवालय - लाल किला लाइन होगी। इस लाइन को मार्च में चालू करने के बाद उसी साल मई में मुकुंदपुर - राजौरी गार्डन और अशोक पार्क - दिल्ली गेट लाइन तैयार हो जाएगी। अगर सरकार मालवीय नगर - नोएडा सेक्टर 18 लाइन को चालू करती है तो उस लाइन को भी जुलाई 2015 तक तैयार कर लिया जाएगा। सबसे अंतिम लाइन सितंबर 2015 में तैयार होगी। यह लाइन आनंद विहार - धौला कुआं लाइन हो गी।

Monday, October 11, 2010

दिल्ली मेट्रो ने नया रेकॉर्ड बनाया

कॉमनवेल्थ खेलों के पहले हफ्ते में दिल्ली मेट्रो ने नया रेकॉर्ड बनाया है। इस अवधि में दिल्ली मेट्रो की ट्रेनों ने 2800 फेरे रोज लगाए। गेम्स की शुरुआत के दिन से ही दिल्ली मेट्रो औसत ढाई मिनट पर ट्रेनें चला रही है। कॉमनवेल्थ के दौरान 1600 ब्लू लाइन बसों को हटाने की वजह से मेट्रो पर प्रेशर बढ़ गया है। लेकिन दिल्ली मेट्रो लोगों को अपनी मंजिल तक पहुंचाने का काम बेहद ही शानदार और जिम्मेदार तरीके से कर रही है। हांलाकि कुछ तकनीकी खामी की वजह से ट्रेने लेट हो जा रही हैं फिर भी दिल्ली मेट्रो को इस टाइम पीरियड में 99.98 फीसदी मामलों में सही टाइम पर चल रही है।

नई ट्रेनों की 101वीं खेप मुंबई पहुंच गई।

मुंबई की लाइफलाइन बनकर करीब 33 महीने पहले जब दुल्हन की तरह से सजी-संवरी नई ट्रेनों ने पटरियों पर दौड़ना शुरू किया तो पहली बार रेल यात्रियों ने कसमसाते माहौल से जुदा थोड़ा खुलकर सांस लिया। एक-एक मिनट बचाने वाले लोकल के यात्रियों को 10-15 मिनट तक नई ट्रेनों का इंतजार करते देखा गया। नई ट्रेनों के आने का कारवां आगे बढ़ा और आज यह इस मुकाम पर पहुंच गया कि इसे सेलीब्रेट करने के लिए रेलवे के साथ राज्य सरकार भी आगे आ गई और विशेष डाक कवर भी रिलीज किया गया। जी हां, बीते हफ्ते नई ट्रेनों की 101वीं खेप मुंबई पहुंच गई। जून 2011 तक कुल 28 और नई ट्रेनें मुंबई में आने वाली हैं। सवाल यह उठता है कि क्या इन ट्रेनों के आने से वास्तव में रेल यात्रियों को सुविधा और सुकून मिला है? या फिर यात्रियों की बढ़ती रेलमपेल ने रेलवे के इस प्रयास को फुस्स कर दिया है। बढ़ी हुई ट्रेनों और इनकी बढ़ी हुई फ्रीक्वेंसी का असर बढ़े हए यात्रियों पर कितना पड़ा है मध्य और पश्चिम रेलवे से प्राप्त आंकड़े थोड़ा सुकून दे सकते हैं कि दुनिया के सबसे कॉम्प्लिकेटेड सबर्बन नेटवर्क में शुमार होने वाले मुंबई की लाइफलाइन (लोकल ट्रेनों) में थोड़ी बहुत भीड़ कम होने लगी है। एक रेल यात्री की हैसियत से शायद आपने भी महसूस किया होगा। रेल अधिकारियों की मानें तो साल 2013 में जब कई इन्फ्रास्ट्रक्चर के काम पूरे हों जाएंगे तो रेल यात्रियों को और भी कई सुविधाएं मिलेंगी। मगर पहले बात वर्तमान की करें। साल 2005-06 में जहां मध्य रेल के प्रति कोच में 269 यात्री ठुंसे होते थे, जुलाई 2010 तक मध्य रेल के मेन-हार्बर और ट्रांसहार्बर रूट को मिलाकर यह संख्या 228 तक आ गई। जबकि पश्चिम रेल में 2005-06 में इसकी लोकल की प्रति बोगियों में 295 यात्री सफर किया करते थे और 2010 में यह तादाद घटकर 247 तक आ गई। इसे थोड़ा सा जनरल टर्म में कहा जाए तो पहले एक बैठे हुए यात्री के पीछे 4 यात्री खड़े रहते थे। अब यह संख्या घटकर तीन तक आ गई है। दूसरे शब्दों में कहें तो सेंट्रल रेल में 20 प्रतिशत और वेस्टर्न रेल में 17 प्रतिशत भीड़ में कमी हुई। बावजूद इसके कि इस दरमियान यात्रियों की संख्या में भी 7-8 प्रतिशत का इजाफा हुआ। यह देर से हुआ या समय पर हुआ, इसे बहस का मुद्दा बनाया जा सकता है। मगर यह भी सच है कि जिस रफ्तार से मुंबई की आबादी आने वाले दिनों में बढ़ने वाली है, उसे देखकर यह कहा जा सकता है लोकल ट्रेनों की भीड़ कम करना हमेशा से रेल अधिकारियों का सरदर्द बना ही रहेगा। रेल यात्रियों के लिए एक भरोसा देने वाली खबर यह भी है कि साल 2014 तक ऐसी 72 और ट्रेनों को मुंबईकरों की सेवा में लाकर पुरानी ट्रेनों को हटाने की प्लानिंग है। मगर यह भी काबिल-ए-गौर है कि जून 2011 से जून 2012 तक मुंबई में नई ट्रेनें नहीं आएंगी। अब बात करते हैं लोकल की बढ़ाई गई लोकल सेवाओं की। जुलाई 2010 तक के प्राप्त आंकड़े बताते हैं कि मध्य रेल में साल 2005-06 में लोकल ट्रेनों की 1,203 सेवाएं हुआ करती थीं, जो जुलाई 2010 तक बढ़कर 1,556 हो गईं। इसमें 12 डिब्बों वाली लोकल की संख्या 218 से बढ़कर 577 हो गईं। पश्चिम रेल जो साल 2005-06 में जहां 1,017 सेवाएं चलाती थी, वो 2010 में बढ़कर 1,210 हो गईं। 12 डिब्बों वाली लोकल की संख्या बढ़कर 435 से 788 हो गई। जहां तक इस दरमियान बढ़ेे हुए यात्रियों की बात है तो मध्य रेल पर साल 2005-06 में रोजाना औसतन 30.84 लाख यात्री सफर करते थे वो साल 2010 जुलाई में बढ़कर 36.7 लाख हो गई। पश्चिम रेल में साल 2005-06 में 30.88 लाख यात्री थे और साल 2010 में इनकी संख्या बढ़कर 33.1 लाख हो गई। करती है जिसका एक और सिर्फ एक ही मकसद होता है पैसा कमाना। आज र्वल्ड क्लास स्टेशनों की बात होती है मगर कई स्टेशनों की हालत इतना बदतर है कि कुछ पूछिए मत। रेलवे को चाहिए कि वो किसी जनांदोलन का इंतजार न करे।

Saturday, October 2, 2010

मोहम्मद रफी और किशोर कुमार के नाम पर कोलकाता मेट्रो स्टेशनों के नाम रखे जाएंगे।

रेल मंत्री ममता बनर्जी ने घोषणा की है कि सिख गुरु गोबिंद सिंह, कवि मोहम्मद इकबाल, सिंगर मोहम्मद रफी और किशोर कुमार के नाम पर कोलकाता मेट्रो स्टेशनों के नाम रखे जाएंगे। दक्षिण के 24 परगना जिले के जोका से शहर के बीचोंबीच स्थित बी.बी.डी. बाग तक एक नई मेट्रो लाइन की नींव रखे जाने के मौके पर आयोजित समारोह में ममता ने कहा, ' हम मोहम्मद रफी और किशोर कुमार के नाम पर स्टेशनों के नाम रखेंगे। कोलकाता में बहुत से सिख हैं और उनकी भावनाओं का ध्यान रखते हुए हम एक स्टेशन का नाम गुरु गोबिंद सिंह के नाम पर रखेंगे। ' उन्होंने कहा, ' हम मोहिनी चौधरी के नाम पर भी एक स्टेशन का नाम रखेंगे। हम शहर के खेल केंद्र मैदान क्षेत्र की मेट्रो का नाम गोश्थो पाल के नाम पर रखेंगे। 'सारे जहां से अच्छा' जैसा अमर गीत देने वाले मोहम्मद इकबाल को भी हम इसी तरह सम्मानित करेंगे। ' कोलकाता में 16.72 किलोमीटर की लंबाई में 13 स्टेशन बनेंगे और 2,619.02 करोड़ रुपये की लागत से उनका निर्माण होगा। ममता ने कहा कि अन्य सात स्टेशनों के नाम स्थानीय लोगों की राय लेने के बाद रखे जाएंगे।

ममता 'राइजिंग पॉवर' विषय पर व्याख्यान देंगी।

रेल मंत्री ममता बनर्जी अगले महीने कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में शिक्षाविदों और छात्रों के एक ग्रुप के सामने व्याख्यान देंगी। बनर्जी ने पत्रकारों से गुरुवार को कहा कि उन्हें कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में व्याख्यान देने के लिए एक निमंत्रण पत्र मिला है। उन्होंने कहा कि वह 25 अक्टूबर को लंदन के लिए रवाना होंगी और वहां दो-तीन दिन ठहरेंगी। ममता 'राइजिंग पॉवर' विषय पर व्याख्यान देंगी।