Monday, September 29, 2014

बोनस के रूप में 78 दिन का वेतन

भारतीय रेलवे के लगभग 11.5 लाख कर्मचारियों को दिवाली बोनस के रूप में 78 दिन का वेतन मिलेगा। इससे पहले पिछले साल भी रेलकर्मियों को इतना ही बोनस दिया गया था। बोनस देने से रेलवे पर लगभग 800 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार आएगा। दिलचस्प यह है कि इस बार बोनस के मामले में कैबिनेट की मंजूरी लिए बिना ही रेलवे की तरफ से यह आदेश जारी कर दिया गया।
रेलवे सूत्रों का कहना है कि दरअसल, रेलकर्मियों को हर साल दिवाली का बोनस, दशहरे के त्योहार से ठीक पहले दिया जाता है। लेकिन इस बार चूंकि प्रधानमंत्री अमेरिका यात्रा पर हैं और वित्तमंत्री अरुण जेटली अस्पताल में हैं, इसलिए कैबिनेट की मंजूरी नहीं ली जा सकी। हालांकि बाद में इस फैसले पर मंजूरी ली जाएगी। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि पिछले लगातार दो साल से रेलवे इतना ही बोनस दे रहा है। यह बोनस उत्पादकता से जोड़ा जाता है।

Thursday, September 25, 2014

अब 139 नंबर पर एसएमएस भेजकर ट्रेनों में खाना बुक

रेल यात्री अब 139 नंबर पर एसएमएस भेजकर ट्रेनों में खाना बुक करा सकते हैं। यह सुविधा परीक्षण के आधार पर चुनिंदा ट्रेनों में कल से शुरू हो रही है।
रेल मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि 25 सितंबर से एसएमएस भोजन सेवा दिल्ली-अमृतसर रूट पर छह ट्रेनों में पायलट परियोजना के रूप में शुरू की जा रही है। जिन ट्रेनों में यह सुविधा शुरू की जा रही है उनमें दिल्ली-पठानकोट एक्सप्रेस, कठिहार-अमृतसर एक्सप्रेस, अमृतसर-लोकमान्य तिलक टर्मिनस एक्सप्रेस, शाने पंजाब एक्सप्रेस, नयी दिल्ली-अमृतसर एक्सप्रेस औप शहीद एक्सप्रेस शामिल हैं। अधिकारी ने बताया कि इन सभी ट्रेनों में पैंट्री कार नहीं हैं। भोजन की सुविधा आईआरसीटीसी द्वारा प्रदान की जाएगी। योजना के अनुसार रेल यात्रियों को भोजन बुक कराने के लिए अपने पीएनआर नंबर के साथ 139 नंबर पर एसएमएस भेजना होगा।
यात्री को सिर्फ मील लिखकर पीएनआर नंबर लिखना होगा। एक बार एसएमएस मिलने के बाद किसी ट्रेन के पीएनआर नंबर, कोच और सीट की स्थिति की पुष्टि की जाएगी। उसके बाद यात्री से भोजन के मेन्यु के साथ संपर्क किया जाएगा। सीट पर भोजन देने के बाद यात्री से पैसे लिए जाएंगे।
एसएमएस फूड सर्विस रेलवे की ई कैटरिंग सेवा है। रेलवे को ट्रेनों में दिए जा रहे भोजन की गुणवत्ता सुधारने के लिए कड़ा प्रयास करना पड़ रहा है। अधिकारी ने बताया कि बाद में यह एसएमएस सेवा अन्य ट्रेनों के लिए भी शुरू की जाएगी।
लेकिन, यह परीक्षण के नतीजों पर निर्भर करेगा। एसएमएस के अलावा रेलवे फोन कॉल्स के जरिए भी भोजन उपलब्ध करा रहा है। भोजन बुक कराने के लिए यात्री 18001034139 या 0120-4383892-99 पर फोन कर सकते हैं।

Monday, September 22, 2014

20-21 मेट्रो ट्रेनों पर ऐड रैप लगे नजर आएंगे

अगले महीने से अगर किसी मेट्रो स्टेशन पर आपको कोई कलरफुल मेट्रो ट्रेन नजर आए, तो हैरान होने की जरूरत नहीं है। रेड लाइन को छोड़कर दिल्ली मेट्रो की अन्य सभी लाइनों पर जल्द ही आपको मेट्रो ट्रेनों का बाहरी हिस्सा भी रंग-बिरंगे और आकर्षक विज्ञापनों से सजा नजर आएगा।
अभी तक तो आपको मेट्रो ट्रेनों के अंदर ही विज्ञापन लगे नजर आते थे, लेकिन अब डीएमआरसी ने अपना नॉन-ऑपरेशनल रेवेन्यू बढ़ाने के लिए एक बड़ा फैसला लेते हुए ट्रेनों के बाहरी हिस्से पर भी विज्ञापन वाले ट्रेन रैप लगाने की मंजूरी दे दी है। इसके लिए डीएमआरसी ने अगले 10 सालों के लिए दो बड़ी ऐड एजेंसियों को एक्सक्लूसिव एडवरटाइजिंग राइट्स भी दे दिए हैं। ये एजेंसियां जल्द ही ट्रेनों पर विज्ञापन वाले ट्रेन रैप्स लगाने का काम शुरू करेंगी और अगले महीने से आपको ऐसी ट्रेनें मेट्रो ट्रैक पर दौड़ती नजर आने लगेंगी।
मेट्रो प्रवक्ता के मुताबिक, डीएमआरसी ने जो अधिकार ऐड एजेंसियों को सौंपे हैं उसके आपत्तिजनक कंटेट और लोगों की भावनाओं को भड़काने या आहत करने वाले विज्ञापन लगाने की साफ मनाही है। ऐड के रूप में ट्रेनों पर आकर्षक पिक्चर्स, प्रिंटेड मटीरियल, पेंटिंग्स, स्मार्ट पोस्टर, प्रिंट या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के ऐड, होलोग्राफिक इमेज, विजुअल डिस्प्ले, डिजिटल आर्ट जैसी चीजें लगाने की ही इजाजत होगी। साथ ही जो कंपनी विज्ञापन देगी, उसका नाम भी लिखा जा सकेगा।
डीएमआरसी के बेड़े में इस वक्त 208 मेट्रो ट्रेनें शामिल हैं। इनमें 60 ट्रेनें 8 कोच वाली, जबकि 80 ट्रेनें 6 कोच वाली हैं। बाकी सभी ट्रेनें 4 कोच वाली हैं। रेड लाइन पर 29, यलो लाइन पर 60, ब्लूलाइन पर 71, ग्रीन लाइन पर 18 और वायलेट लाइन पर 30 ट्रेनें चल रही हैं। इनमें से केवल दिलशाद गार्डन से रिठाला के बीच की रेड लाइन को छोड़कर बाकी सभी लाइनों पर ट्रेनों में विज्ञापन लगाने के पुराने कॉन्ट्रैक्ट खत्म हो गए थे और हाल ही में नए कॉन्ट्रैक्ट दिए गए हैं।
इसीलिए रेड लाइन को छोड़कर अन्य सभी लाइनों की ट्रेनों पर अगले महीने से ऐड रैप लगे नजर आएंगे, लेकिन चूंकि रेड लाइन की ट्रेनों में विज्ञापन लगाने वाली एजेंसी का कॉन्ट्रैक्ट 2018 तक वैलिड है, इसलिए इस लाइन की ट्रेनों पर 2018 के बाद ही विज्ञापन लगे नजर आएंगे। डीएमआरसी ने प्रत्येक लाइन पर चलने वाली ट्रेनों में से केवल 10 पर्सेंट ट्रेनों पर ही विज्ञापन प्रदर्शित करने वाले ट्रेन रैप लगाने की इजाजत दी है। यानी तकरीबन 20-21 मेट्रो ट्रेनों पर ऐड रैप लगे नजर आएंगे।
जिन 2 एजेंसियों को एक्सक्लूसिव ऐड राइट्स दिए गए हैं वे दोनों डीएमआरसी को सालाना लाइसेंस फीस देंगी। इससे डीएमआरसी को सालाना करीब 20 से 25 करोड़ रुपये की अतिरिक्त इनकम होगी। डीएमआरसी ट्रेनों के बाहरी हिस्से पर लगने वाले विज्ञापनों की मॉनिटरिंग करके यह भी सुनिश्चित करेगी वे दिखने में सुंदर और आकर्षक हों और वर्ल्ड क्लास स्टैंडर्ड पर खरे उतरते हों।
यूरोप और अमेरिका समेत कई एशियाई देशों में इसी तरह की मेट्रो ट्रेनें और बसें चलती हैं, जिनके बाहरी हिस्से पर ऐड रैप लगे होते हैं। हाल ही में डीटीसी ने भी अपना रेवेन्यू बढ़ाने के लिए डीटीसी बसों के बाहरी हिस्से पर विज्ञापन लगाने की इजाजत देने का प्लान बनाया है। फीडर बसों पर पहले से ही विज्ञापन लगाने की इजाजत है। यानी जल्द ही दिल्ली में मेट्रो ट्रेनों के साथ-साथ फीडर और डीटीसी बसों पर भी आकर्षक विज्ञापन लगे नजर आने लगेंगे।

Saturday, September 20, 2014

मेट्रो स्टेशनों तक पहुंचने के लिए ट्रांसपोर्ट का इंतजार नहीं

आने वाले कुछ समय में आपको मेट्रो स्टेशनों तक पहुंचने के लिए ट्रांसपोर्ट का इंतजार नहीं करना पड़ेगा और न ही जाम में फंसना पड़ेगा। पैदल चलने वाले लोगों को भी ट्रैफिक की समस्या से नहीं जूझना पड़ेगा।
दिल्ली के एलजी नजीब जंग ने 11 मेट्रो स्टेशनों पर स्काई वॉक और मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट सिस्टम को मंजूरी दे दी है। इन सभी मेट्रो स्टेशनों के लिए योजना बना ली गई है। राजधानी के 68 मेट्रो स्टेशनों पर इस तरह के सिस्टम को शुरू करने का प्लान है। गुरुवार को पास किए गए सभी 11 मेट्रो स्टेशनों के इन प्रॉजेक्टों को जून, 2016 तक पूरा कर लिया जाएगा।
फिलहाल जिन 11 मेट्रो स्टेशनों पर ये प्रॉजेक्ट शुरू किए जाएंगे वे सभी मेट्रो के फेज 3 और 4 प्रॉजेक्ट के तहत आते हैं। इन मेट्रो स्टेशनों का निर्माण चल रहा है। इन सभी स्टेशनों पर मेट्रो से उतरते ही लोगों को ऑटो, टैक्सी और रिक्शा मिलेगी। मेट्रो स्टेशनों के नीचे ट्रैफिक मैनेजमेंट करने के अरेंजमेंट किए जाएंगे। लोगों को कहीं भी जाना है तो उनके लिए तत्काल ट्रांसपोर्ट के साधन मिल जाएंगे। लोगों को ट्रांसपोर्ट सिस्टम सस्ता पड़े इसके लिए मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट सिस्टम होगा।
इन मेट्रो स्टेशनों पर बनेंगे स्काई वॉक 
त्रिलोकपुरी मेट्रो स्टेशन: इस मेट्रो स्टेशन के फर्स्ट फ्लोर पर भीड़-भाड़ कंट्रोल करने के लिए स्काई वॉक और आर्केड्स का निर्माण किया जाएगा, ताकि लोग बिना किसी रुकावट के मेट्रो स्टेशन तक आ जा सकें।
मयूर विहार: मौजूदा कैरिज वे के साथ ट्रैफिक सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए फ्लाईओवर के नीचे राउंड अबाउट बनाया जाएगा, ताकि वाहनों को यहां पर रुकना न पड़े। 
ईस्ट विनोद नगर: यहां बनने वाले मेट्रो स्टेशन को बस टर्मिनल से जोड़ा जाएगा साथ ही लोगों को चलने के लिए अलग से रोड बनाया जाएगा। इससे बस टर्मिनल से लोग सीधे मेट्रो स्टेशन आ जा सकेंगे। इसके अलावा, लोगों के लिए एक रोड भी बनाई जाएगी।
वेस्ट विनोद नगर: यहां पर रोड क्रॉस करने की बड़ी परेशानी होगी। इसके लिए एनएच-24 को आसानी से पार करने के लिए और मंडावली गांव में पहुंचने के लिए स्काई वॉक बनाया जाएगा।
धौला कुआं: धौला कुआं के नए मेट्रो स्टेशन को एयरपोर्ट मेट्रो एक्सप्रेस लाइन के साथ जोड़ने के लिए और यात्रियों को बाहर निकलने के लिए स्काई वॉक बनाया जाएगा। 
मोती बाग: मोती बाग मेट्रो स्टेशन को भीड़-भाड़ से निजात दिलाने के लिए यहां भी एक स्काई वॉक बनाया जाएगा। इसके अलावा एक सबवे भी बनाया जाएगा।
रोहिणी: इस मेट्रो स्टेशन पर ऑटो, रिक्शा और अन्य वाहनों से यात्रियों को उतरने के लिए स्टेशन के साथ वाले रोड का इस्तेमाल किया जाएगा।
शकरपुर: स्टेशन पर होने वाली भीड़ के लिए फुटओवर ब्रिज बनाया जाएगा, आने जाने वाले ट्रैफिक पर असर न पड़े इसके लिए स्टेशन के सामने बाहर निकलने के लिए एक गेट बनाया जाएगा।
बादली मोड़, फ्लाईओवर के नीचे यात्रियों के उतरने की व्यवस्था और संजय गांधी ट्रांसपोर्ट और बादली गांव व औद्योगिक क्षेत्र में जाने के लिए एक तरह के साधनों को मुहैया कराया जाएगा।
ओखला फेज-3: मेन रोड पर भीड़-भाड़ को कम करने के लिए आस्था कुंज पार्क के जरिए रोड को बाईपास से जोड़ा जाएगा।
कालकाजी फेज 2 और फेज 3: रिंग रोड और नेहरू प्लेस के नजदीक हैं, इसे जोड़ने के लिए स्काई वॉक बनाया जाएगा। 

Wednesday, September 17, 2014

रेलवे पवन चक्कियां लगाने, बिजली बनाने और बांटने का काम नहीं करेगा

पीएमओ (प्राइम मिनिस्टर ऑफिस) और इंडियन रेलवे इन दिनों गुजरात के एक बुजुर्ग शख्स के अजीबोगरीब आइडिए से जूझ रहे हैं। 81 साल के अहमादाबाद निवासी विपिन त्रिवेदी ने पीएमओ को सुझाव दिया है कि रेलवे ट्रैक पर पवन चक्कियां लगाकर बिजली पैदा की जा सकती है। इनका कहना है कि ट्रेन चलने पर पैदा होने वाली तेज हवा का इस्तेमाल बिजली बनाने में किया जाना चाहिए।
विपिन त्रिवेदी बैंक ऑफ बड़ौदा की ऐग्रीकल्चर ऐंड रूरल डेवलपमेंट विंग में काम कर चुके हैं। उन्होंने पीएमओ को लिखे लेटर में यह आइडिया सुझाया है। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक पीएमओ ने यह मामला रेलवे मंत्रालय को भेजकर इस आइडिए को अमल में लाने की संभावना और इसकी संभावित लागत पर जवाब मांगा है। यही नहीं, रेलवे मंत्रालय से इसकी नियमितअपडेट देने को भी कहा गया है।

पीएमओ से लेटर मिलने के बाद से ही रेलवे मंत्रालय के अधिकारी विपिन त्रिवेदी के साथ बातचीत में लगे हैं। हालांकि, रेलवे अधिकारियों ने उन्हें बता दिया है कि इस तरह की तकनीक विकसित करना संभव नहीं है लेकिन, उन्हें रेलवे की ओर से तकनीकी जानकारियां लेने को दिल्ली बुलाया जा सकता है। त्रिवेदी का कहना है, एक दिन रेलवे ट्रैक के किनारे टहलते हुए उन्हें यह आइडिया आया। उन्होंने ये आइडिया नरेंद्र मोदी के साथ गुजरात पावर सेक्टर में काम कर चुके और इस समय पीएमओ में अडिशनल प्रिंसिपल सेक्रटरी के तौर पर तैनात अपने दोस्त के परिचित को भेजा।
त्रिवेदी का कहना है कि अब वह अपने दिल्ली बुलाए जाने का इंतजार कर रहे हैं। रेलवे अधिकारियों की मानें तो मंत्रालय में किसी को भी त्रिवेदी के आइडिए का सच होना मुश्किल लग रहा है। उन्होंने त्रिवेदी के लेटर के जवाब में उन्हें लिखा, एक ट्रेन सिर्फ 20 सेकेंड में एक पवन चक्की को पार कर लेगी। पवन चक्की से हर 15 मिनट में भी एक ट्रेन गुजरगी तो दिन भर में पवन चक्की सिर्फ 25 मिनट के लिए चल सकेगी। इसमें जितनी बिजली पैदा होगी उससे कहीं ज्यादा लागत आएगी। हालांकि, इसके बाद मिले भेजे लेटर में मंत्रालय के अधिकारियों ने त्रिवेदी से उनके इस आइडिए के तकनीकी पहलुओं पर आगे भी चर्चा करने की बात कही है।
रेलवे अधिकारी इस बारे में पीएमओ को भी जवाब देने की तैयारी कर रहे हैं। उनका कहना है, देश में किसी को भी बेहतरी के लिए आइडिया आ सकता है और वह इस बारे में पीएमओ को लिख सकता है। उनके अमल में आने की संभावनाओं की जांच करना हमारा काम है। आईआईएम इलाहाबाद में प्रफेसर और वैकल्पिक ऊर्जा के विशेषज्ञ अनिल गुप्ता का भी कहना है कि यह आइडिया अमल में लाने लायक नहीं है। रेलवे भी पवन चक्कियां लगाने, बिजली बनाने और बांटने का काम नहीं करेगा।

Monday, September 15, 2014

बड़े पैमाने पर एक्स्ट्रा ट्रेनें

दुर्गा पूजा, दशहरा, दीपावली और छठ पूजा के दौरान ट्रेनों में उमड़ने वाले रश को क्लियर करने के लिए नॉर्दर्न रेलवे बड़े पैमाने पर एक्स्ट्रा ट्रेनें चलाने जा रहा है। इसी कड़ी में 5 जोड़ी ट्रेनें चलाने की घोषणा और की गई है। इनमें 2 एसी प्रीमियम सुपरफास्ट, 2 प्रीमियम सुपरफास्ट और 1 सुपरफास्ट एक्सप्रेस ट्रेन होगी।
नॉर्दर्न रेलवे प्रवक्ता के मुताबिक ये ट्रेनें अप और डाउन लाइन पर कुल 64 ट्रिप्स लगाएंगी। जिन रूटों के बीच ये एक्स्ट्रा ट्रेनें चलेंगी, उनमें नई दिल्ली से मुंबई सेंट्रल, सराय रोहिल्ला से अहमदाबाद, हजरत निजामुद्दीन से सिकंदराबाद, बांद्रा टर्मिनल से वैष्णो देवी और इंदौर से जम्मूतवी रूट शामिल हैं। इन ट्रेनों के अलावा नॉर्दर्न रेलवे 27 जोड़ी ट्रेनों के 1199 ट्रिप्स चलाने की घोषणा पहले ही कर चुका है।

Thursday, September 11, 2014

गजब की ट्रेन

गजब मामला है। रेलवे के अधिकारी और कर्मचारी एक ट्रेन की खोज में हलकान हैं। यह ट्रेन 14 दिन से लापता है। अब तक इतनी ही जानकारी मिल सकी है कि इसे हाजीपुर स्टेशन पर आखिरी बार देखा गया था। इसके बाद यह कहां गई, इस बारे में न पूर्वोत्तर रेलवे को पता है और न ही पूर्व-मध्य रेलवे को। 
रेलवे सूत्रों के मुताबिक 25 अगस्त की रात गोरखपुर-नरकटियागंज रूट पर घुघली स्टेशन के पास एक मालगाड़ी के नौ डिब्बे पलटने से रूट बाधित हो गया था। ऐसे में इस रूट की ट्रेनों को देवरिया, छपरा और बनारस रूट से चलाया गया। गोरखपुर-मुजफ्फरपुर पैसेंजर ट्रेन को भी बदले हुए रूट से भेजा गया। लेकिन इंटरलॉकिंग की वजह से यह रूट भी बंद हो गया और ट्रेन को हाजीपुर में ही रद्द करना पड़ा।
 

हाजीपुर में ट्रेन की बोगियां खड़ी कर दी गईं। करीब चार दिन बाद जब सभी रूट सामान्य हो गए तो इस पैसेंजर ट्रेन को फिर चलाने का फैसला किया गया, लेकिन तभी पता चला कि ट्रेन तो हाजीपुर में है ही नहीं। रेलवे के ऑफिसर ढूंढ-ढूंढ कर परेशान हैं, लेकिन ट्रेन का पता नहीं लग रहा। हालांकि, उन्होंने किसी तरह 10 बोगियों की व्यवस्था कर पैसेंजर ट्रेन को बहाल कर दिया है। 
समस्तीपुर मंडल की एक पैसेंजर ट्रेन रैक मरम्मत के लिए गोरखपुर यार्ड भेजी गई थी। यहां से वह ठीक कर समय से लौटाई नहीं गई। इस बीच जब गोरखपुर-मुजफ्फरपुर पैसेंजर ट्रेन की रैक हाजीपुर पहुंची तो वहां के कर्मचारियों को लगा कि हमारी रैक लौट आई है। इसके बाद संभवत: उस रैक को किसी और रूट पर भेज दिया गया। लेकिन कर्मचारियों ने पूर्वोत्तर रेलवे से संपर्क कर यह जानने का प्रयास नहीं किया तो यह वही रैक है या नहीं। इसी तरह की चूक पूर्वोत्तर रेलवे ने भी की। उसने हाजीपुर से ट्रेन न लौटने पर समय रहते कोई कार्रवाई नहीं की।
 
देश भर में ट्रेनों के एक-एक कोच और इंजन की मॉनिटरिंग के लिए कोचिंग ऑपरेशन इंफर्मेशन सिस्टम (सीओआईएस) का उपयोग किया जाता है। इस सिस्टम पर आरम्भिक स्टेशन से ट्रेन चलने से पहले ही हर कोच का नम्बर व गाड़ी के कुल डिब्बों की फीडिंग की जाती है। इसी आधार पर ट्रेनों के चार्ट में कोच नम्बर फीड किए जाते हैं। इसके बाद रास्ते के हर स्टेशन पर सीओआईएस के मॉनिटर पर ट्रेन का हर डेटा मिल जाता है। साल में एक बार रेलवे अपनी सभी बोगियों की गणना कराता है। किसी एक दिन के कुछ घंटे के भीतर एक साथ रेलवे के हजारों कर्मचारी रेलवे की बोगियों की गणना करते हैं। अब तभी इस रैक का पता लगने की उम्मीद है।

24 करोड़ रुपये) की रिश्वत देने का मामला

ब्रिटेन के सीरियस फ्रॉड ऑफिस (एसएफओ) ने इंजीनियरिंग कंपनी ऐल्सटम नेटवर्क यूके लिमिटेड के खिलाफ दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के अधिकारियों को 30 लाख यूरो (24 करोड़ रुपये) की रिश्वत देने का मामला दर्ज किया है।
इस मामले में 6 अक्टूबर को साउथवॉर्क क्राउन कोर्ट में सुनवाई होगी। कंपनी के खिलाफ कुछ छह आरोप लगाए गए हैं जिनमें दो डीएमआरसी कॉन्ट्रैक्ट से जुड़े हैं। बाकी चार मामले पोलैंड और ट्यूनिशिया के हैं।

एसएफओ का आरोप है कि मेट्रो से ठेके पाने के लिए ऐल्सटम के कुछ निदेशकों ने 1 अगस्त 2000 से 9 अगस्त 2006 के बीच रिश्वत दी या देने का वादा किया। चार्जशीट में दो ऐसे वाकयों का जिक्र किया गया है जब रिश्वत दी गई। पुलिस के मुताबिक, '12 सितंबर 2001 को इंडो यूरोपियन वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड से कंसल्टेंसी अग्रीमेंट के नाम पर एक करोड 98 लाख 95 हजार रुपये दिए गए। 3 मई 2002 को ग्लोबल किंग टेक्नॉलजी लिमिटेड से कंसल्टेंसी अग्रीमेंट के नाम पर करीब 31 लाख यूरो दिए गए।'
हिंदुस्तान टाइम्स अखबार की खबर के मुताबिक भारत के शहरी विकास मंत्रालय को ऐसे किसी आरोप के बारे में नहीं पता है। एक अधिकारी ने अखबार को बताया, 'हमें नहीं पता है कि ऐल्सटम पर मेट्रो अधिकारियों को रिश्तव देने के आरोप लगे हैं। अभी कोई सूचना हमें नहीं दी गई है। जब हमें गृह मंत्रालय या सीबीआई से लिखित में कुछ मिलेगा तो हम कार्रवाई करेंगे।'
डीएमआरसी ने भी इस बारे में कुछ कहने से इनकार कर दिया।

Tuesday, September 9, 2014

हर मेट्रो स्टेशन पर ऐसा ही नजारा

मेट्रो पिलर इन दिनों नोएडियंस के बीच एड्रेस बताने का नया ट्रेंड हो गए हैं। किसी को एड्रेस समझाना हो या मेट्रो के पास रोड पर कहीं मिलने की लोकेशन बतानी हो, तो पिलर नंबर बताने से तुरंत सब क्लीयर हो जाता है।
पहले लोग मार्केट की दुकानों और आसपास की आसानी से दिखने वाली चीजों के सहारे एड्रेस बताते थे, लेकिन नोएडा में मेट्रो के आने के साथ से ही नोडियएंस के एड्रेस बताने का तरीका बदल गया है। अब मेट्रो स्टेशन के पास की पिलर संख्या बता दी जाती है, जिससे पहुंचने वाला लोकेशन आसानी से पता लगा लेता है। इस सुविधा के अलावा, इस तरीके से टाइम की भी बचत हो रही है। स्टूडेंट मेधा ने बताया कि मेट्रो के पिलर नंबर का पता चलने के बाद एड्रेस पता करना बहुत इजी हो जाता है। अट्टा मार्केट में बहुत सारी छोटी-छोटी कई मार्केट्स हैं। ऐसे में सिर्फ मार्केट के नाम के आधार पर ही दुकान तक पहुंचना मुश्किल होता है। वहीं, मेट्रो का पिलर नंबर पता होने तुरंत आइडिया लग जाता है कि जाना कहां है।
मेट्रो स्टेशन पर पीक आवर्स में बहुत भीड़ रहती है। ऐसे में मेट्रो स्टेशन पर ग्रुप में फ्रेंड्स के साथ खड़े होने में बहुत दिक्कत होती है। स्टेशन पर भीड़ होने की वजह से सिक्युरिटी भी डिस्टर्ब होती है। इसी को देखते हुए अब लोग मेट्रो स्टेशन के नीचे खाली स्पेस में खड़े होते हैं।
स्टूडेंट विशाल बेलवाल ने बताते हैं कि मेट्रो स्टेशन पर खड़े होने से अच्छा है कि स्टेशन के नीचे खाली स्पेस में खड़ा हुआ जाए। वहां भीड़ भी नहीं होती है, इसलिए इंतजार करने में दिक्कत नहीं होती है। हम सभी फ्रेंड्स नोएडा सिटी सेंटर के मेट्रो पिलर नंबर 150 पर मिलते हैं और संख्या पता होने की वजह से किसी को कंफ्यूजन नहीं होता।
नोएडा के मेट्रो स्टेशन पर हर पिलर को नंबर दिए गए हैं। इससे लोगों को एड्रेस बताने में ज्यादा परेशानी नहीं होती। लेकिन ये नंबर हर पिलर पर मोटे अक्षरों में नहीं लिखे गए हैं, जिससे लोग आसानी से इनको भी लोकेट नहीं कर पाते। एचआर मैनेजर ध्रुव माहेश्वरी ने बताया कि नोएडा में सभी पिलर्स पर संख्या नहीं लिखी जाने से लोकेशन का पता करने में थोड़ी परेशानी होती है। अगर सभी पिलर पर नंबर लिखा हुआ तो, लोकेशन तुरंत समझ में आ जाएगी।
मेट्रो
 पिलर पर नंबर होने की सबसे खास बात यह है कि मेट्रो मैनेजमेंट को रिपेयर आदि का काम करने मेंसहूलियत मिलती है। कुणाल भास्कर ने बताया कि मेट्रो पिलर पर नंबर होने से मेट्रो मैनेजमेंट को इनकेरखरखाव का काम करने में आसानी होती है। कुछ टाइम पहले नोएडा सिटी सेंटर के एक पिलर में दरार आने परनंबर की मदद से उसे तुरंत लोकेट कर लिया गया। अगर यह नंबर नहीं होता, तो उस पिलर की पहचान करने मेंकाफी वक्त लग जाता।
नोडिएयंस
 भी चाहते हैं कि पिलर से एड्रेस बताना यहां भी दिल्ली की तर्ज पर ही आसान हो जाए। दिल्ली में हरमेट्रो स्टेशन के नीचे लगे पिलर को एक नंबर दिया गया है, जिसके आधार पर लोग लोकेशन मार्क करते हैं।दिल्ली में मेट्रो स्टेशन के पास घर होने पर लोग गली की लोकेशन भी मेट्रो के पिलर के नंबर के बेस पर ही देतेहैं। लेकिन नोएडा की तस्वीर इससे बिल्कुल अलग है। एक पिलर को नंबर दिया गया है, तो बीच में 5-6 पिलरपर नंबर डाले ही नहीं गए हैं। हर मेट्रो स्टेशन पर ऐसा ही नजारा है। इससे लोग कंफ्यूज हो जाते हैं। 

Friday, September 5, 2014

चोर-जेबकतरे पांच मेट्रो मुसाफिरों की जेब काट रहे हैं

24 दिसंबर 2002 में दिल्ली मेट्रो पहली बार छह स्टेशनों के साथ शुरू हुई थी। इन 11 सालों में दिल्ली मेट्रो ने तूफानी रफ्तार के साथ विस्तार करते हुए अपना नेटवर्क 145 स्टेशनों तक पहुंचा दिया है। हर दिन औसतन 25 लाख मुसाफिर इसकी सवारी करते हैं। इन मुसाफिरों के जानमाल की सिक्योरिटी सीआईएसएफ और दिल्ली पुलिस के कंधों पर है। आंकड़ा यह है कि इन 25 लाख मुसाफिरों की सिक्योरिटी दिल्ली पुलिस के सिर्फ 200 जवानों-अफसरों पर है। सच यह है कि इस मामूली तादाद से लाखों मुसाफिरों की सिक्योरिटी नामुमकिन है। इसका अंदाजा चोरों को हो चुका है। हर दिन चोर-जेबकतरे पांच मेट्रो मुसाफिरों की जेब काट रहे हैं। कई बार उनका मोबाइल और लैपटॉप भी लेकर रफूचक्कर हो जा रहे हैं।
इस साल 3 सितंबर 2014 तक दिल्ली मेट्रो पुलिस ने कुल 1447 मामले दर्ज किए हैं। इनमें ज्यादातर मामले जेबतराशी के हैं। जेब काटने के अलावा चोरों की नजर मोबाइल फोन और कई बार लैपटॉप पर होती है। पिछले साल के मुकाबले यह आंकड़ा पांच गुना बढ़ गया है। पिछले साल 3 सितंबर 2013 तक दिल्ली मेट्रो पुलिस ने सिर्फ 287 मामले दर्ज किए थे। दिल्ली मेट्रो के एक सीनियर ऑफिसर बताते हैं कि जेबतराशों के रैकेट राजीव चौक, कश्मीरी गेट, चावड़ी बाजार और चांदनी चौक पर सबसे ज्यादा एक्टिव हैं। दूसरे स्टेशनों पर भी मोबाइल और पर्स गायब हो जाने के मामले आए दिन दर्ज हो रहे हैं।

पहले सीट पाने की जद्दोजहद में धक्का-मुक्की की तस्वीर हर स्टेशनों पर देखी जाती थी। लेकिन अब मेट्रो में सिर्फ एंट्री करने के लिए मुसाफिरों में होड़ लगी रहती है। इससे मेट्रो में होने वाली भीड़ का अंदाजा सहज लगाया जा सकता है। सच यह है कि नेटवर्क में तेजी से हो रहे विस्तार के बावजूद मेट्रो में भीड़ बढ़ती जा रही है। मेट्रो के भीतर घात लगाकर बैठे जेबतराश इसी मौके का फायदा उठाकर लोगों की जेब और सामानों पर हाथ साफ कर देते हैं। जेबतराशों की धरपकड़ की जिम्मेदारी मोटेतौर पर दिल्ली पुलिस की है लेकिन सिर्फ 200 पुलिसकर्मियों की संख्या के साथ 25 लाख मुसाफिरों और 145 स्टेशनों की निगरानी का सवाल पूछना भी बेमानी है।
मेट्रो पुलिस के एक सीनियर ऑफिसर बताते हैं कि 200 लोगों पर केस दर्ज करने और मामलों को सुलझाने के अलावा भी कई जिम्मेदारी है। इन्हीं जवानों को मेट्रो में पेट्रोलिंग, चेकिंग करनी होती है। जेबतराशों के रैकेट पर नजर रखनी होती है। इनके अलावा थानों में ड्यूटी, इमरजेंसी ऑफिसर, ड्यूटी ऑफिसर, मालखाने की देखरेख भी हमें ही करनी पड़ती है। ऑफिसर कहते हैं कि फिलहाल दिल्ली मेट्रो पुलिस को कम से कम 10 गुना ज्यादा यानीकि 2 हजार पुलिसकर्मियों की जरूरत है। तभी जेबतराशों पर नकेल कसने के बारे में सोचा जा सकता है। मेट्रो में बढ़ती वारदात को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने कई बार होम मिनिस्ट्री को इसकी डीटेल भेजी है। साथ ही, जवानों की संख्या बढ़ाए जाने की मांग भी की है। अगर जल्द ही यह मांग पूरी नहीं होती है तो मेट्रो पुलिस स्टेशनों में दर्ज हो रहे मामलों को सुलझाने का भार बढ़ता जाएगा।
दिल्ली
 मेट्रो की शास्त्री पार्क पुलिस ने एक स्नैचर जितेंद्र(22) को अरेस्ट किया है। जितेंद्र प्रताप नगर का रहनेवाला है।17 अगस्त की रात साढ़े नौ बजे पुलबंगश मेट्रो स्टेशन पर यह स्नैचर एक महिला का पर्स छीनकरफरार हो गया था। मेट्रो पुलिस ने जितेंद्र की गिरफ्तारी पर इसी तरह के तीन मामले सुलझाने का दावा किया है।डीसीपी संजय भाटिया ने बताया कि आजाद मार्केट की रहने वाली आबिदा खान 17 अगस्त की रात मेट्रो सेबाहर  रही थीं। इसी दौरान पीछे से आकर जितेंद्र ने उनका पर्स छीन लिया था। पर्स में दो मोबाइल फोन थे।संजय भाटिया ने शास्त्री पार्क मेट्रो स्टेशन के एसएचओ आनंद लाकड़ा की अगुवाई में एक टीम गठित की और1सितंबर को इसे अरेस्ट कर लिया। पूछताछ में जितेंद्र ने कहा है कि वह घात लगाकर सन्नाटे का इंतजार करताथा। जब लोग कम हो जाते थे तो वह लोगो के पर्स छीनकर भाग जाता था।