अगले महीने से अगर किसी मेट्रो स्टेशन पर आपको
कोई कलरफुल मेट्रो ट्रेन नजर आए, तो हैरान होने की जरूरत नहीं है। रेड लाइन को छोड़कर दिल्ली मेट्रो की
अन्य सभी लाइनों पर जल्द ही आपको मेट्रो ट्रेनों का बाहरी हिस्सा भी रंग-बिरंगे और
आकर्षक विज्ञापनों से सजा नजर आएगा।
अभी तक तो आपको मेट्रो ट्रेनों के अंदर ही विज्ञापन लगे नजर आते थे,
लेकिन अब डीएमआरसी ने अपना नॉन-ऑपरेशनल रेवेन्यू बढ़ाने के लिए एक
बड़ा फैसला लेते हुए ट्रेनों के बाहरी हिस्से पर भी विज्ञापन वाले ट्रेन रैप लगाने
की मंजूरी दे दी है। इसके लिए डीएमआरसी ने अगले 10 सालों के
लिए दो बड़ी ऐड एजेंसियों को एक्सक्लूसिव एडवरटाइजिंग राइट्स भी दे दिए हैं। ये
एजेंसियां जल्द ही ट्रेनों पर विज्ञापन वाले ट्रेन रैप्स लगाने का काम शुरू करेंगी
और अगले महीने से आपको ऐसी ट्रेनें मेट्रो ट्रैक पर दौड़ती नजर आने लगेंगी।
मेट्रो प्रवक्ता के मुताबिक, डीएमआरसी ने जो
अधिकार ऐड एजेंसियों को सौंपे हैं उसके आपत्तिजनक कंटेट और लोगों की भावनाओं को
भड़काने या आहत करने वाले विज्ञापन लगाने की साफ मनाही है। ऐड के रूप में ट्रेनों
पर आकर्षक पिक्चर्स, प्रिंटेड मटीरियल, पेंटिंग्स, स्मार्ट पोस्टर, प्रिंट
या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के ऐड, होलोग्राफिक इमेज, विजुअल डिस्प्ले, डिजिटल आर्ट जैसी चीजें लगाने की
ही इजाजत होगी। साथ ही जो कंपनी विज्ञापन देगी, उसका नाम भी
लिखा जा सकेगा।
डीएमआरसी के बेड़े में इस वक्त 208 मेट्रो
ट्रेनें शामिल हैं। इनमें 60 ट्रेनें 8 कोच वाली, जबकि 80 ट्रेनें 6
कोच वाली हैं। बाकी सभी ट्रेनें 4 कोच वाली
हैं। रेड लाइन पर 29, यलो लाइन पर 60, ब्लूलाइन
पर 71, ग्रीन लाइन पर 18 और वायलेट
लाइन पर 30 ट्रेनें चल रही हैं। इनमें से केवल दिलशाद गार्डन
से रिठाला के बीच की रेड लाइन को छोड़कर बाकी सभी लाइनों पर ट्रेनों में विज्ञापन
लगाने के पुराने कॉन्ट्रैक्ट खत्म हो गए थे और हाल ही में नए कॉन्ट्रैक्ट दिए गए
हैं।
इसीलिए रेड लाइन को छोड़कर अन्य सभी लाइनों की ट्रेनों पर अगले
महीने से ऐड रैप लगे नजर आएंगे, लेकिन चूंकि रेड लाइन की
ट्रेनों में विज्ञापन लगाने वाली एजेंसी का कॉन्ट्रैक्ट 2018 तक वैलिड है, इसलिए इस लाइन की ट्रेनों पर 2018
के बाद ही विज्ञापन लगे नजर आएंगे। डीएमआरसी ने प्रत्येक लाइन पर
चलने वाली ट्रेनों में से केवल 10 पर्सेंट ट्रेनों पर ही
विज्ञापन प्रदर्शित करने वाले ट्रेन रैप लगाने की इजाजत दी है। यानी तकरीबन 20-21
मेट्रो ट्रेनों पर ऐड रैप लगे नजर आएंगे।
जिन 2 एजेंसियों को एक्सक्लूसिव ऐड राइट्स दिए
गए हैं वे दोनों डीएमआरसी को सालाना लाइसेंस फीस देंगी। इससे डीएमआरसी को सालाना
करीब 20 से 25 करोड़ रुपये की अतिरिक्त
इनकम होगी। डीएमआरसी ट्रेनों के बाहरी हिस्से पर लगने वाले विज्ञापनों की
मॉनिटरिंग करके यह भी सुनिश्चित करेगी वे दिखने में सुंदर और आकर्षक हों और वर्ल्ड
क्लास स्टैंडर्ड पर खरे उतरते हों।
यूरोप और अमेरिका समेत कई एशियाई देशों में इसी तरह की मेट्रो
ट्रेनें और बसें चलती हैं, जिनके बाहरी हिस्से पर ऐड रैप लगे
होते हैं। हाल ही में डीटीसी ने भी अपना रेवेन्यू बढ़ाने के लिए डीटीसी बसों के
बाहरी हिस्से पर विज्ञापन लगाने की इजाजत देने का प्लान बनाया है। फीडर बसों पर
पहले से ही विज्ञापन लगाने की इजाजत है। यानी जल्द ही दिल्ली में मेट्रो ट्रेनों
के साथ-साथ फीडर और डीटीसी बसों पर भी आकर्षक विज्ञापन लगे नजर आने लगेंगे।